धनतेरस क्यों और कैसे मनाया जाता है :- शेषाचार्य जी महाराज

राजेन्द्र देवांगन
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धनतेरस क्यों और कैसे मनाया जाता है :- शेषाचार्य जी महाराज

धनतेरस का नाम लेते ही दिमाग में सबसे पहला ख्याल आता है दीपावली का, इस त्यौहार को पुरे भारत वर्ष ही नहीं बल्कि दुनिया के अन्य कई हिस्सों में भी काफी धूमधाम से मनाया जाता है। धनतेरस को आम तौर पर 5 दिनों तक मनाई जाने वाली दीपावली के पहले दिन मनाया जाता है।
धनतेरस क्या है?
धनतेरस को अन्य दूसरे नाम धनत्रयोदसी के नाम से भी जाना जाता है। यही वह दिन है जिसके आते ही दिवाली का उत्सव शुरू हो जाता है। अगर बात की जाए धनतेरस के शाब्दिक अर्थ के बारे में तब आपको बता दें की “धन” का अर्थ होता है संपत्ति और दौलत और वहीं इसके अंतिम में जुड़े शब्द “तेरस” का संस्कृत में अर्थ होता है त्रयोदसी अर्थात हिन्दू केलिन्डर के अनुसार विक्रम संवत का तेरहवां दिन।
धनतेरस क्यों मनाया जाता है?
हिन्दू पैराणिक कथाओं के अनुसार धनतेरस को मनाने के पीछे कई सारे कारण और कहानियां है उनमे से कुछ कहानियां इस प्रकार हैं:
सांप के रूप में यमराज की कहानी
एक बार किसी राजा के पुत्र की की जन्म कुंडली देखी गयी, जिसमे यह लिखा था की उसके विवाह के पश्चात चौथे दिन ही सर्पदंश अर्थात सांप के काटने पर उसकी मृत्यु हो जाएगी। इस समस्या को सुलझाने के लिए राजा की पुत्र वधु ने सोने से पहले अपने सारे गहने और जेवर दरवाजे पर रख दिए जिसके पश्चात सर्प के र्रोप में आये हुए यमराज की आँखें सोने, अलंकार को देखकर चौंक गयी।
केवल यही नहीं सांप घर के अंदर प्रवेश न कर सके इसके लिए राजा की पुत्र वधु ने पूरी रात मधुर आवाज में गाने गाये जिससे सांप का ध्यान भाटकक गया और वह काटना भूल गया और फिर वापस चला गया।
समुद्र मंथन की कहानी
हिन्दू पैराणिक कथाओं के अनुसार एक अन्य कहानी समुद्र मंथन से जुड़ी हुई है। ऐसी मान्यता है की कृष्ण पक्ष के त्रयोदशी के दिन जी समुद्र मंथन की गयी थी जिसके फलस्वरूप माता लक्ष्मी और भगवान् धन्वंतरि प्रकट हुए थे। जब ये दोनों प्रकट हुए थे, तब भगवान् धन्वंतरि के हाथों में कलश था जो अमृत से भरा हुआ था। वहीं माता लक्ष्मी के हाथों में कौड़ी थी। इसलिए ऐसी मान्यता है की धनतेरस के दिन नए बर्तन की खरीदारी को शुभ माना गया है।
धनतेरस कब मनाया जाता है?
धनतेरस को केवल हिन्दू ही नहीं बल्कि जैन धर्म को मानने वाले लोग भी मनाते हैं। प्रत्येक वर्ष धनतेरस पर्व को हिन्दू केलिन्डर के अनुसार कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष के त्रयोदसी अर्थात तेरहवें दिन काफी धूम-धाम से मनाया जाता है। यही वह दिन है जिसमे भगवान् धन्वन्तरि और माता लक्ष्मी समुद्र मंथन के दौरान प्रकट हुए थे।
धनतेरस पर्व कैसे मनाते हैं?
बाजार से किसी भी धातु की खरीदारी जैसे सोना, चांदी या फिर स्टील के बर्तन को भी खरीद कर आप इस पर्व को मना सकते हैं। अगर आप किसी धातु को खरीदने में सक्षम नहीं हैं जब आप एक झाड़ू की खरीदारी इस दिन अवश्य करें। वैसे बहुत सारे लोग इस दिन अन्य कई प्रकार के वस्तुओं की भी खरीदारी करते हैं जिसमे इलेक्ट्रॉनिक्स सामान मुख्य रूप से शामिल हैं। इस दिन बाजार की रौनक देखते ही बनती है।
इसके साथ ही इस पर्व को मनाने के लिए धनतेरस के दिन सूर्य अस्त के बाद घर पर धन कुबेर की पूजा अर्चना करें और साथ ही घर पर डीप जलाएं और भगवान् पर फूल माला और प्रसाद इत्यादि अर्पित करें।

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