कांकेर की प्रियल देवांगन 12वीं बोर्ड में टॉप टेन में आठवें स्थान पर, जिले में प्रथम…!
कांकेर। जिले की छात्राओं ने दसवीं व बारहवी दोनों ही बोर्ड परीक्षाओं में अपना दबदबा कायम रखा है। 12वीं की परीक्षा में जहां प्रियल देवांगन टॉप टेन में जगह बनाई है। वहीं दूसरी तरफ दसवीं की परीक्षा में एसेबेड़ा की रिया हालदार 98 फीसदी अंक लाकर राज्य में चौथा स्थान हासिल किया है।
कांकेर की बारहवीं की छात्रा प्रियल देवांगन ने टॉप 10 की सूची में 95.8 प्रतिशत अंक के साथ प्रदेश में आठवां स्थान हासिल किया है। रिजल्ट घोषित होने के बाद जब मीडिया ने प्रियल देवांगन और उसके परिजनों को मेरिट सूची में नाम आने की जानकारी दी तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद जैसे ही इसकी जानकारी प्रियल को लगी तो वो अपने खुशी के आंसू रोक ना सकी। माता-पिता का बड़ा योगदान : प्रियल देवांगन का कहना है कि ”पिता पतंजलि स्टोर की दुकान चलाते हैं.उन्होंने परीक्षा के लिए बहुत मेहनत की थी। शुरू से जो टीचर पढ़ाते थे उसी को पढ़कर आगे बढ़ती रही। पेपर के दौरान खुद से बहुत मेहनत शुरु की. दिन में 6 से 7 घंटे और पूरी रात पढ़ाई किया करती थी. रात में पढ़ने के दौरान प्रियल की मां भी रात में जागा करती थी.इसमें माता पिता का बहुत योगदान है.” प्रियल नीट की तैयारी करके डॉक्टर बनना चाहती है।
आक्राेश:बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा के खिलाफ बजरंग दल ने किया प्रदर्शन, पुतला फूंका…! कोरर:- कर्नाटक के विधानसभा चुनावी घोषणा पत्र मे राष्ट्रवादी संगठन बजरंग दल को बैन करने की बाते राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडगे और कर्नाटक के कांग्रेस अध्यक्ष डी के शिवकुमार के द्वारा कही गयी जिसके विरोध मे आज सम्पूर्ण भारत एवं छत्तीसगढ़ मे विरोध प्रदर्शन किया हैं इसी तारत्तमय मे आज कोरर मे राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडगे का पुतला दहन कर घोषणा पत्र को जला कर विरोध किया गया जिसमे मुख्य रूप से शुभम नाग बजरंगदल प्रांत सहसंयोजक बजरंग दल , अखिलेश मिश्रा विभाग सहसंयोजक, , भावेश आर्दे
जिलामंत्री,, अंकित टावरी ,नोवेन्द्र साहू जिला अर्चक पुरोहित,महेंद्र , जगदीश जयते कार्य कारी अध्यक्ष,अजय पटेल खंड मंत्री,जय सिवना मंडल महामंत्री , हेमलाल गड़िया युवा मोर्चा अध्यक्ष, पियूष कश्यप युवा मोर्चा अध्यक्ष,धीरज मिश्रा युवा मोर्चा उपाध्यक्ष, निर्मल यादव डोमा हर्रा अध्यक्ष, मोहित टावरी मंत्री तेलावट,दिलेश्वर हिरवानी उपाध्यक्ष खंड तेलावट, कुंबज हिरवानी खंड सह मंत्री,दुर्गेश साहू सदस्य,कृतांत यादव सदस्य,योगेश कोमरा, टाकेश धनकर ,प्रियाशु राजपूत एवं समस्त कार्यकर्ता उपस्थित थे
गांवों से राशन लेना भी किया बंद:डीआरजी की ऐसी दहशत, नक्सलियों ने अपने ही रेड कॉरिडोर में ठहरना छोड़ा…!
