सीएम हिमंत बिस्व सरमा बोले- चुनाव बाद असम में बहु विवाह पर लगेगा प्रतिबंध, UCC भी करेंगे लागू..!

राजेन्द्र देवांगन
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सीएम हिमंत बिस्व सरमा बोले- चुनाव बाद असम में बहु विवाह पर लगेगा प्रतिबंध, UCC भी करेंगे लागू..!
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा…कद्दावर नेता…बेबाक बोल…राष्ट्रवाद पर बेहद मुखर…बयानों में स्पष्टवादिता…जिसे लेकर अक्सर ही चर्चा में रहते हैं। हिमंत दो टूक कहते हैं, चुनाव के बाद असम में न सिर्फ बहुविवाह प्रथा पर प्रतिबंध लगाएंगे, बल्कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) भी लागू करेंगे। वे साफ कहते हैं कि मदरसा शिक्षा से मुसलमानों का भला नहीं होगा। मुस्लिम बेटे-बेटियों को डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर, वैज्ञानिक बनाने की राह दिखानी होगी। उनकी तरक्की के सारे रास्ते बंद हो जाएं, ऐसी शिक्षा नहीं चाहिए। ध्रुवीकरण पर कहा, सामने वाला ऐसा करता है, तो हमें भी करना पड़ता है। मुस्लिमों से वोट नहीं मांगने के सवाल पर बोले- किससे वोट मांगना है…किससे नहीं…यह मेरा अधिकार है। मैं जब जानता हूं कि एक विशेष वर्ग वोट नहीं देगा, तो वहां जाकर वक्त बर्बाद क्यों करना। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने असम की राजधानी दिसपुर में अपने आवास पर डॉ. इन्दुशेखर पंचोली से बातचीत के दौरान हर मुद्दे पर खुलकर अपनी बात रखी…
पीएम मोदी के 400 पार में पूर्वोत्तर राज्य कितना योगदान दे पाएंगे?
पूर्वोत्तर में 25 सीटे हैं। मेरा मानना है कि 22 सीटें एनडीए के पास आएंगी। इसमें से 15-16 भाजपा को मिलेंगी, बाकी गठबंधन को मिलेंगी।
आप लंबे समय तक कांग्रेस में रहे, अब भाजपा में हैं? दोनों में किस तरह का अंतर देखते हैं?
देखिए, जब हम छात्र राजनीति से मुख्य धारा की राजनीति में आए, तो उस समय कांग्रेस ही ऐसी पार्टी थी, जिसका असम में पूरा कब्जा था। कई राज्यों में सरकारें थीं। हम 2001 से 2014 तक असम सरकार में मंत्री रहे। 2014 में मोदीजी सत्ता में आए, तो कई लोगों को लगा कि जो हम लोग कर रहे हैं, वह रूटीन है। उससे देश में बदलाव नहीं आएगा। अगर देश में तरक्की चाहिए, नया काम चाहिए, तो बदलाव लाने वाला व्यक्ति चाहिए। जिसमें निर्णय लेने की क्षमता हो, जिस व्यक्ति के पास नई दिशा हो, उसके साथ मिलकर काम करना होगा। पूर्वोत्तर भारत पर पीएम मोदी का काफी ध्यान रहा है। हम भाजपा में आए, सरकार बनाई। राज्य में दो-दो बार सरकार बनाई, लोकसभा के दो चुनावों में हमारा अच्छा परिणाम रहा।
अगर असम को देखें तो राज्य तरक्की के रास्ते पर निकल पड़ा है। 2014 के बाद यात्रा बहुत ही सफल रही है। तमाम अलगाववादी संगठनों ने हथियार डाले, चारों ओर विकास की गंगा बहने लगी। इससे हम बहुत ही संतुष्ट हैं। असम में हम वह करने में कामयाब रहे, जो जीवन में कभी सोचा भी नहीं था…इतनी शांति हो सकेगी, युवावस्था में भी नहीं सोचा था।
मेरे लिए असम में ध्रुवीकरण जरूरी है। इसलिए नहीं कि सत्ता में रहें, बल्कि हमारे असम में मूल निवासी राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक क्षेत्र में बने रहें। हमारा अस्तित्व खतरे में न पड़े। इसके लिए, कभी-कभी हम लोगों को इस तरह के मामले उठाने पड़ते हैं। यह हमारी मजबूरी है। जब एक राज्य में 36 प्रतिशत लोग पलायन करके आते हैं और धीरे-धीरे आप अपने देश में ही अल्पसंख्यक बन जाते हैं। सामने वाला भी ध्रुवीकरण करता है, तो हमें भी ध्रुवीकरण करना पड़ता है।
आपने चुनाव के बाद यूसीसी लागू करने की घोषणा की है?
वो तो तैयार है, हम चुनाव के बाद बहुविवाह प्रथा पर प्रतिबंध लगाएंगे। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) भी लेकर आएंगे। थोड़ा उत्तराखंड का असर देख रहे हैं। केंद्रीय नेतृत्व से हरी झंडी लेनी है। मुझे लगता है 2026 में वो हो जाना चाहिए।
आप मदरसों को बंद करना चाह रहे हैं?
