Tag: छत्तीसगढ़

  • इन पौधों से थर-थर कांपते हैं जहरीले सांप, घर के आसपास भी फटकने से डरेंगे, जानिए नाम कर देगा हैरान..!

    इन पौधों से थर-थर कांपते हैं जहरीले सांप, घर के आसपास भी फटकने से डरेंगे, जानिए नाम कर देगा हैरान..!

    इन पौधों से थर-थर कांपते हैं जहरीले सांप, घर के आसपास भी फटकने से डरेंगे, जानिए नाम कर देगा हैरान..!

    सांप चाहे जहरीले हो या नहीं, इन्हें देखने भर से ही कोई भी डर जाता है. सांप की कई प्रजातियां होती हैं. शायद ही दुनिया का कोई शख्स होगा जो सांप का सामना करना चाहेगा. लेकिन बरसात में भी ये बिन बुलाए मेहमान की तरह कहीं भी टपक जाते हैं.

    सांप को घर से दूर रखने के कई उपाय है. इसमें से एक है पौधों के जरिये सांप को दूर भगाना. जी हां, अगर आप चाहें तो घर में कुछ ऐसे पौधे लगा सकते हैं, जिससे सांप आपके घर के आसपास भी नहीं फटकेंगे.

    सांप को घर से दूर रखने के कई उपाय है. इसमें से एक है पौधों के जरिये सांप को दूर भगाना. जी हां, अगर आप चाहें तो घर में कुछ ऐसे पौधे लगा सकते हैं, जिससे सांप आपके घर के आसपास भी नहीं फटकेंगे.

    इसमें सबसे पहला नाम है सर्पगंधा का. इसके नाम में ही सर्प है. इसकी जड़ें पीली या भूरी होती हैं. साथ ही इसकी पत्तियां चमकीले हरे रंग की होती हैं. इसका साइंटिफिक नाम सवोल्फिया सर्पेतिना है. कहते हैं कि इस पौधे से इतनी गंदी गंध आती है कि सांप इसे सूंघते ही भाग जाते हैं.

    इसमें सबसे पहला नाम है सर्पगंधा का. इसके नाम में ही सर्प है. इसकी जड़ें पीली या भूरी होती हैं. साथ ही इसकी पत्तियां चमकीले हरे रंग की होती हैं. इसका साइंटिफिक नाम सवोल्फिया सर्पेतिना है. कहते हैं कि इस पौधे से इतनी गंदी गंध आती है कि सांप इसे सूंघते ही भाग जाते हैं.

    मगवॉर्ट का नाम आपने सुना होगा. इस पौधे से काफी तेज गंध आती है. ये होता काफी खतरनाक है. इससे इतनी गंध आती है कि सांप इससे बचते हैं. इस पौधे के रखरखाव में काफी मेहनत लागत है. इस वजह से घरों में ये काफी कम ही देखने को मिलते हैं.

    मगवॉर्ट का नाम आपने सुना होगा. इस पौधे से काफी तेज गंध आती है. ये होता काफी खतरनाक है. इससे इतनी गंध आती है कि सांप इससे बचते हैं. इस पौधे के रखरखाव में काफी मेहनत लागत है. इस वजह से घरों में ये काफी कम ही देखने को मिलते हैं.

    लिस्ट में तीसरा नाम है लहसुन. आप सोच रहे होंगे कि लहसुन खाने में इस्तेमाल होता है. लेकिन इसके पौधे भी काफी उपयोगी है. इसमें सल्फोनिक एसिड होता है. इसकी गंध काफी तेज होती है. सांप इसे पसंद नहीं करते. अगर इसका पौधा आप नहीं उगा सकते तो लहसुन की कलियों में नमक मिलाकर रख दें. इसके गंध से भी सांप घर में नहीं आते.

    लिस्ट में तीसरा नाम है लहसुन. आप सोच रहे होंगे कि लहसुन खाने में इस्तेमाल होता है. लेकिन इसके पौधे भी काफी उपयोगी है. इसमें सल्फोनिक एसिड होता है. इसकी गंध काफी तेज होती है. सांप इसे पसंद नहीं करते. अगर इसका पौधा आप नहीं उगा सकते तो लहसुन की कलियों में नमक मिलाकर रख दें. इसके गंध से भी सांप घर में नहीं आते.

  • आकाशवाणी से शिक्षक दिनेश पाण्डेय के कविताओं का प्रसारण आज रविवार सुबह 10:00 बजे से 10:30 बजे तक ज़रूर सुनें…

    आकाशवाणी से शिक्षक दिनेश पाण्डेय के कविताओं का प्रसारण आज रविवार सुबह 10:00 बजे से 10:30 बजे तक ज़रूर सुनें…

    आकाशवाणी से शिक्षक दिनेश पाण्डेय के कविताओं का प्रसारण आज रविवार सुब10 बजे से 10:30 बजे तक

