बीजापुर में नक्सल हिंसा से विस्थापित परिवारों पर बुलडोजर कार्रवाई: 75 अवैध मकानों को तोड़ने के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग

राजेन्द्र देवांगन
4 Min Read
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छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई ने मानवीय और प्रशासनिक दोनों तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं। न्यू बस स्टैंड के पीछे बसे इलाकों में नगर पालिका और प्रशासन की ओर से बुलडोजर चलाया जा रहा है। प्रशासन के अनुसार इस कार्रवाई के दायरे में कुल 75 अवैध मकान चिन्हित किए गए हैं, जिनमें से खबर लिखे जाने तक करीब 20 मकानों को तोड़ा जा चुका है, जबकि बाकी पर कार्रवाई जारी है।

मौके पर भारी पुलिस बल तैनात

कार्रवाई के दौरान मौके पर भारी पुलिस बल, तहसील प्रशासन और नगर पालिका के अधिकारी मौजूद हैं। जैसे ही बुलडोजर मकानों की ओर बढ़े, स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया। महिलाओं और बच्चों की रोती हुई तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें वे सवाल कर रहे हैं कि “अब हम कहां जाएंगे?” कई परिवारों का कहना है कि उनके पास रहने का कोई और ठिकाना नहीं है।

पीड़ितों ने क्या कहा?

पीड़ितों में शामिल गंगा माड़वी ने मीडिया से बताया कि वे अपने परिवार के साथ पिछले चार वर्षों से इसी इलाके में रह रहे हैं। नक्सली हिंसा के कारण उन्हें अपना मूल गांव छोड़ना पड़ा था। उनका दावा है कि प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत के बाद ही उन्होंने यहां मकान बनाया था और वे नियमित रूप से टैक्स भी जमा कर रहे थे। गंगा माड़वी का कहना है कि तीन महीने पहले उन्हें मकान खाली करने का नोटिस मिला था, जिसके बाद उन्होंने कोर्ट का रुख किया। मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है और उन्हें यह भरोसा दिलाया गया था कि फैसला आने तक मकान नहीं तोड़ा जाएगा।

ग्रामीणों ने लगाया ये आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि इसके बावजूद अचानक बिना किसी पूर्व सूचना या मुनादी के दो बुलडोजर लाकर मकान गिराने की कार्रवाई शुरू कर दी गई। कई परिवारों का कहना है कि वे साल 2022 से यहां रह रहे हैं और उनके पास बिजली-पानी के कनेक्शन तक मौजूद हैं। लोगों ने प्रशासन से कम से कम दो दिन की मोहलत मांगी ताकि वे घरों से जरूरी सामान निकाल सकें, लेकिन उनकी अपील पर ध्यान नहीं दिया गया।

पहले भी 2 बार नोटिस हो चुका है जारी
वहीं दूसरी ओर प्रशासन का पक्ष भी सामने आया है। मुख्य नगरपालिका अधिकारी बी.एल. नुरेटी और तहसीलदार पंचराम सलामे का कहना है कि सभी अतिक्रमणकारियों को पहले दो बार नोटिस जारी किए जा चुके थे। नोटिस के बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाए जाने के कारण यह कार्रवाई करना मजबूरी बन गई। अधिकारियों के अनुसार यह जमीन शासकीय है और यहां अवैध निर्माण किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है।
Bilaspur News
इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से विस्थापित होकर शहरों में बसने वाले लोगों के पुनर्वास की ठोस नीति आखिर कब बनेगी। एक तरफ कानून और नियमों की बात है, तो दूसरी तरफ उन परिवारों का दर्द, जो डर और हिंसा से बचकर यहां पहुंचे थे और अब फिर बेघर हो रहे हैं।

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