बुजुर्ग आदिवासियों की आंख का गलत ऑपरेशन: 10 को दिखना बंद, स्वास्थ्य मंत्री पहुंचे अस्पताल, डॉक्टर्स पर एक्शन की तैयारी

राजेन्द्र देवांगन
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मरीज ने बताया कि उन्हें देखने में परेशानी आ रही है।

दंतेवाड़ा के जिला अस्पताल में बुजुर्ग आदिवासियो के मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया गया।

अचानक 10 बुजुर्गों को आंख में खुजली,दर्द, दिखाई देना बंद हो गया। हड़बड़ी में दंतेवाड़ा के सरकारी डॉक्टर्स ने 10 मरीजों को बीते गुरुवार रायपुर के अंबेडकर हॉस्पीटल भेज दिया.

गलत तरीके से इलाज की वजह से ये 10 ग्रामीण आदिवासी अब परेशानी में हैं। इन्हें दिखाई नहीं दे रहा। मामला फूटा तो रविवार को प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल आदिवासी ग्रामीणों से मिलने पहुंचे। उन्होंने डॉक्टर्स की टीम को निर्देश दिया कि सभी का सही से इलाज किया जाए। मंत्री विभाग के अफसरों पर भड़के हैं, चर्चा है कि दंतेवाड़ा के डॉक्टर्स पर सरकार इस बड़ी लापरवाही के लिए कार्रवाई कर सकती है।

स्वास्थ्य मंत्री ने की मरीजों से मुलाकात

इन मरीजों को लेकर अंबेडकर अस्पताल के अधीक्षक डा. संतोष सोनकर ने बताया कि एक-दो दिन बाद ही मरीजों की आंखों की स्थिति का पता चल सकेगा। फिलहाल उन्हें नेत्र रोग विभाग में अलग वार्ड में रखा गया है।

जूनियर डाक्टरों की एक टीम उनकी निगरानी कर रही है।कांग्रेस बोली ये अंखफोड़वा कांड-2 सोशल मीडिया पर प्रदेश कांग्रेस ने इसे अंखफोड़वा कांड पार्ट 2 बताया है। कांग्रेस पार्टी ने एक जांच दल बनाया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के डॉक्टर राकेश गुप्ता को भी इस स्थिति में मरीजों का जायजा लेने के निवेदन के साथ एक चिट्‌ठी कांग्रेस ने भेजी है।

कांग्रेस की सोशल मीडिया पोस्ट

कांग्रेस पार्टी ने दंतेवाड़ा में मोतियाबिंद ऑपरेशन में हुई लापरवाही के लिए जिस कमेटी का गठन किया है इसमें बस्तर के विधायक लखेश्वर बघेल, बीजापुर के विधायक विक्रम मंडावी, दंतेवाड़ा की पूर्व विधायक देवती कर्मा, जगदलपुर के पूर्व विधायक रेखचंद्र जैन, कांग्रेस के संयुक्त महामंत्री विमल सुराना, जिला कांग्रेस कमेटी के अवधेश गौतम को शामिल किया गया है। कांग्रेस ने जांच कमेटी बनाई।क्या है पूरा मामला इन बुुजुर्ग आदिवासियों का ऑपरेशन करने वाली डॉक्टर का नाम डॉ गीता नेताम है।

फिलहाल सामने आई जानाकारी के मुताबिक ऑपरेशन थिएटर को सैनिटाइज किए बिना ये सर्जरी की गई है। स्वास्थ्य मंत्री जायसवाल ने अफसरों ने इसे लेकर जानकारी मांगी है। जिन मरीजों को अब दिखना बंद हो चुका है, उनकी रायपुर में फिर से सर्जरी कर उन्हें ऑबर्जवेशन में रखा गया है। इन मरीजों को परेशानीक्या था आंखफोड़वा कांड प्रदेश के बालोद जिले में 22 सितंबर 2011 को सरकारी लापरवाही के चलते यहां के 48 लोगों की आंखों की रोशनी चली गई थी। प्रदेश के 2 सरकारी शिविरों में मोतियाबिंद ऑपरेशन के दौरान लापरवाही के चलते करीब पांच दर्जन लोगों की आंखों की रोशनी चली गई थी। बालोद में 48, बागबाहरा में 12, राजनांदगांव-कवर्धा में 4-5 लोग इसके शिकार हुए। इस मामले में दुर्ग सीएमओ समेत बालोद बीएमओ, तीन नेत्र सर्जन आदि सस्पेंड हुए थे। इसे आंखफोड़वा कांड भी कहा गया।

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