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  • घर कौन देगा, उन्हें रोजगार कौन देगा?’ CAA लागू होते ही केंद्र सरकार पर फूटा सीएम केजरीवाल का गुस्सा..!

    घर कौन देगा, उन्हें रोजगार कौन देगा?’ CAA लागू होते ही केंद्र सरकार पर फूटा सीएम केजरीवाल का गुस्सा..!

    CAA से स्थानीय लोगों का रोजगार कम होगा…अरविंद केजरीवाल ने नागरिकता कानून पर क्‍या-कुछ कहा..!

    नई दिल्‍ली. नागरिकता संशोधन अधिनियम-2019 की अधिसूचना जारी होने के बाद देश का राजनीतिक पारा अचानक से बढ़ गया है. दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि CAA लागू होने के बाद 3 देशों से करोड़ों लोग भारत आएंगे. ऐसे में उन्‍हें रोजगार कौन देगा? सीएम केजरीवाल ने कहा कि यह देश के लिए खतरनाक है. CAA के प्रावधानों के तहत बांग्‍लादेश, पाकिस्‍तान और अफगानिस्‍तान में हिंसा या फिर किसी अन्‍य तरीके से वहां के अल्‍पसंख्‍यकों को दर-बदर होना पड़ता है तो पूरी छानबीन के बाद उन्‍हें भारत की नागरिकता दी जा सकती है. इसमें इन तीनों देशों में रहने वाले हिन्‍दू, सिख, बौद्ध, ईसाई, पारसी जैसे अल्‍पसंख्‍यक समुदाय के लोगों को यह सुविधा मिलेगी.

    CAA को लागू करने पर आपत्ति जताते हुए दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि उधर हमारे युवा रोजगार के लिए लाठियां खा रहे हैं और सरकार रोजगार का समाधान खोजने के बजाय CAA की बात कर रही है. उन्‍होंने आगे कहा कि अब भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के अल्पसंख्यक भारत की नागरिकता लेना चाहें तो उन्हें मिल जाएगी. केंद्र सरकार हमारे बच्चों को रोजगार नहीं दे रही है, जबकि पाकिस्‍तान से आने वालों को रोजगार देने की बात कर रही है.
    सीएम केजरीवाल ने कहा, ‘ये तीनों (पाकिस्‍तान, अफगानिस्‍तान और बाग्‍लादेश) गरीब देश हैं. जैसे ही भारत के दरवाजे खुलेंगे और भारी भीड़ भारत में आ जाएगी. ढाई करोड़ में से अगर डेढ़ करोड़ लोग भारत आ गए तो उन्हें रोजगार कौन देगा? बीजेपी का पूरा खेल गंदी राजनीति का हिस्सा है. इनलोगों को लाया गया और उन इलाकों में चुन-चुन कर बसाया गया, जहां बीजेपी का वोट कम है. ऐसा लोगों का कहना है.’ दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री ने आगे कहा, ‘हरियाणा सरकार रोजगार के अभाव में बच्चों को इजराइल भेज रही है और पाकिस्तानियों को भारत लाकर रोजगार देना चाहते हो. हर देश पड़ोसी देशों को रोकने के लिए अपनी दीवार मजबूत करता है, लेकिन बीजेपी इन देशों के गरीबों को लाने की कोशिश में है.’ सीएम केजरीवाल ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में 11 लाख से ज्यादा व्यापारी-उद्योगपति बीजेपी की नीतियों तंग आकर भारत छोड़कर चले गए. ये रोजगार देते थे. लाना है तो इन्हें लाइए, ताकि वो रोजगार दे सकें.
    नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 यानी सीएए (CAA) को लागू करने से जुड़े नियमों को सोमवार को अधिसूचित कर दिया गया. सीएए पाकिस्तान बांग्लादेश  और अफगानिस्तान  से आए बिना दस्तावेज वाले गैर-मुस्लिम प्रवासियों को नागरिकता देने के लिए है. सीएए के नियम जारी हो जाने के बाद अब मोदी सरकार 31 दिसंबर, 2014 तक भारत आए बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के प्रताड़ित गैर-मुस्लिम प्रवासियों (हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई) को भारतीय नागरिकता देना शुरू कर देगी. नागरिकता संशोधन कानून को केंद्र सरकार ने वर्ष 2019 में संसद में पास किया था. इस बिल का उद्देश्य पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आये 6 समुदायों (हिंदू, ईसाई, सिख, जैन, बौद्ध तथा पारसी) के शरणार्थियों को भारत की नागरिकता देना है. वैसे इस बिल में मुस्लिम समुदाय को शामिल नहीं करने पर कई राजनीतिक पार्टियों द्वारा विरोध भी किया जाता रहा है.

  • CJI चंद्रचूड़ की अध्‍यक्षता वाले कॉलेजियम ने केंद्र को भेजा प्रस्‍ताव, केरल से लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट तक से जुड़ा है मामला..!

    CJI चंद्रचूड़ की अध्‍यक्षता वाले कॉलेजियम ने केंद्र को भेजा प्रस्‍ताव, केरल से लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट तक से जुड़ा है मामला..!

