नकसल प्रभावित दंतेवाड़ा में बच्चों को खेलते हुए मिले पैरा बम ,,,, गांव में मचा हड़कंप ,,, जांच में जुटी पुलिस

राजेन्द्र देवांगन
3 Min Read
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement

खिलौना समझ पैरा बम से खेल रहे थे बच्चे:दंतेवाड़ा के खेत में मिले, सर्चिंग में जवान करते हैं इस्तेमाल; BDS टीम ने किए नष्ट

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के एक गांव के खेत में 4 पैरा बम मिले हैं। बताया जा रहा है कि बच्चे इस बम को खिलौना समझ कर खेल रहे थे। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की नजर जब इस पर पड़ी तो उन्होंने इसकी जानकारी गांव वालों को दी। ग्रामीणों ने पुलिस को बताया। जिसके बाद BDS (बम निरोधक दस्ता) की टीम मौके पर पहुंची और बम को नष्ट किया गया। वहीं, अफसरों ने कहा कि गांव के नजदीक बम कहां से आए इस मामले की जांच की जा रही है।

जानकारी के मुताबिक, जिले के चूडिटिकरा-मांझीपदर इलाके में ये सारे बम मिले हैं। आंगनबाड़ी के बच्चे खेलते हुए खेत तक पहुंच गए थे। जहां उन्हें एक ही जगह ये सारे बम दिखे। बच्चों ने खिलौना समझ कर बम को हाथों में उठा लिया था। जिसके बाद कुछ देर तक इससे खेलते रहे, लेकिन थोड़ी देर में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता यहां पहुंच गई। इन्होंने बच्चों के हाथ से बम छुड़वाए। फिर इसकी जानकारी गांव के लोगों को दी गई।

जांच के लिए गठित की गई टीम
दंतेवाड़ा के SP सिद्धार्थ तिवारी ने बताया कि गांव वालों की तरफ से शुक्रवार को जानकारी मिली थी। फौरन जवानों को मौके पर भेजा गया था। सभी बम एक्सपायर थे। सभी को नष्ट कर दिया गया है। यह बम गांव के नजदीक खेतों में कहां से आए इस मामले की जांच की जा रही है। जांच के लिए एक टीम भी गठित की गई है। पूरी जांच होने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।

रोशनी के लिए किया जाता है उपयोग
एक्सपर्ट्स बताते हैं कि इस पैरा बम का इस्तेमाल रोशनी के लिए किया जाता है। जवान जब भी सर्चिंग के लिए निकलते हैं तो अपने पास पैरा बम भी रखते हैं। यह खतरनाक नहीं है। मुठभेड़ के दौरान इस बम को आसमान में छोड़ा जाता है। आसमान में कुछ मीटर की दूरी जाकर यह फटता है, जिससे निकलने वाली रोशनी काफी तेज और बहुत दूर तक फैलती है। इससे छिपे हुए दुश्मनों को आसानी से देखा जा सकता है।

इस बम का इस्तेमाल बस्तर के जंगलों में ज्यादा नहीं हो पाता, क्योंकि यहां घनी झाड़ियां हैं, इसलिए बस्तर में यह कारगर साबित नहीं हो पाता। इसका ज्यादातर इस्तेमाल खुले मैदान वाले इलाके में किया जाता है।

Share This Article