माँ बागदाई की पूजा-अर्चना के साथ नुनियाकछार में 14वें बागदाई मेले का भव्य शुभारंभ

Jagdish Dewangan
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प्राचीन ‘बाघों के बसेरा’ की मान्यता बना श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र

मुंगेली–जिले के ग्राम नुनियाकछार में आयोजित हो रहे 14वें तीन दिवसीय बागदाई मेले का शुभारंभ प्रथम दिन विधिविधानपूर्वक माँ बागदाई की पूजा-अर्चना के साथ किया गया। मेला समिति द्वारा क्षेत्र की सुख-शांति, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना करते हुए धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराया गया। मेला समिति के अध्यक्ष विश्वराज परिहार ने समस्त क्षेत्रवासियों को मेले की शुरुआत पर बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर सवितर्क न्यूज़ के संपादक,प्रदेश उपाध्यक्ष विष्णु देवांगन, प्रदेश प्रवक्ता दुर्गेश देवांगन, शत्रुहन देवांगन, अजय देवांगन सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।


श्रद्धा, परंपरा और लोकसंस्कृति का संगम
वर्षों से चली आ रही यह परंपरागत बागदाई मेला 2026 श्रद्धा, आस्था और लोकसंस्कृति का अनूठा उदाहरण बना। मेले में दूर-दराज के गांवों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मेले की विशेष पहचान “बाघों का बसेरा” इस वर्ष भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा।
बाघ देवता की मान्यता से जुड़ा स्थल
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार बागदाई स्थल को बाघ देवता का निवास स्थान माना जाता है। प्राचीन काल में इस क्षेत्र में बाघों का बसेरा होने की मान्यता रही है, जिसके चलते आज भी यहां विशेष श्रद्धा के साथ पूजा की जाती है। मेले के दौरान पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना की गई, जिसमें ग्रामीणों की गहरी आस्था स्पष्ट रूप से देखने को मिली।


लोक रंग में रंगा मेला
मेले में लोक नृत्य, पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर धुन, झूले, खेल-तमाशे एवं ग्रामीण हाट ने अलग ही रंग बिखेरा। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने मेले का भरपूर आनंद लिया। वहीं, शांति एवं सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने हेतु प्रशासन और ग्राम पंचायत द्वारा समुचित इंतजाम किए गए।
सांस्कृतिक एकता का प्रतीक
बागदाई मेला न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह क्षेत्र की लोकसंस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता को भी मजबूती प्रदान करता है। वर्ष 2026 का यह मेला श्रद्धा, उत्साह और शांतिपूर्ण वातावरण के साथ संपन्न हो रहा है।

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संपादक - जगदीश देवांगन