Tag: नई दिल्ली

  • सुप्रीम कोर्ट में EVM के खिलाफ दायर याचिकाएं खारिज, अदालत ने कहा- आरोप पूरी तरह बेबुनियाद..!

    सुप्रीम कोर्ट में EVM के खिलाफ दायर याचिकाएं खारिज, अदालत ने कहा- आरोप पूरी तरह बेबुनियाद..!

    सुप्रीम कोर्ट में EVM के खिलाफ दायर याचिकाएं खारिज, अदालत ने कहा- आरोप पूरी तरह बेबुनियाद..!
    नई दिल्‍ली : इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के कामकाज में अनियमितता का आरोप लगाने वाली याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि ईवीएम को लेकर कितनी याचिकाएं…? प्रत्येक पद्धति के अपने सकारात्मक और नकारात्मक पहलू होंगे, हम धारणाओं के आधार पर नहीं चल सकते.
    न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की एक पीठ ने कहा कि यह अदालत कई याचिकाओं की पहले ही कई मौकों पर पड़ताल कर चुकी है और ईवीएम के कामकाज से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर विचार कर चुकी है.

    पीठ ने याचिकाकर्ता नंदिनी शर्मा से कहा, “हम कितनी याचिकाओं पर विचार करेंगे? हाल ही में, हमने वीवीपीएटी से संबंधित एक याचिका पर विचार किया था. हम धारणाओं पर नहीं चल सकते. हर पद्धति के अपने सकारात्मक और नकारात्मक पक्ष होते हैं. क्षमा करें, हम अनुच्छेद 32 के तहत इस पर विचार नहीं कर सकते.”

    सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने आदेश में कहा कि याचिका में उठाए गए मुद्दे की शीर्ष अदालत ने विभिन्न याचिकाओं में पड़ताल की है. न्यायमूर्ति खन्ना ने कहा कि अदालत ने इस मुद्दे पर 10 से अधिक मामलों की पड़ताल की है. शर्मा ने अपनी याचिका में भारत के निर्वाचन आयोग और छह राजनीतिक दलों को पक्षकार बनाया था.

  • India’s Vs US : भारत की अमेरिका को दो टूक- CAA हमारा आंतरिक मामला”जिन्हें भारत की समझ नहीं वे लेक्चर न दें..!

    India’s Vs US : भारत की अमेरिका को दो टूक- CAA हमारा आंतरिक मामला”जिन्हें भारत की समझ नहीं वे लेक्चर न दें..!

    भारत की अमेरिका को दो टूक- CAA हमारा आंतरिक मामला”जिन्हें भारत की समझ नहीं वे लेक्चर न दें..!
    नई दिल्‍ली. अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा नागरिकता संशोधन कानून 2019 (CAA) पर टिप्‍पणी किए जाने के बाद इस मामले में भारत के विदेश मंत्रालय की तरफ से कड़ी आपत्ति दर्ज की गई है. विदेश मंत्रालय की तरफ से यह स्‍पष्‍ट कर दिया गया है कि यह भारत का आंतरिक मामला है. इसमें किसी भी बाहरी देश के दखल की कोई जरूरत नहीं है. अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने इससे पहले कहा था कि हम 11 मार्च से प्रभाव में आए सीएए के बारे में चिंतित हैं. हम बारीकी से निगरानी कर रहे हैं कि इस अधिनियम को कैसे लागू किया जाएगा. धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान और सभी समुदायों के लिए कानून के तहत समान व्यवहार मौलिक लोकतांत्रिक सिद्धांत हैं.

    भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता रणधीर जायसवाल ने अमेरिका के रिएक्‍शन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम भारत का आंतरिक मामला है और यह भारत की समावेशी परंपराओं और मानवाधिकारों के प्रति हमारी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को ध्यान में रखते हुए है. यह अधिनियम अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों से संबंधित उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों को सुरक्षित आश्रय प्रदान करता है, जो 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले भारत में प्रवेश कर चुके हैं.

    नहीं छीनता किसी की नागरिकता
    रणधीर जायसवाल ने आगे कहा, ‘सीएए नागरिकता देने के बारे में है, नागरिकता छीनने के बारे में नहीं. यह राज्यविहीनता के मुद्दे को संबोधित करता है, मानवीय गरिमा प्रदान करता है और मानवाधिकारों का समर्थन करता है. जहां तक सीएए के कार्यान्वयन पर अमेरिकी विदेश विभाग के बयान का संबंध है, हमारा मानना है कि यह गलत, गलत जानकारी वाला और अनुचित है.’