बस्तर से लेकर तीन राज्य के जंगल को जोड़ने वाले नक्सलियों के रेड कॉरिडोर पर सन्नाटा पसर गया है। इसकी वजह नांदगांव (अविभाजित) डीआरजी के जवानों की दहशत है। बस्तर में डीआरजी (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) के दस जवानों के शहीद होने के बाद सभी संवदेनशील हिस्सों में फोर्स अलर्ट पर है। लेकिन डीआरजी की दहशत से नक्सलियों ने अपने ही कॉरिडोर से दूरी बना ली है।
बस्तर से कांकेर, गढ़चिरौली से मोहला-मानपुर होकर बोरतलाव और फिर एमपी के बालाघाट के जंगलों से कवर्धा के भोरमदेव तक नक्सलियों ने अपना रेड कॉरिडोर तैयार किया था। लेकिन लंबे समय से नक्सलियों ने अपने कॉरिडोर में ठहरना बंद कर दिया है।
इतना ही नहीं नक्सली कॉरिडोर में आने वाले गांवों से राशन लेना भी बंद कर चुके हैं। कभी इस कॉरिडोर में दर्जनों की संख्या में नक्सली बैठकें करते और कई दिनों तक नक्सल टुकड़ी का ठहरना रहता था। फोर्स का दबाव बढ़ने पर एमपी, महाराष्ट्र और बस्तर तक के नक्सली इसी कॉरिडोर में छिपते रहे हैं।
लेकिन अब इस हिस्से से एक या दो की संख्या में ही नक्सली गुजर रहे हैं। वह भी चंद घंटों में ही इलाके को छोड़ रहे हैं। इसकी बड़ी वजह हर हिस्से में डीआरजी की पहुंच और निगरानी है। नक्सल कमांडर जमुना के एनकांउटर और डेविड की गिरफ्तारी के बाद डीआरजी की इस इलाके में मौजूदगी के साथ मजबूती बढ़ी है।
नक्सलियों के ठहराव या गांव आने का इनपुट नहीं
वर्ष 2019 से कोरोचा से बुकमरका जाने वाली 10.70 किमी लंबी सड़क का निर्माण जारी है। इसका निर्माण फोर्स की मदद से एक माह में पूरा हो जाएगा। करीब साढ़े 7 किमी का डामरीकरण बचा हुआ है। निर्माण के दौरान 5-6 बार यहां मुठभेड़ हो चुकी थी।
आक्रामक की बजाय अब रक्षात्मक हुआ संगठन इस पूरे हिस्से में नक्सलियों ने अपनी रणनीति भी बदल दी है। फोर्स की पहुंच और सूचना तंत्र के चलते नक्सलियों ने इस हिस्से में रक्षात्मक रवैया अपना लिया है। पूर्व में नक्सली अपने कारीडोर के हिस्से में आक्रामक रहते थे। लेकिन अब ऐसी कोई भी मूवमेंट नहीं कर रहे हैं, जिसकी सूचना पुलिस तक पहुंचे। गांवों के राशन लेने के दौरान भी फोर्स को इसकी सूचना मिल जाती थी, जिससे नक्सली घिर रहे थे। यही वजह है रक्षात्मक मोड में आ चुके संगठन ने अब गांवों से राशन जुटाना भी बंद कर दिया है, ताकि पुलिस तक उनके मूवमेंट की सूचना न पहुंचे।
कॉरिडोर में एमएमसी जोन की बड़ी बैठकें होती रहीं रेड कॉरिडोर में एमएमसी जोन की बड़ी बैठकें होती रही हैं। इसी हिस्से में नक्सली संगठन को विस्तार देने से लेकर वारदातों की योजना तैयार करते थे। एक बैठक के दौरान सीतागोटा से लगे जंगल में 7 नक्सलियों को ढेर किया था। बस्तर से प्रशिक्षित 30 नक्सलियों की टुकड़ी भी दो साल पहले इसी कॉरिडोर से भोरमदेव जा रही थी, जिसमें 27 नक्सलियों का एनकांउटर किया था। इस कॉरिडोर में 55 से अधिक जगहों से डंप भी बरामद हो चुका है। राशन जुटाने के लिए इसी कारीडोर के गांवों का इस्तेमाल नक्सली करते थे। लेकिन अब मूवमेंट पर ब्रेक लग गया है।
Chhattisgarh : कांकेर की शान है गढ़िया पहाड़, यहां सोनई-रुपई तालाब के पानी में ये है खासियत…!
