janjgir champa News-नौकरी की मांग-मड़वा ताप विद्युत प्लांट के सामने भूख हड़ताल पर बैठीं महिलाएं

राजेन्द्र देवांगन
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चांपा :-  मड़वा ताप विद्युत कामगार एवं भू-विस्थापित श्रमिक संघ एटक के द्वारा भू-विस्थापितों को नौकरी दो, की मांग को लेकर  चरणबद्ध अनिश्चित कालीन हड़ताल का पैंतालीस ( 45 )  वां दिन हो चुका है। साथ ही महिलाओं का भूख हड़ताल पांचवाँ दिन हो रहा है।

परन्तु जिला प्रशासन, छ. ग. शासन, व छ. ग. राज्य विद्युत मंडल के अधिकारियों के द्वारा भू-विस्थापितों की जायज मांग पर किसी भी प्रकार की उचित कार्यवाही नहीं कर रहे हैं न ही आंदोलनरत भू-विस्थापित साथियों की कोई सुध ले रहे हैं।

जिससे भू-विस्थापितों वासियों में भी असंतोष व्यापत हो रही है। अब लग रहा है कि शासन भू-विस्थापितों  के द्वारा उग्र आंदोलन की राह देख रहा है। कुछ भी अनहोनी होने का इंतजार कर रहे हैं ताकि उन्हें किसी भी प्रकार से आंदोलन को खत्म करने,उनके उपर धारा लगाकर परेशान करने की सोच रहे हैं। आखिर शासन, व  छ. ग. राज्य विद्युत मंडल क्या चाह रही है। भू विस्थापितों को नौकरी देने की मंसा नहीं लग रही है।

मड़वा विद्युत संयंत्र में भू विस्थापितों की लड़ाई तेज होती जा रही है। भू विस्थापितों ने अपनी मांगों को लेकर 45 दिनों से ऊपर आंदोलन होने को है, लेकिन अधिकारियों की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। जिससे भू विस्थापितों आक्रोश में दिख रहे हैं।

इस आंदोलन में भू विस्थापितों ने अपनी हक की लड़ाई को शासन प्रशासन तक पहुंचाने के लिए श्रमिक संघ एटक के साथ मिलकर लड़ाई लड़ रहे हैं। लेकिन अधिकारियों की ओर से कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई है। जिससे भू विस्थापितों को उनका हक मिल सकें।

भू विस्थापितों ने जिले के कलेक्टर को कई बार विज्ञापन सौंप चुके हैं ताकि उनकी मांगों का समाधान किया जा सके। मड़वा विद्युत ताप संयंत्र के वरिष्ठ अधिकारियों को जाकर आंदोलन में बैठे भू विस्थापितों का संज्ञान लेना चाहिए। लेकिन अधिकारियों को ऐसी रूम से निकलने के लिए फुर्सत नहीं है।

इस समस्या का समाधान करने के लिए जिले के कलेक्टर को  संज्ञान में लेकर मड़वा ताप विद्युत संयंत्र को कानूनी सलाह के साथ समाधान करने की आवश्यकता है। जिससे उग्र आंदोलन को रोका जा सकता है और भू विस्थापितों की मांगों को पूरा किया जा सकता है।

इस प्रकार, मड़वा विद्युत संयंत्र में भू विस्थापितों की लड़ाई तेज होती जा रही है, और अधिकारियों को इस समस्या का समाधान करने के लिए कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।ताकि भू विस्थापितों को अपने हक की लड़ाई से प्रशासन के द्वारा क़ानूनी रूप से न्याय की लड़ाई में हक़ दिला सकें ।

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