सरकारी अस्पतालों में आयुष्मान योजना के नाम पर बंदरबांट, स्वास्थ्य मंत्री बोले – प्रदेशभर में जांच के बाद की जाएगी कार्रवाई

राजेन्द्र देवांगन
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रायपुर। सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क इलाज के सरकारी दावे पर सवाल उठने लगे हैं, क्योंकि आयुष्मान योजना के तहत अस्पतालों में मरीजों से शुल्क वसूला जा रहा है। इस मसले को लेकर प्रदेशभर में हंगामा मचा हुआ है। स्वास्थ्य कर्मचारी संगठन ने इस योजना को सरकारी अस्पतालों में बंद करने की मांग उठाई है। संगठन का कहना है कि उन्हें उनके कार्य के लिए सरकार वेतन देती है, ऐसे में इन्सेंटिव के नाम पर बंदरबांट क्यों की जा रही है? कर्मचारी संगठन ने यह भी मांग की है कि सरकारी अस्पतालों में आने वाले पैसों का इस्तेमाल अस्पताल के उन्नयन के लिए होना चाहिए, जिससे बड़े-बड़े मशीनें खरीदी जा सकें और मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

स्वास्थ्य संगठन का यह भी आरोप है कि इन्सेंटिव के लालच में फर्जी मरीजों को भर्ती किया जा रहा है और सरकारी कर्मचारियों के पदों में बदलाव किया जा रहा है। कुछ सेक्टरों को 74 लाख रुपये तक के इन्सेंटिव दिए गए हैं, जबकि कंप्यूटर ऑपरेटरों को तीन-तीन लाख रुपये दिए गए हैं। इस मामले पर राजधानी के जिला चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर मिथलेश चौधरी ने बताया कि मामले की जानकारी मिलते ही जिला स्तरीय टीम गठित की गई है। यह टीम जांच करके रिपोर्ट सौंपेगी, और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

प्रदेशभर में जांच के बाद की जाएगी कार्रवाई

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि कुछ स्थानों से जानकारी मिली है, जिसके बाद तत्काल जांच के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि सिर्फ रायपुर ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में इस मामले की जांच की जाएगी। जो लोग मेहनत कर रहे हैं, उन्हें इन्सेंटिव का प्रावधान है, लेकिन अनियमितता पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि इन्सेंटिव की राशि केवल डॉक्टरों को ही नहीं, बल्कि इसमें जुड़े सभी कर्मचारियों को वितरित की जाती है। इन्सेंटिव की राशि को तीन हिस्सों में विभाजित किया जाता है—एक हिस्सा अस्पताल के विकास के लिए, एक हिस्सा इमरजेंसी खरीद के लिए और एक हिस्सा सरकार के कोष में जमा होता है।

मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने उदाहरण देते हुए बताया कि प्रसव सर्जरी करने वाले डॉक्टरों को 5,000 रुपये और एनेस्थीसिया देने वालों को 3,000 रुपये का इन्सेंटिव दिया जाता है। विभिन्न कर्मचारियों के लिए अलग-अलग इन्सेंटिव की राशि निर्धारित की गई है।

 

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