    श्री दिनेश पांडेय _शिक्षक

    रतनपुर– नव वर्ष के अवसर पर आज 01 जनवरी रविवार को सुबह 10 बजे से शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला ओछिनापारा रतनपुर में पदस्थ शिक्षक दिनेश पाण्डेय के बाल कविताओं का प्रसारण आकाशवाणी बिलासपुर से “आओ बच्चों ” के कार्यक्रम में किया जायेगा। इसके पूर्व में भी इनके बाल कविताओं का प्रसारण आकाशवाणी से हुआ है और अपने विद्यालय के विद्यार्थियों के कार्यक्रम का प्रसारण भी करवाया है।आप शिक्षा के क्षेत्र व अपने विद्यालय के लिए समर्पित शिक्षक है। नवाचार, गतिविधियों ,योग, पौधरोपण व बाल कविता के लिए जाने जाते हैं।
    दिनेश पाण्डेय ने बताया बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए कार्य करने में मजा आता है। इनके कविताओं के प्रसारण होने पर बच्चों, शिक्षकों व नगरवासियों ने हर्ष व्यक्त किया है।

    ज़िला ब्यूरो प्रमुख हरीश माड़वा

  • आप यूथ विंग बिलासपुर विधानसभा बिलासपुर ने गणतंत्र दिवस पर ध्वजारोहण किया

    आप यूथ विंग बिलासपुर विधानसभा बिलासपुर ने गणतंत्र दिवस पर ध्वजारोहण किया

    आप यूथ विंग बिलासपुर विधानसभा बिलासपुर ने गणतंत्र दिवस पर ध्वजारोहण किया

    बिलासपुर, हरीश माड़वा-इस अवसर पर बच्चों ने भी गीत कविता भाषण प्रस्तुत किए, बच्चों को पुरस्कार भी दिया गया
    आज गणतंत्र दिवस के 73 वें वर्षगांठ पर आप यूथ विंग बिलासपुर विधानसभा बिलासपुर के 27 खोली उद्यान नगर श्री राम उद्यान में ध्वजारोहण कार्यक्रम कर गणतंत्र दिवस मनाया गया.
    ध्वजारोहण कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सलीम काजी आप बिलासपुर ज़िला अध्यक्ष, अध्यक्षता यूथ प्रदेश सह सचिव अनिलेश मिश्रा एवं विशिष्ट अतिथि सूर्यकांत जी यूथ प्रदेश उपाध्यक्ष , नीतू मिश्रा यूथ प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य, देवेन्द्र कुर्रे यूथ प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य उपस्थित हुए.
    ध्वजारोहण मुख्य अतिथि सलीम काजी आप बिलासपुर ज़िला अध्यक्ष ने किया ध्वजरोहण पश्चात सामूहिक राष्ट्रगान किया गया.
    इस अवसर पर कान्हा, शौर्य, नव्या, अदृषा ,समर, मीत सिंह, करुन्या एवं पीहू द्वारा मनमोहक गीत और भाषण प्रस्तुत किया गया.कालोनी निवासी श्रीमती नीतू मिश्रा, कमला देवी और प्रिया के द्वारा सामूहिक रूप से -“ऐ मेरे वतन के लोगों” गीत की प्रस्तुति दी गई.
    अतिथियों के द्वारा सभी प्रतिभागी बच्चो को पुरस्कृत भी किया गया.
    इस अवसर पर अतिथियों ने नीतू मिश्रा यूथ प्रदेश कार्यकारिणी सदस्यों ने कहा कि आज हमारी आज़ादी भ्रष्ट नेताओं एवं अधिकारियों के चलते ख़तरे में पड़ रही है, संविधान का भी पालन नहीं किया जा रहा है, एक साज़िश के तहत् बच्चों के भविष्य को बर्बाद करने के लिए स्कूल कालेज बन्द किए जा रहे हैं, जिसके विरुद्ध हम सभी को संवैधानिक रूप से एकजुट होकर आवाज़ बुलंद करने की ज़रूरत है.
    देवेन्द्र कुर्रे यूथ प्रदेश कार्यकारिणी सदस्यों ने कहा कि हमारे देश के लाखों लोगों ने अपनी शहादत देकर इस देश को आज़ादी एवं भारत का समता मूलक संविधान दिलाये हैं जिसकी रक्षा करना हम भारत वासियों का परम कर्त्तव्य है.

    कार्यक्रम में कालोनी की महिला पुरुष एवं बच्चे बड़ी संख्या में उपस्थित हुए.
    कार्यक्रम मे उपस्थित सदस्य आप बिलासपुर ज़िला अध्यक्ष सलीम काजी, यूथ प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत जी, यूथ प्रदेश सह सचिव अनिलेश मिश्रा, यूथ प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य नीतू मिश्रा, यूथ प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य देवेन्द्र कुर्रे, यूथ जिला सचिव आरिफ़ इक़बाल, नीरज शर्मा यूथ बिलासपुर विधानसभा अध्यक्ष, हुलस जायसवाल यूथ बिलासपुर विधानसभा उपाध्यक्ष, तुषार मदने यूथ बिलासपुर विधानसभा सह सचिव, अन्य सदस्य एवं पदाधिकारियों शामिल हुए.
    कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन आप यूथ प्रदेश सह सचिव अनिलेश मिश्रा ने किया.