    जिन लोगों को भारत की परंपराओं की सीमित समझ…
    विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता ने कहा, ‘भारत का संविधान अपने सभी नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है. अल्पसंख्यकों के साथ व्यवहार पर किसी भी चिंता का कोई आधार नहीं है. वोट बैंक की राजनीति को संकट में फंसे लोगों की मदद के लिए किसी प्रशंसनीय पहल के बारे में विचार निर्धारित नहीं करना चाहिए. जिन लोगों को भारत की बहुलवादी परंपराओं और क्षेत्र के विभाजन के बाद के इतिहास की सीमित समझ है, उनके व्याख्यान देने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए. भारत के भागीदारों और शुभचिंतकों को उस इरादे का स्वागत करना चाहिए जिसके साथ यह कदम उठाया गया है.’

  • SC: इलेक्टोरल बॉन्ड नंबर जारी न करने पर सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई से मांगा जवाब, 18 मार्च तक का दिया समय..!

    SC: इलेक्टोरल बॉन्ड नंबर जारी न करने पर सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई से मांगा जवाब, 18 मार्च तक का दिया समय..!

    SC: इलेक्टोरल बॉन्ड नंबर जारी न करने पर सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई से मांगा जवाब, 18 मार्च तक का दिया समय..!
    चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर शीर्ष अदालत को सौंपे गए चुनावी बॉन्ड पर सीलबंद लिफाफे वापस करने की मांग की थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई से पूछा कि उन्होंने इलेक्टोरल बॉन्ड के नंबर्स क्यों जारी नहीं किए, जिनसे दानदाता और राजनीतिक पार्टियों के बीच का लिंक पता चल सके। सुप्रीम कोर्ट ने 18 मार्च तक एसबीआई से इस मामले पर जवाब मांगा है।
    सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कही ये बातें
    चुनाव आयोग के सीलबंद लिफाफे वापस करने की मांग पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि डाटा को स्कैन और डिजिटलीकरण किया जा रहा है, इसमें एक दिन का समय लग सकता है। जैसे ही पूरा डाटा स्कैन हो जाएगा, तो मूल डाटा को चुनाव आयोग को वापस कर दिया जाएगा। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश ने पूछा कि एसबीआई की तरफ से कौन पेश हुआ है? एसबीआई ने बॉन्ड नंबर जारी नहीं किए हैं। स्टेट बैंक को इनका खुलासा करना चाहिए। स्टेट बैंक को सारी जानकारी प्रकाशित करनी होगी।

    चीफ जस्टिस ने कहा कि संविधान पीठ ने अपने आदेश में कहा था कि एसबीआई को चुनाव आयोग को इलेक्टोरल बॉन्ड की जानकारी, उन्हें कैश करने वाले राजनीतिक दल की जानकारी, चुनावी बॉन्ड खरीद की तारीख, चुनावी बॉन्ड खरीदने वाले यानी दानदाता की जानकारी और चुनावी बॉन्ड खरीद की तारीख और उन्हें कैश करने की तारीख की पूरी जानकारी देनी थी, लेकिन एसबीआई ने चुनावी बॉन्ड के यूनिक अल्फा न्यूमेरिक नंबर की जानकारी नहीं दी है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई को नोटिस जारी कर इस मामले में जवाब मांगा है। एसबीआई को 18 मार्च तक अपना जवाब देना है।
    चुनावी बॉन्ड के खिलाफ याचिका दायर करने वाले एडीआर के वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कहा कि अदालत ने एसबीआई द्वारा चुनाव आयोग को मुहैया कराई गई जानकारी का मुद्दा उठाया है। एसबीआई द्वारा दी गई जानकारी में अल्फा न्यूमेरिक नंबर की जानकारी नहीं दी गई है, जिससे पता चलता कि किस व्यक्ति ने बॉन्ड खरीदा और वह बॉन्ड किसी राजनीतिक पार्टी ने कैश कराया। कोर्ट ने इस मामले में एसबीआई को नोटिस जारी कर मामले को सुनवाई के लिए सोमवार को लिस्टेड किया है।

    सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉन्ड योजना पर लगा दी थी रोक
    बीती 15 फरवरी को पांच जजों की संविधान पीठ ने केंद्र की इलेक्टोरल बॉन्ड्स योजना को असंवैधानिक बताते हुए इस पर रोक लगा दी थी। साथ ही कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉन्ड योजना के एकमात्र फाइनेंशियल संस्थान एसबीआई बैंक को 12 अप्रैल 2019 से अब तक हुई इलेक्टोरल बॉन्ड की खरीद की पूरी जानकारी 6 मार्च तक देने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की याचिका पर सुनवाई की थी, जिसमें एसबीआई बैंक ने इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी जानकारी साझा करने की समय सीमा 30 जून तक बढ़ाने की मांग की थी।
    सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि ‘आप (एसबीआई) कह रहे हैं कि दानदाताओं और राजनीतिक पार्टियों की जानकारी सील कवर के साथ एसबीआई की मुंबई स्थित मुख्य शाखा में है। मैचिंग प्रक्रिया में समय लगेगा, लेकिन हमने आपको मैचिंग करने के लिए कहा ही नहीं था और हमने सिर्फ स्पष्ट डिस्कलोजर मांगा था। सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई को 12 मार्च तक चुनाव आयोग के साथ चुनावी बॉन्ड की जानकारी साझा करने का आदेश दिया था और चुनाव आयोग को 15 मार्च तक यह पूरी जानकारी अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक करनी थी। हालांकि चुनाव आयोग ने 14 मार्च की शाम को ही चुनावी बॉन्ड से संबंधित जानकारी सार्वजनिक कर दी।
    अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करें

  • बॉन्ड नंबरों का खुलासा क्यों नहीं किया…चुनावी बॉन्ड केस में SC का SBI को नोटिस..!

    बॉन्ड नंबरों का खुलासा क्यों नहीं किया…चुनावी बॉन्ड केस में SC का SBI को नोटिस..!

    बॉन्ड नंबरों का खुलासा क्यों नहीं किया…चुनावी बॉन्ड केस में SC का SBI को नोटिस..!
    नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को राजनीतिक दलों द्वारा प्राप्त चुनावी बॉण्ड की विशिष्ट अक्षरांकीय संख्या (यूनीक अल्फा-न्यूमेरिक नंबर) का खुलासा करना चाहिए था. न्यायालय ने इस संबंध में बैंक से जवाब मांगा. प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली संविधान पीठ ने निर्वाचन आयोग की उस अर्जी पर सुनवाई की जिसमें चुनावी बॉण्ड मामले में न्यायालय के 11 मार्च के आदेश के एक हिस्से में संशोधन का अनुरोध किया गया है.

    न्यायालय ने अपने पंजीयक न्यायिक को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि निर्वाचन आयोग द्वारा सीलबंद कवर में सौंपे गए आंकड़ों को स्कैन किया जाए और उन्हें डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराया जाए. इस पीठ में न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति बी आर गवई, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल हैं. पीठ ने कहा कि इस काम को शनिवार शाम पांच बजे तक पूरा करना बेहतर रहेगा और एक बार यह कार्य हो जाने के बाद मूल दस्तावेज निर्वाचन आयोग को वापस कर दिए जाएं.
    उसने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील प्रशांत भूषण और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल के इन अभ्यावेदनों पर गौर किया कि एसबीआई ने चुनावी बॉण्ड की विशिष्ट अक्षरांकीय संख्या का खुलासा नहीं किया है. पीठ ने बैंक को नोटिस जारी किया और मामले में आगे की सुनवाई के लिए 18 मार्च की तिथि तय की. निर्वाचन आयोग ने अपनी अर्जी में कहा कि न्यायालय के 11 मार्च के आदेश में कहा गया था कि सुनवाई के दौरान सीलबंद लिफाफे में उसके द्वारा शीर्ष अदालत को सौंपे गए दस्तावेजों की प्रतियां आयोग के कार्यालय में रखी जाएं लेकिन उसने अपने पास दस्तावेजों की कोई प्रति नहीं रखी है.

