Chhattisgarh, raypur: दिवाली में खुशी की जगह आंखों में आंसू; घरों में पकवान के बजाए, सड़क पर भूखी बैठीं विधवाएं…
कर रहे इंसाफ का इंतजार…

राजेन्द्र देवांगन
4 Min Read
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ब्यूरो रिपोर्ट मनोज शुक्ला

Chhattisgarh, raypur: दिवाली में खुशी की जगह आंखों में आंसू; घरों में पकवान के बजाए, सड़क पर भूखी बैठीं विधवाएं…कर रहे इंसाफ का इंतजार…

एक ओर जहां बीते तीन-चार दिनों से पूरा प्रदेश खुशियां मना रहा है। कुछ परिवार गम में डूबे हैं। जहां घरों से पकवानों की खूशबू उड़ रही है, कुछ घरों में उदासी है। दीयों की रोशनियों से मकान जगमगा रहे हैं, मगर कुछ घरों में आर्थिक तंगी का अंधेरा है। ये घर छत्तीसगढ़ के उन शिक्षकों के हैं जिनकी अब मौत हो चुकी है। पंचायत विभाग के लिए ये शिक्षक गांव के स्कूलों में पढ़ाने का काम करते थे। किसी की मौत बीमारी के चलते हुई तो कोई हादसे का शिकार हुआ। अब परिवार के लोग आर्थिक समस्या से जूझ रहे हैं, विधवा पत्नियां प्रशासन से स्थाई नौकरी (पति की जगह अनुकम्पा) की मांग कर रही हैं।

पिछले साल भी इन महिलाओं ने आंदोलन किया था। तब आश्वासन मिला और इन्होंने आंदोलन बंद कर दिया। मगर अब तक मांग पूरी नहीं हुई तो दीवाली के दिन ये महिलाएं काले दिन के रूप में देख रही हैं। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से अपना गांव और घर छोड़कर रायपुर पहुंची हैं।

महिलाएं बच्चों के साथ धरना देने पहुंची हैं।

बूढ़ापारा स्थित धरना स्थल पर धरना दे रही हैं। यहां ये महिलाएं रो पड़ीं और कहा अब जब तक मांग पूरी नहीं होगी सड़क से नहीं उठेंगे। आमरण अनशन शुरू
सोमवार को इन महिलाओं ने रायपुर के धरना स्थल पर आमरण अनशन शुरू कर दिया है। ज्योति जगत और शांति साहू ने आमरण अनशन किया है। कह दिया है कि जब तक रोजगार नहीं मिलेगा हड़ताल खत्म नहीं करेंगे। इनका साथ देने के लिए संगठन अनुकम्पा नियुक्ति शिक्षाकर्मी कल्याण संघ की बाकि औरतों ने भी भूख हड़ताल कर दी है।
लंबे वक्त ने इनकी मांग अधूरी है।

4 साल से मांग रहीं रोजगार
पंचायत शिक्षकों की मौत के बाद परिवार के किसी भी सदस्य काे अब तक अनुकंपा नियुक्ति नहीं मिली है। कोई तीन साल से भटक रहा है तो कोई चार साल से। जांजगीर से आई अश्वनी सोनवानी के पति पंचायत शिक्षक थे। 2017 में पति की हार्ट अटैक से मौत हो गई। अब दो बच्चे हैं। ससुर को लकवा मार गया है। लोगों से उधार रुपए लेकर बुजुर्ग ससुर का इलाज करवा रही हैं। ट्रीटमेंट के लिए पैसे नहीं होते हैं। 17 साल की बैटी ने 10वीं में टॉप किया था। मगर अब उसे आगे पैसों की तंगी की वजह से पढ़ा नहीं पा रहीं। अश्वनी ने पूछा कि हम घर कैसे चलाएं, जिन शिक्षकों का संविलियन हुआ उनके परिवार को सरकार ने अनुकम्पा नियुक्ति दे दी, हमारे पति भी तो पढ़ाते थे। हमें क्यों परेशान किया जा रहा है हमारी तकलीफ कोई नहीं समझ रहा।

क्वालिफिकेशन के नियम का पंगा
दिवंगत शिक्षकों की पत्नियां 12वीं पास हैं, किसी ने बीएड भी किया है। अब इन्हें टीजर एजिबिलिटी टेस्ट, D.ED के बिना अनुकम्पा नियुक्ति न दिए जाने का नियम बताया जा रहा है। दिवंगत पंचायत शिक्षक अनुकम्पा संघ की अध्यक्ष माधुरी मृगे ने बताया कि चुनाव के समय कांग्रेस के बड़े नेताओं ने कहा था कि सरकार बनने के बाद नियमों को शिथिल करेंगे। आपको नौकरी मिलेगी। माधुरी ने कहा कि हमारे साथ जो हुआ अचानक हुआ, कोई तैयारी तो नहीं करता है न कि पति मरे तो मैं पहले से ही सारे कोर्स कर लूं। अब परिवार में पैसे नहीं कि हम कोर्स करें। हम चाहते हैं कि जिसकी जैसी योग्यता है उसे वैसा रोजगार सरकार दे दे।

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