Tag: नई दिल्ली

  • ‘मेरी मां का मंगलसूत्र इस देश के लिए कुर्बान हुआ है’, प्रियंका गांधी ने PM पर किया पलटवार, बोलीं- महत्व समझते तो ऐसी अशोभनीय बातें नहीं करते…!

    ‘मेरी मां का मंगलसूत्र इस देश के लिए कुर्बान हुआ है’, प्रियंका गांधी ने PM पर किया पलटवार, बोलीं- महत्व समझते तो ऐसी अशोभनीय बातें नहीं करते…!

    मेरी मां का मंगलसूत्र इस देश के लिए कुर्बान हुआ है’, प्रियंका गांधी ने PM पर किया पलटवार, बोलीं- महत्व समझते तो ऐसी अशोभनीय बातें नहीं करते…!
    नई दिल्ली:-कांग्रेस पार्टी की नेता प्रियंका गांधी ने पीएम नरेंद्र मोदी पर पलटवार किया है। उन्होंने पीएम मोदी द्वारा दिए गए मंगलसूत्र वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अपनी जनसभा में कहा कि पिछले दो दिनों में बीजेपी ने बहकी-बहकी बातें करना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा, “कांग्रेस ने 55 साल में क्या किसी का सोना या मंगलसूत्र छीना? जब देश युद्ध लड़ रहा था, इंदिरा जी ने अपना मंगलसूत्र व गहने दान किए। मेरी मां का मंगलसूत्र इस देश को कुर्बान हुआ है।”
    उन्होंने कहा कि लाखों महिलाओं ने इस देश के लिए अपने मंगलसूत्र कुर्बान किए। जब मेरी बहनों को नोटबंदी में अपने मंगलसूत्र गिरवी रखने पड़े, तब प्रधानमंत्री जी कहां थे? जब किसान आंदोलन में 600 किसान शहीद हुए तब उनकी विधवाओं के मंगलसूत्र के बारे में सोचा? आज वोटों के लिए महिलाओं को डरा रहे हैं? प्रधानमंत्री मंगलसूत्र का महत्व समझते तो ऐसी अशोभनीय बातें नहीं करते।
    प्रियंका गांधी बोलीं- पीएम को इस स्तर की बातें नहीं करनी चाहिए
    कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने न्यूज एजेंसी PTI से बातचीत में कहा कि बीजेपी के नेता लोगों की भावनाएं भड़काने और वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि प्रधानमंत्री (नरेन्द्र मोदी) को इस स्तर की बात करनी चाहिए।”
    प्रियंका गांधी ने पूछा, “वह 10 साल से प्रधानमंत्री हैं और उनके पास पूर्ण बहुमत है। उन्होंने वास्तव में क्या किया है। वह लोगों के सामने आकर यह क्यों नहीं कह पा रहे हैं कि मैंने इतनी नौकरियां दीं, मैंने इतने सारे IIT, इतने अस्पताल बनाए और इतने लोगों को गरीबी से बाहर निकाला।”
    उन्होंने भाजपा पर जनता को हल्के में लेने का भी आरोप लगाया। प्रियंका ने कहा, “उन्हें लगता है कि जनता उन आंकड़ों की पड़ताल नहीं करने वाली जिनके बारे में वे बात कर रहे हैं, जनता यह जांचने वाली नहीं है कि कांग्रेस ने घोषणापत्र में क्या कहा है या नहीं, यह हर जगह उपलब्ध है….हर दिन वे कुछ न कुछ लेकर आते हैं एक दिन वे कहते हैं कि हम (कांग्रेस) देश के खिलाफ काम कर रहे हैं। एक दिन वे कहते हैं कि हम धर्म के खिलाफ हैं…जबकि कांग्रेस लगातार नौकरियों और शिक्षा पर जोर दे रही है, हम अपने घोषणापत्र में कह रहे हैं कि ये वो चीजें हैं जो हम करना चाहते हैं।”

  • बाबा रामदेव को फिर लगा सुप्रीम कोर्ट से तगड़ा झटका, माफीनामा नहीं हुआ स्वीकार, अगली सुनवाई 30 अप्रैल को..!

    बाबा रामदेव को फिर लगा सुप्रीम कोर्ट से तगड़ा झटका, माफीनामा नहीं हुआ स्वीकार, अगली सुनवाई 30 अप्रैल को..!

