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  • सीएम हिमंत बिस्व सरमा बोले- चुनाव बाद असम में बहु विवाह पर लगेगा प्रतिबंध, UCC भी करेंगे लागू..!

    सीएम हिमंत बिस्व सरमा बोले- चुनाव बाद असम में बहु विवाह पर लगेगा प्रतिबंध, UCC भी करेंगे लागू..!

    सीएम हिमंत बिस्व सरमा बोले- चुनाव बाद असम में बहु विवाह पर लगेगा प्रतिबंध, UCC भी करेंगे लागू..!
    असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा…कद्दावर नेता…बेबाक बोल…राष्ट्रवाद पर बेहद मुखर…बयानों में स्पष्टवादिता…जिसे लेकर अक्सर ही चर्चा में रहते हैं। हिमंत दो टूक कहते हैं, चुनाव के बाद असम में न सिर्फ बहुविवाह प्रथा पर प्रतिबंध लगाएंगे, बल्कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) भी लागू करेंगे। वे साफ कहते हैं कि मदरसा शिक्षा से मुसलमानों का भला नहीं होगा। मुस्लिम बेटे-बेटियों को डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर, वैज्ञानिक बनाने की राह दिखानी होगी। उनकी तरक्की के सारे रास्ते बंद हो जाएं, ऐसी शिक्षा नहीं चाहिए। ध्रुवीकरण पर कहा, सामने वाला ऐसा करता है, तो हमें भी करना पड़ता है। मुस्लिमों से वोट नहीं मांगने के सवाल पर बोले- किससे वोट मांगना है…किससे नहीं…यह मेरा अधिकार है। मैं जब जानता हूं कि एक विशेष वर्ग वोट नहीं देगा, तो वहां जाकर वक्त बर्बाद क्यों करना। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने असम की राजधानी दिसपुर में अपने आवास पर डॉ. इन्दुशेखर पंचोली से बातचीत के दौरान हर मुद्दे पर खुलकर अपनी बात रखी…
    पीएम मोदी के 400 पार में पूर्वोत्तर राज्य कितना योगदान दे पाएंगे?
    पूर्वोत्तर में 25 सीटे हैं। मेरा मानना है कि 22 सीटें एनडीए के पास आएंगी। इसमें से 15-16 भाजपा को मिलेंगी, बाकी गठबंधन को मिलेंगी।
    आप लंबे समय तक कांग्रेस में रहे, अब भाजपा में हैं? दोनों में किस तरह का अंतर देखते हैं?
    देखिए, जब हम छात्र राजनीति से मुख्य धारा की राजनीति में आए, तो उस समय कांग्रेस ही ऐसी पार्टी थी, जिसका असम में पूरा कब्जा था। कई राज्यों में सरकारें थीं। हम 2001 से 2014 तक असम सरकार में मंत्री रहे। 2014 में मोदीजी सत्ता में आए, तो कई लोगों को लगा कि जो हम लोग कर रहे हैं, वह रूटीन है। उससे देश में बदलाव नहीं आएगा। अगर देश में तरक्की चाहिए, नया काम चाहिए, तो बदलाव लाने वाला व्यक्ति चाहिए। जिसमें निर्णय लेने की क्षमता हो, जिस व्यक्ति के पास नई दिशा हो, उसके साथ मिलकर काम करना होगा। पूर्वोत्तर भारत पर पीएम मोदी का काफी ध्यान रहा है। हम भाजपा में आए, सरकार बनाई। राज्य में दो-दो बार सरकार बनाई, लोकसभा के दो चुनावों में हमारा अच्छा परिणाम रहा।