    CJI चंद्रचूड़ की अध्‍यक्षता वाले कॉलेजियम ने केंद्र को भेजा प्रस्‍ताव, केरल से लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट तक से जुड़ा है मामला..!

    नई दिल्‍ली. भारत के प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाले उच्चतम न्यायालय  के कॉलेजियम ने केंद्र को केरल उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के रूप में नियुक्ति के लिए 6 वकीलों के नामों की सिफारिश की है. कॉलेजियम ने यह भी सिफारिश की कि न्यायिक अधिकारी मोहम्मद यूसुफ वानी को जम्मू कश्मीर एवं लद्दाख के उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया जाए. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिशों को केंद्र संशोधित भी करता है और कई बार उस पर आपत्ति भी जताता है. ऐसे में न्‍यायपालिका और कार्यपालिका के बीच टकराव जैसी स्थिति उत्‍पन्‍न हो जाती है.

    सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की एक और सिफारिश
    कॉलेजियम ने बंबई उच्च न्यायालय के 11 अतिरिक्त न्यायाधीशों को उसी उच्च न्यायालय के स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने की भी सिफारिश की. ये 11 न्यायाधीश हैं- न्यायमूर्ति उर्मिला सचिन जोशी-फाल्के, न्यायमूर्ति भरत पांडुरंग देशपांडे, न्यायमूर्ति किशोर चंद्रकांत संत, न्यायमूर्ति वाल्मीकि एसए, न्यायमूर्ति कमल रश्मि खाता, न्यायमूर्ति शर्मिला उत्तमराव देशमुख, न्यायमूर्ति अरुण रामनाथ पेडनेकर, न्यायमूर्ति संदीप विष्णुपंत मार्ने, न्यायमूर्ति गौरी विनोद गोडसे, न्यायमूर्ति राजेश शांताराम पाटिल और न्यायमूर्ति आरिफ सालेह डॉक्टर.

    इलाहाबाद हाईकोर्ट को लेकर भी सिफारिश
    कॉलेजियम ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पांच अतिरिक्त न्यायाधीशों- न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव, न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला, न्यायमूर्ति मोहम्मद अजहर हुसैन इदरीसी, न्यायमूर्ति ज्योत्सना शर्मा और न्यायमूर्ति सुरेंद्र सिंह-प्रथम को उसी उच्च न्यायालय के स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने की सिफारिश की है.

    सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम में सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ के अलावा न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति बीआर गवई भी शामिल हैं. शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर अपलोड कॉलेजियम के एक प्रस्ताव में कहा गया, ‘कॉलेजियम यह सिफारिश करने का निर्णय लेता है कि वकीलों- अब्दुल हकीम मुल्लापल्ली अब्दुल अजीज, श्याम कुमार वडक्के मुदावक्कट, हरिशंकर विजयन मेनन, मनु श्रीधरन नायर, ईश्वरन सुब्रमणि और मनोज पुलम्बी माधवन को केरल उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया जाए.’

  • कर्नाटक में कक्षा 5, 8 और 9 के लिए कोई बोर्ड परीक्षा नहीं, SC ने HC का आदेश किया रद्द..!

    कर्नाटक में कक्षा 5, 8 और 9 के लिए कोई बोर्ड परीक्षा नहीं, SC ने HC का आदेश किया रद्द..!

    कर्नाटक में कक्षा 5, 8 और 9 के लिए कोई बोर्ड परीक्षा नहीं, SC ने HC का आदेश किया रद्द..!
    नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कर्नाटक उच्च न्यायालय की खंडपीठ के उस अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें राज्य सरकार को कक्षा 5,8 और 9 के छात्रों के योगात्मक मूल्यांकन के लिए निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 11 मार्च से बोर्ड परीक्षा आयोजित करने की हरी झंडी दी गई थी. शीर्ष अदालत ने कर्नाटक सरकार के वकील से कहा, ‘आपने देश की पूरी शिक्षा प्रणाली को खराब कर दिया है और अब आप इसे जटिल बनाना चाहते हैं. कृपया वैसा मत करो…’
    न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी और न्यायमूर्ति पंकज मिथल की पीठ ने कहा, ‘हम वर्तमान अपीलों को स्वीकार करते हैं और खंडपीठ द्वारा पारित आदेश को रद्द करते हैं. खंडपीठ को मुख्य अपीलों पर कानून के अनुसार यथाशीघ्र निर्णय करना होगा… हमारे द्वारा की गई टिप्पणियों से प्रभावित हुए बिना, गुण-दोष के आधार पर निर्णय लिया जाना चाहिए.’

    सुनवाई के दौरान कर्नाटक सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत ने जोर देकर कहा कि उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने सही आदेश पारित किया है. कामत ने कहा कि यह कोई परीक्षा भी नहीं है, यह एक योगात्मक मूल्यांकन है और यह छात्रों को उनके भविष्य के लिए तैयार करने की राज्य की नीति है.