    आयोग ने कहा कि उसने दस्तावेजों की कोई प्रति अपने पास नहीं रखी है. उसने कहा कि इन दस्तावेजों को वापस किया जाए ताकि वह न्यायालय के निर्देशों का पालन कर सके.

  • प्लीज चुनावी बॉन्ड पर हमारा सीलबंद लिफाफा वापस कर दीजिए…’ आखिर चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से क्यों की अपील..!

    प्लीज चुनावी बॉन्ड पर हमारा सीलबंद लिफाफा वापस कर दीजिए…’ आखिर चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से क्यों की अपील..!

    प्लीज चुनावी बॉन्ड पर हमारा सीलबंद लिफाफा वापस कर दीजिए…’ आखिर चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से क्यों की अपील..!
    भारत के चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से शीर्ष अदालत को सौंपे गए चुनावी बॉन्ड के दस्तावेजों को सीलबंद कवर में वापस करने का अनुरोध किया है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि एसबीआई ने चुनावी बॉन्ड की संख्या का खुलासा नहीं किया है, जो उसे करना था। सुप्रीम कोर्ट ने SBI को बॉन्ड नंबर का खुलासा करने को कहा।

    सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्रार को कहा कि वो सुप्रीम कोर्ट मे जमा डाटा को कल शाम 5 बजे तक चुनाव आयोग को सौंपे। डाटा डिजिटल फॉर्मेट में सुप्रीम कोर्ट के पास मौजूद रहेगा।

    उच्चतम न्यायालय आज निर्वाचन आयोग की उस अर्जी पर सुनवाई करेगा जिसमें चुनावी बॉन्ड मामले में उसके 11 मार्च के आदेश के एक हिस्से में संशोधन का अनुरोध किया गया है। निर्वाचन आयोग ने कहा कि आदेश में कहा गया था कि सुनवाई के दौरान सीलबंद लिफाफे में उसके द्वारा शीर्ष अदालत को सौंपे गए दस्तावेजों की प्रतियां निर्वाचन आयोग के कार्यालय में रखी जाएंगी। निर्वाचन आयोग ने कहा कि उसने दस्तावेजों की कोई प्रति नहीं रखी है।

    मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों के चयन के लिए एक समिति से प्रधान न्यायाधीश को बाहर करने को चुनौती देने वाले गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ (एडीआर) द्वारा दायर एक अलग याचिका पर भी शुक्रवार को सुनवाई होनी थी। हालांकि, यह मामला शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर शुक्रवार की कार्य सूची में नहीं दिखाया गया है। न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने 12 मार्च को एनजीओ का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील प्रशांत भूषण से कहा था कि चयन समिति से प्रधान न्यायाधीश को बाहर करने की याचिका पर आज सुनवाई की जाएगी।

  • शरणार्थियों और घुसपैठियों के बीच अंतर नहीं समझती हैं…’ CAA पर ममता को अमित शाह का जवाब..!

    शरणार्थियों और घुसपैठियों के बीच अंतर नहीं समझती हैं…’ CAA पर ममता को अमित शाह का जवाब..!

    शरणार्थियों और घुसपैठियों के बीच अंतर नहीं समझती हैं…’ CAA पर ममता को अमित शाह का जवाब..!
    नई दिल्ली: देश में नागरिकता संसोधन कानून (CAA) लागू हो चुका है. CAA को लेकर न्यूज एजेंसी ANI को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक इंटरव्यू दिया है. इस इंटरव्यू में उन्होंने तमाम सवालों का जवाब दिया है. अमित शाह ने CAA के कड़े विरोध के लिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से सवाल किया.

    उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस प्रमुख शरणार्थियों और घुसपैठियों के बीच अंतर नहीं समझती हैं. अमित शाह ने आगे कहा कि ‘मैं ममता बनर्जी से अपील करना चाहता हूं. राजनीति के लिए कई मंच हैं. कृपया बांग्लादेश से आए बंगाली हिंदुओं का विरोध न करें. आप स्वयं बंगाली हैं. मैं उन्हें खुली चुनौती दे रहा हूं और वह हमें बताएं कि इस अधिनियम में कौन सी धारा किसी की नागरिकता छीन रही है.’
    ‘ममता राजनीति कर रही हैं…’
    गृह मंत्री अमित शाह ने इंटरव्यू में आगे कहा कि ‘वह सिर्फ डर पैदा कर रही हैं और वोट बैंक को मजबूत करने के लिए हिंदुओं और मुसलमानों के बीच विभाजन पैदा कर रही हैं. वह राष्ट्रीय सुरक्षा के महत्वपूर्ण मुद्दे पर राजनीति कर रही हैं. लोग आपके साथ खड़े नहीं होंगे. ममता शरणार्थियों और घुसपैठियों के बीच अंतर नहीं समझती हैं.’

