Tag: नई दिल्ली

  • NEET : नीट परीक्षा रद्द करने और काउंसलिंग पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, NTA को नोटिस…!

    NEET : नीट परीक्षा रद्द करने और काउंसलिंग पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, NTA को नोटिस…!

    NEET : नीट परीक्षा रद्द करने और काउंसलिंग पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, NTA को नोटिस…!
    देश की सर्वोच्च अदालत ने नीट यूजी 2024 की काउंसलिंग पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। सोमवार को नीट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने ये माना कि नीट यूजी परीक्षा परिणाम प्रभावित जरूर हुआ है और इसको लेकर एनटीए को जवाब भी देना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने इस संदर्भ में एनटीए और सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने 8 जुलाई को अगली सुनवाई का समय निर्धारित किया है।

    स्पेशल बेंच ने क्या कहा?
    शीर्ष अदालत ने 10 उम्मीदवारों की ओर से नीट परीक्षा को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि हम यह मान रहे हैं कि परीक्षा परिणाम प्रभावित हुए हैं और इसको लेकर एनटीए और सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा जा रहा है, लेकिन परीक्षा को रद्द नहीं किया जाएगा और ना ही काउंसलिंग पर रोक लगाई जाएगी। जस्टिस विक्रम नाथ और अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की स्पेशल बेंच ने काउंसलिंग पर रोक लगाने और परीक्षा को रद्द करने की याचिका को खारिज कर दिया।

    67 टॉपर्स से नीट यूजी पर खड़े हुए हैं सवाल
    बता दें कि नीट यूजी परीक्षा 5 मई को आयोजित हुई थी जिसका रिजल्ट 4 जून को जारी हुआ। रिजल्ट को लेकर शिकायतें तब आई जब 67 स्टूडेंट्स ने इस परीक्षा को टॉप किया। पिछले 2-3 साल में 3-4 स्टूडेंट्स ही परीक्षा को टॉप कर पाए हैं, लेकिन इस बार टॉपर्स की संख्या ने एग्जाम में गड़बड़ी की ओर इशारा किया। रिजल्ट के बाद से ही पेपर लीक के आरोप एनटीए पर लग रहे हैं। हालांकि एनटीए ने भी माना है कि उसके कुछ सेंटर्स पर पेपर में गड़बड़ी हुई है। हालांकि पेपर लीक की बात को एनटीए ने खारिज किया है।

    शिवांगी मिश्रा और अन्य 9 ने दाखिल की थी याचिका
    बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में शिवांगी मिश्रा और अन्य 9 लोगों ने याचिका दाखिल कर नीट यूजी परीक्षा को रद्द करने की मांग की थी। ये याचिका 1 जून को दाखिल हुई थी। सभी 10 याचिकाकर्ताओं ने नीट यूजी परीक्षा को दोबारा आयोजित करने की मांग की थी। बता दें कि एनटीए के शेड्यूल के मुताबिक रिजल्ट भी 10 दिन पहले जारी किया गया था। रिजल्ट जारी होने की तारीख पहले 14 जून थी। याचिका में कुछ उम्मीदवारों को ग्रेस मार्क्स देने के एनटीए के फैसले पर भी सवाल उठाया गया है।

  • निर्मला सीतारमण संभालेंगी पहले वाला ही विभाग, अन्य महिला मंत्रियों को मिली ये जिम्मेदारी..!

    निर्मला सीतारमण संभालेंगी पहले वाला ही विभाग, अन्य महिला मंत्रियों को मिली ये जिम्मेदारी..!

    निर्मला सीतारमण संभालेंगी पहले वाला ही विभाग, अन्य महिला मंत्रियों को मिली ये जिम्मेदारी..!
    नई दिल्ली -देश के अलग-अलग हिस्सों से चुनकर लोकसभा में पहुंची एनडीए के कुल महिला सांसदों में से सात को इस बार मंत्री बनाया गया है। इनको रविवार को हुए समारोह में पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई गई। सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इनके विभागों का भी बंटवारा कर दिया। इनमें निर्मला सीतारमण के पास पिछली सरकार में भी वित्त मंत्रालय था, अब भी वित्त मंत्रालय है। इसके अलावा उनके पास कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय की जिम्मेदारी भी है। वह महिला मंत्रियों में सबसे उम्रदराज मंत्री हैं। जबकि मंत्रिमंडल में शामिल हुईं रक्षा खडसे सबसे युवा महिला मंत्री हैं। वह युवा मामले और खेल मंत्रालय में राज्य मंत्री बनाई गई है।