    बाबा रामदेव को फिर लगा सुप्रीम कोर्ट से तगड़ा झटका, माफीनामा नहीं हुआ स्वीकार, अगली सुनवाई 30 अप्रैल को
    पतंजलि भ्रामक विज्ञापन मामले में आज बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण फिर सुप्रीम कोर्ट में पेश होंगे। बता दें कि इससे पहले (16 अप्रैल 2024) हुई सुनवाई में पतंजलि आयुर्वेद के एमडी और मुखिया रामदेव व बालकृष्ण दोनों की माफी कोर्ट ने ठुकरा दी थी। बाबा रामदेव की तरफ से अब तक तीन बार कोर्ट के सामने माफी मांगी जा चुकी है। पिछला बार खुद योग गुरु रामदेव ने कोर्ट से माफी मांगी थी, लेकिन जस्टिम हिमा कोहली और जस्टिस अमानुल्लाह की बेंच ने कहा था कि आप इस मामले को हल्के में ले रहे हैं। आज कोर्ट में क्या-कुछ होना है?

  • ‘जहरीली भाषा बोलते हैं प्रधानमंत्री…’, मनमोहन सिंह को लेकर PM मोदी के बयान पर जयराम रमेश का बड़ा हमला..!

    ‘जहरीली भाषा बोलते हैं प्रधानमंत्री…’, मनमोहन सिंह को लेकर PM मोदी के बयान पर जयराम रमेश का बड़ा हमला..!

    ‘जहरीली भाषा बोलते हैं प्रधानमंत्री…’, मनमोहन सिंह को लेकर PM मोदी के बयान पर जयराम रमेश का बड़ा हमला..!
    नई दिल्ली:-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के एक बयान को लेकर मुस्लिमों पर टिप्पणी की। अब इसपर विवाद शुरू हो गया है। पीएम मोदी के बयान को कांग्रेस के कम्युनिकेशन विभाग के प्रमुख जयराम रमेश ने जहरीला बताया है। उन्होंने पूछा कि 2021 में जनगणना क्यों नहीं कराई गई?
    प्रधानमंत्री जहरीली भाषा बोलते हैं- जयराम रमेश
    जयराम रमेश ने सोशल ,मीडिया प्लेटफार्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा, “प्रधानमंत्री जहरीली भाषा में दुनिया भर की बातें बोलते हैं। उन्हें एक सीधे से सवाल का जवाब भी देना चाहिए -1951 से हर दस साल के बाद जनगणना होती आ रही है। इससे अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की आबादी का वास्तविक डेटा सामने आता है। इसे 2021 में कराया जाना चाहिए था लेकिन आज तक किया नहीं गया। इस पर प्रधानमंत्री चुप क्यों हैं? यह बाबासाहेब अंबेडकर के संविधान को ख़त्म करने की साज़िश है। प्रधानमंत्री मोदी ने रव‍िवार को कहा था कि अगर कांग्रेस केंद्र की सत्ता में आती है तो वह लोगों की संपत्ति लेकर मुसलमानों को बांट देगी। उन्होंने इसको कहते हुए पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के बयान का हवाला दिया।

    पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस के घोषणापत्र में कहा गया है कि अगर कांग्रेस की सरकार बनेगी तो सबकी प्रॉपर्टी का सर्वे किया जायेगा और हमारी माताओं-बहनों के पास सोना कितना है, उसकी जांच की जाएगी और इसे सबमे बांट दिया जाएगा। पीएम मोदी ने कहा था कि मेरी माताओ- बहनों ये (कांग्रेस) आपका मंगलसूत्र भी बचने नहीं देंगे।
    पीएम के बयान पर राहुल गांधी ने भी किया पलटवार
    पीएम मोदी के बयान को लेकर राहुल गांधी ने X पर लिखा, “पहले चरण के मतदान में निराशा हाथ लगने के बाद नरेंद्र मोदी के झूठ का स्तर इतना गिर गया है कि घबरा कर वह अब जनता को मुद्दों से भटकाना चाहते हैं।कांग्रेस के ‘क्रांतिकारी मेनिफेस्टो’ को मिल रहे अपार समर्थन के रुझान आने शुरू हो गए हैं। देश अब अपने मुद्दों पर वोट करेगा, अपने रोज़गार, अपने परिवार और अपने भविष्य के लिए वोट करेगा। भारत भटकेगा नहीं।
    जानिए क्या कहा था मनमोहन सिंह ने?
    2006 में राष्ट्रीय विकास परिषद की एक बैठक को संबोधित करते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था, “हमें यह सुनिश्चित करने के लिए नयी योजनाएं बनानी होंगी कि अल्पसंख्यक, विशेष रूप से मुस्लिम अल्पसंख्यक, विकास का फल समान रूप से साझा करने के लिए सशक्त हों। संसाधनों पर पहला दावा उनका ही होना चाहिए।

  • सुप्रीम कोर्ट के पांच बड़े फैसले- जिनसे बदल गई चुनाव की दिशा और दशा..!

