छ.ग.उच्च न्यायालय का आदेश, न्यायालय द्वारा तलाक नही लेने पर भी महिला भरण पोषण की हकदार

राजेन्द्र देवांगन
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छ.ग.उच्च न्यायालय का आदेश, न्यायालय द्वारा तलाक नही लेने पर भी महिला भरण पोषण की हकदार

बिलासपुर. याचिकाकर्ता तेरस बाई डोंगरे ने कुटुंब न्यायालय बिलासपुर के समक्ष भरण पोषण हेतु आवेदन प्रस्तुत किया जिसे कुटुंब न्यायालय ने इस आधार पर अस्वीकार कर दिया कि आवेदिका ने अपने पूर्व पति से न्यायालय द्वारा तलाक नहीं लिया है ,इसलिए वह वर्तमान प्रतिवादी की कानूनन ब्याहता पत्नी नहीं है, इसलिए वह अनावेदक से भरण पोषण पाने की हकदार नहीं है।

कुटुंब न्यायालय के आदेश के विरुद्ध क्रिमिनल रिवीजन माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के समक्ष अधिवक्ता सुनील कुमार सोनी के माध्यम से प्रस्तुत की गई , जिसमे इस तथ्य को बताया गया कि सूर्यवंशी जाति में छोड़ छुट्टी से भी मौखिक तलाक प्रचलन में है, ऐसे में इस आधार पर भरण पोषण से उसे वंचित नहीं रखा जा सकता कि आवेदिका ने अपने पूर्व पति से न्यायालय की डिक्री द्वारा तलाक नहीं लिया ।
माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की एकल पीठ जस्टिस सामंत ने कुटुम्ब न्यायालय के आदेश को अपास्त करते हुए याचिकाकर्ता को भरण पोषण की राशि पाने की हकदार बताया है ।

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