‘बेटी की शव के साथ पुलिस ने की रिश्वत की पेशकश’; कोलकाता कांड में डॉक्टर के परिजन का संगीन आरोप

राजेन्द्र देवांगन
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मृतका के पिता ने कहा कि हमें इन प्रदर्शनों में हिस्सा लेना ही होगा। आखिर हम और कर भी क्या सकते हैं? चीजें बहुत धीरे-धीरे हो रही हैं। हम इसे बर्दाश्त नहीं कर सकते। हमारे बहुत सारे सवाल हैं और हम सब कुछ पुलिस से पूछेंगे।

कोलकाता के अस्पताल में महिला डॉक्टर के दुष्कर्म और हत्याकांड का मामला लगातार बढ़ता ही जा रहा है। चिकित्सकों के साथ आमजन भी जोर-शोर से इसे लेकर किए जा रहे आंदोलन में हिस्सा ले रहे हैं। इस बीच, ट्रेनी डॉक्टर के माता-पिता ने पुलिस पर संगीन आरोप लगाए हैं। मृतका डॉक्टर के परिवार ने दावा है कि जब उन्हें शव सौंपा गया था तो एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने मामला दबाने के लिए उन्हें रिश्वत देने की कोशिश की थी, जिसे उनके द्वारा अस्वीकार कर दिया गया।

विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए मृतका के परिजन

मृतका के परिजन का ये बयान तब आया है, जब बुधवार को उन्होंने पहली बार अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए हो रहे प्रदर्शनों में हिस्सा लिया। मृतका के पिता ने इस मौके पर कहा कि हमें इन प्रदर्शनों में हिस्सा लेना ही होगा। आखिर हम और कर भी क्या सकते हैं? चीजें बहुत धीरे-धीरे हो रही हैं। हम इसे बर्दाश्त नहीं कर सकते। हमारे बहुत सारे सवाल हैं और हम सब कुछ पुलिस से पूछेंगे।

पुलिस पर लगाए संगीन आरोप
इस दौरान उन्होंने पुलिस पर कथित तौर पर बिना गहन जांच के मामले को बंद करने का प्रयास करने का भी आरोप लगाया। मृतका डॉक्टर के पिता ने आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस ने शुरू से ही मामले को दबाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि घटना की रात उनकी बेटी का शव श्मशान ले जाने के लिए मजबूर किया गया। बिना किसी जांच के ही कह दिया गया कि उनकी बेटी ने आत्महत्या की है। फिर जब हम 12:10 बजे अस्पताल पहुंचे, तो बेटी के चेहरे को देखने के लिए तीन घंटे तक सेमिनार हॉल के बाहर बैठाया गया। हमें शव देखने की अनुमति नहीं दी गई। इतना ही नहीं, शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाने तक हमें पुलिस स्टेशन में इंतजार करना पड़ा।

पुलिस ने की रिश्वत देने की कोशिश

पिता ने बताया कि अस्पताल प्रशासन की ओर से उस दिन किसी ने भी उनके साथ बात नहीं की। उस रात उनकी बेटी का शव कैसे ले जाया गया, उसकी भी उन्होंने जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हम अंतिम संस्कार करना नहीं चाहते थे, शव को यथासंभव छोड़ देना चाहते थे, लेकिन हमारे ऊपर दबाव डाला गया। हम एक घंटे तक थाने में बैठे रहे। मजबूरी में घर लौट गए। घर जाकर देखा कि वहां 400 पुलिस वाले खड़े थे। तब हमारे पास कुछ करने का विकल्प नहीं था, हमें शव को जलाना पड़ा। लेकिन उस दिन श्मशान का खर्च किसने उठाया, यह हम आज तक नहीं जान पाए हैं। आगे उन्होंने कहा कि बाद में जब शव हमें सौंपा गया तो एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने हमें रुपये देने की कोशिश भी की।

आरजी कर मामले में अब तक क्या हुआ
बता दें कि 8-9 अगस्त की दरम्यानी रात हुई वारदात के बाद से आरजी कर मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टर की दुष्कर्म के बाद हत्या का मामला राष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है और पूरे देश में डॉक्टर हड़ताल पर हैं। कोलकाता के अलावा देश के कई हिस्सों में जनाक्रोश और विरोध-प्रदर्शन देखा गया। कोलकाता हाईकोर्ट के निर्देश के बाद सीबीआई घटना की जांच कर रही है। इस मामले में जमकर सियासत भी हो रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और विपक्षी दल भाजपा आमने-सामने है।

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