    कामत ने कहा कि कक्षा 9 और 11 शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के अंतर्गत नहीं आते हैं और कक्षा 11 की परीक्षाएं पहले ही समाप्त हो चुकी हैं. बेंच ने कहा कि ‘कक्षा 8 तक आपको नियमित परीक्षा आयोजित करने की अनुमति है (आरटीई के अनुसार)…उच्च न्यायालय को निर्णय लेने दें, दो बार उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने अनुमति नहीं दी (परीक्षा के संबंध में राज्य सरकार की अधिसूचना).’

    कामत ने आरटीई की धारा 30 का हवाला देते हुए कहा कि प्रारंभिक शिक्षा पूरी होने तक किसी भी बच्चे को बोर्ड परीक्षा उत्तीर्ण करने की आवश्यकता नहीं होगी और कहा कि जोर उत्तीर्ण करने पर है. जस्टिस मिथल ने कहा कि अगर उन्हें पास करना जरूरी नहीं है तो आप परीक्षा क्यों आयोजित कर रहे हैं.

    इन परीक्षाओं को आयोजित करने के राज्य के फैसले पर कामत ने कहा, ‘हमने पाया कि कक्षाओं में जो सिखाया जा रहा है वह मानकों के अनुरूप नहीं हो है. इसलिए एक राज्य के रूप में मुझे यह जानने की जरूरत है कि हमारे अधिकार क्षेत्र में संचालित स्कूल अपना काम कर रहे हैं या नहीं और इसका आकलन करने का सबसे अच्छा तरीका एक समान मूल्यांकन करना है…’

    न्यायमूर्ति मिथल ने कामत से कहा, ‘आपने देश की पूरी शिक्षा व्यवस्था को खराब कर दिया है और अब आप इसे जटिल बनाना चाहते हैं. कृपया वैसा मत करो. किसी भी परीक्षा को उत्तीर्ण करने की आवश्यकता नहीं है तो परीक्षा आयोजित न करें…’ कामत ने इस बात पर जोर दिया कि परीक्षा की आवश्यकता है और अदालत से डिवीजन बेंच के आदेश के खिलाफ अपील की अनुमति नहीं देने का आग्रह किया. न्यायमूर्ति त्रिवेदी ने कहा, ‘बोर्ड परीक्षाओं का अपना डर होता है. लोग डरे हुए हैं…’

    कामत ने अदालत से आग्रह किया कि कक्षा 9 के छात्रों के लिए परीक्षा की अनुमति दी जाए, क्योंकि उन्हें कक्षा 10 की तैयारी करनी है और कक्षा 9 आरटीई अधिनियम के अंतर्गत नहीं आती है. पीठ ने कहा कि सरकार की अधिसूचनाओं को उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने अवैध ठहराया था. कामत ने कहा कि एकल न्यायाधीश ने धारा 22 या धारा 15 नहीं देखी.’

    ये है मामला : शीर्ष अदालत गैर सहायता प्राप्त मान्यता प्राप्त स्कूलों के संगठन, आरटीई छात्र और अभिभावक संघ और पंजीकृत गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूल प्रबंधन एसोसिएशन कर्नाटक द्वारा उच्च न्यायालय की खंडपीठ द्वारा पारित आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी.

    7 मार्च को न्यायमूर्ति के. सोमशेखर और न्यायमूर्ति राजेश राय के. की खंडपीठ ने एकल न्यायाधीश के फैसले की शुद्धता पर सवाल उठाने वाली राज्य सरकार द्वारा दायर अपील पर एकल न्यायाधीश के 6 मार्च के फैसले पर रोक लगाकर अंतरिम आदेश पारित किया था.

    एकल न्यायाधीश ने शैक्षणिक वर्ष 2023-24 से कक्षा 5, 8, 9 और 11 के लिए बोर्ड परीक्षा आयोजित करने के राज्य के फैसले को रद्द कर दिया था. उच्च न्यायालय ने घोषणा की कि उक्त निर्णय कर्नाटक शिक्षा अधिनियम, 1983 के प्रावधानों के तहत निर्धारित कानून की उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना लिया गया था.

  • SBI ने चुनावी बॉन्ड्स से जुड़ी जानकारी चुनाव आयोग को भेजी” क‍िस पार्टी को म‍िला क‍ितना चंदा, 2 द‍िन में हो जाएगा खुलासा..!

    SBI ने चुनावी बॉन्ड्स से जुड़ी जानकारी चुनाव आयोग को भेजी” क‍िस पार्टी को म‍िला क‍ितना चंदा, 2 द‍िन में हो जाएगा खुलासा..!

    SBI ने चुनावी बॉन्ड्स से जुड़ी जानकारी चुनाव आयोग को भेजी, क‍िस पार्टी को म‍िला क‍ितना चंदा, 2 द‍िन में हो जाएगा खुलासा..!
    भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, चुनाव आयोग को इलेक्टोरल बॉन्‍ड से संबंधित डाटा भेज दिया है. मंगलवार शाम तक चुनाव आयोग को यह डाटा देने के लिए एसबीआई को देने के ल‍िए कहा गया था. एसबीआई द्वारा यह चुनावी बॉन्‍ड्स की जानकारी चुनाव आयोग को सौंपने के बाद 2 द‍िनों में यह साफ हो जाएगा क‍िस पार्टी को क‍ितना चंदा म‍िला है.