    अन्नपूर्णा देवी पहले आरजेडी में थीं, बाद में वह बीजेपी में शामिल हुईं
    झारखंड की कोडरमा सीट से जीतकर आईं अन्नपूर्णा देवी को महिला एवं बाल विकास मंत्री बनाया गया है। वह पहले आरजेडी में थीं। पांच साल पहले वह बीजेपी में शामिल हो गई थीं।

    शोभा करंदलाजे पूर्व मुख्यमंत्री येदियुरप्पा की करीबी मानी जाती हैं
    कर्नाटक से निर्वाचित बीजेपी की महिला सांसद शोभा करंदलाजे को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय में राज्य मंत्री और श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। वह राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री येदियुरप्पा की करीबी मानी जाती हैं। पिछली सरकार में वह कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के साथ-साथ खाद्य और प्रसंस्करण मंत्रालय भी संभालती थीं।

    खडसे 26 साल की उम्र में पहली बार सांसद बनी थीं
    मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में सबसे युवा मंत्री के रूप में रक्षा खडसे शामिल की गई हैं। उन्हें युवा मामले और खेल मंत्रालय में राज्य मंत्री बनाया गया है। 37 साल की रक्षा ने कंप्यूटर साइंस से बीएससी तक की पढ़ाई की है। खडसे मात्र 26 साल की उम्र में पहली बार सांसद बनीं थीं। वह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) नेता एकनाथ खड़से की बहू हैं। उनकी शादी निखिल खडसे से हुई थी। निखिल ने साल 2013 में खुद को गोली मार ली थी।

    अपना दल (एस) की अनुप्रिया पटेल तीसरी बार सांसद बनी हैं
    यूपी की मिर्जापुर सीट से चुनकर लोकसभा में पहुंची अनुप्रिया पटेल मोदी सरकार में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय में राज्य मंत्री की जिम्मेदारी संभालेंगी। वह अपना दल (सोनेलाल) की नेता वह तीसरी बार सांसद चुनी गई हैं और तीनों बार मंत्री बनाई गई हैं।

    एमपी की धार से सांसद सावित्री ठाकुर को महिला विकास विभाग मिला है
    मध्य प्रदेश के धार लोकसभा सीट से दो लाख से अधिक वोटों से जीतने वालीं सांसद सावित्री ठाकुर को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री का प्रभार मिला है। वह संघ कार्यकर्ता रही हैं और बचपन से इसमें उनका जुड़ाव रहा है।

    गुजरात की निमूबेन बंभानिया उपभोक्ता मामले की मंत्री बनाई गई हैं
    गुजरात से लोकसभा सांसद चुनी गईं निमूबेन बंभानिया उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय में राज्य मंत्री बनाई गई हैं। बीजेपी सांसद निमूबेन बंभानिया को भी केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। उन्होंने आम आदमी पार्टी (AAP) के उमेश मकवाना को 4.55 लाख मतों के बड़े अंतर से हराया है। वे 2009-10 और 2015-18 के बीच भावनगर की मेयर के रूप में भी काम कर चुकी हैं।

    इससे पहले रविवार 9 जून को मोदी सरकार 3.0 ने शपथ। राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कुल 72 मंत्रियों ने पद और गोपनीयता की शपथ। कुल 30 कैबिनेट मंत्रियों ने शपथ। इसके अलावा पांच राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 36 राज्य मंत्रियों को भी शपथ दिलाई गई। 72 मंत्रियों में सात महिलाएं भी शामिल हैं। अब जब विभागों का बंटवारा हो गया है तो आइये जानते हैं कि महिलाओं में किसे क्या जिम्मेदारी मिली है?

  • राजनीति में अजेय मानने वाले 5 बार के सीएम नवीन पटनायक को इस दिहाड़ी मजदूर ने दी पटकनी पढ़ें पूरी खबर…

    राजनीति में अजेय मानने वाले 5 बार के सीएम नवीन पटनायक को इस दिहाड़ी मजदूर ने दी पटकनी पढ़ें पूरी खबर…