    बता दें कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने कहा था कि वह CAA को अपने राज्य में लागू नहीं होने देंगी, जिसे उन्होंने नौटंकी करार दिया था और लोगों से नागरिकता के लिए आवेदन नहीं करने को कहा था. क्योंकि ऐसा करने से वे नागरिकता की श्रेणी में आ जाएंगे. उन्होंने आगे कहा कि ‘अवैध प्रवासियों’ से उनके अधिकार छीन लिए जाएंगे.’

    गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा से कुछ दिन पहले 11 मार्च को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने CAA के कार्यान्वयन के लिए नियमों को अधिसूचित किया. CAA का उद्देश्य सताए गए गैर-मुस्लिम प्रवासियों को भारतीय नागरिकता प्रदान करना है. इनमें हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई शामिल हैं. जो बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान चले गए थे और 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आ चुके हैं.

  • अरविंद केजरीवाल आनन-फानन में पहुंचे कोर्ट”इस आदेश के खिलाफ लगाई अर्जी, क्या वजह..!

    अरविंद केजरीवाल आनन-फानन में पहुंचे कोर्ट”इस आदेश के खिलाफ लगाई अर्जी, क्या वजह..!

    अरविंद केजरीवाल आनन-फानन में पहुंचे कोर्ट”इस आदेश के खिलाफ लगाई अर्जी, क्या वजह..!
    नई दिल्ली: शराब घोटाला केस में बार-बार ईडी के समन को इग्नोर करने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अब कोर्ट पहुंचे हैं. अरविंद केजरीवाल ने ईडी द्वारा जारी समन का अनुपालन न करने के लिए दायर शिकायतों पर अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट द्वारा जारी किए गए समन को चुनौती देते हुए राउज एवेन्यू कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. अरविंद केजरीवाल ने विशेष न्यायाधीश राकेश सयाल के समक्ष पुनरीक्षण याचिका दायर की है. उम्मीद की जा रही है कि अदालत आज अरविंद केजरीवाल की अर्जी पर दलीलें सुनेगी.
    दिल्ली शराब घोटाला केस में अरविंद केजरीवाल अब तक एजेंसी द्वारा जारी किए गए आठ समन को छोड़ चुके हैं. 16 मार्च को अरविंद केजरीवाल को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया गया था. दिल्ली की एक अदालत ने कथित आबकारी घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले में समन को नजरअंदाज करने को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की शिकायत पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को तलब किया गया है.

    अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट दिव्या मल्होत्रा ने अरविंद केजरीवाल को 16 मार्च को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया था. अदालत ने यह भी कहा था कि उनके खिलाफ कार्यवाही के लिए ‘पर्याप्त आधार’ हैं. न्यायाधीश ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की उस शिकायत पर आदेश पारित किया, जिसमें 12 और 31 जनवरी तथा 14 फरवरी को समन पर पेश नहीं होने के लिए केजरीवाल के खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग की गई थी.

    न्यायाधीश ने कहा कि धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की विभिन्न धाराओं के तहत, जिस व्यक्ति को तलब किया गया है, वह उसका अनुपालन करने के लिए बाध्य है और जो लोग ऐसा नहीं करते हैं, कानून के तहत उनके खिलाफ मुकदमा चलाया जा सकता है. न्यायाधीश ने कहा, ‘इस प्रकार अधिनियम के आदेश के अनुसार प्रतिवादी समन का पालन करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य था, लेकिन कथित तौर पर वह ऐसा करने में विफल रहा…’

    अदालत ने इस बात पर गौर किया कि भले ही इसी तरह के आरोपों के साथ केजरीवाल के खिलाफ यह केवल दूसरी ईडी शिकायत है, लेकिन शिकायतकर्ता का यह तर्क ठोस है कि किसी लोक सेवक द्वारा जारी किए गए समन पर पेश नहीं होना एक अलग अपराध होगा. न्यायाधीश ने कहा, ‘संक्षेप में, शिकायत की सामग्री और रिकॉर्ड पर रखी गई सामग्री से प्रथम दृष्टया, भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 174 के तहत अपराध बनता है और दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 204 के तहत कार्यवाही के लिए पर्याप्त आधार हैं. इसके अनुसार आईपीसी की धारा 174 के तहत आरोपी अरविंद केजरीवाल को 16 मार्च 2024 के लिए समन जारी करें.’