    निर्वाचन आयोग के सूत्रों के मुताबिक भारतीय स्टेट बैंक ने इलेक्टोरल बॉन्ड्स की खरीद बिक्री से जुड़ी जानकारी भेज दी है. मिली जानकारी के मुताबिक, आंकड़े बुनियादी स्वरूप में हैं. यानी किसने कब कितने रुपए मूल्य के बॉन्ड्स किस पार्टी के पक्ष में खरीदे. हालांकि जानकारी बिल्कुल बुनियादी है यानी रॉ इन्फोर्मेशन है. उसे 15 मार्च तक तरतीब से अपनी वेबसाइट पर अपलोड करना निर्वाचन आयोग के विशेषज्ञों के लिए भी चुनौती है.

    सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को चुनावी बॉण्ड के विवरण 12 मार्च तक निर्वाचन आयोग को देने का आदेश दिया था और एसबीआई को चेतावनी दी कि इसके निर्देशों एवं समयसीमा का पालन करने में यदि वह नाकाम रहता है तो ‘जानबूझ कर अवज्ञा’ करने को लेकर अदालत उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है. चीफ जस्‍ट‍िस डी वाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने विवरण का खुलासा करने के लिए समयसीमा 30 जून तक बढ़ाने संबंधी एसबीआई की अर्जी खारिज कर दी. शीर्ष अदालत ने निर्वाचन आयोग को भी एसबीआई द्वारा साझा की गई जानकारी 15 मार्च को शाम पांच बजे तक अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित करने का निर्देश दिया था.

    पीठ में न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति बी.आर. गवई, न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल हैं. इसी पीठ ने 15 फरवरी को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए केंद्र की चुनावी बॉण्ड योजना को रद्द कर दिया था और इसे ‘असंवैधानिक’ करार देते हुए निर्वाचन आयोग को चंदा देने वालों, चंदे के रूप में दी गई राशि और चंदा प्राप्तकर्ताओं का 13 मार्च तक खुलासा करने का आदेश दिया था. लोकसभा चुनाव से पहले आए इस फैसले में न्यायालय ने चुनावी बॉण्ड योजना को तत्काल बंद करने तथा इस योजना के लिए अधिकृत वित्तीय संस्थान (एसबीआई) को 12 अप्रैल, 2019 से अब तक खरीदे गए चुनावी बॉण्ड का विस्तृत ब्योरा छह मार्च तक निर्वाचन आयोग को सौंपने का निर्देश दिया था.

    क‍िस नेता ने क्‍या कहा था?
    विपक्षी नेताओं ने सोमवार को पारित शीर्ष अदालत के आदेश की सराहना की और कहा कि देश जल्द ही जान जाएगा कि किसने किस पार्टी को चुनावी बॉण्ड के जरिये चंदा दिया है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘सुप्रीम कोर्ट के फैसले से, चुनावी बॉण्ड के जरिये भाजपा को चंदा देने वालों की सूची देश को जल्द पता चल जाएगी. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी एसबीआई की अर्जी खारिज करने के कोर्ट के फैसले पर खुशी जाहिर की. उन्होंने संवाददाता सम्मेलन में कहा क‍ि पूरे देश की जनता को इस बात की खुशी है कि सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से कम से कम वह सूची (चुनावी बॉण्ड से जुड़े लोगों की सूची) सामने आ जाएगी. इस सूची से यह पता लग जाएगा कि चुनावी बॉण्ड किन-किन लोगों से सम्बन्धित है.

    कोर्ट ने एसबीआई की अर्जी पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया. अर्जी में, राजनीतिक दलों द्वारा भुनाए गए प्रत्येक चुनावी बॉण्ड के विवरण का खुलासा करने के लिए समयसीमा 30 जून तक बढ़ाए जाने का अनुरोध किया गया था. पीठ उन अलग-अलग याचिकाओं पर भी सुनवाई कर रही है, जिनमें शीर्ष अदालत के 15 फरवरी के निर्देशों की कथित तौर पर जानबूझ कर अवज्ञा करने का लेकर एसबीआई के खिलाफ अवमानना कार्रवाई का अनुरोध किया गया है.

  • आपके हक हिन्‍दुओं के बराबर… CAA पर गृह मंत्रालय ने मुस्लिम समाज को दिया आश्‍वासन” क्‍या-कुछ कहा..!

    आपके हक हिन्‍दुओं के बराबर… CAA पर गृह मंत्रालय ने मुस्लिम समाज को दिया आश्‍वासन” क्‍या-कुछ कहा..!