    नई दिल्ली। ओडिशा के 5 बार के सीएम रह चुके नवीन पटनायक को राज्य की राजनीति में अजेय माना जाता था, लेकिन एक सामान्य व्यक्ति ने उनके किले में सेंध लगा दी। बीजेडी ने ना केवल राज्य की सत्ता गंवा दी, बल्कि चुनावी राजनीति में अजेय नजर आने वाले ओडिशा के निवर्तमान मुख्यमंत्री नवीन पटनायक अपनी सीट भी हार गए। नवीन पटनायक पिछले 24 साल से ओडिशा के मुख्यमंत्री थे। उनके नाम इस तटीय राज्य का सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड दर्ज है। नवीन पटनायक, 1998 में अस्का संसदीय क्षेत्र से उपचुनाव में 11वीं लोकसभा के सदस्य के रूप में चुने जाने के बाद से कभी चुनाव नहीं हारे थे।

    बता दें कि ओडिशा के कांटाभाजी के चुनावी मैदान में मतगणना 28 राउंड से अधिक समय तक चली और 4 जून की देर शाम को वहां से एक चौंकाने वाला परिणाम मिला। अजेय प्रतीत होने वाले नवीन पटनायक, जिन्होंने अपने शानदार राजनीतिक करियर में कभी हार का सामना नहीं किया था, उनकोे पहली बार हार का सामना करना पड़ा। उनको भारतीय जनता पार्टी के लक्ष्मण बाग ने करारी शिकस्त दी। लक्ष्मण बाग 15 साल पहले तक दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम कर रहे थे। लक्ष्मण बाग को 90,878 वोट मिले, जबकि पटनायक को कांटाभाजी विधानसभा क्षेत्र में 74,532 वोट मिले। यानी लक्ष्मण बाग की जीत का अंतर 16,344 वोट का रहा। पटनायक के प्रभाव को देखते हुए, यह हार और इसका अंतर अकल्पनीय है। बताया जाता है कि लक्ष्मण बाग ने कांटाभाजी निर्वाचन क्षेत्र में लगातार जरूरतमंद लोगों की मदद की और उनके अच्छे कामों ने उनकी शानदार जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लक्ष्मण बाग का जन्म एक गरीब किसान परिवार में हुआ था, जो गुजारा करने के लिए संघर्ष कर रहा था।

    *ट्रक हेल्पर से लेकर मजदूरी तक की*


    लक्ष्मण बाग छह भाई-बहन थे। घर चलाने के लिए उन्होंने अपने परिवार के खेत पर काम किया। मामूली तनख्वाह पर एक ट्रक ड्राइवर के लिए हेल्पर का काम किया। पैसा कमाने के लिए लक्ष्मण बाग दिहाड़ी मजदूर तक बन गए। हालांकि उनके बारे में ऐसी अफवाह थी कि वह दूसरे राज्यों में लेबर भेजने के एजेंटों के लिए काम करते थे, लेकिन यह बात कभी साबित नही हो सकी। बाद में उन्होंने ट्रक खरीदा और अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने में सफल रहे। पिछले साल दाखिल किए गए इन्कम टैक्स रिटर्न में उन्होंने अपनी आय 4.89 लाख रुपये दिखाई है।

    *राजनीतिक रूप से परिपक्वता दिखाई*


    लक्ष्मण बाग ने राजनीति में पहला कदम 2014 के विधानसभा चुनाव में रखा। तब वह तीसरे स्थान पर रहे थे। 2019 के विधानसभा चुनाव में वह महज 128 वोटों से हार गए। पटनायक की उम्मीदवारी की घोषणा करने से बहुत पहले, भाजपा उम्मीदवार ने पहले ही जमीनी कार्य कर लिया था और लगभग हर गांव का दौरा किया था, जिससे उन्हें फायदा हुआ। 48 वर्षीय बाग की जीत सिर्फ एक चुनावी उलटफेर से कहीं अधिक थी। बाग ने बीजू जनता दल सरकार द्वारा लागू रोजगार सृजन कार्यक्रमों के अप्रभावी होने पर जोरदार बहस छेड़ी।

  • प्रधानमंत्री मोदी के शपथ ग्रहण की तारीख बदली!, कई विदेशी नेता होंगे शामिल

    प्रधानमंत्री मोदी के शपथ ग्रहण की तारीख बदली!, कई विदेशी नेता होंगे शामिल

    नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2024 के परिणाम घोषित हो चुके है. किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिली हैं. अब तीसरी बार पीएम मोदी देश के प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि, शपथ ग्रहण समारोह की तारीख में बदलाव हुआ है. इसे लेकर आधिकारिक रूप से कोई जानकारी नहीं आई है. पहले खबर आई थी कि शपथ ग्रहण समारोह आठ जून को होना था. बता दें NDA को 293 सीटों पर जीत मिली थीं।

    एक रिपोर्ट के अनुसार पीएम मोदी अब 8 के बजाए 9 जून, रविवार को शपथ ले सकते हैं। लोकसभा चुनाव 2024 के परिणाम आने के बाद बीजेपी 240 सीटें जीतने में सफल रही है। लेकिन भाजपा पूर्ण बहुमत प्राप्त करने में विफल रही.