    .

  • एक देश, एक चुनाव’ पर मोदी सरकार का बड़ा कदम, कोविंद कमेटी ने राष्ट्रपति को सौंपी रिपोर्ट” क्या-क्या सिफारिश..!

    एक देश, एक चुनाव’ पर मोदी सरकार का बड़ा कदम, कोविंद कमेटी ने राष्ट्रपति को सौंपी रिपोर्ट” क्या-क्या सिफारिश..!

    एक देश, एक चुनाव’ पर मोदी सरकार का बड़ा कदम, कोविंद कमेटी ने राष्ट्रपति को सौंपी रिपोर्ट”क्या-क्या सिफारिश..!
    नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव से पहले ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ पर बड़ा अपडेट सामने आया है. भारत के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की अध्यक्षता में एक साथ चुनाव कराने को लेकर गठित उच्च स्तरीय समिति ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की और अपनी रिपोर्ट सौंपी. इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद रहे.
    रामनाथ कोविंद पैनल की यह रिपोर्ट कुल 18,626 पन्नो की है. बताया गया कि हाई लेवल कमेटी ने हितधारकों, विशेषज्ञों के साथ व्यापक विचार-विमर्श, परामर्श और 191 दिनों तक लगातार काम करने के बाद यह रिपोर्ट तैयार की है, जिसे आज राष्ट्रपति को सौंपी गई है. माना जा रहा है कि 2029 में एक साथ चुनाव कराने की सिफारिश की गई है.

    पिछले सितंबर में गठित समिति को मौजूदा संवैधानिक ढांचे को ध्यान में रखते हुए लोकसभा, राज्य विधानसभाओं, नगर पालिकाओं और पंचायतों के लिए एक साथ चुनाव कराने के लिए संभावनाएं तलाशने और सिफारिशें करने का काम सौंपा गया था. पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली इस समिति में गृह मंत्री अमित शाह, राज्यसभा में विपक्ष के पूर्व नेता गुलाम नबी आजाद, वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष एन.के. सिंह, पूर्व लोकसभा महासचिव सुभाष कश्यप और वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे भी शामिल हैं.

    1. प्रारंभ में हर दस साल में दो चुनाव होते थे. अब हर साल कई चुनाव होने लगे हैं. इससे सरकार, व्यवसायों, श्रमिकों, न्यायालयों, राजनीतिक दलों, चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों और बड़े पैमाने पर नागरिक समाज पर भारी बोझ पड़ता है.

    2. इसलिए समिति सिफारिश करती है कि सरकार को एक साथ चुनावों के चक्र को बहाल करने के लिए कानूनी रूप से व्यवहार्य तंत्र विकसित करना चाहिए.

    3. समिति की सिफारिश है कि पहले चरण में लोक सभा और राज्य विधानसभाओं के लिए एक साथ चुनाव कराए जाएं. दूसरे चरण में नगर पालिकाओं और पंचायतों के चुनाव लोकसभा और राज्य विधान सभाओं के साथ समन्वित होंगे.

    4. इस तरह से कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव होने के सौ दिनों के भीतर नगर पालिकाओं और पंचायतों के चुनाव हो जाएं.
    5. लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनावों को एक साथ कराने के उद्देश्य से समिति सिफारिश करती है कि भारत के राष्ट्रपति आम सभा के बाद लोकसभा की पहली बैठक की तारीख को अधिसूचना द्वारा जारी कर सकते हैं. चुनाव आयोग इस अनुच्छेद के प्रावधान को लागू करें और अधिसूचना की उस तारीख को नियुक्त तिथि कहा जाएगा.

    6. समिति चुनाव कराने के लिए अनुच्छेद 324ए लागू करने की सिफारिश करती है.