    सुप्रीम कोर्ट के पांच बड़े फैसले- जिनसे बदल गई चुनाव की दिशा और दशा..!

    सुप्रीम कोर्ट के पांच बड़े फैसले- जिनसे बदल गई चुनाव की दिशा और दशा..!
    सुप्रीम कोर्ट के पांच बड़े फैसले- जिनसे बदल गई चुनाव की दिशा और दशादेश की आजादी के बाद से सुप्रीम कोर्ट के द्वारा चुनाव सुधार को लेकर ऐसे कौन से फैसले दिए गए हैं जिन पर अक्सर चर्चा होती है आजादी के बाद से अदालतों द्वारा चुनावों को लेकर दिए गए फैसलों की बात करें तो जून, 1975 में आये इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक फैसले का बार-बार जिक्र होता है। इस फैसले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के रायबरेली सीट से निर्वाचन को अवैध घोषित कर दिया था। इसके बाद इंदिरा सरकार ने देश में आपातकाल लगा दिया था।
    इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपनी अपील के पेंडिंग रहने के दौरान संसद में 39 वां संविधान संशोधन किया गया था जिसने अदालतों को प्रधानमंत्री और स्पीकर के चुनाव की स्क्रूटनी करने से रोक दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर, 1975 में हाई कोर्ट के फैसले को पलटते हुए इंदिरा गांधी के चुनाव को बरकरार रखा था लेकिन आंशिक रूप से 39 वें संविधान संशोधन को रद्द कर दिया था।
    मतदाताओं को दिया नोटा का विकल्प
    सितंबर 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने मतदाताओं के सामने नन ऑफ़ द एबव (नोटा) का विकल्प रखा था। अदालत ने कहा था कि किसी भी मतदाता के लिए यह बेहद जरूरी है कि वह राजनीतिक दलों द्वारा चुनाव में खड़े किए गए उम्मीदवारों को खारिज कर सके। अदालत ने कहा था कि अगर जनता उम्मीदवारों को खारिज करेगी तो इससे एक बदलाव होगा और यह राजनीतिक दलों को मजबूर करेगा कि वह लोगों की इच्छाओं का सम्मान करें और ऐसे लोगों को चुनाव मैदान में उतारें जो ईमानदार हों। पिछले कुछ सालों में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव के दौरान लोगों ने बड़े पैमाने पर नोटा का बटन दबाया है।
    दिसंबर 2023 में छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान और तेलंगाना के विधानसभा चुनाव में कुल 47 सीटें ऐसी रही थीं जहां पर जीते और हारे हुए उम्मीदवार के अंतर से ज्यादा वोट नोटा को मिले। मध्य प्रदेश में ऐसी 20, राजस्थान में 17, छत्तीसगढ़ में 8 और तेलंगाना में 2 सीटें थी।
    2018 और 2023 के विधानसभा चुनाव में इन चारों राज्यों में नोटा को कितने वोट मिले, इसे नीचे दिए आंकड़े से समझ सकते हैं।
    अक्टूबर, 2013 में सुब्रमण्यन स्वामी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से चरणबद्ध तरीके से वैरिफायबल पेपर ऑडिट ट्रेल यानी (वीवीपैट) का इस्तेमाल करने के लिए कहा। हालांकि चुनाव आयोग शुरुआत में इसके लिए तैयार नहीं था। लेकिन अदालत ने अपने अहम फैसले में कहा था कि हम इस बात से संतुष्ट हैं कि पेपर ट्रेल स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए बेहद जरूरी है और मतदाताओं का भरोसा केवल पेपर ट्रेल को लागू करके ही करके जीता जा सकता है। अदालत ने कहा था कि ईवीएम के साथ वीवीपैट सिस्टम होने से ही यह पता चलेगा कि हमारी मतदान व्यवस्था कितनी सटीक है।
    2023 में सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच ने सर्वसम्मति से यह फैसला दिया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दो निर्वाचन आयुक्तों का चयन तीन सदस्यों का एक पैनल करेगा। इस पैनल में प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया शामिल होंगे। लेकिन 2023 में ही केंद्र सरकार ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति के लिए एक कानून बनाया। इस कानून में पिछली बार पैनल में शामिल चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की जगह केंद्र सरकार के कैबिनेट मंत्री को रखा गया।
    12 जनवरी, 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने इस नए कानून पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने दो निर्वाचन आयुक्तों के चयन में किसी भी तरह का दखल देने से इनकार किया। लेकिन अदालत ने केंद्र सरकार को निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति में जल्दबाजी करने को लेकर फटकार भी लगाई थी।
    इलेक्टोरल बॉन्ड योजना को किया रद्द
    सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने इलेक्टोरल बॉन्ड योजना को रद्द कर दिया था और राजनीतिक दलों को चंदा देने वालों के नाम गुप्त रखने को असंवैधानिक ठहराया था। यहां बताना होगा कि केंद्र सरकार साल 2017 में इलेक्टोरल बॉन्ड की योजना लेकर आई थी। इसके जरिए कोई भी शख्स या कोई कॉरपोरेट समूह किसी भी राजनीतिक दल को जितनी मर्जी चाहे चुनावी फंडिंग कर सकता था।
    इलेक्टोरल बॉन्ड पर आए कोर्ट के फैसले के बाद आम लोगों को पहली बार इस बात का पता चला कि किस राजनीतिक दल को किसने कितना पैसा इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए दिया। एयरटेल, मेघा, फ्यूचर गेमिंग, क्विक सप्लाई चेन प्राइवेट लिमिटेड, हल्दिया एनर्जी लिमिटेड और वेदांता जैसी नामी कंपनियों ने 4000 करोड़ से ज्यादा के बॉन्ड खरीदे थे। चुनाव आयोग ने बताया था कि फ्यूचर गेमिंग, मेघा इंजीनियरिंग और क्विक सप्लाई चेन प्राइवेट लिमिटेड इलेक्टोरल बॉन्ड के टॉप 3 डोनर्स हैं।
    चुनाव आयोग के फैसले पर मुहर
    इन फैसलों के अलावा 1969 में जब कांग्रेस का विभाजन हुआ था और जगजीवन राम और एस. निजलिंगप्पा के नेतृत्व वाले खेमों ने कांग्रेस के नाम पर दावा किया था तो चुनाव आयोग ने जगजीवन राम के पक्ष में फैसला सुनाया था। चुनाव आयोग ने कहा था कि जगजीवन राम के खेमे के पास कांग्रेस सांसदों, विधायकों और प्रतिनिधियों का बहुमत था। 1971 में सादिक अली के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के द्वारा दी गई व्यवस्था को बरकरार रखा था।
    चुनाव आयोग ने पिछले कुछ सालों में एनसीपी और शिवसेना में हुई टूट के मामले में भी 1969 में कांग्रेस के विभाजन को लेकर दिए गए फैसले के आधार पर ही अपना निर्णय सुनाया था।