    आपके हक हिन्‍दुओं के बराबर… CAA पर गृह मंत्रालय ने मुस्लिम समाज को दिया आश्‍वासन,”क्‍या-कुछ कहा..!
    नई दिल्ली. केंद्र सरकार द्वारा सोमवार को नागरिकता संशोधन कानून को देश में लागे करने के बाद इसे लेकर मुस्लिम समाज में फैली अनिश्चितताओं के संबंध में मंगलवार को गृह मंत्रलाय की तरफ से एक स्‍टेटमेंट जारी किया गया है. गृह मंत्रालय ने साफ किया कि सीएए से किसी भारतीय की नागरिकता नहीं जाने वाली है. कहा गया कि भारतीय मुसलमानों को चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि नागरिकता संशोधन अधिनियम उनकी नागरिकता को प्रभावित नहीं करेगा. वो हिंदू समाज की तर्ज पर ही बराबरी के अधिकारों के हकदार हैं.

    मंत्रालय ने सीएए के संबंध में मुसलमानों और छात्रों के एक वर्ग के डर को दूर करने की कोशिश करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि “इस अधिनियम के बाद किसी भी भारतीय नागरिक को अपनी नागरिकता साबित करने के लिए कोई दस्तावेज पेश करने के लिए नहीं कहा जाएगा.” गृह मंत्रालय ने एक बयान में कहा है, “भारतीय मुसलमानों को चिंता करने की जरूरत नहीं है क्योंकि सीएए ने उनकी नागरिकता को प्रभावित करने के लिए कोई प्रावधान नहीं किया है और इसका वर्तमान 18 करोड़ भारतीय मुसलमानों से कोई लेना-देना नहीं है, जिनके पास अपने हिंदू समकक्षों के समान अधिकार हैं.”

    इस्‍लाम एक शांतिपूर्ण धर्म…
    गृह मंत्रालय ने बयान में कहा, “इन तीन मुस्लिम देशों में अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न के कारण दुनिया भर में इस्लाम का नाम बुरी तरह से खराब हो गया है. हालांकि, इस्लाम एक शांतिपूर्ण धर्म है, जो कभी भी धार्मिक आधार पर कोई उत्पीड़न, नफरत या हिंसा का प्रचार या सुझाव नहीं देता है.” इसमें कहा गया, यह अधिनियम ”उत्पीड़न के नाम पर इस्लाम को कलंकित होने से बचाता है. कानून की आवश्यकता बताते हुए मंत्रालय ने कहा कि भारत का अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ प्रवासियों को इन देशों में वापस भेजने के लिए कोई समझौता नहीं है.

    मुसलमानों की चिंता अनुचित…
    गृह मंत्रालय की तरफ से कहा गया, “यह नागरिकता अधिनियम अवैध अप्रवासियों के निर्वासन से संबंधित नहीं है और इसलिए मुसलमानों और छात्रों सहित लोगों के एक वर्ग की चिंता कि सीएए मुस्लिम अल्पसंख्यकों के खिलाफ है, वो अनुचित है. मंत्रालय ने कहा कि नागरिकता अधिनियम की धारा 6 के तहत दुनिया में कहीं से भी मुसलमानों को भारतीय नागरिकता लेने पर कोई रोक नहीं है, जो प्राकृतिक रूप से नागरिकता से संबंधित है.

    विदेशी मुस्लिम भी कर सकते हैं आवेदन…
    मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय नागरिक बनने की इच्छा रखने वाले किसी भी विदेशी मुस्लिम प्रवासी सहित कोई भी व्यक्ति मौजूदा कानूनों के तहत इसके लिए आवेदन कर सकता है. “यह अधिनियम उन तीन इस्लामिक देशों में इस्लाम के अपने संस्करण का पालन करने के कारण सताए गए किसी भी मुस्लिम को मौजूदा कानूनों के तहत भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने से नहीं रोकता है।”

  • CAA का ओवैसी ने किया विरोध, बोले- धर्म आधारित कानून को बढ़ावा नहीं मिलना चाहिए…!

    CAA का ओवैसी ने किया विरोध, बोले- धर्म आधारित कानून को बढ़ावा नहीं मिलना चाहिए…!

    CAA का ओवैसी ने किया विरोध, बोले- धर्म आधारित कानून को बढ़ावा नहीं मिलना चाहिए…!
    पूरे देश में सीएए (CAA) लागू हो गया है. लोकसभा चुनाव से ठीक पहले केंद्र सरकार ने 11 मार्च को नागरिकता (संशोधन) अधिनियम 2024 की अधिसूचना जारी कर दी. गृह मंत्रालय ने 11 मार्च, सोमवार को इसके नियम जारी किए. इस कानून में संशोधन को चार साल पहले ही राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई थी. लेकिन इसे लागू नहीं किया जा सका था. अब चुनाव से ठीक पहले इसका नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है.

    केंद्र सरकार के फैसले पर विपक्षी नेताओं के रिएक्शन लगातार आ रहे हैं. विपक्षी दल सरकार के फैसले की टाइमिंग पर सवाल उठाए रहे हैं. ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमी चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने भी CAA को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है. सीएए पर बोलते हुए ओवैसी ने कहा कि चार साल पहले मोदी सरकार जो कुछ भी लेकर आई, वह गलत है. AIMIM चीफ ओवैसी ने कहा कि धर्म के आधार पर कानून लाने को बढ़ावा नहीं मिलना चाहिए.