कांकेर । शहर से लगे गढ़िया पहाड़ का इतिहास हजारों साल पुराना है। जमीन से करीब 660 फीट ऊंचे इस पहाड़ पर सोनई-रुपई नाम का एक तालाब है, जिसका पानी कभी सूखता नहीं है। इस तालाब की खासियत यह भी है कि सुबह और शाम के वक्त इसका आधा पानी सोने और आधा चांदी की तरह चमकता है।
किंवदती है कि गढ़िया पहाड़ पर करीब 700 साल पहले धर्मदेव कंड्रा नाम के एक राजा का किला हुआ करता था। राजा ने ही यहां पर तालाब का निर्माण कराया था। धर्मदेव की सोनई और रुपई नाम की दो बेटियां थीं। वो दोनों इसी तालाब के आसपास खेला करती थीं। एक दिन दोनों तालाब में डूब गईं। तब से यह माना जाता है सोनई-रुपई की आत्माएं इस तालाब की रक्षा करती हैं, इसलिए इसका पानी कभी नहीं सूखता। पानी का सोने-चांदी की तरह चमकना सोनई-रुपई के यहां मौजूद होने के रूप में देखा जाता है।
उस जमाने के मिट्टी के बर्तन व ईंट-खपरों के टुकड़े आज भी यहां मिलते हैं। पहाड़ी के ऊपर एक बड़ा सा मैदान स्थित है। उस मैदान में किले में निवास करने वाले राजा और उनके सैनिकों की आवश्यकता की वस्तुएं बिक्री के लिए आती थीं। इस बाजार में विक्रय करने के लिए लड़कियां सामग्री लाया करती थीं। इसी कारण इसका नाम टूरी हटरी (बाजार) पड़ा।
राजशाही के जमाने में फांसी भाठा में अपराधियों को मृत्यु दंड दिया जाता था। यहां अपराधियों को ऊंचाई से नीचे फेंका जाता था। एक बार कैदी ने अपने साथ सिपाही को भी खींच लिया। इसके बाद से अपराधियों के हाथ बांधकर उन्हें दूर से बांस से धकेला जाने लगा। झंडा शिखर के पास ही फांसी भाठा स्थित है।
मेलाभाटा की ओर से पहाड़ी के ऊपर जाने के लिए कच्चा मार्ग बना हुआ है। इस मार्ग में एक विशाल गुफा स्थित है। कहा जाता हैं कि उस गुफा में एक सिद्ध जोगी तपस्या करते थे, जिनका शरीर काफी विशाल था। वहां उनकी विशाल खड़ऊ आज भी मौजूद है। इस कारण इसे जोगी गुफा कहा जाता है।
झंडा शिखर
गढ़िया पहाड़ को दूर से देखने में जो सबसे ज्यादा आकर्षित करता है, वह है गढ़िया पहाड़ का मुकुट झंडा शिखर। इस स्थान पर राजा का राजध्वज फहराया जाता था। जिस लकड़ी के खंभे पर झंडा फहराया जाता था, उसके अवशेष आज भी मौजूद हैं। कहा जाता है कि जब राजा किले में रहते थे, तभी झंडा शिखर पर ध्वज लहराता था। झंडे से ही राजा की मौजूदगी का पता प्रजा को चलता था।
राजा का महल जिस स्थान पर था, वहां एक विशाल ऊंचा पत्थर है। प्रतीत होता है कि उसमें पत्थर का ही दरवाजा बना हुआ है। किंवदती है कि इस पत्थर के नीचे राजा ने अपना खजाना छुपाया हुआ है। इसी कारण इसे खजाना पत्थर कहते हैं।
सोनई रूपई तालाब के पास ही एक गुफा है, जिसमें जाने का मार्ग एकदम सकरा है किंतु उस गुफा में प्रवेश करने के बाद विशाल स्थान है। यहां सैकड़ों लोग बैठ सकते हैं। गुफा के मार्ग में छुरी के समान तेज धारदार पत्थर हैं। इसी कारण इसे छुरी गुफा कहा जाता है। कहते हैं कि किले में दुश्मनों द्वारा हमला होने पर राजा अपने सैनिकों के साथ इसी गुफा में छुप जाते थे।
नक्सल हिंसा पीड़ित परिवार पर सितम, दबंगों ने किया हुक्का पानी बंद…!
