RSS के मंच पर दिखे एम्स डायरेक्टर: 100 साल का हो रहा संघ, रायपुर में पथ-संचलन, 4 साल के बच्चे ने उठाई तलवार

राजेन्द्र देवांगन
4 Min Read
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement

भारतीय सेना में टॉप रैंक अफसर और अब रिटायरमेंट के बाद रायपुर एम्स के डायरेक्टर लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल(पीवीएसएम, एवीएसएम, वाईएसएम) राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यक्रम में नजर आए। टाटीबंध में बाजार मैदान में दशहरे पर आयोजित संघ की सभा में उन्हें.रायपुर के पुरानी बस्ती सरस्वती कन्या स्कूल में शस्त्र पूजा का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। यहां आस-पास से आए स्वयं सेवकों ने पूजा की और संस्कृति की रक्षा और प्रचार का संकल्प लिया।

दूसरी तरफ टाटीबंध में आयाेजित सभा में विजयादशमी उत्सव के मुख्य वक्ता डॉ पूर्णेंदु सक्सेना ने संघ की योजनाओं के बारे में बात की। डॉ सक्सेला मध्य क्षेत्र संघचालक हैं।रायपुर के अलग-अलग 14 इलाकों से निकला पथ संचलन।सबसे छोटे स्वयं सेवक ने खींचा ध्यान रायपुर में जब स्वयं सेवक कदम से कदम मिलाकर चल रहे थे तो सबसे छोटे स्वयं सेवक की ओर सबकी नजर गए।

देवेंद्र पटेल नाम के युवक के साथ पहुंचे इस बच्चे का नाम चित्रांश पटेल है। शस्त्र पूजा में तलवार के साथ दिखा पथ संजलन में भी पूरे जोश में घूमता नजर आया। अपने आस-पास बड़ों को देखकर वैसे एक्टिविटी कर रहा था। जो मैदान में दूसरे स्वयं सेवक कर रहे थे।सबसे छोटे स्वयं सेवक की शस्त्र पूजा।5 परिवर्तन लाने पर होगा काम डॉ सक्सेना ने स्वयं सेवकों को जिंदगी में 5 बदलाव लागू करने को कहा उन्होंने कहा कि संघ की स्थापना सन 1925 में हुई। अब संघ 100 साल में प्रवेश कर रहा है।

हमें सामाजिक जीवन में मुख्य बातों का पालन करना होगा और समाज में अन्य लोगों को भी बताना होगा।1 मन कर्म वचन से ऐसा कोई भी कार्य जिससे किसी को नुकसान हो न करना।2 प्रदूषण ना फैलाना।3 ⁠जरूरतमंद व्यक्तियों को सहयोग करना।

4 ⁠प्रशासन के नियमों का पालन करना जैसे यातायात नियम, कानून के नियम आदि।5 ⁠अपनी कार्यक्षेत्र की जिम्मेदारी का निष्ठापूर्वक निर्वहन करना, व्यक्तिगत एवम सामाजिक जीवन में भष्ट्राचरण का परित्याग करना आदि।सभा में बड़ी तादाद में पहुंचे स्वयं सेवक।स्वदेशी के इस्तेमाल पर जोर संघ के पदाधिकारियों ने कहा- हमें दैनिक जीवन में स्वदेशी सामग्री यानी स्थानीय वस्तुओं का उपयोग करना है।

स्वदेशी उद्यमिता यानी स्वदेशी चीजों के प्रोडक्शन से जुड़े कामों को बढ़ावा देना है। ये भी प्रयास करें कि पारिवारिक मूल्यों को बढ़ावा दिया जाए। हर मांगलिक कार्य में वृक्षारोपण करना। ⁠प्लास्टिक का उपयोग बंद करना, पर्यावरण के अनुकूल हों ऐसी गाड़ियों का इस्तेमाल करना।

जल सरंक्षण और भोजन की बर्बादी न हो इसे तय करना होगा।आसुरी शक्तियों का नाश करना जरूरी पुरानी बस्ती के कार्यक्रम में संघ के क्षेत्र प्रचार प्रमुख कैलाश ने अपने उद्बोधन में कहा- विदेशी आक्रमणकारी हम पर 750 सालों तक हावी रहे। भारत का इतिहास सत्य का है, भारतीय समाज जो ना किसी से डरता है ना किसी को डराता है , भारत के इतिहास का स्मरण कर विजयादशमी के दिन साम्राज्यवादी शक्तियों को ढहाने के लिए संघ की स्थापना की।

सच्चे अर्थों में सत्य सनातन हिंदू है। मैं हिंदू हूं, क्योंकि हिंदू किसी का भी अहित नहीं करता ।जो बात तुमको अपने लिए पसंद हो वही बात दूसरों से करनी चाहिए । हिंदू किसी भी लालच में नहीं फंसता। भारत की भव्यता को प्राप्त करने के लिए हमे अनेक आसुरी शक्तियों का नाश करना जरूरी है। संस्कार बचपन में ही दिया जाता है।

Share This Article