    अगर असम को देखें तो राज्य तरक्की के रास्ते पर निकल पड़ा है। 2014 के बाद यात्रा बहुत ही सफल रही है। तमाम अलगाववादी संगठनों ने हथियार डाले, चारों ओर विकास की गंगा बहने लगी। इससे हम बहुत ही संतुष्ट हैं। असम में हम वह करने में कामयाब रहे, जो जीवन में कभी सोचा भी नहीं था…इतनी शांति हो सकेगी, युवावस्था में भी नहीं सोचा था।
    मेरे लिए असम में ध्रुवीकरण जरूरी है। इसलिए नहीं कि सत्ता में रहें, बल्कि हमारे असम में मूल निवासी राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक क्षेत्र में बने रहें। हमारा अस्तित्व खतरे में न पड़े। इसके लिए, कभी-कभी हम लोगों को इस तरह के मामले उठाने पड़ते हैं। यह हमारी मजबूरी है। जब एक राज्य में 36 प्रतिशत लोग पलायन करके आते हैं और धीरे-धीरे आप अपने देश में ही अल्पसंख्यक बन जाते हैं। सामने वाला भी ध्रुवीकरण करता है, तो हमें भी ध्रुवीकरण करना पड़ता है।
    आपने चुनाव के बाद यूसीसी लागू करने की घोषणा की है?
    वो तो तैयार है, हम चुनाव के बाद बहुविवाह प्रथा पर प्रतिबंध लगाएंगे। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) भी लेकर आएंगे। थोड़ा उत्तराखंड का असर देख रहे हैं। केंद्रीय नेतृत्व से हरी झंडी लेनी है। मुझे लगता है 2026 में वो हो जाना चाहिए।
    आप मदरसों को बंद करना चाह रहे हैं?
    सरकारी मदरसे तो बंद कर दिए। यह भी तलाश रहे हैं कि कानून के रास्ते से कैसे प्राइवेट मदरसे भी बंद किए जा सकते हैं। मैं नहीं मानता हूं कि मुसलमान का भला मदरसा शिक्षा से होगा। मुसलमान बेटों और बेटियों को आप सार्वजनिक शिक्षा से जोड़ें। उन्हें डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर, वैज्ञानिक बनने की राह दिखाइए। अगर किसी को धार्मिक शिक्षा लेनी है, तो वह घर में ले सकता है, अपने समुदाय में ले सकता है। मुसलमान बच्चों की शिक्षा-दीक्षा बचपन से ही एक अलग रास्ते पर चली जाए और उनके सारे रास्ते बंद हो जाएं, ऐसी शिक्षा नहीं चाहिए।
    मैं तो हमेशा कहता हूं कि जो वर्ग आपको वोट नहीं देता है, आपको वहां जाकर समय नष्ट नहीं करना चाहिए। धीरे-धीरे विकास कीजिए। तब एक समय आएगा, वे लोग खुद वोट देंगे। मैं किसी से जबरदस्ती तो नहीं कर सकता। मैं जब जानता हूं कि एक विशेष वर्ग वोट नहीं देगा, तो वहां जाने से मेरा एक दिन का कीमती वक्त बर्बाद ही होगा। ऐसे बहुत से हिंदू इलाके भी हैं, जो मुझे वोट नहीं देंगे, मैं वहां भी नहीं जाता हूं। बेवजह हल्ला होगा, दोनों ग्रुप में मारपीट की नौबत आ जाएगी। जो हमें वोट देते हैं, उनका सम्मान करना है, जो हमें वोट नहीं देते, उनका भी सम्मान करना है।
    2021 में मैंने बोला कि अभी वे लोग हमें वोट नहीं देंगे। लेकिन, तीन साल में हमने काफी काम किया है, मुसलमान बेटियों और माताओं के बीच। उम्मीद है कि मैं मांगू या नहीं मांगू, 10 प्रतिशत वोट हमें मिलेंगे।