कांकेर : जिले के धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्र की जनता पहले लाल आतंक से परेशान थी.लेकिन अब जब लाल आतंक का साया छट गया है तो उनकी जगह दबंगों ने ले ली है.ऐसा ही एक मामला बांदे थाना क्षेत्र में सामने आया है.जहां एक परिवार को पहले नक्सलियों ने सताया.परिवार का पेट पालने वाले की जान मुखबिरी का आरोप लगाते हुए नक्सलियों ने ले ली. नक्सलियों के डर से परिवार ने अपना घर छोड़कर दूसरे जिलों में पनाह ली. अब जब एक बार फिर इलाके में शांति कायम हुई है तो परिवार अपने घर लौट आया. लेकिन इस बार परिवार को नक्सलियों से नहीं बल्कि स्थानीय दबंगों से परेशानी है. दबंगों ने परिवार से बात करने या मदद करने वालों पर जुर्माना लगाने का फरमान जारी किया है.लिहाजा अब परिवार अपने घर में ही कैद हो चुका है.
क्या है पूरा मामला :पीड़ित परिवार ने कांकेर कलेक्टर से इस बारे में शिकायत की है. परिवार बांदे थानाक्षेत्र अंतर्गत पीवी 105 में रहता है. जहां 10 साल पहले नक्सलियों ने परिवार के मुखिया की हत्या कर दी थी.हत्या के बाद डर से महिला अपने तीन बच्चों के साथ जगदलपुर में रहने लगी.नक्सल हिंसा शांत होने के बाद परिवार वापस अपने गांव लौटा. लेकिन दबंगों ने अब हुक्का पानी बन्द कर दिया है . सूचना के बाद भी पुलिस और प्रशासन से अब तक किसी प्रकार का मदद परिवार तक नही पहुंचाई है.जिससे परिवार डर के साए में जीने को मजबूर है.
पीड़ित परिवार ने बताई आपबीती :पीड़ित सुषमा हालदार ने बताया कि ” 10 साल पहले मेरे पति को पुलिस मुखबिर के शक में नक्सलियों ने मेरे ही सामने गोली मार कर हत्या कर दी थी. उसके बाद नक्सलियों के डर से तीन बच्चों को लेकर जगदलपुर आ गई. क्षेत्र में नक्सली दहशत कम होने के बाद फिर से गांव पीवी 106 में आकर अपने बच्चों के साथ खेती किसानी कर रही हूं.स्कूल में रसोईयां का काम करने के साथ अपनी बेटियों की पढ़ाई का जिम्मा उठा रही हूं.लेकिन अब गांव के गुंडे परेशान करते हैं. परिवार का हुक्का पानी बंद कर दिया गया है. गांव में हमारी मदद करने वालों पर जुर्माने का फरमान सुनाया गया है.”
पुलिस ने कही कार्रवाई की बात :पूरे मामले की सूचना मिलते ही एसपी शलभ सिन्हा ने तत्काल एक्शन लेते हुए बांदे थाना प्रभारी समेत पुलिस टीम गांव भेजी है. जो पीड़ित परिवार को सुरक्षित थाने लेकर आ रही है.एसपी शलभ सिन्हा ने कहा है कि ” पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जाएगी. जो भी दोषी होगा. उस पर कड़ी कार्यवाई की जाएगी. किसी भी व्यक्ति का हुक्कापानी बंद करने का अधिकार इस तरह कानून नहीं देता है.आज भले ही नक्सली क्षेत्रों में शांति कायम हो गई हो.लेकिन अब वहां रहने वाले असामाजिक तत्व अशांति कायम करके अपना उल्लू सीधा करना चाह रहे हैं. ऐसे में पुलिस को चाहिए कि बदमाशों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे.
कांकेर:कांकेर में भालू सिटी सेटर मॉल घूम रहा है. जिसका वीडियो सामने आया है. वीडियो में साफ तौर पर देखा जा रहा है कि भालू सिटी सेंटर मॉल के आसपास घूम रहा है. लगातार शहर में भालुओं की दस्तक से लोग खौफजदा हैं.
नेशनल हाईवे पर घूमता दिखा भालू
भालू इस बार कांकेर नगर के सिटी सेंटर मॉल में घूमता नजर आया है. सिटी सेंटर मॉल के बाद नेशनल हाइवे 30 में भालू काफी देर तक घूमता रहा. खास बात यह है कि यहां से 100 मीटर दूर वनपरिक्षेत्र अधिकारी कार्यालय मौजूद है. लगातार भालुओं के शहर में आने से लोगों में खौफ है. भालुओं को शहर आने से रोकने में वन विभाग भी विफल साबित हो रही है.
