महिला उत्पीड़न के मामलों पर राज्य महिला आयोग की सुनवाई, 356वीं जनसुनवाई आयोजित

राजेन्द्र देवांगन
3 Min Read
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रायपुर में आर्थिक तंगी, वैवाहिक विवाद और नौकरी के नाम पर ठगी के मामलों पर अहम निर्देश

रायपुर | 07 जनवरी 2026

अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक एवं सदस्य लक्ष्मी वर्मा ने बुधवार को आयोग कार्यालय रायपुर में महिला उत्पीड़न से जुड़े मामलों की सुनवाई की।
इस अवसर पर प्रदेश स्तर पर 356वीं तथा रायपुर जिले में 172वीं जनसुनवाई आयोजित की गई।

पति की मृत्यु के बाद कर्ज तले दबी महिला को राहत दिलाने का प्रयास

जनसुनवाई के दौरान एक प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि उनके पति ने वर्ष 2015–16 में व्यवसाय के लिए बैंक से ऋण लिया था। वर्ष 2022 में पति की मृत्यु के बाद आवेदिका पर दो बच्चों, सास और लकवाग्रस्त ससुर की जिम्मेदारी आ गई।
आवेदिका वर्तमान में स्कूल में आया का कार्य कर परिवार का पालन-पोषण कर रही है, जिससे वह बैंक ऋण चुकाने में असमर्थ रही।

ऋण के एवज में आवेदिका का मकान बैंक के पास गिरवी है, जो अब एनपीए हो चुका है। ऋण की मूल राशि 11 लाख रुपये है, जो ब्याज सहित लगभग 16 लाख रुपये हो गई है।

बैंक की ओर से उपस्थित ब्रांच मैनेजर ने आयोग के समक्ष कहा कि ब्याज माफ कर मूलधन 11 लाख रुपये देना होगा। वहीं आवेदिका ने पारिवारिक सहयोग से 6.5 से 7 लाख रुपये ही दे पाने की बात कही।

आयोग ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद बैंक को निर्देश दिए कि मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए मूलधन में छूट की संभावना पर विचार करें। दोनों पक्षों को दो माह का समय दिया गया।

दूसरे विवाह के बाद अलग रह रहे दंपती के मामले में सुलह के प्रयास

एक अन्य मामले में आवेदिका ने बताया कि उनका और अनावेदक का यह दूसरा विवाह है, जो मई 2025 में हुआ था। विवाह के तीन माह बाद से दोनों अलग रह रहे हैं।

अनावेदक ने एकमुश्त भरण-पोषण देकर आपसी सहमति से तलाक का प्रस्ताव रखा, जबकि आवेदिका अभी इसके लिए तैयार नहीं है और चाहती है कि सास-ससुर की उपस्थिति में चर्चा हो

आयोग ने अनावेदक को निर्देश दिए कि वह अगली सुनवाई में अपने माता-पिता के साथ उपस्थित हों, ताकि प्रकरण का समाधान निकाला जा सके।

नौकरी के नाम पर लाखों की ठगी, FIR के आदेश

एक गंभीर प्रकरण में अनावेदिका द्वारा जिंदल कंपनी में नौकरी दिलाने के नाम पर चार आवेदिकाओं के परिवारजनों से क्रमशः 6 लाख, 5 लाख, 10 लाख और 10 लाख रुपये लिए गए।
राशि लेने के बावजूद न तो नौकरी दिलाई गई और न ही पैसे लौटाए गए।

आयोग ने इसे धोखाधड़ी और षड्यंत्र मानते हुए अनावेदिका के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का आदेश दिया। प्रकरण को आगे की कार्रवाई हेतु थाना सारागांव, जिला जांजगीर-चांपा को प्रेषित किया गया है।


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