    ओवैसी ने कहा सवाल उठाते हुए कहा कि भारत में केवल 5% लोग ही ऐसे हैं जिनके पास पासपोर्ट है. आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं है. जब एनआरसी और एनपीआर के लिए बायोमेट्रिक होगा, तब क्या होगा? ओवैसी ने CAA को असंवैधानिक कहते हुए कहा, मैं यह समझाने की कोशिश कर रहा हूं कि आपको CAA को अकेले नहीं देखना चाहिए. इसके साथ एनपीआर और एनआरसी को जोड़कर देखा जाना चाहिए.

    ओवैसी ने आगे कहा कि हैदराबाद के लोग इस चुनाव में भाजपा को सबक सिखाएंगे और लोग सीएए और भाजपा के खिलाफ मतदान करेंगे. धर्म के आधार पर बनाया गया यह कानून समानता के अधिकार का उल्लंघन करता है. असम में एनपीआर एनआरसी हो चुका है. ओवैसी ने असम का हवाला देते हुए कहा कि वहां एनपीआर-एनआरसी नागरिकता कानून का हिस्सा है. आप एक को दूसरे से कैसे निकाल सकते हैं?

    ओवैसी ने गृह मंत्री अमित शाह के बयान का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने मेरा नाम लेते हुए बताया था कि एनपीआर और (एनआरसी) को कैसे लाया जाएगा. ओवैसी ने कहा कि सिर्फ सीएए को ही न देखें. एनपीआर और एनआरसी को इससे जोड़कर देखा जाना चाहिए. AIMIM चीफ ने कहा कि सीएए के बाद  एनपीआर और  एनआरसी को भी लाया जाएगा. इसका असर अल्पसंख्यकों पर पड़ेगा.

  • दिल छू रहा ‘Bastar’ का दमदार गाना ‘वंदे वीरम’, बस्तर की दिखाई कड़वी सच्चाई, लोग बोले- ‘तुझको लाल सलाम…!

    दिल छू रहा ‘Bastar’ का दमदार गाना ‘वंदे वीरम’, बस्तर की दिखाई कड़वी सच्चाई, लोग बोले- ‘तुझको लाल सलाम…!

    दिल छू रहा ‘Bastar’ का दमदार गाना ‘वंदे वीरम’, बस्तर की दिखाई कड़वी सच्चाई, लोग बोले- ‘तुझको लाल सलाम…!
    नई दिल्ली: फिल्म ‘बस्तर: द नक्सल स्टोरी’ को लेकर चर्चा जोरों पर है और दर्शक इसे 15 मार्च 2024 को देखने के लिए बेताब हैं. मेकर्स ने दर्शकों के उत्साह को और बढ़ाते हुए फिल्म के पहले और सबसे पावरफुल गाने ‘वंदे विरम’ को रिलीज कर दिया है. जावेद अली की आवाज में यह गाना रूह को छू लेने वाला है, गाने में देश के लोगों के भीतर देशभक्ति की भावना जगाने की शक्ति है. यह गाना दर्शकों के सामने बस्तर की कड़वी सच्चाई की झलक दिखा रहा है.
    गाने से यह साफ है कि ये फिल्म सभी के उम्मीदों से बहुत आगे जाएगी. यह फिल्म अपने इमोशनल कॉन्टेंट से हर किसी की आंखें नम कर देगी. लोग म्यूजिक वीडियो पर कमेंट करके अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं.

    एक यूजर लिखता है, ‘छत्तीसगढ़ के लोग फिल्म को लेकर काफी रोमांचित हैं.’ दूसरा यूजर कहता है, ‘जय हिंद, जय इंडियन आर्मी, नेवी एयर फोर्स.’ तीसरा यूजर लिखता तुकबंदी करते हुए लिखता है, ‘काला सूरज काले बादल, और काले शाम, इस सफर के वो मुसाफिर, तुझको लाल सलाम

    मेकर्स ने पुलिस अधिकारियों-जवानों को किया सम्मानित
    ‘बस्तर: द नक्सल स्टोरी’ के मेकर्स ने आज एक लॉन्च इवेंट में गाना लॉन्च किया है, जिसमें पुलिस अधिकारी और जवानों की मौजूदगी ने इवेंट को खास बनाया. सॉन्ग लॉन्च के बाद, मेकर्स ने देश की रक्षा करने वाले रियल लाइफ हीरोज यानी पुलिस अधिकारियों और जवानों को सम्मानित भी किया. विपुल अमृतलाल शाह की सनशाइन पिक्चर्स द्वारा निर्मित और आशिन ए शाह द्वारा सह-निर्मित, ‘बस्तरः द नक्सल स्टोरी’ सुदीप्तो सेन द्वारा निर्देशित हैं और इसमें अदा शर्मा मुख्य भूमिका में होंगी. यह फिल्म 15 मार्च 2024 को दुनिया भर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी.