  • दीपक पूनिया, सुजीत कलकल को ओलंपिक क्वालिफायर खेलने की नहीं मिली मंजूरी, दुबई में भारी बारिश ने कठिन की पेरिस ओलंपिक की राह..!

    दीपक पूनिया, सुजीत कलकल को ओलंपिक क्वालिफायर खेलने की नहीं मिली मंजूरी, दुबई में भारी बारिश ने कठिन की पेरिस ओलंपिक की राह..!

    दीपक पूनिया, सुजीत कलकल को ओलंपिक क्वालिफायर खेलने की नहीं मिली मंजूरी, दुबई में भारी बारिश ने कठिन की पेरिस ओलंपिक की राह..!
    नई दिल्ली:-टोक्यो ओलंपिक में मामूली अंतर से पदक से चूक जाने वाले दीपक पूनिया की पेरिस ओलंपिक में पदक जीतने की महत्वाकांक्षाओं को बड़ा झटका लगा है। दीपक पूनिया और उनके साथी सुजीत कलकल को शुक्रवार 19 अप्रैल 2024 को एशियाई ओलंपिक क्वालिफायर में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं दी गई।
    इंडिनय एक्सप्रेस के मुताबिक, दोनों शुक्रवार सुबह 8 बजे के बाद मेजबान शहर बिश्केक पहुंचे। हालांकि, इससे पहले ही वेट-इन (पहलवानों को अपने शरीर के वजन को रिकॉर्ड करना होता है और दिखाना होता है कि वे मानदंडों को पूरा करते हैं) पहले ही शुरू हो चुका था। इस कारण आयोजकों ने दोनों को प्रतियोगिता में अनुमति देने से इनकार कर दिया।
    भारत का क्वालिफिकेशन अभियान शुक्रवार से शुरू हो रहा है, जिसमें 19 अप्रैल 2024 को पुरुषों की फ्रीस्टाइल बाउटें होनी हैं। दीपक पूनिया की गैरमौजूदगी में युवा 57 किग्रा वर्ग के स्टार अमन सहरावत पुरुष टीम का नेतृत्व करेंगे। बता दें कि दीपक पूनिया और सुजीत कलकल अपने कोच कमल मलिकोव और फिजियो शुभम गुप्ता के साथ मंगलवार 16 अप्रैल से दुबई हवाई अड्डे पर फंसे हुए थे।
    मजबूरी बताने के बावजूद नहीं पसीजे आयोजक
    दीपक पूनिया और सुजीत कलकल ने अपना पक्ष रखा, लेकिन आयोजकों ने कोई छूट नहीं दी। दीपक पूनिया और सुजीत कलकल के पास अब पेरिस ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने का सिर्फ एक (अगले महीने होने वाला विश्व क्वालिफायर) और मौका है।
    दुबई में 75 साल में सबसे अधिक बारिश
    दुबई में अब तक की हुई रिकॉर्ड बारिश के कारण हवाई अड्डे पर परिचालन गंभीर रूप से बाधित हुआ। इसी के चलते भारतीय पहलवान भी दुबई हवाई अड्डे पर फंसे हुए थे। यूएई सरकार के अनुसार, देश में 75 वर्षों में सबसे अधिक बारिश हुई।
    सुजीत कलकल के पिता दयानंद ने गुरुवार 18 अप्रैल को इंडियन एक्सप्रेस को बताया था कि वह दोनों के टूर्नामेंट में हिस्सा लेने को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि वे हवाई अड्डे के फर्श पर सो रहे थे और उन्हें उचित भोजन नहीं मिला। पूरी खबर इस लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं:- दुबई एयरपोर्ट के फर्श पर सो रहे, न खाने-पीने का इंतजाम, एशियाई ओलंपिक क्वालिफायर खेलने जा रहे दीपक पूनिया और सुजीत कलकल का बुरा हाल

  • “केजरीवाल को मारने की साजिश’: जेल में मीठा खाने के दावे पर आतिशी का बयान- कस्टडी में रोकी गई CM की दवाई..!

    “केजरीवाल को मारने की साजिश’: जेल में मीठा खाने के दावे पर आतिशी का बयान- कस्टडी में रोकी गई CM की दवाई..!

    “केजरीवाल को मारने की साजिश’: जेल में मीठा खाने के दावे पर आतिशी का बयान- कस्टडी में रोकी गई CM की दवाई..!
    दिल्ली सरकार में मंत्री आतिशी ने आरोप लगाया कि प्रवर्तन निदेशालय ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आहार को लेकर कोर्ट में झूठ बोला है कि वह चीनी वाली चाय पी रहे हैं और आम व मिठाई खा रहे हैं। यह पूरी तरह से झूठ है। केजरीवाल कृत्रिम स्वीटनर ले रहे हैं।
    आतिशी ने कहा कि ईडी ने कोर्ट को बताया कि केजरीवाल केले खा रहे हैं। कोई भी डॉक्टर आपको बता देगा कि डायबिटीज के रोगियों को केला या कोई टॉफी या चॉकलेट अपने पास रखने के लिए कहा जाता है, क्योंकि शुगर के स्तर में गिरावट जीवन के लिए खतरनाक हो सकती है।
    ईडी ने कहा कि केजरीवाल आलू पूड़ी खा रहे हैं। इतना झूठ बोलने के लिए ईडी को भगवान से डरना चाहिए। उन्होंने सिर्फ नवरात्रि के पहले दिन ही पूड़ी खाई थी। उन्होंने कहा कि भाजपा अपनी विंग ईडी के जरिये केजरीवाल की सेहत को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रही है। वे केजरीवाल को जेल में घर का बना खाना देने से रोकने का प्रयास कर रहे हैं।
    उन्होंने कहा कि एक बार जब घर का खाना बंद हो जाएगा तो यह पता नहीं चलेगा कि केजरीवाल को जेल में क्या खिलाया जा रहा है और कब। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ दिनों से केजरीवाल का शुगर लेवल 300 से अधिक है, लेकिन तिहाड़ जेल अधिकारियों ने उन्हें इंसुलिन देने से इन्कार कर दिया है। केजरीवाल के घर में बने खाने की आपूर्ति बंद कर उन्हें मारने की साजिश की जा रही है।

  • EVM-VVPAT Hearing: सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग की दलील- EVM से छेड़छाड़ संभव नहीं…!

    EVM-VVPAT Hearing: सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग की दलील- EVM से छेड़छाड़ संभव नहीं…!

