छत्तीसगढ़ पर्यटक स्थलों में से एक सेतगंगा धाम धर्म नगरी सेतगंगा

Jagdish Dewangan
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*मुंगेली* छत्तीसगढ़ के कई ऐसे पर्यटन स्थल है जो श्रद्धालुओं का मन मोह लेते है यहाँ के पर्वत शृंखला नदी झरने अनायास ही लोगों कोअपनी ओर आकर्षित करते है बस्तर से लेकर मैकल पर्वत श्रृंखला व अनेक जिलों में स्तिथ पर्यटन स्थलों में से एक है सेतगंगा धाम….यहाँ के अद्वितीय रमणीय पुरातात्विक सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक श्री रामजानकी मंदिर महामाया सिध्देश्वरी देवी का मंदिर अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिये जाना जाता है यहाँ प्रतिवर्ष माघ पूर्णिमा के पावन बेला पर पांच दिवसीय मेला का आयोजन भी होता है
पुरातात्विक धरोहरों और प्राकृतिक विविधताओं से परिपूर्ण छत्तीसगढ़ का पर्यटन देश मे अपनी पहचान स्थापित करता जा रहा है यहाँ प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण अनेक स्मरणीय स्थलोँ के साथ साथ गौरवशाली अतीत और समृद्धि विरासत को संजोए अनेक पुरातात्विक और ऐतिहासिक महत्व स्थल है जैसे कि शिरपुर में शैव वैष्णव बौद्ध और जैन संतो के सहअस्तित्व के पुरातात्विक प्रमाण है सरगुजा के रामगढ़ में सीता बेंगरा गुफा प्राचीनतम नाटकशाला बस्तर में चित्रकूट तीरथगढ़ के जलप्रपात कवर्धा जिले का भोरमदेव मंदिर मैकल पर्वत कुटुम्बसर के जलप्रपात अमरकंटक की पर्वत शृंखला अभ्यारण शिवरीनारायण राजिम मदकूद्वीप में प्राप्त द्वादशज्योतिर्लिंग तक पूरे छत्तीसगढ़ में अनेक स्थल पर्यटक के दृष्टि से विशेष महत्व के है
इसी कड़ी में मुंगेली जिले के अंतर्गत जिला मुख्यालय से 22 किलोमीटर की दूरी पर मुंगेली पंडरिया जबलपुर राष्ट्रीय मार्ग पर टेसुवा नदी के तट पर श्री रामजानकी मंदिर सेतगंगा स्तिथ है जो कि धार्मिक आस्था का परिचायक है जहाँ अनेक पर्वो में श्रद्धालुओं का आवागमन होते रहता है किवदंती है कि पंडरिया के तत्कालीन राजा दलसाय सिंग बहुत ही धार्मिक प्रतापी व दयालु प्रवृत्ति के थे वे अनेक पर्वों पर अमरकंटक स्थित माँ नर्मदा कुंड में आस्था रूपी डुबकी लगाने जाया करते थे जब वे वृद्धावस्था में वहाँ जाने में असमर्थ हो गए तब वे हमेशा व्याकुल रहते थे एक दिन अचानक अर्धरात्रि को स्वप्नादेश हुआ कि हे राजन …मैं तुम्हारी श्रद्धा भक्ति से काफी प्रसन्न हुँ मैं तुम्हारे ही राज्य के पूर्वी दिशा में प्राकट्य हो रही हूं तुम वहाँ जावो मंदिर और कुंड की स्थापना करो स्वप्नादेश पर राजा ने भोर काल मे ही अपने दल बल के साथ अपने ही राज्य के पूर्वी दिशा पर उदगम स्थल को ढूढने निकल पड़े उन्हें अपने ही राज्य के अंतिम छोर पर सेतगंगा में एक बुलबुला नुमा स्थल दिखाई दिया राजा ने कालांतर में उसी स्थल पर एक मंदिर व कुण्ड की स्थापना किये जहाँ एक छोटी सी बस्ती बसी जो श्वेतगंगा के नाम से जाना जाता है जिसका अभ्रंश नाम सेतगंगा है
आज पर्यन्त भक्तगण गाँव से नही जिले से नही अपितु प्रान्तों से भी अनेक पर्वो पर पूजा अर्चना करने एवं मन्नते मांगने बड़ी संख्या में श्रद्धालु आवागमन करते हैं 2010/11 में सेतगंगा को पर्यटक स्थलों की श्रेणी में दर्जा दी गई है . 2026 को माघी पूर्णिमा मेला 1 फरवरी से पांच दिवसी धर्म नगरी सेतगंगा धाम मुंगेली छ ग महंत श्री राधेश्याम दास जी श्री नारायण शर्मा जी है

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संपादक - जगदीश देवांगन