    7. समिति की सिफारिश है कि त्रिशंकु सदन, अविश्वास प्रस्ताव या ऐसी किसी घटना की स्थिति में नए सदन के गठन के लिए नए सिरे से चुनाव कराए जा सकते हैं।

    8. जहां लोकसभा के लिए नये चुनाव होते हैं, लोकसभा का कार्यकाल, लोकसभा के पूर्ण कार्यकाल से ठीक पहले की शेष अवधि के लिए ही होगा और इस अवधि की समाप्ति विघटन के रूप में कार्य करेगी.

    लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी को भी समिति का सदस्य बनाया गया था लेकिन उन्होंने समिति को पूरी तरह से छलावा करार देते हुए मना कर दिया. विधि मंत्री अर्जुन राम मेघवाल समिति के विशेष आमंत्रित सदस्य हैं.

  • CPI(M) समर्थक होने के कारण केंद्र ने जज के रूप ने नियुक्ति से किया इनकार, सुप्रीम कोर्ट ने कहा: जजशिप से इनकार करने के लिए राजनीतिक पृष्ठभूमि पर्याप्त कारण नहीं..!

    CPI(M) समर्थक होने के कारण केंद्र ने जज के रूप ने नियुक्ति से किया इनकार, सुप्रीम कोर्ट ने कहा: जजशिप से इनकार करने के लिए राजनीतिक पृष्ठभूमि पर्याप्त कारण नहीं..!

    जजशिप से इनकार करने के लिए राजनीतिक पृष्ठभूमि पर्याप्त कारण नहीं, SC कॉलेजियम ने CPI(M) संबद्धता पर केंद्र की आपत्ति को किया खारिज..!
    नई दिल्ली: 12 मार्च, 2024 को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने बैठक की. उक्त बैठक में कॉलेजियम ने केरल हाईकोर्ट के जज के रूप में नियुक्ति के लिए मनोज पुलम्बी माधवन के नाम की सिफारिश की. सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने वकील मनोज पुलम्बी माधवन को केरल उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत करने पर केंद्र की आपत्ति को खारिज कर दिया.
    उन्होंने कहा कि उम्मीदवार को सीपीआई (एम) का समर्थक माना जाता है बेहद अस्पष्ट है. फ़ाइल में न्याय विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए इनपुट में कहा गया है, ‘मनोज पुलम्बी माधवन को सीपीआई (एम) का समर्थक माना जाता है. उन्हें एलडीएफ सरकार द्वारा 2010 और 2016-2021 में सरकारी वकील के रूप में नियुक्त किया गया था. माधवन अनुसूचित जाति समुदाय से हैं, जो उनकी उम्मीदवारी को अस्वीकार करने का वैध आधार नहीं है’.

    भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ के नेतृत्व वाले कॉलेजियम ने कहा, ‘वास्तव में, सरकारी वकील के रूप में उम्मीदवार की नियुक्ति यह संकेत देगी कि उसने उन मामलों को संभालने में पर्याप्त अनुभव प्राप्त किया होगा, जहां राज्य कानून की विभिन्न शाखाओं में एक पक्ष है’. कॉलेजियम, जिसमें न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और बी आर गवई भी शामिल हैं, ने 12 मार्च को पारित एक प्रस्ताव में कहा कि यह इनपुट कि उम्मीदवार को सीपीआई (एम) का समर्थक माना जाता है, अन्यथा अस्पष्ट और ठोस आधार से रहित है. अन्यथा भी, केवल यह तथ्य कि उम्मीदवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि रही है, सभी मामलों में पर्याप्त कारण नहीं हो सकता है.
    कॉलेजियम ने आगे कहा, ‘उदाहरण के लिए, हाल के दिनों में, एक वकील को उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया है, वह पदोन्नति से पहले एक राजनीतिक दल की पदाधिकारी थी. वर्तमान मामले में, बार में पर्याप्त अभ्यास के साथ एससी उम्मीदवार होने के नाते उम्मीदवार उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने के योग्य है. उनके प्रदर्शन को उच्च न्यायालय के कॉलेजियम के सदस्यों द्वारा देखा गया, जिनके पास एक वकील के रूप में उनकी क्षमता और आचरण का निरीक्षण करने का अवसर था. उनकी राय को यह कहते हुए कि उम्मीदवार फिट और उपयुक्त है उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति हेतु उचित महत्व दिया जाना चाहिए’.
    कॉलेजियम ने अधिवक्ता अब्दुल हकीम मुल्लापल्ली अब्दुल अजीज, श्याम कुमार वडक्के मुदावक्कट, हरिशंकर विजयन मेनन, मनु श्रीधरन नायर और ईश्वरन सुब्रमणि को केरल उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत करने की भी सिफारिश की.