    EVM-VVPAT Hearing: सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग की दलील- EVM से छेड़छाड़ संभव नहीं…!
    नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को कहा कि चुनावी प्रक्रिया के संबंध में सभी की आशंकाओं को दूर करना महत्वपूर्ण है. यह भी कहा कि इसमें पवित्रता होनी चाहिए. इसके साथ ही भारत के चुनाव आयोग से स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए अपनाए गए कदमों के बारे में विस्तार से बताने को कहा.
    न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और दीपांकर दत्ता की पीठ ने ईसीआई का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह से कहा, ‘कृपया अदालत को पूरी प्रक्रिया समझाएं. पीठ ने कहा कि मशीनों को कैसे सक्षम बनाया जाता है, यदि आवश्यक हो तो उम्मीदवार किस चरण की जांच कर सकते हैं. साथ ही इसकी गारंटी है कि मशीनों के साथ कोई छेड़छाड़, चिप्स में बदलाव, डेटा की पुनर्प्राप्ति आदि संभव नहीं है.
    सिंह ने पीठ के समक्ष पेश किया कि सभी को पहले ही निपटा दिया गया है और इस अदालत द्वारा भी जांच की गई है, और आदेश पारित किए गए हैं. न्यायमूर्ति दत्ता ने कहा, ‘हम जो चाहते हैं वह यह है कि या तो आप या उपायुक्त जो भी मौजूद हों सभी की आशंकाओं को दूर करें (चुनावी प्रक्रिया के बारे में). यह एक चुनावी प्रक्रिया है. इसमें कुछ पवित्रता होनी चाहिए.
    एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील प्रशांत भूषण ने एक समाचार लेख का हवाला देते हुए पीठ के समक्ष पेश किया कि केरल के कासरगोड में एक मॉक पोल हुआ था और कुछ ईवीएम और वीवीपैट में भाजपा के लिए एक अतिरिक्त वोट दर्ज किया जा रहा था. पीठ ने ईसीआई के वकील और अधिकारी से इस पर गौर करने को कहा. शीर्ष अदालत इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) पर डाले गए वोटों का वीवीपीएटी प्रणाली के माध्यम से उत्पन्न कागजी पर्चियों से सत्यापन की मांग करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है. अभी सुनवाई जारी है.

  • Delhi High Court Judgement: दिल्ली हाईकोर्ट कोर्ट का फैसला.. प्रेमी कर ले सुसाइड तो प्रेमिका को नहीं माना जाएगा जिम्मेदार, पढ़े क्या हैं टिप्पणी..!

    Delhi High Court Judgement: दिल्ली हाईकोर्ट कोर्ट का फैसला.. प्रेमी कर ले सुसाइड तो प्रेमिका को नहीं माना जाएगा जिम्मेदार, पढ़े क्या हैं टिप्पणी..!