    राहुल आरोप लगाते हैं तो बताते क्यों नहीं…मैंने कौन सा भ्रष्टाचार किया भ्रष्टाचार पर विपक्ष आपको निशाने पर लेता रहता है। राहुल गांधी से लेकर केजरीवाल तक आरोप लगाते हैं कि आप भाजपा में इसीलिए शामिल
    मैं कोशिश करता हूं जानने की, कि मेरे ऊपर क्या आरोप हैं, कोई बता ही नहीं रहा। सिर्फ बोलते रहते हैं कि आरोप है। कोई बताए तो सही, कि मेरे ऊपर क्या आरोप हैं? असम के लोग जानते हैं कि तरुण गोगोई के साथ मेरा विवाद हुआ, राहुल गांधी के साथ मेरा विवाद हुआ। पूरी तरह से राजनीतिक कारणों से मैं कांग्रेस को छोड़कर भाजपा में आया। राहुल गांधी बोलते हैं कि मैंने भ्रष्टाचार किया, इसलिए भाजपा-में आया। मैं राहुल जी से पूछना चाहता हूं कि आपकी पार्टी में रहते हुए मैंने कौन सा करप्शन किया? कोई आरोप तो बताता नहीं।
    राहुल गांधी आप के निशाने पर हमेशा रहते हैं?
    ऐसा नहीं है। मैं राहुल के निशाने पर रहता हूं। जब से मैं कांग्रेस में हूं तब से। तो मुझे थोड़ा रक्षात्मक रवैया अपनाना पड़ता है।
    दो लोकसभा चुनाव में भाजपा ने पूर्वोत्तर में बेहतर प्रदर्शन किया। दोबारा विधानसभा चुनाव भी जीते। आगे पूर्वोत्तर में क्या भविष्य देखते हैं?
    अब भी पूर्वोत्तर में हम कमजोर हैं। मिजोरम, नगालैंड, मेघालय में हम बहुत कमजोर हैं, लेकिन सरकार में हैं। वहां हम काफी अच्छा कर सकते हैं। असम में 35% जनता मुस्लिम है। बिना तुष्टीकरण किए, न्यायसंगत तरीके से हमें इनके बीच जाना होगा। हमें मुसलमानों के बीच से ही एक राष्ट्रवादी मूवमेंट खड़ा करना होगा। जैसे-मदरसा नहीं, सामान्य शिक्षा, बहुविवाह नहीं, एक विवाह प्रथा हो, 16 साल से नीचे विवाह न करके शिक्षा दी जाए।
    आपके काम के तरीके की लोगों के बीच खूब चर्चा है। क्या इसकी प्रेरणा पीएम मोदी से मिली है?
    मोदीजी ने भाजपा के सभी सीएम के मन में प्रतिस्पर्धा की भावना ला दी है। छह-छह महीने में हमारी परीक्षा भी ली जाती है, सभी को एकसाथ बैठाकर। न वह सोते हैं, न हमें सोने देते हैं। जब हर छह महीने में टेस्ट होगा, तो तैयारी करनी ही होगी।
    कांग्रेस का घोषणापत्र भारत नहीं पाकिस्तान के लिए बनाया गया…
    आप कांग्रेस में काफी समय तक रहे, आज भाजपा में हैं। दोनों में मूल अंतर क्या है?
    एक परिवारवादी पार्टी है, दूसरी लोकतांत्रिक पार्टी है। जो हमारी देश पहले की नीति है, वैसी कांग्रेस की नीति नहीं रही। आप कांग्रेस के घोषणापत्र को देखें, वह भारत के चुनाव के लिए बनाया है, या पाकिस्तान के लिए बनाया है, कोई फर्क ही नहीं नजर आएगा। अपराधी के लिए बनाया है या नागरिकों के लिए बनाया है, फर्क ही नहीं है। इसलिए कांग्रेस और भाजपा के बीच कोई तुलना ही नहीं है।