बिल्डमार्ट में कर्मचारी ने बचाई थी जान:कांकेर में दो दिन पहले नगर से सटे चोपड़ा बिल्डमार्ट में दिनदहाड़े भालू का तांडव देखने को मिला. बिल्डमार्ट में भालू को देख वहां के कर्मचारी को भाग कर अपनी जान बचानी पड़ी थी. ये पूरा वाकया बिल्डमार्ट में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया था.
पानी की तलाश में शहर की ओर आते हैं जानवर
:गर्मी का मौसम आते भोजन और पानी की तलाश में भालू शहर की ओर आ जाते हैं. यही कारण है कि गर्मियों में इनका तांडव शहर में अधिक देखने को मिलता है. कांकेर शहर चारो ओर पहाड़ और जंगलो है. नगर के आस-पास के जंगलो में भालू की संख्या अधिक है. अक्सर भोजन पानी की तलाश में भालू जंगल से नगर की ओर रुख करते हैं. जंगलो में छोटे-छोटे डबरी जानवरो के लिए बनाए गए हैं. गर्मी के दिनों में ये डबरी सूख जाते हैं. फलदार वृक्षों की संख्या भी जंगलो में घटने लगती है. ऐसे में भालू नगर की ओर आ जाते हैं.
वन विभाग का जामवंत परियोजना
:कांकेर नगर के आस-पास शिवनगर-ठेलकाबोड़ के पहाड़ियों में साल 2014-2015 में 30 हजार हेक्टेयर भूमि में वन विभाग ने भालू विचरण क्षेत्र बनाया था, जिसका नाम जामवंत परियोजना दिया गया था. इस परियोजना के तहत अमरूद, बेर, जामुन जैसे फलदार वृक्ष लगाना था. वन विभाग ने फलदार पौधा तो लगाए लेकिन कोई भी पेड़ फल देने लायक नहीं बन पाया. यही कारण है कि अब जंगली भालुओं को शहर की तरफ भोजन के लिए आना पड़ता है.
CG BREAKING : नक्सलियों की साजिश, IED की चपेट में आए BSF के 2 जवान, जानिए कैसे हुआ हादसा…! कांकेर. छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नक्सली लगातार घटनाओं को अंजाम देकर अपनी मौजूदगी दर्ज कर रहे हैं. आज कांकेर जिले के चिलपरस के पास बीएसएफ (BSF) के दो आईईडी (IED) की चपेट में आ गए. IED की चपेट में आने से दोनों जवान घायल हो गए हैं. घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
बीएसएफ के जवान एरिया डोमिनेशन में निकले थे. चिलपरस के पास बने नाले में नक्सलियों ने आईईडी प्लांट कर रखी थी तभी दो जवान आईईडी के चपेट में आने से घायल हो गए. घायल जवानों का नाम सुशील कुमार और छोटूराम बताया जा रहा है. घायल जवानों को उपचार के लिए कोयलीबेड़ा अस्पताल लाया गया है. इस घटना की पुष्टि पुलिस अधीक्षक शलभ कुमार सिन्हा ने की है.
चारामा के ग्राम चावड़ी में मिली जलती हुई कार की गुत्थी सुलझी, कांकेर पुलिस को मिली बड़ी सफलता…!