  • चंदैनी गोंदा’ की मुख्य गायिका, छत्तीसगढ़ की सुप्रसिद्ध लोक गायिका माया खापर्डे दुनिया को कर गई,अलविदा…

    चंदैनी गोंदा’ की मुख्य गायिका, छत्तीसगढ़ की सुप्रसिद्ध लोक गायिका माया खापर्डे दुनिया को कर गई,अलविदा…


    चंदैनी गोंदा’ की मुख्य गायिका, छत्तीसगढ़ की सुप्रसिद्ध लोक गायिका माया खापर्डे दुनिया को कर गई,अलविदा
    राजनांदगांव(ब्यूरो)-छत्तीसगढ़ की सुप्रसिद्ध लोक सांस्कृतिक संस्था ‘चंदैनी गोंदा’ की मुख्य गायिका रही माया खापर्डे का आज दुर्ग में निधन हो गया। शहर के भरका पारा की रहने वाली 57 वर्षीय माया खापर्डे पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रही थी। सन् 80 के दशक में माया खापर्डे ने चंदैनी-गोंदा के मंच पर अपने सुमधुर स्वरों के जादू से लोगों को विमोहित किया था। सन् 90 के दशक में मिलीन्द साव व आत्माराम कोशा के साथ रायपुर आकाशवाणी के दल लोकरंजनी कार्यक्रम में ‘कावर तै मारे नैना वान’ जैसे सुप्रसिद्ध छत्तीसगढ़ी गीत से धूम मचाई थी वही गायक प्रकाश देवांगन के साथ मोर खेती खार रूमझुम जैसे लोकप्रिय गीत में अपने गले की समधुरता के रंग भरे थे। इसी दशक में आत्माराम कोशा और साथी वाले लोकरंजनी ग्रुप में माया ने तोला फूंदरा मंगाए व दरोगा, जैसे लोकप्रिय गाकर लोगों को झुमाया था वही सुप्रसिद्ध लोक गायक महादेव हिरवानी के साथ ‘डोंगा अरझगे मंझधार मे… गाकर मधुरता बिखेरी थी। माया खापर्डे अपने पीछे अपने पति सुभाष वैदे के सहित एक पुत्र व दो पुत्रियों वाला भरा-पूरा परिवार छोड़ गई है। छ.ग. की लोकप्रिय लोक गायिका माया खापर्डे के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए छत्तीसगढ़ी साहित्य समिति ने उन्हें भाव-पूरित शोक श्रद्धांजलि अर्पित की है। लोक गायक महादेव हिरवानी ने बताया कि लोक गायिका माया खापर्डे की अंतिम यात्रा उनके निवास स्थान सुभाष नगर दुर्ग से आज शनिवार को सुबह 10 बजे निकलेगी।

  • भाजपा और कांग्रेस को सिर्फ आप दे सकती है टक्कर:- अनिलेश मिश्रा

    भाजपा और कांग्रेस को सिर्फ आप दे सकती है टक्कर:- अनिलेश मिश्रा

    भाजपा और कांग्रेस को सिर्फ आप दे सकती है टक्कर:- अनिलेश मिश्रा

    छत्तीसगढ़/ बिलासपुर, हरीश माड़वा: चंडीगढ़ नगर निगम में आम आदमी पार्टी की शानदार जीत का जश्नन पार्टी कार्यकर्ताओं ने छत्तीसगढ़ में भी मनाया कार्यकर्ताओं ने मिठाई बांटी और ढोल नगाड़ों पर जमकर थिरके। आम आदमी पार्टी ने चंडीगढ़ नगर निगम में भाजपा के किले को ध्वस्त कर दिया पार्टी सबसे ज्यादा सीटें जीतकर पहले स्थान पर रही। भाजपा के बड़े बड़े महारथियों को आप के उम्मीदवार ने शिकस्त दी। पार्टी की शानदार शुरूआत पर कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुए आम आदमी पार्टी छत्तीसगढ़ प्रदेश के यूथ प्रदेश सह सचिव अनिलेश मिश्रा ने कहा कि जनता ने मन में क्या है उसकी ये सिर्फ झलकी है छत्तीसगढ़ प्रदेश में इसकी पुरी तस्वीरें दिखाई देंगी उन्होंने आगे कहा कि चुनाव के परिणाम ने एक बार फिर से साबित कर दिया कि भाजपा और कांग्रेस को सिर्फ आप ही टक्कर दे सकती है उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ चुनाव के परिणाम के आने के बाद भी हमने कहा कि कांग्रेस नहीं जीती बल्कि भाजपा हारी है जनता के पास जहां आम आदमी पार्टी का विकल्प आया है दोनो भाजपा और कांग्रेस मुंह की खाएंगी।

  • व्हील चेयर फेंसिंग वर्ल्ड कप 2021 में शानदार प्रदर्शन करने पर रोहिणी का कलेक्टर ने किया उत्साहवर्धन

    व्हील चेयर फेंसिंग वर्ल्ड कप 2021 में शानदार प्रदर्शन करने पर रोहिणी का कलेक्टर ने किया उत्साहवर्धन


    व्हील चेयर फेंसिंग वर्ल्ड कप 2021 में शानदार प्रदर्शन करने पर रोहिणी का कलेक्टर ने किया उत्साहवर्धन