    क्या कांग्रेस के घोषणापत्र से असम में कोई लाभ होगा?
    मैंने ठीक से कांग्रेस का घोषणापत्र पढ़ा भी नहीं है। असम में कांग्रेस की ज्यादा चर्चा भी नहीं है। जो मैंने पढ़ा, उससे लगा कि यह पाकिस्तान में ज्यादा चलेगा।
    बयानबाजी को लेकर कांग्रेस ने चुनाव आयोग में शिकायत की है?
    ये तो मूल अधिकार है, घोषणापत्र पढ़कर जो लगा, वही बोलना पड़ेगा। अगर कोई किताब पढ़कर उसकी समीक्षा मांगे, तो हमें ईमानदारी से देनी होगी।
    “असम में एक वर्ग है, जो सीएए का विरोध करता है। हम उनकी भी विचारधारा का सम्मान करते हैं, लेकिन आप आंदोलन न कीजिए। कोर्ट से जो भी हल है, ले आइए। हमें कोई आपत्ति नहीं है। हम लोगों को समझाने में कामयाब हुए। कुछ लोग अब भी विरोध में हैं, लेकिन उन्होंने आंदोलन नहीं, कोर्ट का रास्ता चुना।”
    असम पहले राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को लेकर विवाद में रहा, फिर सीएए को लेकर। इस बार सीएए का वैसा विरोध नहीं दिखता। कैसे हुआ यह?
    सीएए आंदोलन की पृष्ठभूमि में ही, मैं सीएम बना। पिछले तीन साल में मैंने काफी संवाद किया। जिस दिन मैं मुख्यमंत्री बना, तो दिमाग में यही था कि जब नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) लागू होगा, तो बवाल होगा, उसे रोकना है। जिन लोगों ने पहले विरोध किया, उन्हें हमने राजी किया कि सीएए में ऐसा कुछ भी नहीं है, जो हमें खतरे में डालेगा। कहा, देखो संसद में कानून पास हुआ है, अगर कानून को निरस्त भी कराना है, तो कोर्ट ही निरस्त कर सकता है। आप कोर्ट जाइए, हम सीएए के पक्ष में अपनी बात रखेंगे, आप विरोध में रखिए। कोर्ट निर्णय करेगा, लेकिन असम को दोबारा संघर्ष के रास्ते पर ले जाने का कष्ट न करें। लोग समझ गए। कोई कोर्ट चला गया, तो कोई सीएए के पक्ष में आ गया।
    मेघालय सीएए से अलग है, लेकिन एक वर्ग है, जो फिर भी इसका विरोध कर रहा है। उनसे कोई बातचीत हो रही है?
    मेघालय के साथ बाकी राज्यों में जो थोड़ी बहुत असंतुष्टि है, इसे लेकर राज्य सरकारें बात कर रही हैं। केंद्र सरकार का भी उनके साथ बातचीत का रास्ता है। इसीलिए पूरे नार्थ-ईस्ट में कोई आंदोलन नहीं हुआ। हां, कुछ विरोध है।
    विपक्ष का आरोप है, परिसीमन का लाभ भाजपा को मिल रहा है? गौरव गोगोई को अपनी सीट छोड़नी पड़ी।
    देखिए…मैं व्यक्ति के ऊपर कोई चर्चा नहीं करता। परिसीमन चुनाव आयोग ने किया है। कांग्रेस ने कोई दूसरा प्रस्ताव आयोग को नहीं दिया। कुछ छोटे-मोटे सुधार बताए थे, वह आयोग ने काफी हद तक मान भी लिए। इसलिए परिसीमन को लेकर कोई असंतोष जैसा नहीं दिखा। किसी को अपनी सीट बदलनी है, या नहीं बदलनी है, उनकी पार्टी का निर्णय होता है।