कांकेर। पुलिस अधीक्षक कांकेर शलभ कुमार सिन्हा के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री अविनाश ठाकुर एव अनुविभागीय अधिकारी पुलिस श्री मोहसिन खान के पर्यवेक्षण में जिला कांकेर पुलिस द्वारा थाना चारामा के ग्राम चावड़ी में मिले जलती हुई कार की गुत्थी को सुलझा लिया गया है चारों गुमशुदा व्यक्तियों को सकुशल बरामद कर लिया गया है पुलिस ने बीमा की राशि गई साजिश का भी पर्दाफाश कर लिया है मामले का विवरण इस प्रकार है कि थाना चारामा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम चावड़ी में दिनांक 01.03.2023 की रात्रि में चारामा कोरर मार्ग पर एक जलती हुई कार होने की सूचना मिली थी, उक्त सूचना पर थाना चारामा पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची परंतु तब तक कार पूरी तरह जल चुकी थी, जिस संबंध में पतासाजी के दौरान दिनांक 02/03/23 की प्रातः उक्त जली हुई कार पखांजूर पिव्हि 42 निवासी बिपुल सिकदार के स्वामित्व का होना ज्ञात हुआ था, मौके पर कार स्वामी के पुत्र हर्षित सिकदार ने जली हुई कार की पहचान कर पुलिस को जानकारी दिया था कि उक्त कार मारुति xl6 में पखांजूर पिव्हि 42 निवासी समीरन सिकदार पिता विपुल सिकदार उम्र 29 वर्ष,उसकी पत्नी जया सिकदार उम्र 26 वर्ष, अपने बेटे दीप सिकदार उम्र 9 वर्ष एवं पुत्री कृतिका सिकदार उम्र 4 वर्ष के साथ रायपुर इलाज हेतु दिनांक 01/03/23 को गए हुए थे जोकि अपने परिवार से मोबाइल फोन पर लगातार संपर्क में थे रायपुर से वापसी के दौरान धमतरी पहुंचकर उन्होंने अपने पिता एवं परिवार के लोगों को धमतरी में होटल में रात्रि भोजन कर पखांजूर हेतु कार से निकलने की बात भी बताई थी ग्राम चावड़ी में वही कार जली हुई अवस्था में मिली थी, परंतु कार सवार चारों व्यक्तियों का कोई पता नहीं था, पुलिस द्वारा उक्त जली हुई कार की जांच मौके पर फॉरेंसिक टीम से कराई गई कार की जांच में कोई मानव अवशेष होना नहीं पाया गया था,परंतु कार में 2 नग जले हुए मोबाइल मिले थे इससे यह आशंका थी कि कार सवार व्यक्तियों का अपहरण अथवा हत्या भी हो सकता है परिजन बार-बार इस बात की आशंका भी व्यक्त कर रहे थे, थाना चारामा में चारों लापता व्यक्तियों के संबंध में परिजनों की रिपोर्ट पर चारों व्यक्तियों की गुमशुदगी की रिपोर्ट गुम इंसान क्रमांक11,12,13,14 दर्ज कर पता तलाश किया जा रहा था, पुलिस अधीक्षक कांकेर श्री शलभ कुमार सिन्हा ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए गुमशुदा व्यक्तियों की पतासाजी हेतु 5 पुलिस टीम गठित किया था पतासाजी हेतु आवश्यक दिशा निर्देश दिए थे, होटलों की चेकिंग के दौरान पुलिस को जानकारी 00प्राप्त हुई कि धमतरी स्थित आशियाना लाज में उक्त लापता परिवार दिनांक 01.03.2023 की रात्रि में रुका हुआ था, तथा पुलिस को गुमशुदा व्यक्तियों के मोबाइल नंबरों के कॉल रिकॉर्ड की तस्दीक करने पर ज्ञात हुआ की गुमशुदा हुए समिरन सिकदार ने रायपुर स्थित अजय फोटो स्टूडियो में अपने 93 फोटो प्रिंट कराने हेतु दिए थे, जिसे दिनांक 02.03.2023 को समीरन सिकदार फोटो को ले जा चुका था, जानकारी होने पर पुलिस आश्वस्त थी कि चारों व्यक्ति का अपहरण नहीं हुआ है और वे स्वयं से ही छिप रहे हैं उक्त संबंध में पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में पुलिस की विभिन्न टीमें लगातार पतासाजी कर रही थी जांच के दौरान पुलिस टीमों द्वारा पखांजूर से रायपुर तक सेल आईडी के टावर डंप में 900000 से अधिक मोबाइल नंबरों का साइबर सेल द्वारा विश्लेषण कर 45000 मोबाइल नंबरों को शॉर्टलिस्ट कर तस्दीक किया जा रहा था तथा पखांजूर से रायपुर के मध्य लगभग 1000 सीसीटीवी कैमरे के फुटेज खंगाले गए 300 से अधिक