    आपको जानकारी हो कि, नरेंद्र मोदी ने बीते बुधवार को राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू को अपना त्याग पत्र सौंपा था। वहीं, राष्ट्रपति द्वारा इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया था और नई सरकार के संभालने तक पद पर बने रहने की अपील की थी।

    इन विदेशी नेताओं को भेजा गया न्यौता

    नरेंद्र मोदी ने अपने शपथ ग्रहण समारोह के लिए भूटान के नरेश, श्रीलंका के राष्ट्रपति, नेपाल, बांग्लादेश और मॉरिशस के पीएम को न्योता भेजा है। लगातार तीसरा टर्म जीतने पर दुनिया भर के नेताओं ने नरेंद्र मोदी को बधाई दी है।अमेरिक के राष्ट्रपति जो बाइडेन, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी बधाई संदेश भेजे हैं। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने नरेंद्र मोदी को फोन करके चुनाव में जीत की बधाई दी। इसके बाद नरेंद्र मोदी ने उन्हें अपने शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने का न्योता दिया

  • पीएम मोदी पहुंचे BJP मुख्यालय, भव्य स्वागत,

    पीएम मोदी पहुंचे BJP मुख्यालय, भव्य स्वागत,

    नई दिल्ली। PM Modi: लोकसभा चुनाव 2024 में तीसरी बार सरकार बनाने के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली के बीजेपी कार्यालय पहुंचे हैं। पीएम मोदी के साथ बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा, अमित शाह और राजनाथ सिंह भी मौजूद है। बीजेपी कार्यकर्ताओं ने पीएम मोदी का स्वागत किया है।

  • देश चलाने के लिए मोदी-शाह की जरूरत नहीं, संदेश एकदम साफ: राहुल गांधी..!

    देश चलाने के लिए मोदी-शाह की जरूरत नहीं, संदेश एकदम साफ: राहुल गांधी..!

    देश चलाने के लिए मोदी-शाह की जरूरत नहीं, संदेश एकदम साफ: राहुल गांधी..!
    नई दिल्ली लोकसभा चुनाव के नतीजों के बीच कांग्रेस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की है। मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि यह जनता की जीत है, मोदी के खिलाफ जनादेश आया है। कांग्रेस ने इस बात पर भी जोर दिया कि चुनाव के दौरान उन्हें रोकने के लिए सत्ताधारी दल ने हर संभव कोशिश की, लेकिन फिर भी जनता ने उन पर भरोसा जताया।
    लोकसभा चुनाव परिणाम 2024
    खड़गे ने चुनावी नतीजों पर क्या बोला?
    कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पूरे चुनाव के दौरान जिस प्रकार का कैंपेन पीएम मोदी ने चलाया, उसे लंबे समय तक याद रख जाएगा। दूसरी तरह हमने सकारात्मक प्रचार किया, इसी वजह से लोगों ने हमारा साथ दिया। मैं इंडिया गठबंधन के सभी साथियों का शुक्रिया अदा करता हूं, सभी एकजुट रहे और उसी वजह से इस प्रकार का जनादेश मिला।
    अयोध्या में नहीं मिला BJP को रामलला का आशीर्वाद, आसपास की सीटें भी गंवाई
    खड़गे ने आगे कहा कि कांग्रेस के घोषणा पत्र के बारे में मोदी जी ने जो झूठ फैलाया जनता ने उसे समझ लिया। राहुल गांधी की दोनों यात्राएं भारत जोड़ो यात्रा और भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान करोड़ों लोगों से मिलना, उनकी समस्याओं को सुनना और उन समस्याओं का हल ढूंढना ही हमारी कैंपेन का आधार बना। कांग्रेस अध्यक्ष के बाद राहुल गांधी ने भी बीजेपी पर निशाना साधा और इन नतीजों को संविधान बचाने की जीत बताया।राहुल का बीजेपी पर निशाना
    राहुल गांधी ने कहा कि यह चुनाव INDIA गठबंधन और कांग्रेस पार्टी सिर्फ एक राजनैतिक दल के खिलाफ नहीं लड़ी, यह चुनाव हम भाजपा, हिंदुस्तान की संस्था, सीबीआई-ED, इन सबके खिलाफ लड़े, क्योंकि इन संस्थाओं को नरेंद्र मोदी जी और अमित शाह जी ने डराया-धमकाया… लड़ाई संविधान को बचाने की थी। वैसे इस समय सवाल यह है कि क्या इंडिया गठबंधन सरकार बनाने की भी कोशिश करेगा या फिर वो विपक्ष में ही बैठने वाला है।
    आगे की रणनीति क्या है?
    इस सवाल पर राहुल गांधी ने दो टूक कहा कि वे इस तरह से कोई बयान नहीं दे सकते हैं। कल इंडिया की अहम मीटिंग है, उसमें हर बिंदू पर विचार किया जाएगा। उन्होंने यहां तक कहा कि वे इंडिया के सभी साथियों का पूरा सम्मान करते हैं और उनकी इच्छाओं को ध्यान में रखकर ही कोई फैसला लिया जाएगा।

  • अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनीता को क्यों नहीं मिली तिहाड़ में मुलाकात की इजाजत? AAP ने लगाया बड़ा आरोप…!

    अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनीता को क्यों नहीं मिली तिहाड़ में मुलाकात की इजाजत? AAP ने लगाया बड़ा आरोप…!

    अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनीता को क्यों नहीं मिली तिहाड़ में मुलाकात की इजाजत? AAP ने लगाया बड़ा आरोप…!
    दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल तिहाड़ जेल में हैं और अब आम आदमी पार्टी  ने दावा किया है कि उनकी पत्नी सुनीता को जेल में केजरीवाल से मिलने की इजाजत नहीं मिली है। AAP का दावा है कि सुनीता केजरीवाल दिल्ली के सीएम से 29 अप्रैल को मिलने जाना चाहती थीं लेकिन तिहाड़ जेल प्रशासन की तरफ से इजाजत ही नहीं मिली थी। वहीं आज दिल्ली सरकार की मंत्री आतिशी उनसे मिलने तिहाड़ जाने वाली हैं।
    एक तरफ आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया है कि सुनीता केजरीवाल को उनसे मिलने की इजाजत नहीं मिली है, तो दूसरी ओर तिहाड़ जेल के सूत्रों का कहना है कि सुनीता, अरविंद केजरीवाल से आए दिन मिली रहती है। उन्हें अनुमति देने से इनकार करने का तो कोई सवाल ही नहीं है।

    बता दें कि आज मंत्री आतिशी केजरीवाल से मिलने वाली हैं। इसको लेकर तिहाड़ जेल के सूत्रों की तरफ से कहा गया है कि हमें जेल से जुड़े नियमों का पालन करकना ही होगा और अरविंद केजरीवाल से दिल्ली की कैबिनेट मंत्री आतिशी की मुलाकात की तैयारियां काफी पहले ही अच्छे से कर ली गई हैं।
    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सोमवार दोपहर साढ़े 12 बजे अतिशी अरविंद केजरीवाल से मुलाकात करने के लिए तिहाड़ जाएंगी। इसके बाद 30 अप्रैल को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान  भी केजरीवाल से मुलाकात के लिए तिहाड जाने वाले हैं। केजरीवाल की दो मीटिंग पहले से ही फिक्स हैं और सुनीता केजरीवाल की एप्लिकेशन 28 अप्रैल को ही मिली थी। ऐसे में इन दो मीटिंग्स के बाद सुनीता केजरीवाल दिल्ली के सीएम से मुलाकात कर सकेंगी।

    तिहाड़ जेल प्रशासन का कहना है कि दो फिक्स मीटिंग्स के बाद सुनीता केजरीवाल दिल्ली के सीएम से जेल में मिल सकती हैं। वहीं आम आदमी पार्टी जेल प्रशासन के दावे को खारिज करते हुए यह आरोप लगा रही है कि सुनीता केजरीवाल की एप्लिकेशन ही जेल प्रशासन द्वारा खारिज कर दी गई है।
    आम आदमी पार्टी ने एक्स पर एक पोस्ट शेयर करते हुए तिहाड़ प्रशासन को निशाने पर लिया और कहा, “मोदी सरकार के इशारे पर तिहाड़ जेल प्रशासन ने सुनीता केजरीवाल की उनके पति अरविंद केजरीवाल से मुलाकात रद्द कर दी। मोदी सरकार अमानवीयता की सारी हदें पार कर रही है।”
    आम आदमी पार्टी के एक पदाधिकारी का कहना है आतिशी और सुनीता केजरीवाल दोनों के ही नाम सोमवार को मुख्यमंत्री से जेल में मुलाकात के लिए भेजे गए थे लेकिन जेल प्रशासन ने जानकारी दी कि सुनीता को मिलने की इजाजत नहीं है।