  • असम में किसी मतलब का नहीं है CAA, ऐसा क्यों बोल पड़े CM हिमंत बिस्वा सरमा..!

    असम में किसी मतलब का नहीं है CAA, ऐसा क्यों बोल पड़े CM हिमंत बिस्वा सरमा..!

    असम में CAA पूरी तरह निरर्थक, सीएम हिमंता बिस्वा सरमा बोले- नागरिकता के लिए होगा सबसे कम आवेदन..!
    असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए) असम में पूरी तरह निरर्थक है और राज्य से भारत की नागरिकता के लिए ‘‘सबसे कम संख्या में आवेदन’’ आएंगे। गृह मंत्रालय ने मंगलवार को नागरिकता (संशोधन) अधिनियम 2019 के तहत भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने के पात्र लोगों के वास्ते एक पोर्टल लॉन्च किया था। सरमा ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘सीएए असम में पूरी तरह निरर्थक है और पोर्टल में राज्य से सबसे कम संख्या में आवेदन होंगे।’’

    क्या बोले हिमंता बिस्वा सरमा
    सरमा ने कहा कि अधिनियम बेहद स्पष्ट है कि नागरिकता के लिए आवेदन तभी दिया जा सकता है जब कोई 31 दिसंबर 2014 से पहले देश में आया हो और असम में राष्ट्रीय नागरिक पंजी के अद्यतन होने के बाद जिन लोगों को इसमें अपने नाम नहीं मिले हैं और जिन्होंने आवेदन किया था। ‘‘केवल ऐसे लोग ही सीएए के लिए आवेदन देंगे।’’ मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) असम में 14 लोकसभा सीट में से 13 पर जीत हासिल करेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तीसरी बार सत्ता में आएंगे।

    सीएए पर अमित शाह क्या बोले?
    बता दें कि केंद्र सरकार द्वारा नागरिकता संशोधन कानून यानी सीएए को लागू कर दिया गया है। इस बाबत केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने न्यूज एजेंसी से बात करते हुए कहा कि सीएए कानून को कभी भी वापस नहीं लिया जाएगा. हमारे देश में भारतीय नागरिकता सुनिश्चित करना हमारा संप्रभु अधिकार है। हम इसपर कभी भी समझौता नहीं करेंगे। सीएए के नोटिफिकेशन को लेकर उन्होंने ममता बनर्जी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वह दिन दूर नहीं जब भाजपा बंगाल के सत्ता में आएगी और घुसपैठ को रोकेगी। अगर आप इस तरह की राजनीति करते हैं राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय पर और तुष्टीकरण की राजनीति करके घुसपैठ करने की अनुमति देते हैं तो हम इसका विरोध करते हैं।

  • असम विधानसभा ने संकल्प पर पहली बार मतपत्र के जरिये कराया मतदान, जानिए क्या रहा नतीजा..!

    असम विधानसभा ने संकल्प पर पहली बार मतपत्र के जरिये कराया मतदान”पढ़ें पूरी खबर…!

    असम विधानसभा में बजट सत्र चल रहा है. विधानसभा में  सिंचाई से जुड़े एक गैर सरकारी संकल्प को लेकर नाटकीय माहौल बन गया. यह प्रस्ताव निर्दलीय विधायक और रायजोर दल के अध्यक्ष अखिल गोगोई ने रखा था. जब अखिल गोगोई ने असम विधान सभा आचरण और व्यवसाय अधिनियम के नियम 115 के तहत प्रस्ताव उठाया तो सभी विपक्षी विधायक सदन में मौजूद थे. लेकिन सत्ता पक्ष के अधिकांश विधायक अस्थायी जलपान के लिए सदन से बाहर थे. जैसे ही विपक्षी विधायकों ने प्रस्ताव का समर्थन किया, उन्होंने इसे वोट से पारित करने की मांग की.

    असम विधानसभा ने अपने इतिहास में पहली बार एक संकल्प पर मतपत्र के जरिये मतदान कराया गया. निर्दलीय विधायक अखिल गोगोई की ओर से लाए गए निजी संकल्प को लेकर यह मतदान कराया गया. हालांकि, सिंचाई व्यवस्था से संबंधित यह प्रस्ताव नौ वोट के अंतर से खारिज हो गया. भाजपा नीत गठबंधन के 77 विधायकों में से 39 वोट सरकार को मिले. दूसरी ओर, 47 विपक्षी विधायकों में से 30 ने संकल्प के पक्ष में वोट दिया जिसमें कांग्रेस के पांच विधायक शामिल हैं.

    इससे पहले, संकल्प को ध्वनिमत के लिए रखा गया और विधानसभा अध्यक्ष विश्वजीत दैमारी ने कहा कि संकल्प खारिज हो गया है. हालांकि, गोगोई और नेता विपक्ष देबब्रत सैकिया सहित अन्य विपक्षी सदस्यों ने दावा किया कि सत्तारूढ़ दल के पास ध्वनिमत के दौरान पर्याप्त संख्या नहीं थी. उन्होंने उचित मतदान की मांग की. इसके बाद, अध्यक्ष ने यह कहते हुए सदन को 10 मिनट के लिए स्थगित कर दिया कि मतदान होगा और विधानसभा सचिवालय को प्रस्ताव पर मतदान की तैयारी के लिए समय की आवश्यकता होगी.