होटलों की चेकिंग की गई, रेलवे स्टेशन बस स्टैंड, ऑटो स्टैंड, एयरपोर्ट की जांच की गई, पुलिस परिजनों एवं समीरन सीकदार के व्यवसाय से जुड़े लोगों से भी लगातार पूछताछ कर रही थी तभी दिनांक 13/03/23 की रात्रि में गुमशुदा हुए समीरन सिकदार ने अपने फार्म हाउस के वर्करों के माध्यम से मोबाइल पर पुलिस से संपर्क कर अपने को परिवार सहित पीवी 42 में पहुंचने की बात बताई तब पुलिस द्वारा तत्काल अभिरक्षा में लेकर पूछताछ किया गया पूछताछ में समीरन सिकदार एवं उसकी पत्नी जया सिकदर ने पूछताछ में बताया कि कुछ दिनों से व्यापार में नुकसान होने से वह परेशान थे इसी दौरान उन्होंने पूरे परिवार का इंश्योरेंस भी कराया था बीमा पॉलिसी के अनुसार मृत्यु होने पर 72 लाख रुपया के भुगतान का प्रावधान था इसी लालच में पति ने योजना बनाई थी कि कार को जला देंगे और पत्नी जया को गुमराह कर गायब हो जाएंगे जिससे लोग उसे कार में जलकर मृत होना समझ जाएंगे और बीमा कंपनी 72 लाख रुपया भुगतान कर देगी जिससे व्यापार में नुकसान की भरपाई भी हो जाएगी और पखांजूर से दूर किसी दूसरे स्थान पर नए तरीके से अपना जीवन यापन करेंगा। योजना के अनुसार समिरन सिकदार ने पत्नी जया सिकदार अपने दोनों बच्चों के साथ रायपुर आने के दौरान धमतरी आशियाना लॉज में रुका वहां से रात्रि भोजन कर समीरन सिकदार ने अपनी पत्नी जया एवं बच्चों को लाज में छोड़कर कार को लेकर चारामा पहुंचा चारामा में पेट्रोल पंप से पेट्रोल खरीदा और चारामा कोरर मार्ग पर ग्राम चावड़ी पहुंचकर योजनाबद्ध तरीके से पूर्व से निर्धारित स्थल पर कार को पेड़ से टकरा कर खड़ा कर दिया और पेट्रोल छिड़ककर माचिस से आग लगा दिया और पैदल खेत जंगल के रास्ते चारामा पहुंचा चरमा से बस में सवार होकर धमतरी पहुंचा और अपने परिवार को होटल आशियाना लॉज से लेकर रायपुर चला गया रायपुर में अजय फोटो स्टूडियो से फोटो लिया और बस में सवार होकर इलाहाबाद चला गया इलाहाबाद में 1 दिन रुका और दूसरे दिन ट्रेन में सवार होकर पटना गया पटना में मोबाइल तथा दूसरे के नाम का चालू मोबाइल नंबर खरीदा और अपने मोबाइल पर दैनिक मोबाइल ऐप डाउनलोड कर खबरों को देखा तो उसे ज्ञात हुआ कि उसकी स्वयं को परिवार सहित जलकर मर जाने और मृत्यु उपरांत बीमा की रकम ले लेने की योजना विफल हो गई है वह धमतरी के लॉज तथा फोटो स्टूडियो में लोकेट हो गया हैं जिससे पुलिस को चारों गुमशुदा का जानबूझकर लापता होने का षड्यंत्र करना ज्ञात हो गया है तब वह पुलिस से बचने के लिए पटना से, गुवाहाटी चला गया होटल में रुका रहा वह न्यूज़ एप लगातार कांकेर की खबरें देख रहा था उसे अंदेशा हो गया था कि वह बहुत जल्दी पुलिस के गिरफ्त में आ जाएगा सजा के भय से वह गुवाहाटी से संबलपुर आ गया संबलपुर से प्राइवेट टैक्सी में पखांजूर पिव्हि 42 पहुंचा और अपने फार्म हाउस के वर्करों के माध्यम से पुलिस से फोन पर संपर्क किया । पुलिस ने चारों गुमशुदा को पीवी 42 से बरामद किया गया गया है। सिमरन सीकदार के कब्जे से 504000 नगदी रकम मोबाइल फोन भी बरामद किया गया है। सम्पूर्ण जांच पर समीरन सिकदार के द्वारा धारा 435,427,120,420,511 भादवि के अंतर्गत अपराध घटित करना पाए जाने से अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया सिमरन सीकदर को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड में भेजा जा रहा है । पुलिस प्रत्येक पहलू पर जांच कर रही है गुमशुदा समीरन सीकदार से प्राप्त जानकारी के आधार पर रुके हुए स्थान एवं होटलों से संपर्क स्थापित कर तस्दीक किया जा रहा है। सहायता करने वाले लोगों की संलिप्तता प्रमाणित पाए जाने पर वैधानिक कार्यवाही की जावेगी।
Bear in Kanker City कांकेर में बीच सड़क पर घूमता दिखा भालू…!
