बिलासपुर जिले में 222 स्कूल जर्जर : कागजों में कर डाला 28 लाख का काम, हो गया भुगतान

राजेन्द्र देवांगन
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छत्तीसगढ़ में 16 जून से स्कूल खुल रहे हैं लेकिन बिलासपुर जिले में कई स्कूलों हालत खराब है। आधे से अधिक स्कूलों की मरम्मत तक नहीं हो पाई है। यही नहीं भारी भ्रष्टाचार करते हुए 93 स्कूलों में कागजों में काम पूरा बताकर भुगतान भी प्राप्त कर लिया गया। जांच में पता चला कि मस्तूरी ब्लॉक के 48 स्कूल ऐसे हैं, जहां कार्य को पूर्ण बता दिया गया लेकिन कोई काम पूरा नहीं हुआ।


तखतपुर ब्लॉक में 14 स्कूल, कोटा ब्लॉक में 11 और बिल्हा ब्लॉक में 9 स्कूल ऐसे मिले, जहां समस्या जस की तस है। ध्यान रहे कि जिले के 1400 स्कूलों को संवारने के लिए 74 करोड़ 74 लाख 59 हजार रुपए की राशि स्वीकृत की गई थी, इसमें से करीब 300 स्कूलों में ही काम हो सका है। इसके साथ ही सरकारी स्कूल भवनों का निर्माण, अतिरिक्त कक्ष निर्माण और रिपेयरिंग के काम में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार उजागर हुआ है।

हाईकोर्ट ने शासन को लगाई फटकार
यही नहीं जिला शिक्षा विभाग ने संचालनालय के पास जो रिपोर्ट भेजी है उसमें 222 स्कूल काफी जर्जर हैं तो वहीं 43 से अधिक स्कूल भवनों को पूरी तरह नया बनाने की जरूरत है। खास तौर पर सिरगिट्टी स्कूल की बदहाली पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए शासन को फटकार भी लगाई है। गौरतलब है कि, जिले में 1856 स्कूल सरकारी स्कूल संचालित हैं, जिसमें प्राइमरी, मिडिल, हाईस्कूल और हायर सेकेंड्री स्कूल शामिल है।

जांच में 78 स्कूल भवनों में निर्माण कार्यों में गंभीर खामियां

मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना के अंतर्गत न केवल शाला भवन की मरम्मत और उनका नवीनीकरण किया जाना था, बल्कि अतिरिक्त कक्ष का निर्माण भी कराया जाना था लेकिन अधिकारियों की लापरवाही और ठेकेदारों के साथ मिलकर किए गए भ्रष्टाचार के कारण यह सब नहीं हो सका। योजना के तहत स्कूलों का जीर्णोद्धार करने के साथ ब्लैक बोर्ड, रंगरोगन, खेल मैदान आदि को व्यवस्थित करना था। इन स्कूलों को मरम्मत करने के बाद इनकी दीवारों को गोबर पेंट से पोतना था, जो लापरवाही के कारण नहीं हो सका। जांच में 78 स्कूल भवनों में निर्माण कार्यों में गंभीर खामियां पाई गई। इसमें छत का प्लास्टर गिरना, पुट्टी और खिड़कियों का न लगना और छतों से पानी का रिसाव होना जैसी प्रमुख गड़बड़ियां शामिल हैं।
शहरी क्षेत्र के 57 स्कूलों के लिए 5 करोड़
बिलासपुर में मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना के तहत शासकीय प्राथमिक स्कूलों के लिए जिले में करीब 1400 स्कूलों को संवारने की बात थी, इसके लिए जिले में 74 करोड़ 74 लाख 59 हजार रुपए की राशि स्वीकृत की गई थी। इसमें से बड़ी मुश्किल से 300 स्कूलों में ही कुछ काम हो सका। अधिकारी टेंडर और दूसरी प्रक्रियाओं में देरी करते रहे। शहरी क्षेत्र में कुल 57 स्कूलों में निर्माण और जीर्णोद्धार की जिम्मेदारी निगम को देते हुए निर्माण एजेंसी बनाया गया। इसके लिए 4 करोड़ 68 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की गई। भुगतान तो कर दिया गया लेकिन स्कूलों की हालत जर्जर ही रही।

इन स्कूलों में मिली गड़बड़ी
जिन स्कूलों में खास तौर पर खामियां पाई गई, उनमें शासकीय जनपद प्राथमिक शाला बम्हनीखुर्द बिल्हा ब्लॉक में स्कूल की छत और बरामदे में रिपेयरिंग और निर्माण कार्य 3 लाख 84 हजार रुपए में किया गया था। जांच टीम ने सत्यापन किया तो पता चला कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता का अभाव है और बरामदे की छत का प्लास्टर गिरा हुआ था। ऐसे ही तखतपुर के तुर्काडीह प्राथमिक शाला (ईडीयू) में 11 लाख 30 हजार की लागत से भवन का निर्माण हुआ था। मौके पर जांच करने पर टीम को छत में सीपेज की समस्या मिली।

स्कूल की हालत पहले की तरह जर्जर
कोटा शासकीय माध्यमिक शाला भवन में परिवर्तन और परिवर्धन कार्य रानीबछाली में 4 लाख 62 हजार की लागत से किया गया। जांच में गुणवत्ता का अभाव पाया गया। वहीं, मस्तूरी ब्लॉक के प्राथमिक शाला, सबरियाडेरा (सोन) में अतिरिक्त कक्ष निर्माण का ठेका 8 लाख 32 हजार में हुआ, लेकिन फर्श का काम अधूरा था। बिल्हा ब्लाक के शासकीय प्रायमरी स्कूल नवीन डबरीपारा में चतुर्थ चरण काम बताकर 15 लाख रुपए की राशि निकाल ली गई है जबकि स्कूल की हालत पहले की तरह जर्जर है और कुछ भी काम मौके पर नहीं दिखता है।

कुछ स्कूलों को नया बनाने की जरूरत
जिला शिक्षा अधिकारी विजय तांडे ने बताया कि, जिला शिक्षा विभाग ने संचालनालय के पास जर्जर स्कूलों की जानकारी भेज दी है। मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना अंतर्गत स्वीकृत निर्माण कार्यों की भौतिक और वित्तीय प्रगति की जानकारी जो निर्माण एजेंसियों द्वारा दी गई है, उनका भौतिक सत्यापन भी कराया जाएगा।

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