    https://twitter.com/i/broadcasts/1eaKbgOeagYGX

  • ‘अरविंद केजरीवाल को बस सत्ता का मोह, मंत्री बहा रहे घड़ियाली आंसू’, आखिर क्यों दिल्ली सरकार पर आगबबूला हुआ हाई कोर्ट..!

    ‘अरविंद केजरीवाल को बस सत्ता का मोह, मंत्री बहा रहे घड़ियाली आंसू’, आखिर क्यों दिल्ली सरकार पर आगबबूला हुआ हाई कोर्ट..!

    ‘अरविंद केजरीवाल को बस सत्ता का मोह, मंत्री बहा रहे घड़ियाली आंसू’, आखिर क्यों दिल्ली सरकार पर आगबबूला हुआ हाई कोर्ट..!
    दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल तिहाड़ जेल में हैं, जिसके चलते उनकी सरकार का कामकाज ढुलमुल होने के आरोप लग रहे हैं। एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट  ने अब केजरीवाल और उनके मंत्रियों को फटकार लगाई है। कोर्ट ने यह तक कह दिया है कि दिल्ली सरकार और अरविंद केजरीवाल की दिलचस्पी केवल सत्ता में बने रहने की है।
    दरअसल, दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि नगर निगम की आपसी खींचतान के चलते एमसीडी के स्कूलों में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स को अभी तक किताबें नहीं मिल पाई हैं और वे टिन शेड में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। इसको लेकर दिल्ली हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य जज मनमोहन और जस्टिस प्रीतम सिंह अरोड़ा की बेंच ने दिल्ली सरकार को फटकार लगाई।
    हाईकोर्ट ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को लेकर कहा कि गिरफ्तारी के बावजूद इस्तीफा न देकर अरविंद केजरीवाल ने राष्ट्रीय हित के ऊपर निजी हितों को प्राथमिकता दी है। इसके साथ ही कोर्ट ने दिल्ली सरकार में मंत्री सौरभ भारद्वाज को जमकर खरी-खरी सुनाई है।

    दिल्ली सरकार की तरफ से पेश वकील शादान फरासत ने कहा कि उन्हें सौरभ भारद्वाज से निर्देश मिले हैं कि एमसीडी की स्थायी समिति की गैरमौजूदगी में किसी उपायुक्त प्राधिकारी को शक्तियां सौंपने के लिए मुख्यमंत्री की सहमति की जरूरत होगी, जो कि अभी हिरासत में हैं। इसको लेकर हाईकोर्ट के जस्टिस मनमोहन ने सौरभ भारद्वाज को लेकर कहा कि उन्होंने छात्रों की दुर्दशा पर आंखें मूंद लीं हैं और वे घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं।
    हेल्थ इंश्योरेंस के लिए अब उम्र सीमा पर कोई प्रतिबंध नहीं, जानिए नए नियम के बारे सबकुछ
    दिल्ली सरकार को नहीं है छात्रों की कोई चिंता
    दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकार को लेकर कहा कि उन्हें कोई चिंता नहीं है कि छात्र स्कूल जा रहे हैं या नहीं। उनके पास किताबें नहीं हैं। उनकी दिलचस्पी सिर्फ सत्ता में हैं, यहां सत्ता का अहंकार अपने चरम पर है। कार्यवाहक चीफ जस्टिस मनमोहन ने कहा कि इसका मतलब यह नहीं कि छात्रों को किताबों के बिना ही पढ़ने के लिए ही छोड़ दिया जाए।

    दिल्ली सरकार के वकील पर की दलीलों पर कोर्ट ने कहा कि आपने कहा था कि मुख्यमंत्री के हिरासत में होने के बावजूद सरकार चलती रहेगी, आप हमें उस रास्ते पर जाने पर मजबूर कर रहे हैं, जहां हम नहीं जाना चाहते हैं।
    हाई कोर्ट ने कहा कि हमने अपने सामने आई जनहित याचिकाओं में कई बार यह कहा है, लेकिन यह आपके प्रशासन का फैसला है। अगर आप चाहते हैं कि हम इस पर टिप्पणी करें, तो हम इस पर विचार करेंगे। जस्टिस मनमोहन ने कहा कि वह सौरभ भारद्वाज का नाम भी ऑर्डर में शामिल करेंगे।

  • Delhi: ’23 दिन तक क्यों नहीं दी इंसुलिन, सीएम केजरीवाल की सेहत के साथ खिलवाड़ क्यों?’, AAP ने किया प्रदर्शन..!

