स्वास्थ्य विभाग: जरूरत से ज्यादा दवा खरीदी 5 साल में 33 करोड़ की बर्बादी

राजेन्द्र देवांगन
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स्वास्थ्य विभाग की सरकारी दवा उपकरण क्रेता कंपनी सीजी एमएससी में बड़ा बदलाव किया है। इस बदलाव के जरिए करोड़ों की दवाओं, कंज्यूमेबल, उपकरण की जरूरत से ज्यादा खरीदी और बर्बादी को रोका जा रहा है। दरअसल, प्रदेश में पिछले कुछ साल में सरकारी क्रेता कंपनी मे.अस्पतालों द्वारा स्थानीय स्तर पर भी दवाएं खरीदी जा रही थीं। इस पूरे सिस्टम में अब ऑनलाइन मॉनिटरिंग और नियमों में बदलाव के जरिए एक बड़ा सुधार लाने की पहली बार कवायद हुई है। यही नहीं पहली बार सरकारी क्रेता कंपनी ने रीएजेंट के स्टॉक की ऑनलाइन मॉनिटरिंग शुरू की है।ताकि अस्पतालों में पैथालॉजी टेस्ट के लिए इस्तेमाल होने वाले रीएजेंट की कोई कमी नहीं रहे। जहां स्टॉक कम हो रहा है। वहां खत्म होने से पहले दवा रीएजेंट सप्लाई कराने की व्यवस्था भी बनाई गई है। ऐसा सिस्टम न होने के कारण 2018-19 से लेकर 2022-23 तक 33 करोड़ रुपए की दवा-उपकरण की बर्बादी हुई।इसी को देखते हुए प्रदेश में अस्पतालों में वर्षों से बेकार पड़े लाखों करोड़ों के उपकरणों को सुधारने और मेंटेन करने के लिए भी एक नई नीति बनाई गई है। इस पहल का अच्छा असर देखा जा रहा है।

पहली बार… नोटिस देकर सुधरवाए 450 उपकरण अस्पतालों में वर्षों से बेकार पड़े करोड़ों रुपए के उपकरणों को सुधारने के लिए भी एक नई नीति बनाई गई है।

सीजी एमएससी ने सरकारी और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में वर्षों से बेकार पड़े या मेंटनेंस के अभाव में काम नहीं आ रहे 640 से ज्यादा उपकरणों की सूची बनाई है। जिन उपकरण निर्माता या सप्लायर कंपनियों ने इनकी सप्लाई की है।उनको पहली बार नोटिस जारी कर 450 से ज्यादा उपकरण सुधरवाए हैं।

अस्पतालों से लगातार बंद पड़े उपकरणों की सूची भी मांगी जा रही है। अफसरों का कहना है कि अगले कुछ हफ्तों में पहली सूची के 640 उपकरण सुधरकर मरीजों के इलाज में काम आने लगेंगे। अस्पतालों स्वास्थ्य केंद्रों में बेकार या बंद पड़े ऐसे उपकरणों में आईसीयू वेंटीलेटर, मल्टीपैरा मॉनिटर, अल्ट्रा साउंड मशीनें, एक्सरे मशीनें, रेफ्रिजरेटर आदि थे।

सिस्टम का असर: 40 लाख की ओवर खरीद से बचेप्रदेश में अस्पतालों जिला स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय आदि द्वारा स्थानीय स्तर पर दवाओं की खरीद के लिए एनओसी ऑटो मोड पर मिल जाती थी। नए इस सिस्टम में कई बार ऐसा भी होता था कि सीजी एमएससी के गोदामों में दवा उपलब्ध रहती थी फिर भी स्थानीय स्तर पर खरीदी कर ली जाती थी।

अब सीजी एमएससी कार्यालय के जरिए एनओसी मंजूर होने के बाद ही लोकल पर्चेस हो सकेगा। इस नए सिस्टम से शुरूआती तीन हफ्तों में करीब 40 लाख की दवाएं गोदाम में उपलब्ध स्टॉक के जरिए करवाई गई है। इससे स्वास्थ्य विभाग को करीब 40 लाख की बचत हुई है।

साल दर साल दवाओं की बर्बादी स्त्रोत – सीजी एमएसी द्वारा खरीदी दवाओं में बर्बाद हुई दवाएं, सालाना प्रतिवेदन में दी गई जानकारी।सरकारी अस्पताल स्वास्थ्य केंद्रों में दवाएं उपकरण वक्त पर उपलब्ध हों, इसके लिए सिस्टम में सुधार किया जा रहा है।

लोकल पर्चेस के जरिए होने वाली अनावश्यक खरीदी पर रोक के लिए भी हमने नई व्यवस्था बना ली है। बेकार उपकरणों को सप्लायर कंपनियों के जरिए सुधरवा कर हमने बचत भी की है। -पद्मिनी भोई साहू, एमडी, सीजी एमएससी

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