  • Rahul Kaswan Joins Congress: भाजपा छोड़ कांग्रेस में शामिल हुए चूरू सांसद राहुल कस्वां, चूरू लोकसभा सीट से लड़ेंगे चुनाव..!

    Rahul Kaswan Joins Congress: भाजपा छोड़ कांग्रेस में शामिल हुए चूरू सांसद राहुल कस्वां, चूरू लोकसभा सीट से लड़ेंगे चुनाव..!

    Rahul Kaswan Joins Congress: भाजपा छोड़ कांग्रेस में शामिल हुए चूरू सांसद राहुल कस्वां, चूरू लोकसभा सीट से लड़ेंगे चुनाव..!
    चूरू लोकसभा सीट  से भाजपा के सासंद राहुल कस्वां भाजपा छोड़ कांग्रेस में शामिल हो गए. दिल्ली में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राजस्थान कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की उपस्तिथि में राहुल कस्वां ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की. जानकारी के मुताबिक कस्वां को चूरू लोकसभा सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी हो सकते हैं. 
    भाजपा ने चुरू सीट से इस बार नये चेहरे देवेंद्र झाझड़िया को टिकट दिया है. झाझड़िया पैरालंपिक में दो बार स्वर्ण व एक बार रजत पदक जीत चुके हैं.
    कांग्रेस में शामिल होने पहले कस्वां ने ‘एक्स’ पर लिखा,  ‘राम-राम’ मेरे चूरू लोकसभा परिवार….. मेरे परिवारजनों! आप सब की भावनाओं के अनुरूप, मैं सार्वजनिक जीवन का एक बड़ा फैसला लेने जा रहा हूँ. राजनीतिक कारणों के चलते आज इसी समय, मैं भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता एवं संसद सदस्य पद से इस्तीफा दे रहा हूँ.”
    सांसद ने यह भी लिखा, ‘‘समस्त भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जे.पी. नड्डा जी, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी एवं श्री अमित शाह जी का आभार प्रकट करता हूं, जिन्होंने मुझे 10 वर्षों तक चूरू लोकसभा परिवार की सेवा करने का अवसर दिया. विशेष आभार मेरे चूरू लोकसभा परिवार का, जिन्होंने मुझे सदैव बहुमूल्य साथ, सहयोग और आशीर्वाद दिया.”
    तीसरी पीढ़ी सांसद, अब कटा टिकट
    चूरू से वर्तमान सांसद राहुल कस्वां लगातार दो बार सांसद रहे हैं, लेकिन इस बार बीजेपी ने लोकसभा चुनाव में टिकट नहीं दिया है. कस्वां परिवार की तीसरी पीढ़ी के राहुल कस्वां 2014 और वर्ष 2019 में लगातार दो बार चुनाव जीते. कयास है कि राहुल कस्वां का टिकट काटने पर बीजेपी को नुकसान हो सकता है. सोशल मीडिया पर भी इसका लगातार विरोध हो रहा है.

  • Sandeshkhali Case: संदेशखाली मामले पर ममता सरकार को ‘सुप्रीम’ झटका, सीबीआई जांच पर रोक से इनकार..!

    Sandeshkhali Case: संदेशखाली मामले पर ममता सरकार को ‘सुप्रीम’ झटका, सीबीआई जांच पर रोक से इनकार..!

    Sandeshkhali Case: संदेशखाली मामले पर ममता सरकार को ‘सुप्रीम’ झटका, सीबीआई जांच पर रोक से इनकार..!
    सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को ईडी के अधिकारियों पर हमले से संबंधित संदेशखाली हिंसा मामले को सीबीआई को ट्रांसफर करने के कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया है। जस्टिस बीआर गवई और संदीप मेहता की पीठ हाई कोर्ट के आदेश में पश्चिम बंगाल पुलिस के खिलाफ की गई टिप्पणियों को हटाने पर सहमत हुई।
    इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने ममता सरकार से सवाल करते हुए कहा कि शाहजहां शेख को इतने दिनों तक अरेस्ट क्यों नहीं किया गया? राज्य सरकार ने कहा कि सात गिरफ्तारी हुईं थी, सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं हो सकी थी। जस्टिस मेहता ने कहा कि राज्य की पुलिस को जांच में चार्जशीट दाखिल करने में कितना समय लगता है।ईडी के वकील एसवी राजू ने बताया कि ईडी अधिकारियों को बुरी तरह से पीटा गया,

    जब वह एक घोटाला मामले की जांच कर रहे
    ईडी ने बताया कि मुख्य आरोपी शेख शाहजहां ने एक एफआईआर भी दर्ज कराई थी। यह पीटे गए अधिकारियों के खिलाफ थी। इस मामले में पुलिस की भूमिका बेहद नदारद नजर आती है। मास्टरमाइंड को सीबीआई को सौंपने में काफी समय लग गया।