    बिलासपुर 27 नवंबर 2021। ब्यूरो रिपोर्ट– विकासखंड बिल्हा के ग्राम खमतराई निवासी सुश्री रोहिणी साहू ने अपने बुलंद हौसले एवं अपनी प्रतिभा के चलते इटली के पीसा में आयोजित व्हील चेयर फेंसिंग वर्ल्ड कप 2021 में शानदार प्रदर्शन करते हुए व्यक्तिगत स्पर्धा में पांचवा स्थान प्राप्त किया है। अपने बुलंद हौसले के साथ कुछ कर गुजरने की तमन्ना से उन्होंने अपनी पहचान खुद बनाई है। कलेक्टर डॉ. सारांश मित्तर ने उन्हें शानदार उपलब्धि पर बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए उनका उत्साहवर्धन किया। सुश्री साहू ने आज कलेक्टोरेट कक्ष में कलेक्टर डॉ. मित्तर से सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर कलेक्टर ने कहा कि रोहिणी ने अपने खेल प्रदर्शन से बिलासपुर जिले को गौरान्वित किया है। उन्होंने रोहिणी को खेल किट के लिए सीएसआर मद से 5 लाख रूपए दिलाने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं।
    समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर सुश्री साहू साहू जन शिक्षण संस्थान में कम्प्यूटर ऑपरेटर के पद पर कार्यरत हैं। उनके परिवार में सात सदस्य है। उन्होंने इस प्रतियोगिता के लिए बहुत मेहनत की है, इसके लिए उन्होंने कोचिंग भी ली है।

  • धनतेरस क्यों और कैसे मनाया जाता है :- शेषाचार्य जी महाराज

    धनतेरस क्यों और कैसे मनाया जाता है :- शेषाचार्य जी महाराज

    धनतेरस क्यों और कैसे मनाया जाता है :- शेषाचार्य जी महाराज

    धनतेरस का नाम लेते ही दिमाग में सबसे पहला ख्याल आता है दीपावली का, इस त्यौहार को पुरे भारत वर्ष ही नहीं बल्कि दुनिया के अन्य कई हिस्सों में भी काफी धूमधाम से मनाया जाता है। धनतेरस को आम तौर पर 5 दिनों तक मनाई जाने वाली दीपावली के पहले दिन मनाया जाता है।

    धनतेरस क्या है?
    धनतेरस को अन्य दूसरे नाम धनत्रयोदसी के नाम से भी जाना जाता है। यही वह दिन है जिसके आते ही दिवाली का उत्सव शुरू हो जाता है। अगर बात की जाए धनतेरस के शाब्दिक अर्थ के बारे में तब आपको बता दें की “धन” का अर्थ होता है संपत्ति और दौलत और वहीं इसके अंतिम में जुड़े शब्द “तेरस” का संस्कृत में अर्थ होता है त्रयोदसी अर्थात हिन्दू केलिन्डर के अनुसार विक्रम संवत का तेरहवां दिन।

    धनतेरस क्यों मनाया जाता है?
    हिन्दू पैराणिक कथाओं के अनुसार धनतेरस को मनाने के पीछे कई सारे कारण और कहानियां है उनमे से कुछ कहानियां इस प्रकार हैं:

    सांप के रूप में यमराज की कहानी
    एक बार किसी राजा के पुत्र की की जन्म कुंडली देखी गयी, जिसमे यह लिखा था की उसके विवाह के पश्चात चौथे दिन ही सर्पदंश अर्थात सांप के काटने पर उसकी मृत्यु हो जाएगी। इस समस्या को सुलझाने के लिए राजा की पुत्र वधु ने सोने से पहले अपने सारे गहने और जेवर दरवाजे पर रख दिए जिसके पश्चात सर्प के र्रोप में आये हुए यमराज की आँखें सोने, अलंकार को देखकर चौंक गयी।

    केवल यही नहीं सांप घर के अंदर प्रवेश न कर सके इसके लिए राजा की पुत्र वधु ने पूरी रात मधुर आवाज में गाने गाये जिससे सांप का ध्यान भाटकक गया और वह काटना भूल गया और फिर वापस चला गया।

    समुद्र मंथन की कहानी
    हिन्दू पैराणिक कथाओं के अनुसार एक अन्य कहानी समुद्र मंथन से जुड़ी हुई है। ऐसी मान्यता है की कृष्ण पक्ष के त्रयोदशी के दिन जी समुद्र मंथन की गयी थी जिसके फलस्वरूप माता लक्ष्मी और भगवान् धन्वंतरि प्रकट हुए थे। जब ये दोनों प्रकट हुए थे, तब भगवान् धन्वंतरि के हाथों में कलश था जो अमृत से भरा हुआ था। वहीं माता लक्ष्मी के हाथों में कौड़ी थी। इसलिए ऐसी मान्यता है की धनतेरस के दिन नए बर्तन की खरीदारी को शुभ माना गया है।

    धनतेरस कब मनाया जाता है?
    धनतेरस को केवल हिन्दू ही नहीं बल्कि जैन धर्म को मानने वाले लोग भी मनाते हैं। प्रत्येक वर्ष धनतेरस पर्व को हिन्दू केलिन्डर के अनुसार कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष के त्रयोदसी अर्थात तेरहवें दिन काफी धूम-धाम से मनाया जाता है। यही वह दिन है जिसमे भगवान् धन्वन्तरि और माता लक्ष्मी समुद्र मंथन के दौरान प्रकट हुए थे।

