शिक्षक संघर्ष मोर्चा फिर बनेगा शिक्षकों की समस्याओं का खेवनहार. TET में छूट, पूर्व सेवा अवधि की गणना, केंद्रीय वेतनमान सहित पांच प्रमुख मांगों को लेकर एकजुट हुए शिक्षक संगठन

Jagdish Dewangan
5 Min Read

मुंगेली—- प्रदेश के शिक्षकों की लंबे समय से लंबित समस्याओं के समाधान को लेकर छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा एक बार फिर सक्रिय हो गया है। शिक्षकों के हितों को लेकर छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन, छत्तीसगढ़ शालेय शिक्षक संघ एवं संयुक्त शिक्षक संघ के प्रमुख नेतृत्वकर्ताओं ने एकजुट होकर संघर्ष का शंखनाद किया है। मोर्चा द्वारा शिक्षकों की प्रमुख पांच मांगों को लेकर 18 अगस्त को प्रदेश के शिक्षा मंत्री, शिक्षा सचिव एवं संचालक डीपीआई से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा जाएगा। इस दौरान शिक्षक हित से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा कर समस्याओं के समाधान की मांग की जाएगी। शिक्षक संघर्ष मोर्चा के जिला संयोजक बलराज सिंह, दीपक वेंताल एवं लक्ष्मीकांत जडेजा ने बताया कि प्रदेश के शिक्षक लंबे समय से विभिन्न विसंगतियों और विभागीय आदेशों से परेशान हैं। ऐसे समय में पुराने भरोसेमंद शिक्षक नेतृत्व के साथ पुनः एकजुट होकर संघर्ष करने का निर्णय लिया गया है।

उन्होंने कहा कि संविदा शिक्षक से लेकर शासकीय शिक्षक बनने तक हुए अनेक संघर्षों में संजय शर्मा, वीरेंद्र दुबे एवं केदार जैन के नेतृत्व ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके नेतृत्व में शिक्षाकर्मी एवं संविदा शिक्षक व्यवस्था के अंत सहित शिक्षकों के विभिन्न महत्वपूर्ण अधिकारों के लिए आंदोलन किए गए, जिनका सकारात्मक परिणाम सामने आया। इसी भरोसे के साथ शिक्षक संगठन एक बार फिर शिक्षक हित के लिए एकजुट हुए हैं।


बताया गया कि छत्तीसगढ़ में जब प्रदेशवासी हरेली पर्व मना रहे थे, उसी दौरान छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन, शालेय शिक्षक संघ एवं संयुक्त शिक्षक संघ की कोर कमेटी ने अपने प्रमुख नेतृत्वकर्ताओं के साथ ऑनलाइन बैठक की। बैठक सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुई, जिसमें सर्वसम्मति से छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा के गठन का निर्णय लिया गया। मोर्चा द्वारा शिक्षकों के हितों के विपरीत एवं परेशान करने वाले आदेशों का विरोध करने तथा समस्याओं के समाधान के लिए चरणबद्ध संघर्ष करने की बात कही गई।

पांच प्रमुख मांगों को बनाया प्राथमिकता

शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने शिक्षकों की पांच प्रमुख समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हांकित किया है। इनमें—
समस्त कार्यरत शिक्षकों के लिए टीईटी की बाध्यता समाप्त करते हुए वरिष्ठता के आधार पर व्याख्याता, शिक्षक तथा प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक शाला के प्रधान पाठक सहित सभी पदों पर पदोन्नति किए जाने की मांग की गई है। शिक्षकों की पूर्व सेवा अवधि की गणना पूर्ण पेंशन लाभ के लिए किए जाने की मांग की गई है, ताकि पूर्व में की गई सेवा का लाभ पेंशन निर्धारण में मिल सके। शिक्षकों की वेतन विसंगति दूर करने के लिए केंद्रीय वेतनमान के आधार पर छत्तीसगढ़ के समस्त शिक्षक संवर्ग का वेतन निर्धारण किए जाने की मांग रखी गई है। 13 फरवरी 2026 को जारी नए भर्ती एवं पदोन्नति नियम में मौजूद विसंगतियों को दूर करते हुए उक्त नियम को निरस्त किए जाने की मांग की गई है। प्रशिक्षित सहायक शिक्षक, शिक्षक एवं व्याख्याताओं के लिए विभागीय स्तर पर बीएड ब्रिज कोर्स कराया जाए तथा ब्रिज कोर्स से पहले पदोन्नति के लिए बीएड को अनिवार्य नहीं किया जाए। शिक्षक संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारियों ने कहा कि इन पांच प्रमुख मांगों के अलावा शिक्षकों की आवश्यकता एवं विभागीय स्तर पर सामने आ रही अन्य समस्याओं को भी ज्ञापन में शामिल किया जाएगा। मोर्चा का उद्देश्य किसी संगठन विशेष के हित के बजाय प्रदेश के समस्त शिक्षकों के हित में प्रभावी संघर्ष करना है। बैठक में मुंगेली जिले के शिक्षक संगठनों के प्रमुख पदाधिकारी संजय उपाध्याय, मोहन लहरी, दीपक वेंताल, बलराज सिंह, लक्ष्मीकांत जडेजा, नेमीचंद भास्कर, उमेश साहू, जिलाराम यादव, शिवकुमार चंद्राकर, दुर्गेश देवांगन, विवेक गोविन्द, ब्रजेश यादव सहित अन्य पदाधिकारी शामिल हुए। मोर्चा के पदाधिकारियों ने कहा कि 18 अगस्त को शिक्षा मंत्री, शिक्षा सचिव एवं संचालक डीपीआई से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा जाएगा। इस दौरान शिक्षकों की लंबित समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी पहल की मांग की जाएगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार शिक्षक हित में सकारात्मक निर्णय लेते हुए समस्याओं का शीघ्र निराकरण करेगी।

Share This Article
संपादक - जगदीश देवांगन