दंतेवाड़ा जिला अस्पताल में घोटाला: SBI मैनेजर और अकाउंटेंट गिरफ्तार, फर्जी हस्ताक्षर से निकाले 66 लाख-जानिए क्या है पूरा मामला

राजेन्द्र देवांगन
3 Min Read
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दंतेवाड़ा। जिला अस्पताल के सिविल सर्जन का फर्जी हस्ताक्षर कर 66 लाख 75 हजार 850 रुपये की हेराफेरी के मामले में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के मैनेजर और अस्पताल की अकाउंटेंट को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इस घोटाले में पहले ही चार अन्य आरोपी जमानत पर रिहा हो चुके हैं।

फर्जी दस्तखत कर निकाल लिए लाखों, FIR के बाद खुला मामला

सिविल सर्जन सह अस्पताल अधीक्षक ने दंतेवाड़ा सिटी कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई थी कि जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) और कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) मद में आई राशि के आहरण में गंभीर अनियमितता हुई है। जांच के दौरान सामने आया कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बैंक से यह रकम निकाली गई थी।

पुलिस ने मामले की जांच के बाद मुख्य आरोपी अभिजीत सिंह चौहान के साथ अन्य आरोपी अर्पणा चौहान, सौरभ सुद और मोहम्मद तौसिफ रजा के खिलाफ भी मामला दर्ज किया था। इनमें से चार को पहले ही जमानत मिल चुकी थी, जबकि अब इस घोटाले में दो और आरोपियों की संलिप्तता सामने आई।

बैंक मैनेजर और अकाउंटेंट की भूमिका उजागर

जांच के दौरान स्पष्ट हुआ कि SBI दंतेवाड़ा शाखा के सीनियर मैनेजर निशांत ठाकुर (38) और जिला अस्पताल की सहायक अकाउंटेंट सुतापा कुंडू (33) इस वित्तीय घोटाले में सीधे तौर पर शामिल थे। पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसमें घोटाले में उनकी संलिप्तता साबित हुई। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।

“पूरी साजिश में बैंक और अस्पताल के अफसर शामिल” – पुलिस

दंतेवाड़ा एसडीओपी गोविंद सिंह दीवान ने बताया कि “इस घोटाले की गहन जांच की गई, जिसमें यह स्पष्ट हुआ कि बैंक मैनेजर और अस्पताल की अकाउंटेंट ने मिलकर इस अनियमितता को अंजाम दिया। दोनों पर कार्रवाई करते हुए जेल भेज दिया गया है।”

अब भी जारी है जांच, अन्य गिरफ्तारियों की संभावना

इस घोटाले में चार आरोपी पहले ही जमानत पर रिहा हो चुके हैं, जबकि दो की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस अन्य संभावित संलिप्त लोगों की भी जांच कर रही है। फर्जी हस्ताक्षर और बैंकिंग प्रक्रियाओं की अनदेखी से जुड़े पहलुओं पर भी जांच जारी है। जल्द ही और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

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