सरकारी मदरसे तो बंद कर दिए। यह भी तलाश रहे हैं कि कानून के रास्ते से कैसे प्राइवेट मदरसे भी बंद किए जा सकते हैं। मैं नहीं मानता हूं कि मुसलमान का भला मदरसा शिक्षा से होगा। मुसलमान बेटों और बेटियों को आप सार्वजनिक शिक्षा से जोड़ें। उन्हें डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर, वैज्ञानिक बनने की राह दिखाइए। अगर किसी को धार्मिक शिक्षा लेनी है, तो वह घर में ले सकता है, अपने समुदाय में ले सकता है। मुसलमान बच्चों की शिक्षा-दीक्षा बचपन से ही एक अलग रास्ते पर चली जाए और उनके सारे रास्ते बंद हो जाएं, ऐसी शिक्षा नहीं चाहिए।
मैं तो हमेशा कहता हूं कि जो वर्ग आपको वोट नहीं देता है, आपको वहां जाकर समय नष्ट नहीं करना चाहिए। धीरे-धीरे विकास कीजिए। तब एक समय आएगा, वे लोग खुद वोट देंगे। मैं किसी से जबरदस्ती तो नहीं कर सकता। मैं जब जानता हूं कि एक विशेष वर्ग वोट नहीं देगा, तो वहां जाने से मेरा एक दिन का कीमती वक्त बर्बाद ही होगा। ऐसे बहुत से हिंदू इलाके भी हैं, जो मुझे वोट नहीं देंगे, मैं वहां भी नहीं जाता हूं। बेवजह हल्ला होगा, दोनों ग्रुप में मारपीट की नौबत आ जाएगी। जो हमें वोट देते हैं, उनका सम्मान करना है, जो हमें वोट नहीं देते, उनका भी सम्मान करना है।
2021 में मैंने बोला कि अभी वे लोग हमें वोट नहीं देंगे। लेकिन, तीन साल में हमने काफी काम किया है, मुसलमान बेटियों और माताओं के बीच। उम्मीद है कि मैं मांगू या नहीं मांगू, 10 प्रतिशत वोट हमें मिलेंगे।
राहुल आरोप लगाते हैं तो बताते क्यों नहीं…मैंने कौन सा भ्रष्टाचार किया भ्रष्टाचार पर विपक्ष आपको निशाने पर लेता रहता है। राहुल गांधी से लेकर केजरीवाल तक आरोप लगाते हैं कि आप भाजपा में इसीलिए शामिल
मैं कोशिश करता हूं जानने की, कि मेरे ऊपर क्या आरोप हैं, कोई बता ही नहीं रहा। सिर्फ बोलते रहते हैं कि आरोप है। कोई बताए तो सही, कि मेरे ऊपर क्या आरोप हैं? असम के लोग जानते हैं कि तरुण गोगोई के साथ मेरा विवाद हुआ, राहुल गांधी के साथ मेरा विवाद हुआ। पूरी तरह से राजनीतिक कारणों से मैं कांग्रेस को छोड़कर भाजपा में आया। राहुल गांधी बोलते हैं कि मैंने भ्रष्टाचार किया, इसलिए भाजपा-में आया। मैं राहुल जी से पूछना चाहता हूं कि आपकी पार्टी में रहते हुए मैंने कौन सा करप्शन किया? कोई आरोप तो बताता नहीं।
राहुल गांधी आप के निशाने पर हमेशा रहते हैं?
ऐसा नहीं है। मैं राहुल के निशाने पर रहता हूं। जब से मैं कांग्रेस में हूं तब से। तो मुझे थोड़ा रक्षात्मक रवैया अपनाना पड़ता है।
दो लोकसभा चुनाव में भाजपा ने पूर्वोत्तर में बेहतर प्रदर्शन किया। दोबारा विधानसभा चुनाव भी जीते। आगे पूर्वोत्तर में क्या भविष्य देखते हैं?
अब भी पूर्वोत्तर में हम कमजोर हैं। मिजोरम, नगालैंड, मेघालय में हम बहुत कमजोर हैं, लेकिन सरकार में हैं। वहां हम काफी अच्छा कर सकते हैं। असम में 35% जनता मुस्लिम है। बिना तुष्टीकरण किए, न्यायसंगत तरीके से हमें इनके बीच जाना होगा। हमें मुसलमानों के बीच से ही एक राष्ट्रवादी मूवमेंट खड़ा करना होगा। जैसे-मदरसा नहीं, सामान्य शिक्षा, बहुविवाह नहीं, एक विवाह प्रथा हो, 16 साल से नीचे विवाह न करके शिक्षा दी जाए।
आपके काम के तरीके की लोगों के बीच खूब चर्चा है। क्या इसकी प्रेरणा पीएम मोदी से मिली है?