  • दिल्ली मेट्रो के दो नए कॉरिडोर को मंजूरी, 8400 करोड़ रुपये होंगे खर्च, कैबिनेट में फैसला..!

    दिल्ली मेट्रो के दो नए कॉरिडोर को मंजूरी, 8400 करोड़ रुपये होंगे खर्च, कैबिनेट में फैसला..!

    दिल्ली मेट्रो के दो नए कॉरिडोर को मंजूरी, 8400 करोड़ रुपये होंगे खर्च, कैबिनेट में फैसला..!
    केंद्रीय कैबिनेट ने दिल्ली मेट्रो के दो नए कॉरिडोर को मंजूरी दे दी है। इन पर 8400 करोड़ रुपये खर्च होंगे। केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल की बैठक के बाद बुधवार को केंद्रीय सूचना व प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया है कि पहला कॉरिडोर लाजपत नगर से साकेत जी ब्लॉक के बीच होगा। इसकी लंबाई 8.4 किलोमीटर होगी। वहीं, दूसरा कॉरिडोर इंद्रलोक से इंद्रप्रस्थ के बीच होगा जिसकी लंबाई 12.4 किलोमीटर होगी। इन दोनों कॉरिडॉर का काम मार्च 2029 तक पूरा कर लिया जाएगा।

    क्या होगी दिल्ली मेट्रो के दो नए प्रस्तावित कॉरिडोर की खासियत?
    केंद्रीय मंत्री ने बताया कि लाजपत नगर से साकेत के बीच बनने वाला मेट्रो ब्लॉक सिल्वर, मेजेंटा, पिंक और वॉयलट लाइन्स को जोड़ेगा। इस पर आठ स्टेशन होंगे और यह पूरी तरह से एलिवेटेड होगा।केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया कि इंद्रलोक और इंद्रप्रस्थ के बीच बनने वाले 12.377 किलोमीटर के कॉरिडोर के जरिए ग्रीन लाइन का एक्सटेंशन किया जाएगा। इसके यात्रियों को रेड, यलो, एयरपोर्ट लाइन, मेजेंटा, वॉयलट और ब्लू लाइन से इंटरचेंज करने की सुविधा मिलेगी। इस कॉरिडोर के जरिए हरियाणा के बहादुरगढ़ रीजन के लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।

    केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि दोनों कॉरिडोर की कुल परियोजना लागत 8,399 करोड़ रुपये अनुमानित है, जो केंद्र और दिल्ली सरकारों और अंतरराष्ट्रीय फंडिंग एजेंसियों से प्राप्त की जाएगी. इन दो लाइनों में 20.762 किमी शामिल होंगे. उन्होंने कहा कि इन दोनों लाइनों पर 8399 करोड़ रूपये में से 10547 करोड़ रुपये केंद्र सरकार और 1987 करोड़ रुपये दिल्ली सरकार वहन करेगी. इन लाइनों के लिए 4309 करोड़ रुपये का लोन लिया जाएगा, 333 करोड़ रुपये दिल्ली मेट्रो रेल निगम खर्च करेगी और 195 करोड़ रुपये निजी सरकारी भागीदारी से जुटाये जाएंगे. ठाकुर ने कहा कि अभी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में मेट्रो का नेटवकर्क 427 किलोमीटर है जो इन लाइनों के बनने के बाद करीब 450 किलोमीटर हो जाएगा.

    इंद्रलोक-इंद्रप्रस्थ कॉरिडोर ग्रीन लाइन का विस्तार होगा और रेड, येलो, एयरपोर्ट लाइन, मैजेंटा, वॉयलेट और ब्लू लाइन के साथ इंटरचेंज होगा. लाजपत नगर-साकेत जी ब्लॉक कॉरिडोर सिल्वर, मैजेंटा, पिंक और वॉयलेट लाइनों को जोड़ेगा.