    Delhi High Court Judgement: दिल्ली हाईकोर्ट कोर्ट का फैसला.. प्रेमी कर ले सुसाइड तो प्रेमिका को नहीं माना जाएगा जिम्मेदार, पढ़े क्या हैं टिप्पणी..!
    दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रेम में असफलता के कारण आत्महत्या के लिए उकसाने के लिए पार्टनर जिम्मेदार नहीं है। कमजोर या दुर्बल मानसिकता वाले व्यक्ति द्वारा लिए गए गलत निर्णय के लिए किसी अन्य को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है।
    उच्च न्यायालय ने हाल ही में कहा कि यदि कोई प्रेमी प्रेम में असफलता के कारण आत्महत्या करता है, तो उसके साथी को आत्महत्या के लिए उकसाने वाला नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने मृतक की प्रेमिका रही एक युवकी व उसके साथी को अग्रिम जमानत देते हुए ये टिप्पणियां कीं। उन पर एक युवक की आत्महत्या के बाद आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था।
    न्यायमूर्ति अमित महाजन ने कहा इसी तरह यदि कोई छात्र परीक्षा में खराब प्रदर्शन के कारण आत्महत्या करता है या कोई मुवक्किल इसलिए आत्महत्या करता है क्योंकि उसका मामला अदालत ने खारिज कर दिया है तो परीक्षक या वकील को भी दोषी नहीं ठहराया जा सकता है।
    उदाहरण देकर हाईकोर्ट ने समझाया
    अदालत ने कहा यदि कोई प्रेमी प्रेम में असफलता के कारण आत्महत्या करता है यदि कोई छात्र परीक्षा में अपने खराब प्रदर्शन के कारण आत्महत्या करता है, यदि कोई ग्राहक आत्महत्या करता है क्योंकि उसका मामला खारिज कर दिया गया है, तो क्रमशः महिला, परीक्षक, वकील को उकसाने के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता। आत्महत्या का कमजोर या दुर्बल मानसिकता वाले व्यक्ति द्वारा लिए गए गलत निर्णय के लिए किसी अन्य व्यक्ति को आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
    प्रेमिका पर है उकसाने का आरोप
    बताया जाता है कि महिला का मृत व्यक्ति के साथ संबंध था। जिसने दोनों आरोपियों को एक साथ देखने के बाद आत्महत्या कर ली। यह आरोप लगाया गया कि आरोपी ने मृतक को यह कहकर उकसाया कि वे शारीरिक संबंध बनाते हैं और जल्द ही शादी करेंगे। उन्होंने कथित तौर पर मृतक से यह भी कहा कि उसके पास मर्दानगी क्षमता नहीं है और उसे आत्महत्या कर लेनी चाहिए, अन्यथा वे उसकी तस्वीरों के साथ उसकी टूटी हुई कार की खिड़की की तस्वीरें जैसी नल्ली कार वैसा नल्ला शीर्षक के साथ अपलोड कर देंगे।
    व्हाट्सएप चैट से सामने आई प्रेमी की हरकत
    मामले पर विचार करने के बाद, न्यायमूर्ति महाजन ने पाया कि रिकॉर्ड पर रखी गई व्हाट्सएप चैट से पता चलता है कि मृतक एक संवेदनशील स्वभाव का व्यक्ति था, जो लगातार धमकी देता था कि जब भी महिला उससे बात करने से इनकार करती थी तो वह आत्महत्या कर लेगा।
    मृतक ने सुसाइड नोट में आवेदकों का नाम लिखा था