    Delhi: ’23 दिन तक क्यों नहीं दी इंसुलिन, सीएम केजरीवाल की सेहत के साथ खिलवाड़ क्यों?’, AAP ने किया प्रदर्शन..!

    Delhi: ’23 दिन तक क्यों नहीं दी इंसुलिन, सीएम केजरीवाल की सेहत के साथ खिलवाड़ क्यों?’, AAP ने किया प्रदर्शन..!
    दिल्ली में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को तिहाड़ जेल में इंसुलिन का मुद्दा गरमाता जा रहा है। काफी दिनों से चले आ रहे दावों और आरोपों के बाद सीएम को मंगलवार को इंसुलिन दी गई। मगर आप इस मुद्दे को छोड़ना नहीं चाहती है। पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट से आप उम्मीदवार कुलदीप कुमार ने सवाल उठाते हुए पूछा है कि केजरीवाल को 23 दिनों तक इंसुलिन क्यों नहीं दी गई। उन्हेंने सीएम के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किए जाने का भी आरोप लगाया। वहीं दूसरी तरफ आप की डॉक्टर्स विंग इंसुलिन नहीं दिए जाने को लेकर प्रदर्शन कर रही है।

    ‘जेल का जवाब वोट से’ की होईंग्स लिए आप का डॉक्टर्स विंग प्रदर्शन कर रहा है। इसी दौरान आप उम्मीदवार कुलदीप कुमार ने कहा, ‘दिल्ली की जनता को सुविधाएं देने वाले, दिल्ली की बसों में बहनों को फ्री यात्रा देने वाले, दिल्ली के लोगों को 24
    घंटे बिजली देने वाले, दिल्ली के स्कूलों- अस्पतालों को शानदार करने वाले मुख्यमंत्री को भाजपा ने षड्यंत्र करके जेल में है। उसका जवाब दिल्ली की जनता वोट से देने को तैयार है। दिल्ली के लोग सड़क पर निकलकर कैंपेन कर रहे हैं। लोगों को जागरुक कर रहे हैं कि जैसे आपके मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जी को फंसाने का काम झूठे आरोप लगाकर भारतीय जनता पार्टी ने किया है। उन्हे जेल के अंदर प्रताड़ना दी जा रही है। जेल में उनकी हत्या का प्रयास बीजेपी करने का काम कर रही है। इसका खुलासा हो गया है। दिल्ली के लोग अब जेल का जवाब वोट से देने का काम करेंगे।’
    आप नेता ने कहा कि केजरीवाल को 23 दिनों तक इंसुलिन क्यों नहीं दी गई। उन्होंने कहा, ‘भाजपा बताए की मुख्यमंत्री की सेहत से खिलवाड़ करने का काम जेल के अंदर क्यों किया गया। उन्हें 23 दिन तक इंसुलिन क्यों नहीं दी गई। दूसरी बात ये बताए की बिना किसी सबूत के, बिना गवाह के दिल्ली के लोकप्रिय मुख्यमंत्री, दिल्ली के भाई को जेल में क्यों रखा गया  है। वो इसलिए रखा गया है क्योंकि बीजेपी निष्पक्ष चुनाव से भाग रही है। दिल्ली की जनता को परेशान करने के लिए दिल्ली
    के मुख्यमंत्री को उन्होंने जेल में डालने का काम किया है।’ वहीं दिल्ली पुलिस ने शराब घोटाले को लेकर केजरीवाल की गिरफ्तारी और जेल में उन्हें इंसुलिन नहीं देने को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे आप नेताओं, कार्यकर्ताओं और उसके विंग के सदस्यों को हिरासत में ले लिया।

  • ‘हम ऐसी गलती दोबारा नहीं दोहराएंगे’, सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद बालकृष्ण और रामदेव ने फिर मांगी माफी..!

    ‘हम ऐसी गलती दोबारा नहीं दोहराएंगे’, सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद बालकृष्ण और रामदेव ने फिर मांगी माफी..!