    सदन 30 मिनट बाद फिर से शुरू हुआ. इस आधे घंटे के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक दिगंता कलिता एक कागज पर सत्ता पक्ष के सदस्यों की गिनती करते दिखे. गोगोई भी लगभग हर सदस्य के पास हाथ जोड़कर जाते दिखे. जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, अध्यक्ष ने सत्ता पक्ष के सदस्यों की अधिक संख्या के साथ एक बार फिर ध्वनिमत से मतदान कराया और प्रस्ताव के खारिज होने की घोषणा की. लेकिन पूरे विपक्ष ने इसका विरोध किया और कहा कि दैमारी ने पहले ही मतदान की घोषणा कर दी थी. निर्णय में बदलाव नहीं किया जाना चाहिए.

    इसके बाद, विधानसभा अध्यक्ष ने उनकी मांग स्वीकार कर ली. उन्होंने सदन के दरवाजे बंद करने का आदेश दिया और विधानसभा के प्रधान सचिव हेमेन दास को मतदान कराने के लिए कहा. इसके बाद दास ने विधायकों को मतदान की प्रक्रिया समझाई. तदनुसार, सदन के कर्मियों ने प्रत्येक सदस्य को मतपत्र वितरित किए, जिन्होंने अपनी पसंद पर निशान लगाया और उसे मतपेटी में डाल दिया. कांग्रेस विधायक दल के उपनेता रकीबुल हुसैन ने अध्यक्ष से अपील की कि दलबदल रोधी कानून के मुताबिक दलों के मुख्य सचेतकों को अपने विधायकों के वोट देखने की इजाजत दी जाए.

    इसके तुरंत बाद, कांग्रेस विधायक कमलाख्या डे पुरकायस्थ और बसंत दास, जिन्होंने हाल में पार्टी छोड़े बिना ‘सरकार का समर्थन’ करने की घोषणा की थी, मतदान के दौरान चुपचाप सदन से बाहर चले गए. प्रधान सचिव और उनके सहयोगियों ने सदन के अंदर मतों की गिनती की और परिणाम अध्यक्ष को सौंपा.

    दैमारी ने कहा कि परिणाम के अनुसार, संकल्प के पक्ष में 30 और विरोध में 39 मत मिले हैं, इसलिए यह खारिज हुआ. प्रस्ताव में हर समय खेतों में पानी की आपूर्ति करके असम को 12 महीने की खेती वाला राज्य बनाने की मांग की गई थी. असम विधानसभा के तीन सेवानिवृत्त प्रधान सचिवों ने बताया कि अब तक ऐसी कोई नौबत नहीं आई थी जब सरकारी या किसी निजी संकल्प को स्वीकार करने या अस्वीकार करने का निर्णय लेने के लिए मतपत्र के जरिये मतदान कराया गया हो.

    आधिकारिक तौर पर 126 सदस्यीय असम विधानसभा में भाजपा विधायकों की संख्या 61 है, जबकि उसकी सहयोगी यूपीपीएल के सात और अगप के नौ विधायक हैं. विपक्षी खेमे में कांग्रेस के पास 27, एआईयूडीएफ के 15, बीपीएफ के तीन और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) का एक विधायक है. सदन में एक निर्दलीय विधायक भी हैं.

    यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यदि अध्यक्ष ने आज सदन को दस मिनट के लिए स्थगित नहीं किया होता और तत्काल मतदान की व्यवस्था नहीं की होती, तो सरकार वोट हार सकती थी. लेकिन यह बात किसी को समझ नहीं आ रही है कि स्पीकर बिस्वजीत दैमारी ने सरकार बचाने के लिए सदन की कार्यवाही दस मिनट के लिए स्थगित कर दी.

    हालांकि, यदि यह प्रस्ताव आज पारित हो जाता तो असम के संसदीय इतिहास में यह एक अभूतपूर्व घटना होती. विधायक अखिल गोगोई ने कहा कि आज के दिन विपक्ष ने एकजुट होकर काम किया है. विपक्ष का एक भी वोट नहीं गया. यह पहली बार है, जब विपक्ष को इतने वोट मिले हैं.