मोदीजी ने भाजपा के सभी सीएम के मन में प्रतिस्पर्धा की भावना ला दी है। छह-छह महीने में हमारी परीक्षा भी ली जाती है, सभी को एकसाथ बैठाकर। न वह सोते हैं, न हमें सोने देते हैं। जब हर छह महीने में टेस्ट होगा, तो तैयारी करनी ही होगी।
कांग्रेस का घोषणापत्र भारत नहीं पाकिस्तान के लिए बनाया गया…
आप कांग्रेस में काफी समय तक रहे, आज भाजपा में हैं। दोनों में मूल अंतर क्या है?
एक परिवारवादी पार्टी है, दूसरी लोकतांत्रिक पार्टी है। जो हमारी देश पहले की नीति है, वैसी कांग्रेस की नीति नहीं रही। आप कांग्रेस के घोषणापत्र को देखें, वह भारत के चुनाव के लिए बनाया है, या पाकिस्तान के लिए बनाया है, कोई फर्क ही नहीं नजर आएगा। अपराधी के लिए बनाया है या नागरिकों के लिए बनाया है, फर्क ही नहीं है। इसलिए कांग्रेस और भाजपा के बीच कोई तुलना ही नहीं है।
क्या कांग्रेस के घोषणापत्र से असम में कोई लाभ होगा?
मैंने ठीक से कांग्रेस का घोषणापत्र पढ़ा भी नहीं है। असम में कांग्रेस की ज्यादा चर्चा भी नहीं है। जो मैंने पढ़ा, उससे लगा कि यह पाकिस्तान में ज्यादा चलेगा।
बयानबाजी को लेकर कांग्रेस ने चुनाव आयोग में शिकायत की है?
ये तो मूल अधिकार है, घोषणापत्र पढ़कर जो लगा, वही बोलना पड़ेगा। अगर कोई किताब पढ़कर उसकी समीक्षा मांगे, तो हमें ईमानदारी से देनी होगी।
“असम में एक वर्ग है, जो सीएए का विरोध करता है। हम उनकी भी विचारधारा का सम्मान करते हैं, लेकिन आप आंदोलन न कीजिए। कोर्ट से जो भी हल है, ले आइए। हमें कोई आपत्ति नहीं है। हम लोगों को समझाने में कामयाब हुए। कुछ लोग अब भी विरोध में हैं, लेकिन उन्होंने आंदोलन नहीं, कोर्ट का रास्ता चुना।”
असम पहले राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को लेकर विवाद में रहा, फिर सीएए को लेकर। इस बार सीएए का वैसा विरोध नहीं दिखता। कैसे हुआ यह?
सीएए आंदोलन की पृष्ठभूमि में ही, मैं सीएम बना। पिछले तीन साल में मैंने काफी संवाद किया। जिस दिन मैं मुख्यमंत्री बना, तो दिमाग में यही था कि जब नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) लागू होगा, तो बवाल होगा, उसे रोकना है। जिन लोगों ने पहले विरोध किया, उन्हें हमने राजी किया कि सीएए में ऐसा कुछ भी नहीं है, जो हमें खतरे में डालेगा। कहा, देखो संसद में कानून पास हुआ है, अगर कानून को निरस्त भी कराना है, तो कोर्ट ही निरस्त कर सकता है। आप कोर्ट जाइए, हम सीएए के पक्ष में अपनी बात रखेंगे, आप विरोध में रखिए। कोर्ट निर्णय करेगा, लेकिन असम को दोबारा संघर्ष के रास्ते पर ले जाने का कष्ट न करें। लोग समझ गए। कोई कोर्ट चला गया, तो कोई सीएए के पक्ष में आ गया।
मेघालय सीएए से अलग है, लेकिन एक वर्ग है, जो फिर भी इसका विरोध कर रहा है। उनसे कोई बातचीत हो रही है?
मेघालय के साथ बाकी राज्यों में जो थोड़ी बहुत असंतुष्टि है, इसे लेकर राज्य सरकारें बात कर रही हैं। केंद्र सरकार का भी उनके साथ बातचीत का रास्ता है। इसीलिए पूरे नार्थ-ईस्ट में कोई आंदोलन नहीं हुआ। हां, कुछ विरोध है।
विपक्ष का आरोप है, परिसीमन का लाभ भाजपा को मिल रहा है? गौरव गोगोई को अपनी सीट छोड़नी पड़ी।
देखिए…मैं व्यक्ति के ऊपर कोई चर्चा नहीं करता। परिसीमन चुनाव आयोग ने किया है। कांग्रेस ने कोई दूसरा प्रस्ताव आयोग को नहीं दिया। कुछ छोटे-मोटे सुधार बताए थे, वह आयोग ने काफी हद तक मान भी लिए। इसलिए परिसीमन को लेकर कोई असंतोष जैसा नहीं दिखा। किसी को अपनी सीट बदलनी है, या नहीं बदलनी है, उनकी पार्टी का निर्णय होता है।

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