IVF से बच्चा के नाम पर रायपुर के दो निजी अस्पतालों ने महिला को दिया लाखों रुपए का धोखा – आयोग लेगा एक्शन

राजेन्द्र देवांगन
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किडनी मरीज़ को आयोग ने 1 लाख रुपए मुख्यमंत्री जी से सहायता राशि दिलाए जाने की अनुशंसा की

2 लाख में नौकरी दिलाने की ठगी करने वाले सरकारी क्लर्क की नौकरी समाप्त करने की अनुशंसा किया आयोग ने

रायपुर / 13 दिसंबर 2024 / छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक एवं सदस्यगणों श्रीमती सरला कोसरिया, श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, श्रीमती ओजस्वी मंडावी एवं सुश्री दीपिका शोरी ने आज छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग के कार्यालय रायपुर में महिला उत्पीड़न से संबंधित प्रकरणों पर सुनवाई की। आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक की अध्यक्षता में प्रदेश स्तर पर आज 296 वी. सुनवाई हुई। रायपुर जिले में 142 वी. जनसुनवाई।

आज की सुनवाई के दौरान आयोग में एक अत्यंत गंभीर प्रकृति का प्रकरण आवेदिका ने दर्ज कराया, जिसमें आवेदिका ने अपने भ्रूण अनावेदकणों के पास संरक्षित करा कर रखे है। जिसमें से 4 भ्रूण प्रत्यारोपित करने के बाद नष्ट हो चुका है। लेकिन 7 भ्रूण अभी भी अनावेदकगणों के पास है जिसके लिए आवेदिका और बच्चा चाहने की चाह में लगभग 15 लाख अनावेदकगणों को दे चुकी है। और शेष 7 भ्रूण मे से आवेदिका पुनः मातृत्व अधिकार के लिए प्रयासरत है किंतु अनावेदकगण लगातार आवेदिका को इंकार कर प्रताड़ित कर रहे है।

उभय पक्षों को विस्तार से सुना गया, जिसमें अनावेदकगण केवल अपने उद्देश्य से दो तरह की बाते करती नजर आई। एक अन्य अनावेदिका का कहना है कि पहली अनावेदिका डॉ. ने बिना सहमति के सारी मशीन और भ्रूण को असुरक्षित तरीके से निकालकर ले गयी। जिसके कारण भ्रूणों के सुरक्षित और प्रत्यारोपण के बाद जीवित और नॉर्मल बच्चा होने की संभावना संदिग्ध है उनका यह भी कहना है कि वह दावे के साथ कह सकती है कि आवेदिका के सारे भ्रूण समाप्त हो गए है।

भ्रूणों को संरक्षित करने के नाम पर अनावेदक उससे फीस लेती आ रही है। लेकिन भ्रूण प्रत्यारोपण करने के लिए पति की सहमति के आड पर भ्रूण प्रत्यारोपित नही कर रही है जो कि उपभोक्ता कानून के तहत क्षतिपूर्ति का मामला प्रतीत होता है क्योकिं दोना अनावेदिकागणों ने आवेदिका को डोनर एक्ट के माध्यम से भ्रूण निर्माण व संरक्षण के सपने दिखाकर इसके आड़ में लाखों रू. खर्च कराये। आयोग ने आवेदिका को निर्देश दिया कि वह अनावेदकिागणों को कितनी राशि कब-कब दिया उसकी सूची लेकर आयोग में उपस्थित हो ताकि प्रकरण का अंतिम निराकरण किया जा सके।

आज के एक प्रकरण के दौरान आवेदिका ने बताया कि अनावेदिका उसके पति के साथ दूसरी पत्नी के रूप में रहती है। और आवेदिका पति से तलाक लेने के लिए धमकाती है। अनावेदिका के इस व्यवहार से आवेदिका भयभीत है। अनावेदिका (दूसरी महिला) ने आयोग के समक्ष सुनवाई में यह कबूल किया कि वह आवेदिका के पति के साथ अवैध संबंध में दूसरी पत्नी के रूप में रह रही है। अनावेदिका (दूसरी महिला) अपनी गलती को स्वीकारने के बाद भी आक्रोशित है अनावेदिका द्वारा आवेदिका को नुकसान पहुंचाने की संभावना को देखते हुए व सुरक्षा की दृष्टि से अनावेदिका को आगामी सुनवाई तक नारी निकेतन भेजे जाने का आदेश आयोग के द्वारा दिया गया।

