हजार साल पुराने चित्र और 54 करोड़ साल पहले बने शैलाश्रय, भीमबेटका में अब नए सिरे से मानव इतिहास की खोज…!

राजेन्द्र देवांगन
3 Min Read
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भीमबेटका की गुफाओं की कुछ विशेषताएंं क्या हैं, कि इन्हें भारत की ऐतिहासिक धरोहर..!
भोपाल. मानव विकास को लेकर सालों से खोज चलती आ रही है. आदि मानव काल के इतिहास से जुड़े सैकड़ों प्रमाण मध्यप्रदेश के भोपाल और कई स्थानों पर मौजूद हैं, जो यह बताते हैं कि मध्यप्रदेश के जंगलों में तकरीबन 10 हजार सालों से इंसानों का वजूद रहा है. विश्व धरोहर स्थानों में शामिल भीमबेटका में पाई गई रॉक पेंटिंग की उम्र करीबन दस हजार साल मानी जाती है,

लेकिन यहां नए सिरे से मानव इतिहास की खोज की जा रही है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यहां इंसानों की मौजूदगी कितने हजार साल पुरानी है. इसमें करीबन 1 साल का वक्त लगेगा।

13 पुरातत्वविदों की टीम कर रही अध्ययन
विश्व धरोहर साइट भीमबेटिका में अध्ययन के लिए एक नई साइट को चुना गया है. इसे सेक्टर नंबर बी-9 नाम दिया गया है. इस अध्ययन की जिम्मेदारी भोपाल सर्कल के अधीक्षण पुरातत्वविद् मनोज कुमार कुर्मी को दी गई है. उनके नेतृत्व में 13 पुरातत्वविदों  की टीम एब्सोल्यूट डेटिंग कर रही है. मनोज कहते हैं, ‘

कार्बन डेटिंग से यह तो पता लगाया जा चुका है कि शैलाश्रय पर पेंटिंग की उम्र 10 हजार साल पुरानी है, यानी 10 हजार साल पहले यहां इंसानों ने यह पेंटिंग बनाई थी, लेकिन यह पता नहीं लगाया जा सका कि इंसानों की गतिविधियां कितने हजार सालों से यहां थी.

10 हजार साल से भी ज्यादा वक्ते से थीं इंसानी गतिविधि?
मनोज आगे कहते हैं, इंसानों की गतिविधियां कितने हजार सालों से यहां थी यही इस अध्ययन के माध्यम से पता लगाने की कोशिश की जा रही है.

इसके लिए एब्सोल्यूट डेटिंग की जा रही है. इसमें माइक्रो कंटूरिंग, ले आउटिंग, फोटोग्राफी और स्क्रिप्टिंग की जाती है. इसके बाद यहां मिलने वाले नमूनों को लैब भेजा जाएगा. एब्सोल्यूट डेटिंग के दौरान यह सावधानी रखी जाती है कि नमूनों पर प्रकाश न पड़े.

इसके लिए कई उपकरणों का उपयोग किया जाता है. यही वजह है कि इस अध्ययन में काफी वक्त लगता है.

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