9वीं के पेपर में विषय को विशय, कोशिका को कोषिका लिखा, पढ़े पूरी खबर

राजेन्द्र देवांगन
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प्रदेश में एक ओर शिक्षक भर्ती नहीं होने पर बवाल मचा है, आंदोलन हो रहे हैं। वहीं जिले में शिक्षा विभाग के शिक्षक और कम्प्यूटर टाइपिंग करने वाले कर्मचारी बच्चों के लिए बनाए जा रहे प्रश्न पत्र में भारी गलतियां कर रहे हैं।2024-25 के सत्र की सितंबर-अक्टूबर में हो रही नौवीं कक्षा की त्रैमासिक परीक्षा के लिए तैयार प्रश्न पत्र की हर लाइन में भाषाई गलती है। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा दो साल से त्रैमासिक, अर्द्धवार्षिक, वार्षिक परीक्षाओं के प्रश्न पत्र तैयार किए जा रहे हैं। होम एग्जाम की ज्यादातर परीक्षाओं में कम्प्यूटर से टाइप किए गए प्रश्न पत्र विद्यार्थियों को दिए जा रहे हैं।

इसमें बड़ी गलती की शिकायत शिक्षा मंत्री, वाणिज्य मंत्री, जिला शिक्षा अधिकारी से की गई है। शिकायतकर्ता ने बाकायदा 9वीं, 10वीं और 12वीं के अलग-अलग विषयों के प्रश्न पत्र में गलतियां मार्क कर पत्र से साथ भेजी हैं। इस संबंध में जिला शिक्षा विभाग ने आगे से गलती नहीं करने की बात कही है। बता दें कक्षा नौवीं के सूचना प्रोद्योगिकी विषय के पर्चे में सुचना लिखा हुआ है। कौन को कोन लिखा है, बतायें की जगह बताये लिखा हुआ है।

प्रश्न पत्र के ऊपर ही त्रैमासिक की जगह त्रेमासिक लिखा हुआ है। हेल्थकेयर विषय में कोशिका को कोषिका, उत्तक को उतक, मनुश्य, राश्ट्रीय, स्वास्थय लिखा हुआ है। शुरू की जगह भुरू लिखा हुआ है। पीपीई किट को कीट लिखा गया है। मॉनिटर को मोनीटर लिखा गया है। नीचे दिए गए शब्दों की परिभाशा पूछी गई है। दसवीं कक्षा की आईडी और हेल्थकेयर विषयों के प्रश्न पत्रों में भी ऐसी ही त्रुटियां हैं।

शार्ट कट को शोर्ट कट लिखा गया है। प्रश्न पत्र के ज्यादातर हिंदी शब्द गलत लिखे गए हैं।भविष्य में नहीं होगा ऐसा: केवी राव ^जिला शिक्षा अधिकारी केवी राव ने कहा, प्रश्न पत्र मेरी ज्वाइनिंग से पहले बनाए गए हैं। स्कूल के शिक्षक व कर्मचारियों ने ही तैयार किए हैं। ऐसी गलती नहीं होनी चाहिए। मुझे भी शिकायत मिली है। हम सुनिश्चित करेंगे कि ऐसी त्रुटि ना हो। ऐसा संभवत: टाइपिंग में गलती के कारण हुआ है लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए।

बिना प्रूफ रीडिंग के छापे प्रश्न पत्र शिकायतकर्ता ने कहा है कि वह एक अभिभावक और जागरूक नागरिक हैं। बच्चों को मिले प्रश्न पत्र की भाषा देखकर उन्हें अफसोस हुआ। उन्होंने सवाल उठाया है कि प्रश्न निश्चित ही स्कूलों के शिक्षकों द्वारा तैयार किए गए होंगे।

इनकी टाइपिंग भी शिक्षा विभाग के कर्मचारियों ने ही की होगी। शिक्षा विभाग का ही ऐसा हाल है तो बच्चों को कैसी शिक्षा देंगे।

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