बिलासपुर: सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर 50 हजार रुपये लेने का आरोप, कलेक्टर से जांच की मांग

राजेन्द्र देवांगन
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बिलासपुर। सरकारी पद पर नौकरी दिलाने का झांसा देकर कथित रूप से पैसे लेने और फर्जी आदेश पत्र देने के मामले में प्रफुल्ल दुबे ने बिलासपुर कलेक्टर को आवेदन सौंपकर जांच और कार्रवाई की मांग की है। आवेदन में मनीष यादव सहित कुछ अन्य शासकीय कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।

नौकरी का भरोसा देकर पैसे लेने का आरोप

कलेक्टर को दिए गए आवेदन के अनुसार, शिकायतकर्ता सितंबर माह में एक शासकीय कार्य से कलेक्टर कार्यालय पहुंचा था। इसी दौरान उसकी मुलाकात मनीष यादव नामक व्यक्ति से हुई। शिकायतकर्ता का दावा है कि मनीष यादव ने खुद को कलेक्टर कार्यालय की परीक्षा शाखा में कार्यरत बताया और दैनिक वेतनभोगी के रूप में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया।

आवेदन में आरोप लगाया गया है कि मनीष यादव की बातों पर विश्वास करके शिकायतकर्ता ने ऑनलाइन माध्यम से उसके बैंक खाते में 35 हजार रुपये भेजे। इसके कुछ दिन बाद मनीष के कहने पर उसके साथी सावन यादव को 15 हजार रुपये नकद दिए गए। इस तरह शिकायतकर्ता ने कुल 50 हजार रुपये दिए जाने का दावा किया है।

कथित आदेश पत्र देने का भी आरोप

शिकायतकर्ता ने आवेदन में यह भी आरोप लगाया है कि उसे कलेक्टर कार्यालय की आवक-जावक शाखा से संबंधित एक कथित आदेश पत्र दिया गया था। हालांकि, आवेदन के मुताबिक, संबंधित व्यक्ति ने न तो काम दिलाया और न ही बाद में उसका कोई पता चल पाया।

शिकायतकर्ता ने इस मामले में शासकीय कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका जताते हुए इसे नौकरी दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी का मामला बताया है। ये सभी आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

प्रफुल्ल दुबे ने कलेक्टर से पूरे मामले की गहन और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने मनीष कुमार यादव और कथित रूप से संलिप्त अन्य शासकीय अथवा गैर-शासकीय व्यक्तियों के विरुद्ध धोखाधड़ी, पद के दुरुपयोग और अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।

आवेदन के साथ कथित आदेश पत्र तथा बैंक हस्तांतरण और लेन-देन से संबंधित विवरण संलग्न किए जाने का उल्लेख है। मामले में प्रशासन या पुलिस की ओर से जांच अथवा कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

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