    यह सही है कि मृतक ने सुसाइड नोट में आवेदकों का नाम लिखा था लेकिन इस न्यायालय की राय में मृतक द्वारा लिखे गए कथित सुसाइड नोट में खतरों की प्रकृति के बारे में कुछ भी उल्लेख नहीं किया गया है। अनुपात इतना कि एक ‘सामान्य व्यक्ति’ आत्महत्या के बारे में सोचने के लिए प्रेरित हो। यह आरोप कि आरोपी ने महिला के साथ अपने रोमांटिक रिश्ते की विफलता पर मृतक को चिढ़ाया था, इस तरह का उकसावा नहीं लगता है जो भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 306 के संदर्भ में आत्महत्या के लिए उकसाने की श्रेणी में आएगा।

  • “आतंकियों को घर में घुसकर मारेंगे…’, पाक को लेकर PM मोदी- राजनाथ के बयान को अमेरिका का भी साथ, कहा- नहीं करेंगे मध्यस्थता..!

    “आतंकियों को घर में घुसकर मारेंगे…’, पाक को लेकर PM मोदी- राजनाथ के बयान को अमेरिका का भी साथ, कहा- नहीं करेंगे मध्यस्थता..!

    “आतंकियों को घर में घुसकर मारेंगे…’, पाक को लेकर PM मोदी- राजनाथ के बयान को अमेरिका का भी साथ, कहा- नहीं करेंगे मध्यस्थता..!
    एएनआई:नई दिल्ली:-प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में इंटरव्यू और चुनावी रैलियों में कहा कि भारत आतंकवादियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर रहा है। आतंकियों को उनके घर में घुसकर मारा जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर दोबारा इसकी जरूरत पड़ी तो भारत हिचकिचाएगा नहीं। इस बयान में पीएम मोदी की सीधा इशारा पाकिस्तान की ओर था। पाकिस्तान ने भी इस बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। अब अमेरिका ने इस मामले को लेकर बयान दिया है। अमेरिका ने कहा कि भारत और पाकिस्तान को मिलकर इस विवाद को बातचीत के माध्यम से हल करना चाहिए। हालांकि अमेरिका ने यह भी कहा कि वह इस मामले को लेकर मध्यस्थता नहीं करेगा।
    पीएम मोदी ने क्या दिया था बयान
    राजनाथ सिंह ने हाल में एएनआई को दिए इंटरव्यू में कहा कि सीमा पार के आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए भारत का दृष्टिकोण अब बदल गया है। अगर आतंकवादी भारत में शांति भंग करने या आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की कोशिश करते हैं तो करारा जवाब दिया जाएगा। राजनाथ सिंह ने अपने बयान में कहा कि अगर ये आतंकवादी पाकिस्तान भाग गए तो भारत उन्हें पड़ोसी देश में घुसकर मारेगा। पीएम मोदी ने भी उत्तराखंड में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा कि जब भी देश में हमारी कमजोर सरकार रही है, हमारे दुश्मनों ने फायदा उठाया है। इस मजबूत सरकार में आतंकवादियों को घर में घुस के मारा जाता है।
    अमेरिका ने दिया ये बयान
    अमेरिका के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर से जब अन्य देशों आतंकियों के सफाए को लेकर प्रश्न किया गया तो उन्होंने कहा कि अमेरिका इस मसले में नहीं पड़ेगा। मिलर से प्रश्न किया गया था कि कनाडा में खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह की कथित हत्या, आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू की न्यूयॉर्क में हत्या की साजिश और पाकिस्तान में हाल के दिनों में आतंकवादियों की हत्या हुई इस पर अमेरिका की क्या प्रतिक्रिया है। इस सवाल के जवाब में मिलर ने कहा कि अमेरिका इसमें नहीं पड़ेगा लेकिन हम भारत और पाकिस्तान दोनों को तनाव से बचने और बातचीत के माध्यम से समाधान तलाशने का आग्रह करते हैं।

