केशकाल में विकास की आड़ में पर्यावरण से खिलवाड़ NH-30 परियोजना में गलत सर्वे से करोड़ों का नुकसान,
काटे गए हजारों पेड़ -चूक का जिम्मेदार कौन?

राजेन्द्र देवांगन
4 Min Read
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कोंडागांव -फरसगांव। NH-30 केशकाल बाईपास में विकास के नाम पर गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। बस्तर और दक्षिण भारत को जोड़ने वाले इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए किए गए बाईपास निर्माण में गलत सर्वे और विभागीय चूक के कारण हजारों हरे-भरे पेड़ अनावश्यक रूप से काट दिए गए। नए सर्वे में जब यह गड़बड़ी उजागर हुई, तो वन विभाग और नेशनल हाईवे विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते नज़र आए।
केशकाल में विकास की आड़ में पर्यावरण से खिलवाड़ NH-30 परियोजना में गलत सर्वे से करोड़ों का नुकसान, काटे काटे गए हजारों पेड़- चूक का जिम्मेदार कौन?

बस्तर की लाइफलाइन पर भारी लापरवाही
रायपुर से बस्तर और आगे आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु तक जोड़ने वाला NH-30 एक प्रमुख परिवहन मार्ग है। केशकाल घाट में लगातार जाम और बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए बाईपास परियोजना प्रस्तावित हुई थी, ताकि वाहनों का निर्बाध आवागमन सुनिश्चित हो सके। लेकिन इस महत्त्वपूर्ण परियोजना में लापरवाही की परतें खुलने से यह विकास कार्य विवादों में घिर गया है।

NH-30 परियोजना में गलत सर्वे से करोड़ों का नुकसान,
गलत अलाइनमेंट का खुलासा और हजारों पेड़ों की व्यर्थ कटाई
वन विभाग और नेशनल हाईवे विभाग के बीच हुई समन्वय की कमी और तकनीकी चूक के कारण बाईपास के लिए तय किए गए मार्ग में भारी अंतर पाया गया। नए सर्वे में यह पुष्टि हुई कि करीब 11 किलोमीटर बाईपास में से लगभग 5 किलोमीटर हिस्सा गलत अलाइनमेंट पर था। इसी गलत मार्ग के आधार पर वर्ष 2016-17 में बड़ी संख्या में हरे-भरे पेड़ काट दिए गए थे। इन पेड़ों की कटाई से न केवल पर्यावरण को नुकसान हुआ बल्कि सरकार को भी करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

6,000 और पेड़ काटने की तैयारी
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि परियोजना को दोबारा शुरू करने से पहले हुए नए सर्वे में यह सामने आया है कि वास्तविक अलाइनमेंट पर कार्य करने के लिए अब फिर से 6 हजार से अधिक पेड़ों की कटाई की आवश्यकता बताई जा रही है। यानी एक ही परियोजना में पर्यावरण को दोहरी क्षति- पहले गलत जगह कटाई और अब वास्तविक मार्ग पर कटाई का सामना करना पड़ेगा। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या इस बार भी विभाग बिना ठोस जांच के आगे बढ़ेगा?

वन विभाग की कार्रवाई और जांच की दिशा
केशकाल डीएफओ दिव्या गौतम के अनुसार, मार्च महीने में हाईवे विभाग से प्राप्त जानकारी में बताया गया था कि पूर्व में की गई पेड़ों की कटाई गलत जगह पर हुई थी। इस जानकारी के बाद वन विभाग ने तत्काल एक टीम गठित कर नया सर्वे शुरू कराया। स्वीकृत अलाइनमेंट का पुनः सत्यापन किया जा रहा है और जिन क्षेत्रों में पहले कटाई की गई थी, उनका वास्तविक मार्ग से सामंजस्य भी जांचा जा रहा है। विभागीय स्तर पर दोषी कर्मचारियों और अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश जारी किए जा चुके हैं।

इस चूक का जिम्मेदार कौन?
इस पूरे मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इतनी बड़ी परियोजना में गलत अलाइनमेंट का निर्धारण कैसे हो गया? पेड़ों की कटाई से पहले उचित सत्यापन क्यों नहीं किया गया? पर्यावरण को जो भारी क्षति हुई है, उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? और क्या विभागीय कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सिमटकर रह जाएगी या वास्तव में दोषियों तक पहुंचेगी? परियोजना के पुनर्सर्वे और जांच रिपोर्ट से इन सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है।

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