    धनतेरस पर्व कैसे मनाते हैं?
    बाजार से किसी भी धातु की खरीदारी जैसे सोना, चांदी या फिर स्टील के बर्तन को भी खरीद कर आप इस पर्व को मना सकते हैं। अगर आप किसी धातु को खरीदने में सक्षम नहीं हैं जब आप एक झाड़ू की खरीदारी इस दिन अवश्य करें। वैसे बहुत सारे लोग इस दिन अन्य कई प्रकार के वस्तुओं की भी खरीदारी करते हैं जिसमे इलेक्ट्रॉनिक्स सामान मुख्य रूप से शामिल हैं। इस दिन बाजार की रौनक देखते ही बनती है।

    इसके साथ ही इस पर्व को मनाने के लिए धनतेरस के दिन सूर्य अस्त के बाद घर पर धन कुबेर की पूजा अर्चना करें और साथ ही घर पर डीप जलाएं और भगवान् पर फूल माला और प्रसाद इत्यादि अर्पित करें।

  • मां लक्ष्मी की कृपा बरसने का संकेत इनसे मिलता है :-शेषाचार्य जी महाराज

    मां लक्ष्मी की कृपा बरसने का संकेत इनसे मिलता है :-शेषाचार्य जी महाराज

    मां लक्ष्मी की कृपा बरसने का संकेत इनसे मिलता है :-शेषाचार्य जी महाराज

    हिंदुओं के प्रमुख त्यौहारों में से एक दिवाली का पर्व भी है। ये पांच दिवसीय पर्व मुख्य रूप से माता लक्ष्मी को समर्पित मना जाता है। हिंदुओं में माता लक्ष्मी को धन-धान्य की देवी माना जाता है।

    दीपावली के इस 5 दिवसीय पर्व में प्रमुख पर्व तीसरे दिन दिवाली का होता है। ऐसे में दिवाली को अत्यंत धूमधाम से मनाया जाता है। यह पर्व हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है।

    ऐसे में इस साल 2021 में यह दिवाली गुरुवार, 4 नवंबर को मनाई जाएगी। वहीं दीपावली का ये पांच दिवसीय पर्व 2 नवंबर से शुरु होकर 6 नवंबर तक चलेगा।

    दीपावली के इस पर्व पर हर कोई चाहता है कि देवी मां लक्ष्मी उनके घर आएं और वास करें। वहीं मान्यता के अनुसार माता लक्ष्मी को सफाई अत्यंत प्रिय है और वे उन्हीं जगहों पर वास करती हैं, जहां साफ़-सफाई होती है। ऐसे में दीपावली पर्व पर माता के आगमन की आशा में हर कोई अपने घरों में साफ सफाई करने में लग जाता है।

    ऐसे में माना जाता है कि इस सफाई के दौरान माता लक्ष्मी अपने भक्तों को अपनी कृपा के कुछ खास संकेत देती है। जिसके संबंध में कहा जाता है कि यदि घर की साफ-सफाई के दौरान आपको कुछ ऐसी खास चीजें अचानक मिल जाएं, जिन्हें आप भूल चुके हों, तो इसका अर्थ आप पर मां लक्ष्मी की कृपा बरसने से लगाया जाता है।

    जानें क्या मिलना होता है शुभ?
    1. पंडित शेषाचार्य जी के अनुसार इस समय घर की सफाई में कौड़ी या शंख का मिलना बेहद खास माना गया है, इनके मिलने पर इन्हें गंगाजल से स्नान कराकर धन वाले स्थान पर रख लेना चाहिए। माना जाता है कि इससे घर में सुख समृद्धि आती है।

    2. इस समय घर की सफाई करते समय यदि आपको अपने पर्स में या किसी कपड़े के जेब में रखे रुपए या पैसे मिल जाएं तो यह काफी ही शुभ माना जाता है। माना जाता है इस दौरान मिले पैसों को किसी धार्मिक कार्य में लगाने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और उनके आशीर्वाद से घर में हमेशा बरकत बनी रहती है।

    3. वहीं रसोई को साफ़ करते समय यदि आपको वह चावल मिल जाएं, जिन्हें आप पूरी तरह से भूल गए हैं। तो इसका अर्थ आपके बहुत ही भाग्यशाली होने से माना जाता है।

    4. घर की सफाई के दौरान मुरली या मोरपंख का मिलना बेहद शुभ माना गया है। कहा जाता है कि इन चीजों का संबंध भगवान विष्णु के श्री कृष्ण अवतार से है। ऐसे में इनके मिलने का अर्थ घर में मां लक्ष्मी का आशीर्वाद बना रहने से लगाया जाता है।

    5. इनके अतिरिक्त यदि घर की सफाई करते समय आपको कोई कोरा लाल कपड़ा मिल जाए तो इसे काफी खास माना जाता है। ऐसे में इस कपड़े के मिलने पर इसे संभालकर रख लेना चाहिए। माना जाता है कि यह लाल कपड़ा आपके आने वाले सुनहरे कल का संकेत देता है।

  • श्राद्ध से पितृ ही नहीं अपितु समस्त देवों से लेकर वनस्पतियां तक तृप्त होती हैं:- शेषाचार्य जी महाराज

    श्राद्ध से पितृ ही नहीं अपितु समस्त देवों से लेकर वनस्पतियां तक तृप्त होती हैं:- शेषाचार्य जी महाराज

