गोधन न्याय योजना से मजबूत हो रही है ग्रामीण अर्थव्यवस्था

राजेन्द्र देवांगन
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जिले के 4 हजार 273 पशुपालको से क्रय किया गया 91 हजार 306 क्विंटल गोबर

21-दिसम्बर,2020

बिलासपुर-{सवितर्क न्यूज़} छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा विलुप्त होती जा रही प्राचीन ग्रामीण परम्पराओं का पुनर्जीवत करने का कार्य किया जा रहा है। छ.ग. देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जहां गोबर क्रय करने जैसी अनूठी योजना चलाई जा रही हैै। गोधन न्याय योजना पशुपालको के हित में लिया गया ऐसा निर्णय है जिससे उन्हें वित्तीय मदद के साथ-साथ रोजगार भी मिल रहा है एवं वे आर्थिक रूप से सुदृढ़ हो रहे है। गोधन न्याय योजना एक बहुयामी योजना है जिससे बहुत सारे उद्देश्यों की पूर्ति हो रही है।
प्रत्येक ग्राम पंचायत में गौठान बनाये जा रहे हंै। जिनसे स्थानीय स्तर पर ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध हो रहा है एवं गौठान रोजगार मूलक गतिविधियों का केन्द्र बन गये है। स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलने से पलायन पर भी अकुंश लगेगा। बिलासपुर जिले में 88 गौठान बनाये गये है। 4 हजार 273 पशुपालको से 91306.09 क्विंटल गोबर की खरीदी की गई है। इनमें विकासखण्ड बिल्हा से 17152.27 क्विंटल, विकासखण्ड कोटा से 13180.07 क्विंटल, विकासखण्ड मस्तुरी से 15163.138 क्विंटल, तखतपुर से 27768.37 क्विंटल एवं नगरीय निकायों से 18042.00 क्विंटल गोबर की खरीदी शामिल है।

इसके लिए पशुपालको को 1 करोड़ 80 लाख रूपये की राशि भुगतान किया गया है। क्रय किये गोबर में 781.79 क्विंटल गोबर से खाद बनाया गया है। गोधन न्याय योजना के तहत भुगतान के लिए एक ऐप भी बनाया गया है। जिससे योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित हो रही है। यह शासन की दूरदर्शिता का परिणाम है कि गोबर से भी अब लोगों को रोजगार मिलने लगा है एवं उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया है।

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