गिरौदपुरी धाम पर्यटन स्थल

राजेन्द्र देवांगन
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गिरौदपुरी धाम पर्यटन स्थल

छत्तीसगढ़ की सबसे महत्वपूर्ण आस्था स्थली कही जाती है और यह पर्यटकों तथा श्रद्धालुओं को सूर्य और प्रकृति के समागम के दर्शन कराता प्रतीत होता है। महानदी और जोंक नदी के संगम पर स्थित गिरौदपुरी धाम, बिलासपुर से करीब 80 किमी की दूरी पर स्थित है। एक बेहद पवित्र धार्मिक स्थल होने के साथ-साथ यह जगह छत्तीसगढ़ में सतनामी पंथ के संस्थापक श्री गुरु घासीदास जी की जन्मस्थली के रूप में प्रसिद्ध है।

इस जगह का आध्यात्म और इतिहास से बहुत गहरा नाता रहा है। और सबसे विशेष बात यह है कि सतनामी पंथ के संस्थापक श्री गुरु घासीदास जी के जन्मस्थली होने के नाते देश-विदेश से पर्यटक यहां आध्यात्मिक ज्ञान की खोज में यहां आते हैं।

श्री गुरु घासीदास जी के बारे में प्रचलित है कि वह एक बहुत ही साधारण किसान परिवार में जन्में थे और जैतखाम के ठीक बगल में आज भी उनके बैठने का स्थान स्थापित है। ऐसा भी कहा जाता है कि आत्मज्ञान की प्राप्ति के लिए उन्होंने औराधरा वृक्ष के नीचे तपस्या की थी, जो अब तपोभूमि के नाम से प्रचलित है।

अमृत कुंड. गिरौदपुरी से महज 1 किमी की दूरी पर स्थित इस जगह का इतिहास बहुत रोचक है। कहा जाता है कि यहां पर पीने के पानी की बहुत किल्लत रहती थी और प्रशासन के तमाम प्रयासों के बावजूद यह समस्या दूर नहीं हो पा रही थी।

तब एक स्थानीय साधु ने लोगों की मदद करने के उद्देश्य से अपनी दैवीय शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए एक पहाड़ के हिस्से को अपने अंगूठे से छूकर एक गढ्ढे में तब्दील कर दिया,

जहां से मीठे पानी की जलधारा फूट पड़ी। फिर जिस कुंड में इस पानी का भंडारण किया जाने लगा उसे अमृत कुंड का नाम दिया है।
आपको यहां आकर एक अलग ही प्रकार का अनुभव प्राप्त होगा।

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