विकास की राह ताकता मुंगेली: मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसता जिला

Jagdish Dewangan
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मुंगेली, छत्तीसगढ़। प्रदेश के मानचित्र पर एक अलग पहचान के साथ उभरे मुंगेली जिले को अस्तित्व में आए लगभग 13–14 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन आज भी यह जिला मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझता नजर आ रहा है। जिला बनने के साथ लोगों ने बेहतर सड़क, सुदृढ़ नाली व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल और सुव्यवस्थित नगरीय ढांचे की उम्मीद की थी, परंतु जमीनी हकीकत इन अपेक्षाओं से कोसों दूर दिखाई देती है।

सड़क और नाली की बदहाल स्थिति

शहर और आसपास के क्षेत्रों में उबड़-खाबड़ सड़कें आमजन के लिए रोजाना परेशानी का कारण बनी हुई हैं। कई वार्डों में सड़कों पर बहता नाली का पानी न केवल आवागमन में बाधा उत्पन्न करता है, बल्कि संक्रमण और मच्छरों की समस्या को भी बढ़ावा देता है। बारिश के दिनों में स्थिति और भयावह हो जाती है, जबकि गर्मी में यही सड़कें सूखकर धूल का गुबार बन जाती हैं, जिससे दमा, एलर्जी और अन्य श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

अस्थायी मरम्मत, स्थायी समाधान का अभाव

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शिकायतों के बाद अक्सर ‘थूक-पालिश’ जैसी अस्थायी मरम्मत कर दी जाती है, जिससे कुछ दिनों के लिए समस्या दब जाती है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल पाता। परिणामस्वरूप कुछ ही समय में सड़कें फिर से गड्ढों में तब्दील हो जाती हैं और नालियां जाम होकर सड़कों पर बहने लगती हैं।

जवाबदेही का सवाल

जनप्रतिनिधियों की उदासीनता हो या संबंधित विभागों की लापरवाही, मूलभूत समस्याओं के निराकरण में अपेक्षित गंभीरता नजर नहीं आती। जिला बनने के बाद जिस स्तर की अधोसंरचना विकसित होनी चाहिए थी, वह अब भी अधूरी प्रतीत होती है। आम नागरिकों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर वे अपनी समस्याएं लेकर कहां जाएं, जहां उनका स्थायी समाधान सुनिश्चित हो सके।

जनआकांक्षाओं पर खरा उतरने की जरूरत

मुंगेली जैसे उभरते जिले के लिए सुनियोजित विकास कार्यों, गुणवत्तापूर्ण निर्माण और नियमित मॉनिटरिंग की आवश्यकता है। पारदर्शी कार्यप्रणाली, समयबद्ध क्रियान्वयन और जनसहभागिता के माध्यम से ही इन समस्याओं का स्थायी समाधान संभव है।
अब समय आ गया है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि मिलकर ठोस कार्ययोजना तैयार करें, ताकि मुंगेली वास्तव में विकास की राह पर आगे बढ़ सके और यहां के नागरिकों को वह सुविधाएं मिल सकें, जिनकी वे वर्षों से प्रतीक्षा कर रहे हैं।

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संपादक - जगदीश देवांगन