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  • यूसीसी और बहुविवाह बिल पर ये बोले असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा..!

    यूसीसी और बहुविवाह बिल पर ये बोले असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा..!

    यूसीसी और बहुविवाह बिल पर ये बोले असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा..!
    गुवाहाटी: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार को गुवाहाटी में यूसीसी और बहुविवाह के बिल पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि ‘असम बहुविवाह पर काम कर रहा था और UCC एक नई चीज़ बन गई. यूसीसी केवल बहुविवाह पर प्रतिबंध लगा रही है, इसे एक नागरिक अपराध बना रही है, लेकिन हम बहुविवाह को एक आपराधिक अपराध बनाने के बारे में सोच रहे थे, इसलिए देश को एक समान नीति की आवश्यकता है, इसलिए हम इसे संरेखित करने जा रहे हैं. जिसके लिए मैं अपने केंद्रीय नेतृत्व से एक दौर की चर्चा करूंगा कि हमें किस दिशा में जाना चाहिए. ये दीर्घकालिक सुधार हैं, इसलिए हम कोई शॉर्टकट नहीं अपना रहे हैं.’

    उन्होंने कहा कि ‘मेरी विशेषज्ञ समिति फिर बैठेगी. यदि वे रिपोर्ट के साथ तैयार हैं, तो हम उस सत्र में करेंगे अन्यथा अगले सत्र में करेंगे. असम कैबिनेट ने यूसीसी और बहुविवाह विधेयक दोनों पर चर्चा की है, लेकिन हम बहुविवाह का पालन कर रहे थे. उत्तराखंड ने यूसीसी पास कर लिया है.’

    गौरतलब है कि इससे पहले असम के मुख्यमंत्रीने सोमवार को कहा कि राज्य में 1.59 लाख से अधिक लोगों को अब तक ‘विदेशी’ घोषित किया गया है. उन्होंने कहा कि अन्य करीब 97,000 लोगों की ‘संदिग्ध’ मतदाता के रूप में पहचान की गई है.

    गृह विभाग का भी प्रभार संभालने वाले सरमा ने कहा कि राज्य में संदिग्ध मतदाताओं की नागरिकता के मुद्दे से निपटने वाले 100 विदेशी (नागरिक) अधिकरण वर्तमान में संचालित हो रहे हैं. वह विधानसभा में विपक्षी एआईयूडीएफ के विधायक अमीनुल इस्लाम के एक सवाल का जवाब दे रहे थे. मुख्यमंत्री ने कहा कि इन अधिकरणों ने 31 दिसंबर 2023 तक 1,59,353 लोगों को विदेशी घोषित किया है.

  • असम के प्रभारी विकास उपाध्याय बचे शेष दो चरणों के मतदान को लेकर सक्रिय दिखें

    असम के प्रभारी विकास उपाध्याय बचे शेष दो चरणों के मतदान को लेकर सक्रिय दिखें

    असम के प्रभारी विकास उपाध्याय बचे शेष दो चरणों के मतदान को लेकर सक्रिय हो

    कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव व असम के प्रभारी विकास उपाध्याय असम में बचे शेष दो चरणों के मतदान को लेकर सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने राहुल गांधी के प्रस्तावित सभाओं को लेकर पूरी ताकत झोंक दी है।

    उन्होंने बताया असम में दूसरे चरण के मतदान प्रचार के आज अंतिम दिन बोर क्षेत्री में कांग्रेस के उपाध्याय राहुल गांधी का पब्लिक मीटिंग के साथ विशाल आम सभा आयोजित है। इस सभा में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी मंच साझा करने जा रहे हैं।

    असम में राहुल गांधी व प्रियंका गांधी को सुनने जनता गहराई से रुचि ले रही है। उन्होंने आज फिर से एक बार दावा किया कांग्रेस गठबंधन स्पष्ट बहुमत की ओर बढ़ रही है। असम की जनता ने भाजपा को सिरे से खारिज कर दिया है।