    श्राद्ध से पितृ ही नहीं अपितु समस्त देवों से लेकर वनस्पतियां तक तृप्त होती हैं:- शेषाचार्य जी महाराज

    महाभारत के अनुशासन पर्व में उल्लेख मिलता है कि सर्वप्रथम श्राद्ध का उपदेश महर्षि निमि को महातपस्वी अत्रि मुनि ने दिया था। इस तरह पहले निमि ने श्राद्ध का आरंभ किया।

    समय के साथ इसे अन्य ऋषि-मुनियों ने अपनाया। और धीरे-धीरे यह चार वर्णों यानी ब्राह्मण, क्षत्रिए, वैश्य और शूद्र लोग भी श्राद्ध परंपरा का निर्वाहन करने लगे।

    तृप्त करने की क्रिया और देवताओं, ऋषियों या पितरों को तंडुल या तिल मिश्रित जल अर्पित करने की क्रिया को तर्पण कहते हैं। तर्पण करना ही पिंडदान करना है।

    हिन्दू धर्म में मान्यता है कि शरीर नष्ट हो जाने के बाद भी आत्मा अजर-अमर रहती है। वह अपने कार्यों के भोग भोगने के लिए नाना प्रकार की योनियों में विचरण करती है। शास्त्रों में मृत्योपरांत मनुष्य की अवस्था भेद से उसके कल्याण के लिए समय-समय पर किए जाने वाले कृत्यों का निरूपण हुआ है।

    सामान्यत: जीवन में पाप और पुण्य दोनों होते हैं। हिन्दू मान्यता के अनुसार पुण्य का फल स्वर्ग और पाप का फल नर्क होता है। नर्क में जीवात्मा को बहुत यातनाएं भोगनी पड़ती हैं। पुण्यात्मा मनुष्य योनि तथा देवयोनि को प्राप्त करती है।

    इन योनियों के बीच एक योनि और होती है वह है प्रेत योनि। वायु रूप में यह जीवात्मा मनुष्य का मन:शरीर है, जो अपने मोह या द्वेष के कारण इस पृथ्वी पर रहता है। पितृ योनि प्रेत योनि से ऊपर है तथा पितृलोक में रहती है।

    भाद्रपद की पूर्णिमा से आश्विन कृष्ण अमावस्या तक सोलह दिनों तक का समय सोलह श्राद्ध या श्राद्ध पक्ष कहलाता है। शास्त्रों में देवकार्यों से पूर्व पितृ कार्य करने का निर्देश दिया गया है। श्राद्ध से केवल पितृ ही तृप्त नहीं होते अपितु समस्त देवों से लेकर वनस्पतियां तक तृप्त होती हैं।

    श्राद्ध करने वाले का सांसारिक जीवन सुखमय बनता है तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है। ऐसी मान्यता है कि श्राद्ध न करने से पितृ क्षुधा से त्रस्त होकर अपने सगे-संबंधियों को कष्ट और शाप देते हैं। अपने कर्मों के अनुसार जीव अलग-अलग योनियों में भोग भोगते हैं, जहां मंत्रों द्वारा संकल्पित हव्य-कव्य को पितर प्राप्त कर लेते हैं।

    श्राद्ध की साधारणत: दो प्रक्रियाएं हैं-

    एक पिंडदान और दूसरी ब्राह्मण भोजन। ब्राह्मण के मुख से देवता हव्य को तथा पितर कव्य को खाते हैं। पितर स्मरण मात्र से ही श्राद्ध प्रदेश में आते हैं तथा भोजनादि प्राप्त कर तृप्त होते हैं।

    एकाधिक पुत्र हों और वे अलग-अलग रहते हो तो उन सभी को श्राद्ध करना चाहिए। ब्राह्मण भोजन के साथ पंचबलि कर्म भी होता है, जिसका विशेष महत्व है यूं तो एक आम मान्यता है कि जिस भी तिथि को किसी महिला या पुरुष का निधन हुआ हो उसी तिथि को संबंधित व्यक्ति का श्राद्ध किया जाता है, लेकिन आपकी जानकारी के लिए हम कुछ खास बातें यहां बता रहे हैं…

    सौभाग्यवती स्त्री का श्राद्ध नवमी के दिन किया जाता है।

    यदि कोई व्यक्ति संन्यासी है तो उसका श्राद्ध द्वादशी के दिन किया जाता है।

    शस्त्राघात या किसी अन्य दुर्घटना में मारे गए व्यक्ति का श्राद्ध चतुर्दशी के दिन किया जाता है।

    ।।ॐ अर्यमा न त्रिप्य्ताम इदं तिलोदकं तस्मै स्वधा नमः।…ॐ मृत्योर्मा अमृतं गमय।।

    पितरों में अर्यमा श्रेष्ठ है। अर्यमा पितरों के देव हैं। अर्यमा को प्रणाम। हे! पिता, पितामह, और प्रपितामह। हे! माता, मातामह और प्रमातामह आपको भी बारंबार प्रणाम। आप हमें मृत्यु से अमृत की ओर ले चलें।

    पितरों के लिए श्रद्धा से किए गए मुक्ति कर्म को श्राद्ध कहते हैं तथा तृप्त करने की क्रिया और देवताओं, ऋषियों या पितरों को तंडुल या तिल मिश्रित जल अर्पित करने की क्रिया को तर्पण कहते हैं। तर्पण करना ही पिंडदान करना है।

