“पीएम मोदी ने केन-बेतवा नदी लिंक परियोजना का शिलान्यास किया, बुंदेलखंड के विकास की नई शुरुआत”

राजेन्द्र देवांगन
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में केन और बेतवा नदियों के जल का संगम कराए जाने की ऐतिहासिक योजना के तहत केन-बेतवा नदी लिंक परियोजना का शिलान्यास किया। यह परियोजना न केवल मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के जल संकट को हल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि बुंदेलखंड क्षेत्र के समग्र विकास में भी अहम भूमिका निभाएगी।

इस परियोजना के माध्यम से केन और बेतवा नदियों का पानी आपस में जोड़ा जाएगा, जिससे लगभग 10 लाख हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा। इस जलवायु परिवर्तन और सूखे से प्रभावित क्षेत्र के लिए यह एक जीवनदायिनी साबित होगी।

यह योजना किसानों के लिए वरदान साबित होगी, क्योंकि इससे कृषि उत्पादकता में वृद्धि होगी और पानी की उपलब्धता में सुधार आएगा। साथ ही, यह परियोजना क्षेत्र में जल संरक्षण और विकास की दिशा में एक नया अध्याय लिखेगी। इस परियोजना के तहत जल आपूर्ति की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे कृषि, जीवन स्तर और पर्यावरण में संतुलन बनेगा।

खजुराहो, छतरपुर(Ken Betwa Link Project)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने केन और बेतवा के जल का संगम कराया और दोनों नदियों को लिंक करने की परियोजना का शिलान्यास किया। इसके साथ ही उन्होंने ओंकारेश्वर में फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट का लोकार्पण किया। 1153 अटल ग्राम सुशासन भवनों का भूमिपूजन भी किया।

बुंदेलखंडी बोली से भाषण की शुरुआत

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत में बुंदेलखंडी बोली में किया, उन्होंने कहा- वीरों की धरती बुंदेलखंड में रहबे वाले, सबई जनन को हमारी तरफ से हाथ जोड़कर राम-राम पहुंचे। सीएम मोहन यादव की सरकार का एक साल पूरा हो गया है। इस एक साल में एमपी में विकास को एक नई गति मिली है। यहां आज हजारों करोड़ रुपये की विकास परियोजना की शुरुआत हुई है।

सुशासन पर लोगों को भरोसा है

पीएम ने कहा हमारे लिए सुशासन दिवस केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं है। यह भाजपा सरकारों की पहुंचान है। देश की जनता ने तीसरी बार केंद्र में भाजपा की सरकार बनाई। एमपी में आप सभी लगातार भाजपा को चुन रहे हैं। इसलिए क्योंकि सुशासन का भरोसा ही सबसे प्रबल है।

हमारी सरकार ने विकास में पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए

पीएम नरेन्द्र मोदी ने कहा कि मैं विद्वानों से आग्रह करुंगा कि देश की आजादी से अब तक किसकी सरकार ने क्या काम किया। मैं दावे से कहता हूं, देश में जब-जब भाजपा को जहां-जहां भी सेवा करने का मौका मिला है, हमने पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़कर जनहित के कार्यों में सफलता पाई है।

आजादी के बाद सबसे पहले नदी जल का महत्व बाबा साहब आंबेडकर ने समझा

पीएम ने कहा भारत के लिए नदी जल का महत्व सबसे पहले डॉ. भीमराव आंबेडकर ने समझा। भारत में जो नदी घाटी परियोजनाएं बनीं, इसके पीछे उन्हीं का विजन था। लेकिन कांग्रेस की सरकार ने उनके इस योगदान के लिए किसी को पता नहीं चलने दिया।

उन्होंने कहा कि कई राज्यों के बीच नदी जल को लेकर विवाद चल रहा है। जिस समय कांग्रेस की सकरार थी वो इस विवाद को सुलझा सकती थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। अटलजी की सरकार ने पानी से जुड़ी समस्याओं के निराकरण के लिए प्रयास किया, लेकिन उनकी सरकार जाते ही कांग्रेस ने इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया।

प्रधानमंत्री ने कहा मध्य प्रदेश ऐसा पहला राज्य है, जहां नदियों को जोड़ने की दो परियोजनाएं चल रही हैं। 21वीं सदी में वहीं देश आगे बढ़ पाएगा जिसके पास पर्याप्त जल होगा। पानी होगा तभी खेत-खलिहान होंगे। पानी होगा तभी उद्योग-धंधे होंगे।

सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा, पीएम मोदी आधुनिक भारत के भागीरथ

सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज का दिन भारत ही नहीं दुनिया के लिए ऐतिहासिक दिन है। आज पीएम नरेंद्र मोदी मध्य प्रदेश की धरती पर पधारे हैं। जैसी गंगा को धरती पर लाया गया था, वैसे ही नदी जोड़कर प्रधानमंत्री मोदी आधुनिक भारत के भागीरथ बन गए हैं।

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सीएम ने कहा, मध्य प्रदेश में जब भी सूखे की खबर आती थी, तो बुंदेलखंड का नाम सबसे पहले जहन में आता था। लोग अपने घरों के गेट निकालकर उन्हें ईंटों के पैक करके रोजगार की तलाश में घर छोड़कर चले जाते थे। बड़ा कष्ट होता था कि हमारा ये क्षेत्र सालों तक सूखे का दंश झेलता रहा।

सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा- कांग्रेस के लोग आते थे, सूखा दूर करने के लिए बड़े बड़े वादे करते थे। लेकिन कुछ नहीं किया, लेकिन नदी जोड़ो परियोजना से 10 जिलों को सिंचाई के लिए भरपूर पानी मिलेगा। चंबल नहर परियोजना से भी किसानों को लाभ मिलेगा।

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उन्होंने कहा, प्रदेश में नवीन ऊर्जा के लिए ओंकारेश्वर में फ्लोटिंग सोलर परियोजना का शुभारंभ हो रहा है।कांग्रेसियों को आज प्रधानमंत्री जी द्वारा आज का भूमिपूजन कार्यक्रम और लोकार्पण सुहा नहीं रहा है। उनकी मति मारी गई है। हमारी सरकार के एक साल पूरे होने पर 11 दिसंबर से एक महीने तक जनकल्याण पर्व की शुरुआत की है। इस दौरान पात्र हितग्राहियों को लाभ दिया जा रहा है। जनता के हित के लिए घर-घर जाकर अभियान चलेगा।

सीएम ने कहा- आज श्रद्धेय अटलजी की 100वीं जयंती है। उनकी जन्मस्थली ग्वालियर में आज गौरव दिवस मनाया जा रहा है। प्रदेश में शासकीय पदों पर भर्तियां शुरू हो चुकी हैं। मध्य प्रदेश के अलग-अलग शहरों में 6 रीजनल इन्वेस्टमेंट समिट की जा चुकी हैं। हमारी सरकार ने साल 2025 को उद्योग वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया है।

जानिए इस परियोजना के बारे में जिससे बदलने जा रही है बुंदेलखंड अंचल की तस्वीर।

इसलिए खास है यह परियोजना

  • केन बेतवा लिंक परियोजना के अंतर्गत पन्ना टाइगर रिजर्व में केन नदी पर 77 मीटर ऊंचाई एवं 2.13 किलोमीटर लंबाई के दौधन बांध बनाया जाएगा।
  • 2 टनल का निर्माण कर बांध में 2,853 मिलियन घन मीटर जल का भंडारण किया जाएगा।
  • केन नदी पर दौधन बांध से 221 किमी लंबी लिंक नहर के द्वारा एमपी यूपी राज्यों के 14 जिलों को लाभ मिल सकेगा।
  • मध्य प्रदेश के 10 जिले पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, सागर, रायसेन, विदिशा, शिवपुरी एवं दतिया के 2 हजार ग्रामों में 8.11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हो सकेगी। इससे लगभग 7 लाख किसान परिवार लाभान्वित होंगे।
  • केन- बेतवा परियोजना से उत्तरप्रदेश में 59 हज़ार हेक्टेयर क्षेत्र में वार्षिक सिंचाई सुविधा होगी एवं 1.92 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मौजूदा सिंचाई का स्थिरीकरण किया जाएगा। जिससे उत्तरप्रदेश के महोबा, झांसी, ललितपुर एवं बांदा जिलों में सिंचाई सुविधा प्राप्त होगी।
  • परियोजना से मध्यप्रदेश की 44 लाख एवं उत्तर प्रदेशकी 21 लाख आबादी को पेयजल की सुविधा मिल सकेगी। साथ ही परियोजना से 103 मेगावाट जल विद्युत एवं 27 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन होगा।
  • परियोजना के अंतर्गत चंदेल कालीन तालाबों को सहेजने का कार्य होगा। मध्य प्रदेश के छतरपुर, टीकमगढ़ एवं निवाड़ी जिलों में चंदेल कालीन 42 तालाबों का मरम्मत जीर्णोधार किया जाएगा।

    ऐसे चली परियोजना की प्रक्रिया

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    • प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में परियोजना के कियान्वयन के लिए मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री के मध्य 22 मार्च 2021 को त्रिपक्षीय सहमति ज्ञापन हस्ताक्षरित किया गया।
    • केन बेतवा लिंक परियोजना की लागत राशि 44 हजार 605 करोड़ रूपये है।
    • परियोजना का व्यय निर्धारण केन्द्र सरकार द्वारा 90 प्रतिशत एवं राज्य सरकार द्वारा 10 प्रतिशत के अनुपात में रहेगा।
    • परियोजना से 8.10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी, 02 हजार ग्रामों के लगभग 7 लाख 18 हजार किसान परिवार लाभान्वित होंगे।

    परियोजना से मिटेगा सूखा और पलायन का कलंक

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    बुंदेलखंड का सूखा और पलायन लोगों की कमर तोड़ता रहा है। परिवारों को पलायन करने पर यह सूखा मजबूर करता रहा है। लेकिन केन बेतवा परियोजना बुंदेलखंड के लिए मील का पत्थर साबित होगी।

    क्योंकि दौधन बांध से लेकर केन बेतवा तक परियोजना आकार लेगी और बुंलेखंड का सूखा मिटाएगी। सूखाग्रस्त बुंदेलखण्ड क्षेत्र में भूजल स्तर की स्थिति में सुधार, औद्योगीकरण, निवेश एवं पर्याटन को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।

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