गर्मी का मौसम आते ही फिर एक बार भोजन-पानी की तलाश में भालू कांकेर शहर की गलियों में घूमते देखे जा रहे हैं. एकता नगर में आज सुबह 8 बजे एक भालू सड़कों में दौड़ते देखा गया. नगर के शिक्षक पवन सेन ने भालू के बीच सड़क में घूमने का वीडियो बना लिया. पवन सेन ने बताया कि अक्सर भालू सड़कों में इस तरह घूमते देखा गया है. हालांकि अभी तक किसी प्रकार का नुकसान भालू ने नही पहुंचाया है. नगर चारों तरफ से पहाड़ियों और जंगलों से घिरा हुआ है.
नगर के आस-पास के जंगलों में भालू की बहुतायत संख्या है. अक्सर भोजन पानी की तालाश में भालू जंगल से नगर की ओर रुख कर जाते हैं. जंगलों में छोटे-छोटे डबरी जानवरों के लिए बनाए गए है लेकिन गर्मी के शुरुआती समय में ही डबरी सूखने की कगार पर है. फलदार वृक्षों की संख्या भी जंगलों में घट रही है जिसके चलते भालू नगर की ओर आ जाते है. भालुओं के इस तरह नगर में विचरण से लोगों में दहशत का माहौल रहता है. शहर के आस-पास शिवनगर-ठेलकाबोड के पहाड़ियों में 2014-2015 में 30 हजार हेक्टेयर भूमि में वन विभाग ने भालू विचरण और रहवास क्षेत्र बनाया था. जिसका नाम जामवंत परियोजना दिया गया था. इस परियोजना के तहत अमरूद, बेर, जामुन जैसे फलदार वृक्ष लगाना था. वन विभाग ने फलदार पौधा तो लगाए लेकिन कोई भी फल देने लायक नहीं बन पाया जिसके कारण अब जंगली भालुओं को शहर की तरफ भोजन के लिए आना पड़ता है.
बस्तर कांकेर : कंदीय फसलों पर आधारित एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण का आयोजन…!
अखिल भारतीय समन्वित कंद फसल अनुसंधान परियोजना के अंतर्गत एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन कृषि महाविद्यालय एवं अनुसन्धान केंद्र सिंगार-भाट कांकेर के द्वारा भानुप्रतापपुर विकासखंड के ग्राम चलेवा में किया गया ! परियोजना के प्रभारी डॉ फूलसिंह मरकाम के द्वारा कार्यक्रम की रूप रेखा और कंदीय फसलों की संभावना के बारे में विस्तार से बताया गया ! डॉ नितिन कुमार रस्तोगी, अधिष्ठाता ने कंदीय फसलों के महत्त्व पर प्रकाश डालते हुये सेमरकंद, जिमिकंद, कोचई के पोषक तत्व और मानव शरीर पर उनके प्रभाव के बारे में कृषको को जानकारी दी! अखिल भारतीय समन्वित कंद फसल अनुसन्धान परियोजना की प्रमुख अन्वेष्क डॉ पदमाक्षी ठाकुर ने इस परियोजना के अंतर्गत शोध की जाने वाली सभी कंदीय फसल सेमरकांदा, जिमिकांदा, अरोरुट, तिखुर, डांगकांदा, कोचई, बैचाँदी, केउकांदा, नागरकांदा आदि फसलों की खेती और किस्मों के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी देते हुये कृषको के सवालों के जवाब दिये! डॉ जीवन सलाम, सह प्राध्यापक ने कंदीय फसलों के किस्मों और किस्म बनने की प्रकिया के साथ साथ पारम्परिक महत्व को उजागर किये! कार्यक्रम में ग्राम प्रमुख रामदूलार भेड़िया, समाज प्रमुख विसम्भर बंजारे, सतनामी समाज संरक्षक नरहरि कटेले, पुनीत राम गेंदले वार्ड पंच, सतनामी समाज प्रमुख नरोत्तम दास कटेले ने कृषको के समक्ष अपने विचार प्रकट किये! कार्यक्रम का संचालन अनिल नेताम सहायक प्राध्यापक ने किया! इस अवसर पर प्रदीप गंजीर, खेमेश्वर, सचिन, गोवर्धन खुटले सहित बड़ी संख्या में महिला पुरुष कृषक शामिल हुये! कार्यक्रम में उपस्थित कृषको को कंदीय फसलों के बीज, कृषि उपकरण और सब्जी के बीज का वितरण किया गया!