    ‘हे अग्नि! हमारे श्रेष्ठ सनातन यज्ञ को संपन्न करने वाले पितरों ने जैसे देहांत होने पर श्रेष्ठ ऐश्वर्य वाले स्वर्ग को प्राप्त किया है वैसे ही यज्ञों में इन ऋचाओं का पाठ करते हुए और समस्त साधनों से यज्ञ करते हुए हम भी उसी ऐश्वर्यवान स्वर्ग को प्राप्त करें।’- यजुर्वेद

    इन विशेष बातों का रखें ध्यान*

    – हवन के समय पितरों के निमित्त पिंड दान दिया जाता है। मान्यता है कि इसे ब्रह्मराक्षस भी दूषित नहीं कर सकते हैं। इसीलिए सर्वप्रथम पिता को, उनके बाद दादा को उसके बाद परदादा को पिंड देना चाहिए।

    – तर्पण करते समय पिता-पितामह आदि के नाम का स्पष्ट उच्चारण करें।

    – पहले अपने कुल के पितरों को जल से तृप्त करने के पश्चात मित्रों और संबंधियों को जलांजलि देनी चाहिए।

    श्राद्ध में है तीन पिंडों का विधान*

    पहला पिंड: जल में अर्पित करें। यह चंद्रमा को तृप्त करता है और चंद्रमा स्वयं देवता तथा पितरों को संतुष्ट करते हैं।

    दूसरा पिंड: गुरुजनों की आज्ञा से जो दूसरा पिंड पत्नी खाती है, उससे प्रसन्न होकर पितर संतान की कामना वाले पुरुष को संतान प्रदान करते हैं।

    तीसरा पिंड: यह अग्नि में डाला जाता है, उससे तृप्त होकर पितर मनुष्य की संपूर्ण कामनाएं पूर्ण करते हैं।

  • *सरकार ओबीसी की जातिगत जनगणना करें एवं संख्या के अनुपात में ओबीसी आरक्षण लागू करें

    *सरकार ओबीसी की जातिगत जनगणना करें एवं संख्या के अनुपात में ओबीसी आरक्षण लागू करें

    सरकार ओबीसी की जातिगत जनगणना करें एवं संख्या के अनुपात में ओबीसी आरक्षण लागू करें

    छत्तीसगढ़ में लंबित 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को शीघ्र लागू करे
    बालोद:- ओबीसी महासभा प्रदेश इकाई छत्तीसगढ़ के आह्वान पर सभी जिला , अनुभाग एवं तहसील मुख्यालयों में 4 बिंदु पर ज्ञापन सौंपा गया। प्रमुख मांगों पर प्रकाश डालते हुए प्रदेश अध्यक्ष ओबीसी राधेश्याम ने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा ओबीसी की जातिगत जनगणना कराए जाने हेतु जननगणना फार्म में ओबीसी का कालम जोड़ने का प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजते हुए ओबीसी महासभा की मांग से अवगत किया जाना, ओबीसी आरक्षण में लागू की गई असंवैधानिक क्रीमी लेयर की शर्तों को समाप्त किया जाए, मंडल आयोग द्वारा की गई 40 अनुशंसाओं को पूर्णतः लागू किया जाए एवं छत्तीसगढ़ में लंबित 27% ओबीसी आरक्षण को शीघ्र लागू किया जावे।उक्त ज्ञापन महामहिम राष्ट्रपति ,माननीय प्रधानमंत्री एवं माननीय मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन के नाम सभी जिला कलेक्टर/ एसडीएम /तहसीलदार के माध्यम से सौंपा गया ।उन्होंने कहा कि प्रदेश में लगातार प्रतिमाह ओबीसी महासभा द्वारा ज्ञापन सौंपा जा रहा है जिसमें प्रमुख रूप से जनगणना फॉर्मेट में ओबीसी का कॉलम बनवाने हेतु ओबीसी महासभा ने प्रतिबद्धता जारी की है ।सर्वविदित है कि संविधान में सामाजिक एवं शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़े हुए समुदायों को अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़े वर्ग के रूप में तीन वर्गों में रखा है ।जनगणना में इन तीनों वर्गों की दशाओं के आंकड़े एकत्रित किए जाने चाहिए ,लेकिन अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग की जनगणना तो होती है किंतु अन्य पिछड़ा वर्ग की जनगणना नहीं होती है क्योंकि जनगणना फॉर्म में ओबीसी वर्ग का पृथक से कॉलम नहीं होता है उन्होंने आगे बताया कि जनगणना का मकसद भारतीय समाज की विविधता से जुड़े तथ्यों को सामने लाना है ताकि देश को समझने का रास्ता खुल सके। इन आंकड़ों का इस्तेमाल नीतिनिर्माताओं से लेकर समाजशास्त्री, अर्थशास्त्री ,जनसंख्याविद और आँकडा़विज्ञानी करते हैं। जनगणना में तमाम जातियों के आंकड़े जुटाए जाएं तभी जनगणना का उद्देश्य पूरा होता है भारत में पहली बार जनगणना अट्ठारह सौ बहत्तर में हुई और 1881 के बाद से हर 10 साल पर जनगणना हो रही है ।भारत में 1931 तक हर जातियों की गिनती होती थी ।जनगणना की रिपोर्ट में हर जाति की संख्या और उनकी