    बता दें कि 5 मार्च को कलकत्ता हाई कोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई से कराने का आदेश दिया था। साथ ही, पश्चिम बंगाल पुलिस को हमले के मास्टरमाइंड आरोपी शेख शाहजहां को उसी दिन सीआईडी की हिरासत से सीबीआई को सौंपने का निर्देश दिया था। इसके खिलाफ ममता सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक एसएलपी दायर की। इसमें कहा गया कि जांच को सीबीआई को सौंपने का हाई कोर्ट ने आदेश बहुत जल्दी पारित कर दिया था।

    संदेशखाली में ईडी अधिकारियों के साथ मारपीट करने के बाद मामले का मुख्य आरोपी शाहजहां शेख काफी दिनों तक फरार था। करीब 55 दिनों की फरारी काटने के बाद बंगाल पुलिस ने 29 फरवरी को शाहजहां शेख को अरेस्ट कर लिया था। शाहजहां शेख इन 55 दिनों तक कहां रहा किसी को नहीं पता।
    सीबीआई ने पार्टी से निकाले गए टीएमसी नेता शाहजहां शेख के 9 करीबी सहयोगियों को समन भेजा है। एजेंसी ने उन्हें सोमवार को यानी कि आज पेश होने के लिए कहा है। एक अधिकारी ने इस बात की जानकारी दी। सीबीआई को इन सभी 9 लोगों पर पांच जनवरी को शाहजहां शेख के आवास पर छापेमारी के दौरान ईडी की टीम के अधिकारियों पर हमला करने में शामिल होने का शक है।

    वहीं, संदेशखाली की स्थानीय महिलाओं ने टीएमसी नेता और उनके सहयोगियों पर जबरन उनकी जमीनों पर कब्जा करने और उत्पीड़न करने का आरोप लगाया। इस मामले में भारतीय जनता पार्टी ने सत्तारूढ़ टीएमसी पार्टी परत शाहजहां शेख को बचाने का आरोप लगाया था।

  • Manipur Violence: ‘जांच की स्थिति पर दाखिल करें रिपोर्ट’, सुप्रीम कोर्ट का राज्य सरकार, NIA और CBI को आदेश..!

    Manipur Violence: ‘जांच की स्थिति पर दाखिल करें रिपोर्ट’, सुप्रीम कोर्ट का राज्य सरकार, NIA और CBI को आदेश..!

    Manipur Violence: ‘जांच की स्थिति पर दाखिल करें रिपोर्ट’, सुप्रीम कोर्ट का राज्य सरकार, NIA और CBI को आदेश..!
    सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को मणिपुर सरकार, सीबीआई और एनआईए को निर्देश दिया कि वे जातीय हिंसा के मामलों में दायर आरोप पत्रों और जांच की स्थिति पर रिपोर्ट पेश करें। शीर्ष अदालत ने कहा कि इससे यह फैसला लेने में मदद मिल सकेगी कि सुनवाई असम में ही शुरू होगी या मणिपुर में भी की जा सकती है। 
    शीर्ष अदालत ने कहा कि वह पिछले दो महीने में हिंसक घटनाओं, सशस्त्र प्रदर्शनों, राजमार्गों को रोकने और जिला कलेक्टर के घर पर हमले की घटनाओं के मद्देनजर कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए राज्य सरकार और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को निर्देश जारी नहीं कर सकती है। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा, “ये ऐसे मामले हैं जिनमें अदालत निर्देश नहीं दे सकती।

    हम कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए नागरिक समाज संगठनों को निर्देश जारी नहीं कर सकते। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए राज्य सरकार है।अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणि मणिपुर सरकार और जांच एजेंसियों की ओर से पेश हुए। अदालत ने वेंकटरमणि से कहा कि वह राज्य में हिंसा की हालिया घटनाओं पर न्यायमूर्ति गीता मित्तल समिति की हालिया रिपोर्ट पर निर्देश हासिल करें।  
    न्यायमूर्ति गीता मित्तल की अध्यक्षता में शीर्ष अदालत द्वारा नियुक्त तीन न्यायाधीशों की समिति चाहती थी कि सर्वोच्च न्यायालय हिंसा की हालिया घटनाओं के बाद आदेश पारित करे। अदालत ने समिति की ओर से पेश वकील से कहा कि वह इस मुद्दे पर निर्देश हासिल करने के लिए अटॉर्नी जनरल को रिपोर्ट की एक प्रति प्रदान करे। 
    शीर्ष अदालत ने गुवाहाटी में एक विशेष न्यायाधीश से मिले पत्र का जिक्र किया। विशेष न्यायाधीश को जांच की निगरानी के लिए मणिपुर में हिंसा से जुड़े मामले स्थानांतरित किए गए थे। निचली अदालत के न्यायाधीश इस बारे में स्पष्टीकरण चाहते थे कि क्या वह 25 अगस्त 2023 को जारी शीर्ष अदालत के निर्देशों के अनुपालन में मणिपुर से गुवाहाटी स्थानांतरित किए गए मामलों में मुकदमे को आगे बढ़ा सकते हैं। असम की अदालत ने यह भी निर्देश की मांग की थी कि किशोर अपराधियों से निपटने के लिए उसे कैसे आगे बढ़ना चाहिए।