  • “झुग्गी-झोपड़ियों के स्कूलों में पढ़ने वाला व्यक्ति भी सुप्रीम कोर्ट का जज बन सकता है’, जानिए जस्टिस गवई ने क्यों कही यह बात..!

    “झुग्गी-झोपड़ियों के स्कूलों में पढ़ने वाला व्यक्ति भी सुप्रीम कोर्ट का जज बन सकता है’, जानिए जस्टिस गवई ने क्यों कही यह बात..!

    “झुग्गी-झोपड़ियों के स्कूलों में पढ़ने वाला व्यक्ति भी सुप्रीम कोर्ट का जज बन सकता है’, जानिए जस्टिस गवई ने क्यों कही यह बात..!
    नई दिल्ली:-सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बीआर गवई पिछले कुछ दिनों से अपने बयानों के चलते सुर्खियों में बने हुए हैं। सोमवार को एक बार फिर से उन्होंने समाज में हासिए पर रहने वाले समुदाय को लेकर अपनी बात रखी।जस्टिस बीआर गवई ने कहा कि हाशिए पर रहने वाले समुदायों के लोगों को अपनी आवाज खोजने और समाज में अपनी पहचान बनाने में भारतीय संविधान के निर्माता डॉ. बीआर अंबेडकर का महत्वपूर्ण योगदान है। इस दौरान उन्होंने भीमराव अंबेडकर की प्रशंसा भी की।
    जस्टिस गवई ने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि देश के लिए डॉ. अंबेडकर के योगदान का मतलब था कि झुग्गी-झोपड़ियों के स्कूलों में पढ़ने वाला व्यक्ति भी सुप्रीम कोर्ट का जज बन सकता है।
    उन्होंने कहा, “भारतीय संविधान की उत्पत्ति का श्रेय डॉ. बीआर अंबेडकर को जाता है… यह केवल डॉ. बीआर अंबेडकर के कारण ही है कि मेरे जैसा व्यक्ति, जो झुग्गी-झोपड़ी इलाके में एक नगरपालिका स्कूल में पढ़ता था, इस पद तक पहुंच सका।” .जस्टिस गवई, जस्टिस एएस ओका के साथ अंबेडकर मेमोरियल लेक्चर में ‘अनुच्छेद 32: इतिहास और भविष्य’ विषय पर बोल रहे थे।
    दूसरे दलित चीफ जस्टिस होंगे बीआर गवई
    जस्टिस गवई भारत के 52वें चीफ जस्टिस बनने जा रहे हैं। जस्टिस बीआर गवई 24 मई 2019 को सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त हुए थे। वह चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बनने की कतार में भी हैं और जस्टिस केजी बालाकृष्णन के बाद दूसरे दलित चीफ जस्टिस होंगे। जस्टिस बालाकृष्णन साल 2007 से 2010 के बीच चीफ जस्टिस रहे थे।
    अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 32 का उपयोग परिवर्तनकारी न्याय के लिए एक उपकरण के रूप में किया गया है। उन्होंने जोर देकर कहा, “डॉ. अंबेडकर ने कहा था कि संविधान वकीलों के लिए एक किताब नहीं बल्कि जीवन जीने का एक तरीका है।”
    कौन थे जस्टिस बीआर गवई के पिता?
    जस्टिस बीआर गवई के पिता रामकृष्ण सूर्यभान गवई 30 अक्टूबर 1929 को महाराष्ट्र के अमरावती में जन्में थे और अपने समर्थकों के बीच ”दादासाहेब” के नाम से मशहूर थे। वह रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (RPI) के संस्थापक थे। आरएस गवई साल 2006 से 2011 के बीच, जब केंद्र में कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार थी तब बिहार, सिक्किम और केरल के राज्यपाल भी रहे।