किसानों के नाम से निकाल लिया फर्जी लोन: धान बेचकर भी नहीं मिले पैसे, रामचंद्रपुर के 50 किसान पहुंचे कलेक्ट्रेट घेरने

राजेन्द्र देवांगन
3 Min Read
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बलरामपुर जिले के रामचंद्रपुर ब्लाक के लगभग 50 किसानों ने आज कलेक्ट्रेट का घेराव किया। कलेक्ट्रेट का घेराव कर समर्थन मूल्य पर बेची गई धान की राशि की मांग कर रहे थे। किसानों का आरोप है कि, उनके नाम से फर्जी तरीके से लोन निकाली गई है। जिसके कारण उन्हें समर्थन मूल्य पर बेची गई धान की राशि आज तक नहीं मिल पाई है।

वहीं किसानों से चर्चा करने पहुंचे अतिरिक्त तहसीलदार ने कहा कि, मुख्यमंत्री के नाम सौंपे गए 1 सूत्रीय मांग के ज्ञापन को नियमानुसार राज्य सरकार को भेजी जाएगी। फर्जी लोन मामले में प्रशासन ने जांच भी कराई है और उसी जांच के फेर में खाते होल्ड कर दिया गया।


जेल में बंद किसान के नाम पर भी निकाल लिया कर्ज
एक रामचंद्रपुर ब्लाक के 50 से अधिक किसान पिछले 1 महीने से समर्थन मूल्य पर बेची गई धान की रकम की मांग कर रहे है। खरीफ सीजन वर्ष 2025 -26 में इन किसानों ने भी समर्थन मूल्य पर धान बेची थी, लेकिन बाकी किसानों की तरह उन्हें धान का भुगतान नहीं हो पाया है। किसानों का कहना है कि, वे सहकारी समितियों के चक्कर काटते रहे। इसके बाद भी उन्हें उनके नाम पर लोन निकाले जाने की जानकारी मिली है, लेकिन उन्होंने सहकारी बैंक से लोन लिया ही नहीं है। एक किसान तो ऐसा भी है, जो जेल में निरुद्ध था और उसके नाम से भी लोन की राशि निकाली गई है।

प्रतिनिमंडल कलेक्टर के समक्ष अपनी बात रखेगा
इधर, किसानों से ज्ञापन लेने पहुंचे बलरामपुर अतिरिक्त तहसीलदार जितेंद्र डहरिया ने कहा कि, उन्हें मुख्यमंत्री के नाम 1 सूत्रीय मांग की ज्ञापन किसानों से सौंपी है। जिसमें नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी इसके अलावा किसानों का प्रतिनिमंडल कलेक्टर के समक्ष अपनी बात रखेगा। धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में यह पहला मौका नहीं है। जब अन्नदाता अपनी मांग को लेकर कलेक्टर दफ्तर की दहलीज पर पहुंचे हो।

जिम्मेदार कब देंगे राहत?
इस बार किसानों की पीड़ा उनके नाम से निकाले गए। फर्जी लोन को लेकर है। फर्जी लोन मामले में प्रशासन ने जांच भी कराई थी,लेकिन जांच के नाम पर किसानों के खाते होल्ड कर दिया गया। अब भला खाते होल्ड करने से किसानों का क्या लेना देना जिसका खामियाजा वे भुगत रहे है। जिम्मेदार इस मामले को लेकर किसानों को त्वरित राहत दे। एक बार फिर खरीफ फसल की तैयारी कर सके।

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