एक प्रकरण में आवेदिका ने अनावेदक के खिलाफ मामला प्रस्तुत किया कि वह दूसरी महिला के साथ भागने व आवेदिका को तलाक के लिए दबाव बना रहा है। अनावेदक ने बताया कि उसका एकतरफा तलाक कुंटुंब न्यायालय से हो चुका है। अनावेदक ने बताया कि वह बिजली विभाग में लाईन मैन की पोस्ट पर संविदा में कार्यरत है। और उसे 14 हजार रू. वेतन मिलता है। परंतु उसकी पे स्लिप में वेतन 22 हजार रू. दिखा रहा है। आवेदिका लगभग 3 वर्षों से अनावेदक से अलग रह रही है और उसे किसी भी प्रकार का कोई भरण पोषण प्राप्त नही हो रहा है। अनावेदक आयोग के सामने लगातार झूठे तथ्य बता रहा है।

आवेदिका ने बताया कि अनावेदक का अन्य महिला से अवैध संबंध है। अनावेदक का मो. चेक किये जाने पर आवेदिका के कथन की पुष्टि हुई, कि अन्य महिला के कारण आवेदिका का वैवाहिक जीवन बर्बाद हो रहा है। आगामी सुनवाई में दूसरी महिला को पुलिस के माध्यम से एक महिला सिपाही के साथ आयोग में उपस्थित किये जाने का आदेश दिया गया तथा अनावेदक को अपने विस्तृत प्रस्ताव के साथ ईमानदारी से उपस्थित होने को कहा गया अन्यथा आयोग के द्वारा अपराधिक प्रकरण दर्ज करने की अनुशंसा की जायेगी।

एक अन्य प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि उसके विवाह के पूर्व से ही उसका पति किडनी का मरीज था। बिमारी की बात छिपाकर अनावेदक पक्ष ने विवाह किया था। विवाह के बाद से आवेदिका ही अपने पति का ईलाज करवा रही है। जिसमें आवेदिका के ससुराल पक्ष के द्वारा किसी भी प्रकार की मदद नहीं मिल रही है और आवेदिका के पास आय का कोई स्त्रोत नहीं है। आवेदिका के मायके वाले ईलाज का खर्च उठा रहे थे किंतु 2 माह से मायके वालो ने भी खर्च देना बंद कर दिया है।

आवेदिका अपने पति के ईलाज में करवाने में असमर्थ है। इस स्तर पर आयोग के सभी सदस्यों ने मानवीय आधार पर इस प्रकरण में आवेदिका को शासकीय सहयोग दिलाने की सहमति व्यक्त की। आयोग ने आवेदिका को उसके पति की बिमारी के सारे दस्तावेज और डिटेल विवरण लेकर आयोग में उपस्थित होने को कहा, ताकि एम्स में आवेदिका के पति के निःशुल्क ईलाज और 1 लाख रू. मुख्यमंत्री जी से सहायता राशि दिलाये जाने की अनुशंसा आयोग के द्वारा किया जा सके।

अन्य मामले में आवेदिका ने अनावेदकगणों के विरूध्द सामाजिक बहिष्कार किये जाने की शिकायत आयोग में की थी। जिसमें अनावेदकगणों ने कहा कि महिला आयोग द्वारा जो भी दिशा-निर्देश दिया गया है उसका पालन किया जा रहा है। वे कभी भी अंर्तजातीय विवाह करने वाले को सामाजिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित नहीं करते है। आयोग के समक्ष अनावेदकगणों की इस घोषणा के बाद आयोग ने प्रकरण नस्तीबध्द किया।

एक प्रकरण के दौरान आवेदिका ने बताया कि अनावेदक शासकीय स्कूल में लिपिक के पद पर कार्यरत् है और आवेदिका को नौकरी दिलाने का झूठा आश्वासन देकर 2 लाख 10 हजार रू. हड़प लिया है जिसकी स्वीकृति महिला आयोग के समक्ष अनावेदक ने की। अनावेदक ने बताया कि उसे केवल 1 लाख रू. आवेदिका को वापस करने है शेष राशि वह वापस कर चुका है। आज दिनांक को आयोग के समक्ष आवेदिका को 1 लाख रू. वापस करना था लेकिन अनावेदक जान बुझ कर अनुपस्थित रहा।

इस स्थिति से स्पष्ट है कि अनावेदक आवेदिका को रू. वापस करने की मंशा नही रखता है। अनावेदक शासकीय लिपिक होकर आवेदिका को नौकरी देने का झांसा देकर उससे 2 लाख 10 हजार रू. ऐंठ चुका है इसलिए डी.ई.ओ. बिलासपुर, जिला कलेक्टर बिलासपुर व प्रमुख सचिव शिक्षा विभाग छ.ग. शासन को आयोग के द्वार पत्र भेज कर सिविल सर्विस एक्ट प्रावधान के तहत अनावेदक को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने की अनुशंसा की जायेगी।

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