    ‘हम ऐसी गलती दोबारा नहीं दोहराएंगे’, सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद बालकृष्ण और रामदेव ने फिर मांगी माफी..!
    नई दिल्ली:-पतंजलि विज्ञापन केस में योग गुरु बाबा रामदेव और बालकृष्ण ने बुधवार यानी आज दोबारा से अखबारों में माफीनामा दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने बीते दिन अखबारों में छपे माफीनामे के साइज पर सवाल खड़े किए थे। अखबारो में दिए गए माफीनामे मे लिखा है कि देश के सुप्रीम कोर्ट के समक्ष चल रहे मामले के मद्देनजर हम अपनी व्यक्तिगत क्षमता के साथ-साथ कंपनी की ओर से सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवज्ञा के लिए बिना शर्त माफी मांगते हैं।इस माफीनामें में यह भी लिखा है कि हम 22.11.2023 को प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने के लिए बिना शर्त माफी मांगते हैं। हम अपने विज्ञापनों को प्रकाशित करने में हुई गलती के लिए ईमानदारी से माफी मांगते हैं और यह हमारी पूरी प्रतिबद्धता है कि ऐसी गलतियां दोबारा नहीं दोहराई जाएंगी। हम सावधानी और बिल्कुल ईमानदारी के साथ कोर्ट के निर्देशों का पालन करने का वचन देते हैं। हम कोर्ट की महिमा को बनाए रखने और संबंधित प्राधिकारियों के लागू कानूनों और निर्देशों का पालन करने का वचन देते हैं।
    माफीनामे को ऑन रिकार्ड रखें
    बाबा रामदेव और उनके सहयोगी पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के बालकृष्ण ने जस्टिस हिमा कोहली और अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ को बताया कि उन्होंने भ्रामक विज्ञापनों पर 67 अखबारों में बिना शर्त सार्वजनिक माफी मांगी है और वे अपनी गलतियों के लिए बिना शर्त माफी मांगते हुए और भी विज्ञापन जारी करेंगे। इस पर जस्टिस हिमा कोहली ने कहा कि आपके विज्ञापन जिस साइज के रहते थे, उसी तरह का यह माफीनामा भी था? इन विज्ञापनों की कटिंग ले लें और हमको भेज दें। इन्हें बड़ा करने की जरूरत नहीं है। हम इसका जो साइज है वही देखना चाहते हैं। यह हमारा निर्देश है।
    जस्टिस कोहली ने कहा कि जब आप कोई विज्ञापन प्रकाशित करते हैं तो इसका मतलब यह नहीं कि हम उसे माइक्रोस्कोप से देखेंगे। सिर्फ पन्ने पर न हो, पढ़ा भी जाना चाहिए। कोर्ट ने रामदेव और बालकृष्ण को यह भी निर्देश दिया माफीनामे को ऑन रिकार्ड रखें। इसमें यह लिखा हो कि उन्होंने गलती की है।
    हम किसी के लिए यहां बंदूक चलाने नहीं आए
    सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि हमें यह साफ करना चाहिए कि हम यहां किसी खास पार्टी या किसी खास एजेंसी या किसी खास अथॉरिटी के लिए बंदूक चलाने नहीं आए हैं। यह एक जनहित याचिका है और लोगों के हित में है। लोगों को पता होना चाहिए कि वह क्या रास्ता अपना रही हैं और उन्हें कैसे गुमराह किया जा सकता है। साथ ही, अधिकारी इसे रोकने के लिए कैसे काम कर रहे हैं। कोर्ट ने केंद्रीय उपभोक्ताओं के मामले में सूचना एवं प्रसारण और प्रौद्योगिकी मंत्रालयों से यह बताने को कहा कि उन्होंने उपभोक्ता कानूनों के दुरुपयोग को रोकने के लिए क्या कार्रवाई की है।
    सुप्रीम कोर्ट ने आईएमए को भी लगाई फटकार
    सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान आईएमए को भी फटकार लगाई थी। कोर्ट ने कहा कि आईएमए को अपनी तरफ भी देखना चाहिए। एलोपैथी के डॉक्टर लोगों को गैरजरूरी और काफी महंगी दवाएं लिखते हैं। कोर्ट ने आगे कहा कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की तरफ से भी अनैतिक तौर तरीके अपनाए जाने की शिकायत मिल रही है। इतना ही नहीं, इस दौरान कोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद के अलावा दूसरी एफएमसीजी कंपनियों का भी जिक्र किया और कहा कि वे भी अपने प्रोडक्ट्स के बारे में गलत दावे करती हैं।