CG News-बहते पानी में बनी पत्थर की परतें, अनोखी और रहस्यमयी है कांगेर घाटी में मिली गुफा, नाम है ग्रीन केव

राजेन्द्र देवांगन
3 Min Read
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छत्तीसगढ़ की कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध जैव विविधता और विश्व-प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों के लिए देश-विदेश में विख्यात है। इसी कड़ी में अब कांगेर घाटी में एक और अनोखी प्राकृतिक स्थलाकृति सामने आई है, जिसे “ग्रीन केव” (ग्रीन गुफा) नाम दिया गया है।

अनोखी और रहस्यमयी है गुफा
पर्यटक इस अद्भुत गुफा की प्राकृतिक खूबसूरती का प्रत्यक्ष अनुभव कर सकेंगे। वन विभाग द्वारा आवश्यक तैयारियां पूर्ण किए जाने के बाद शीघ्र ही इस गुफा को पर्यटकों के लिए खोले जाने की योजना है।

आखिर क्यों पड़ा ग्रीन केव नाम? जानें

उल्लेखनीय है कि यह ग्रीन गुफा कोटुमसर परिसर के कंपार्टमेंट क्रमांक 85 में स्थित है। गुफा की दीवारों और छत से लटकती चूने की आकृतियों (स्टैलेक्टाइट्स) पर हरे रंग की सूक्ष्मजीवी परतें पाई जाती हैं, जिसके कारण इसे “ग्रीन केव” नाम दिया गया है। चूना पत्थर और शैल से निर्मित यह गुफा कांगेर घाटी की दुर्लभ और विशिष्ट गुफाओं में से एक मानी जा रही है।

ऐसे पहुंचे गुफा पर

ग्रीन गुफा तक पहुंचने का मार्ग बड़े-बड़े पत्थरों से होकर गुजरता है। गुफा में प्रवेश करते ही सूक्ष्मजीवी जमाव से ढकी हरी दीवारें पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। आगे बढ़ने पर एक विशाल कक्ष दिखाई देता है, जहां से भीतर की ओर चमकदार और विशाल स्टैलेक्टाइट्स तथा फ्लो-स्टोन (बहते पानी से बनी पत्थर की परतें) देखने को मिलती हैं, जो गुफा की प्राकृतिक भव्यता को और भी बढ़ा देती हैं।

नाम है ग्रीन केव
घने जंगलों के मध्य स्थित यह गुफा अपनी अनोखी संरचना और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण पर्यटकों के लिए एक नया आकर्षण केंद्र बनने जा रही है। वन विभाग द्वारा गुफा की सुरक्षा एवं नियमित निगरानी की जा रही है। साथ ही पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पहुंच मार्ग, पैदल पथ तथा अन्य आवश्यक आधारभूत संरचनाओं का विकास कार्य प्रगति पर है।

वन विभाग द्वारा कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के पर्यटन विकास के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इस पहल में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वनबल प्रमुख व्ही. श्रीनिवासन तथा प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) अरुण पांडे का मार्गदर्शन भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

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