सरगुजा में राजस्व मंडल के आठ आदेश मिले संदिग्धअनुसूचित्र क्षेत्र सरगुजा जिले में अनुसूचित जनजाति वर्ग की जमीनों को गैर आदिवासी वर्ग के पक्ष में अंतरित करने तथा शासकीय भूमि को निजी मद में दर्ज करने के राजस्व मंडल के आठ आदेश प्रारंभिक जांच में कूटरचित मिले हैं। कलेक्टर विलास भोस्कर ने इन आठ प्रकरण.जानकारी के मुताबिक, अंबिकापुर के गैर आदिवासी पक्षकारों ने राजस्व मंडल के आदेश का हवाला देकर आदिवासियों की जमीन उनके नाम करने अंबिकापुर तहसीलदार व नायब तहसीलदार के समक्ष आवेदन दिया था। इन प्रकरणों में राजस्व मंडल का आदेश भी संलग्न है। अनुसूचित क्षेत्र में आदिवासियों की जमीन गैर आदिवासियों के नाम अंतरित नहीं हो सकती।तहसीलदार और नायब तहसीलदार को राजस्व मंडल के कथित आदेशों पर संदेह हुआ। वहीं शासकीय जमीनों को भी निजी मद में दर्ज करने के आदेश भी आए हैं।कलेक्टर ने कहा- सत्यापन के लिए भेजा गया है आदेशसत्यापन के लिए भेजा गया आदेश कलेक्टर सरगुजा विलास भोस्कर ने इन आदेशों की प्रारंभिक स्तर पर जांच कराई। आवेदकों द्वारा प्रस्तुत आदेश राजस्व मंडल की वेबसाइट पर भी अपलोड नहीं हैं। इससे इनके फर्जी होने का पूरा संदेह है। कलेक्टर ने सरगुजा के नायब तहसीलदार निखिल वर्मा को इन प्रकरणों के सारे दस्तावेज के साथ राजस्व मंडल भेजा है।आशंका है कि आवेदकों द्वारा करोड़ों रुपये की बेशकीमती जमीनों को अपने नाम दर्ज कराने के लिए राजस्व मंडल का कूटरचित आदेश प्रस्तुत किया गया है। सरगुजा में राजस्व मंडल के आदेशों की बारीकी से निगरानी की जा रही है, जिससे यह फर्जीबाड़ा पकड़ा गया है।पहले मिल चुके हैं पांच फर्जी आदेश सरगुजा जिले में राजस्व मंडल के पांच कूटरचित आदेश से जमीन फर्जीवाड़ा का मामला सामने आया था। राजस्व मंडल बिलासपुर ने इन आदेशों को फर्जी बताते हुए एफआईआर कराने के निर्देश दिए थे।जून 2024 में कोतवाली थाने में राजपुर निवासी अशोक अग्रवाल, सूरजपुर के प्रेमनगर निवासी घनश्याम अग्रवाल, मणिपुर निवासी फारूख और नवागढ़ निवासी जैनुल हसन के खिलाफ धारा 318(4), 336(3), 338, 340(2) बीएनएच के तहत अपराध दर्ज किया गया है। एक प्रकरण गांधीनगर थाने में दर्ज किया गया है। सभी आरोपी फरार बताए गए हैं।सत्यापन के लिए भेजे गए हैं प्रकरण-कलेक्टर मामले में कलेक्टर विलास भोस्कर ने कहा कि आठ ऐसे प्रकरण संज्ञान में आए हैं, जिन्हें सत्यापन के लिए राजस्व मंडल कार्यालय बिलासपुर भेजा गया है। सत्यापन के बाद मामले में कूटरचना मिली तो एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। अनुसूचित जनजाति वर्ग की जमीन सामान्य वर्ग के नाम अंतरित नहीं की जा सकती। जिन शासकीय जमीनों को निजी मद में दर्ज करने का संदिग्ध आदेश है, वे जमीनें बेशकीमती हैं।
राजस्व मंडल के 8 आदेशों के फर्जी होने का संदेह: आदिवासी की जमीन गैर आदिवासी को ट्रांसफर करने का है आदेश, सत्यापन के लिए भेजा गया