    शैक्षणिक एवंआर्थिक हालत का ब्यौरा होता था। 1941 की जनगणना में भी जाति का कॉलम था ,लेकिन दूसरे विश्व युद्ध के जारी होने के कारण इस जनगणना का काम सुचारू रूप से नहीं हो पाया और आंकड़े नहीं आए इसलिए आज भी जाति के किसी आंकड़े की जरूरत होती है तो 1931 की जनगणना रिपोर्ट का ही हवाला दिया जाता है 1931 की जनगणना के आधार पर ही द्वितीय पिछड़ा वर्ग आयोग यानी मंडल कमीशन ने पिछड़ी जातियों की आबादी 52% बताई थी और उसके आरक्षण की सिफारिश की थी संविधान के अनुच्छेद 340 के परिपालन में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए गठित आयोगों( काका कालेलकर आयोग मंडल आयोग एवं मध्य प्रदेश राम जी महाजन आयोग) द्वारा अन्य पिछडे वर्ग की जनगणना कराए जाने बाबत अनुशंसाए की गई है। तदनुसार इस हेतु संसद में बनी सहमति के आधार पर जनगणना 2011 में पृथक से अन्य पिछड़ा वर्ग के आंकड़े एकत्र करने का प्रयास किए गए ,किंतु आंकड़े जारी नहीं किए गए ।ओबीसी महासभा लंबे समय से प्रतिमाह ज्ञापन देकर जनगणना 2021 के फॉर्मेट में ओबीसी का कालम बनवाने शासन प्रशासन से निवेदन किया जाता रहा है लेकिन पूर्व की भांति इस बार भी जनगणना फॉर्मेट में अन्य पिछड़ा वर्ग का कॉलम नहीं है फल स्वरूप ओबीसी वर्ग की जनसंख्या तथा उसकी परिस्थितियों का आकलन नहीं हो पाएगा जिससे ओबीसी वर्ग के विकास करने की संवैधानिक मनसा फिर अपूर्ण रह जाएगी।
    जनगणना 2021 के फॉर्मेट में कॉलम 13 में ओबीसी के लिए कोड नंबर 3 और सामान्य के लिए कोड नंबर 4 लिखें जाने का विकल्प बनवाने हेतु प्रस्ताव को पारित करवाकर केंद्र सरकार को पहुंचाने ओबीसी महासभा द्वारा चरणबद्ध ढंग से समय-समय पर ज्ञापन सौंपा गया है ।उन्होंने आगे बताया कि ओबीसी महासभा की जायज संवैधानिक मांग पर ओबीसी महासभा को आश्वस्त करें कि जनगणना फॉर्मेट के कॉलम नंबर 13 में ओबीसी का कोड नंबर 3 रहेगा या नहीं। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो ओबीसी समाज के सामने जनगणना 2021 का बहिष्कार करने के अलावा अन्य विकल्प नहीं होगा, जिसकी संपूर्ण जवाबदारी शासन प्रशासन की होगी ।उन्होंने आगे प्रदेश भर में यह संकल्प भी दोहराया की हम विभिन्न चरणों में लोकतांत्रिक गतिविधियों से उक्तार्थ अंत तक प्रयास करते रहेंगे । उक्त ज्ञापन के अवसर पर प्रमुख रूप से ओबीसी महासभा के प्रदेश अध्यक्ष ओबीसी राधेश्याम ,जिला संयोजक चतुर्भुज साहू ,टी एल सिन्हा, वैदनाथ पटेल ,सी एल साहू ,चंद्र कुमार साहू राकेश देवांगन, रवि यादव ,टोमिन देवांगन, द्रोपदी सोनसार्वा, राधा साहू प्रदीप कुमार, जितेंद्र कुमार निषाद ,बुध लाल साहू ,नेपाल साहू राहुल ,पीएल साहू, देवेंद्र कुमार, त्रिवेणी साहू ,लक्ष्मी, रमन ,राजू साहू एवं बड़ी संख्या में ओबीसी महासभा के पदाधिकारी सम्मिलित हुए साथ ही बालोद जिले के डौंडीलोहारा अनुविभागीय अधिकारी को प्रदेश कोषाध्यक्ष महावीर कलिहारी एवं पुनेश्वर देवांगन के नेतृत्व में ज्ञापन सौंपा गया एवं देवरी उप तहसील में महिला मोर्चा के जिलाध्यक्ष खिलेश्वरी साहू के नेतृत्व में ज्ञापन सौंपा गया जिसमें प्रमुख रुप से पोषण लाल देवांगन सरपंच संघ ब्लॉक अध्यक्ष डौंडीलोहारा, पसौद ग्रामीण इकाई अध्यक्ष महिला मोर्चा कलीन चौधरी एवं अधिक संख्या में ओबीसी समाज के लोग शामिल हुए हैं ।इस प्रकार प्रदेश एवं संभाग ,जिला तहसील एवं ग्रामीण इकाई के पदाधिकारियों ने प्रदेश के अलग-अलग जिलों अनुभाग एवं तहसील मुख्यालय में ज्ञापन सौंपा