सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर एवं जनसरोकारों की आवाज़ उठाने वाले अभय सिंह (AbhaySinghCG) ने देश में लगातार बढ़ती महंगाई, पेट्रोल-डीज़ल और रसोई गैस की कीमतों को लेकर केंद्र की Bharatiya Janata Party सरकार और प्रधानमंत्री Narendra Modi पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि भाजपा सरकार हर आर्थिक संकट के लिए अंतरराष्ट्रीय हालात का बहाना बनाकर अपनी जिम्मेदारियों से बच नहीं सकती।
अभय सिंह ने कहा कि देश की जनता पिछले कई वर्षों से एक चीज लगातार देख रही है। जब भी पेट्रोल-डीज़ल के दाम बढ़ते हैं, गैस सिलेंडर महंगा होता है, रुपया कमजोर पड़ता है या रोजमर्रा की जिंदगी महंगी होती है, तब भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार तुरंत कोई न कोई बाहरी कारण सामने रख देती है। कभी कोविड, कभी रूस-यूक्रेन युद्ध, कभी वैश्विक मंदी और अब अंतरराष्ट्रीय तनाव तथा हारमुस संकट।
उन्होंने कहा कि सवाल यह है कि आखिर देश की हर आर्थिक परेशानी के लिए हमेशा बाहरी कारण ही जिम्मेदार कैसे हो सकते हैं? और अगर हर संकट के लिए कोई न कोई अंतरराष्ट्रीय वजह है, तो फिर देश की सरकार किस बात की जिम्मेदारी लेगी?
अभय सिंह ने कहा कि जनता को याद है कि वर्ष 2020 में कोविड महामारी आई थी। वह पूरी दुनिया के लिए कठिन समय था। लोगों ने अपनी नौकरियां खोईं, छोटे व्यापार बंद हुए, लाखों परिवार आर्थिक संकट में चले गए। उस समय जनता ने सरकार का साथ दिया क्योंकि हालात असाधारण थे। लोगों को उम्मीद थी कि संकट खत्म होने के बाद सरकार जनता को राहत देगी और अर्थव्यवस्था को संभालेगी।
लेकिन कोविड के बाद क्या हुआ? पेट्रोल-डीज़ल लगातार महंगे होते गए। गैस सिलेंडर आम परिवार की पहुंच से बाहर होने लगा। खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ते गए। बेरोजगारी बनी रही। रुपया लगातार कमजोर होता गया और आज भारतीय रुपया लगभग ₹96.14 प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच चुका है। देश के कई हिस्सों में पेट्रोल ₹103.26 प्रति लीटर के आसपास या उससे ऊपर बिक रहा है, डीज़ल लगातार महंगा बना हुआ है और घरेलू गैस सिलेंडर ₹900 से ₹1000 तक पहुंच चुका है। यानी संकट खत्म होने के बाद भी आम आदमी का संकट खत्म नहीं हुआ।
अब जब तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो सरकार और भाजपा के नेता फिर कहते हैं कि इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय हालात जिम्मेदार हैं। लेकिन जनता पूछ रही है कि आखिर कब तक हर बार नया बहाना देकर जिम्मेदारी से बचा जाएगा?
अभय सिंह ने कहा कि यह वही भाजपा है जिसने वर्षों तक पूर्व प्रधानमंत्री Manmohan Singh की सरकार को महंगाई के मुद्दे पर घेरा था। जनता को याद है कि जब रुपया लगभग ₹62 प्रति डॉलर था, पेट्रोल-डीज़ल ₹60-65 प्रति लीटर के आसपास था और गैस सिलेंडर लगभग ₹385 में मिलता था, तब भाजपा देश में महंगाई और आर्थिक बदहाली का माहौल बताती थी। उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा नेताओं का कहना था कि महंगाई किसी भी सरकार की सबसे बड़ी विफलता होती है।
आज सवाल उठता है कि अगर उस समय कांग्रेस सरकार जिम्मेदार थी, तो आज की स्थिति की जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या सत्ता बदलने के बाद जिम्मेदारी की परिभाषा भी बदल गई?
अभय सिंह ने कहा कि सच्चाई यह है कि पेट्रोल-डीज़ल की कीमत केवल वाहन चलाने का खर्च तय नहीं करती, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती है। भारत में ट्रांसपोर्ट का बड़ा हिस्सा डीज़ल पर निर्भर है। जब डीज़ल महंगा होता है तो ट्रकों का किराया बढ़ता है। ट्रांसपोर्ट महंगा होने का असर सीधे सब्जियों, राशन, दूध, दवाइयों और निर्माण सामग्री तक पहुंचता है। यानी पेट्रोल पंप पर बढ़ा हुआ कुछ रुपये धीरे-धीरे हर घर के खर्च में जुड़ जाता है।
उन्होंने कहा कि खेती पर इसका असर और गंभीर होता है। किसान ट्रैक्टर, सिंचाई पंप और फसल परिवहन के लिए डीज़ल पर निर्भर है। गैस और ईंधन महंगे होने से खाद उत्पादन की लागत बढ़ती है, जिससे खेती और महंगी हो जाती है। लेकिन किसान की आमदनी उसी गति से नहीं बढ़ती। परिणाम यह होता है कि किसान का मुनाफा घटता जाता है और कर्ज बढ़ता जाता है।
अभय सिंह ने कहा कि मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों पर इसका असर सबसे ज्यादा पड़ता है। गैस सिलेंडर महंगा होने का मतलब है रसोई का बजट बिगड़ना। स्कूल बस, ऑटो, दैनिक यात्रा और बाजार का खर्च बढ़ना। परिवारों को बचत कम करनी पड़ती है, जरूरी जरूरतों में कटौती करनी पड़ती है। महंगाई केवल आर्थिक समस्या नहीं रहती, बल्कि जीवन स्तर को प्रभावित करने लगती है।
उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा सवाल टैक्स को लेकर उठता है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सस्ता हुआ था, तब जनता को उतनी राहत क्यों नहीं मिली? पेट्रोल-डीज़ल पर भारी टैक्स क्यों जारी रहे? जनता यह महसूस करने लगी है कि ईंधन अब केवल जरूरत नहीं, बल्कि सरकारों की कमाई का सबसे बड़ा साधन बन चुका है।
अभय सिंह ने कहा कि इसी वजह से जनता के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि “महंगाई मैन” के रूप में बन रही है। क्योंकि लोगों को लगता है कि हर साल उनका खर्च बढ़ रहा है, बचत कम हो रही है और जीवन कठिन होता जा रहा है, जबकि सरकार की प्राथमिकता जनता को राहत देने से ज्यादा प्रचार और छवि प्रबंधन पर दिखाई देती है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकारें केवल उपलब्धियों का श्रेय लेने के लिए नहीं होतीं, बल्कि संकट की जिम्मेदारी लेने के लिए भी होती हैं। अगर अच्छे समय का श्रेय प्रधानमंत्री लेते हैं, तो कठिन समय की जिम्मेदारी से बचना कैसे उचित माना जा सकता है?
अंत में अभय सिंह ने कहा कि जनता अब टीवी बहसों से ज्यादा अपनी जेब का हिसाब देख रही है। और वह हिसाब यही कह रहा है कि महंगाई वास्तविक है, जबकि बहाने लगातार बदलते जा रहे हैं
महंगाई मैन” मोदी इस आर्थिक त्रासदी की जिम्मेदारी स्वीकार करें — अभय सिंह
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