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  • कोंडागांव में प्यार के देवता, यहां पूरी होती है आशिकों की मन्नतें !

    कोंडागांव में प्यार के देवता, यहां पूरी होती है आशिकों की मन्नतें !
    कोंडागांव: आज वेलेंटाइन डे है, आज के दिन को प्रेमी प्रेमिका खास तरीके से सेलिब्रेट करते हैं. इस मौके पर हम आपको छत्तीसगढ़ की एक लव स्टोरी के बारे में बताने जा रहा है. ये जोड़े खुद तो मिल न सकें, लेकिन अब दूसरे जोड़ों को मिलाने का वरदान देते हैं. दरअसल, हम बात कर रहे हैं कोंडागांव के सोमी-धामी और रुनकी-झुनकी की.
    कोंडागांव सोमी-धामी की लव स्टोरी : छत्तीसगढ़ के बस्तर की धरती पर भी प्रेमी-प्रेमिकाओं से जुड़ी कई कहानियां छिपी हुई है, जिसमें अधूरी प्रेम कहानी भी है. झिटकू-मिटकी की अमर प्रेम कथा है तो साथ में सोमी-धामी और रूनकी-झुनकी की अधूरी प्रेम गाथा भी है. भले ही इनका प्रेम परवान नहीं चढ़ पाया हो पर वे आज भी देवी-देवता बनकर लोगों की प्रेम कहानी के साथ ही अन्य मन्नतों को पूरा कर रहे है.
    महिलाओं का जाना है वर्जित

    कोंडागांव जिला मुख्यालय से तकरीबन 12 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत सोनाबाल है. जहां सेठिया परिवार की संख्या अधिक है. उनके साथ ही अब गांव वाले भी हर तीज-त्यौहार से पहले सोमी-धामी को देवता के रूप में पूजने लगे है. गांव के बाहर ही एक पेड़ के नीचे चबूतरे पर अक्सर विशेष अवसरों पर सोमी-धामी की पूजा ग्रामीणों द्वारा की जाती है. खास बात यह है कि इनके पूजा स्थल के पास महिलाओ का आना वर्जित है.
    ऐसे हुई उनके प्यार की शुरुआत

    सोमी-धामी और रुनकी-झुनकी की प्रेम कथा के बारे में अधिक जानकारी के लिए ईटीवी भारत ने लोक कला और साहित्यकार खेम वैष्णव से बातचीत की. बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि, “कोंडागांव से लगे ग्राम सम्बलपुर से दो लड़के सोमी और धामी रोजगार की तलाश में सोनाबाल पहुचे थे. ये दोनों सेठिया परिवार के यहां काम करने लगे. काम के दौरान रूनकी और झूनकी नाम की दो युवतियों के साथ सोमी और धामी की नजरें टकराई. इनको एक दूसरे से प्यार हो गया. ये प्यार परवान चढ़ने लगा. इस बीच जब घर वालों के साथ गांव वालों को इस प्यार की खबर लगी, तो इसका विरोध होने लगा. इससे डर से सोमी और धामी एक कोठी में जाकर छुप गए. कोठी में अलसी भरा हुआ था. अलसी की कोठी में छिपे सोमी और धामी की वहीं मौत हो गई थी.”
    सोमी धामी की याद में सती हो गई रूनकी झुनकी: कई दिनों से लापता सोमी-धामी दोनों भाई की खोज जारी थी. चूंकि अलसी की कोठी के तरफ लोगों का आना-जाना नहीं होता था, इसलिए वहां पर छिपे दोनों भाईयों का पता नहीं चल पाया. सेठिया परिवार के बुजुर्ग गायब हुए सोमी-धामी की तलाश लगातार करते रहे. महीनों बाद पता चला की अलसी की कोठी में छिपे सोमी-धामी की मौत हो गई. जब इस बात की जानकरी रूनकी और झुनकी को लगी

    तब अपने प्यार की याद में दोनों सती हो गईं.
    भले ही सोमी और धामी का प्यार अधूरा रह गया हो, लेकिन पर आज भी उनके दर पर जो भी फरियाद लेकर आता है उनकी मन्नतें जरूर पूरी होती है. खासकर अपने प्यार को पाने लिए लोग मन्नत मांगते हैं. हालांकि रुनकी-झुनकी सती हुईं थीं. महिलाएं दैवीय प्रकोप से प्रभावित न हो जाए, इसलिए इनके मंदिर में महिलाओं का प्रवेश निषेध है. यहां तक कि इनका प्रसाद भी महिलाए नहीं खाती है. 

    खेम वैष्णव, लोक कला और साहित्यकार
    घरवाले हो गए परेशान: सोमी और धामी दोनों भाइयों की मौत के बाद सेठिया परिवार परेशानियों से घिर गया. परेशानी को दूर करने के लिए सेठिया परिवार के पूर्वजों ने बस्तर रियासत से नरसिंह नाथ सहित अन्य देवी-देवताओं को इस मामले के निराकरण के लिए सोनाबल गांव में आमंत्रित किया था. इन्हीं देवताओं ने बताया कि सोमी और धामी को अब देवता के रूप में पूजना होगा. इसके बाद से उनका परिवार और गांव वाले दशकों से सोमी और धामी की पूजा-अर्चना करते आ रहे है.

  • Dragon Fruit Farming”Bastar News : ड्रैगन फ्रूट की बस्तर में बड़ी मात्रा में पैदावार…एक एकड़ में 5 से 10 लाख तक की हो सकती है सालाना आय…!

    Dragon Fruit Farming”Bastar News : ड्रैगन फ्रूट की बस्तर में बड़ी मात्रा में पैदावार…एक एकड़ में 5 से 10 लाख तक की हो सकती है सालाना आय…!

    ब्यूरो रिपोर्ट संतोष मरकाम

    Dragon Fruit Farming: इस फल की खेती करने से आप बन जाएंगे मालामाल,लाखों में होगी कमाई! जानिए क्या है तरीका…!

    छत्तीसगढ़ के बस्तर में ड्रैगन फ्रूट की खेती होने लगी है. इस फल की खेती वियतनाम, चीन और थाईलैंड में बड़े पैमाने पर होती है. मध्यम वर्ग के लोगों की पहुंच से दूर अमीरों और रईसों के फलों में शुमार ड्रैगन फ्रूट की खेती अब छत्तीसगढ़ के बस्तर  में भी होने लगी है. यह फल मेक्सिको  और चीन  में पाई जाती है, लेकिन अब इस ड्रैगन फ्रूट की खेती कोंडागांव जिले में भी हो रही है. इस फल का उत्पादन बड़ी मात्रा में होने से अब स्थानीय लोगों को भी यह फल कम दाम में और आसानी से मिल जाता है.

    साथ ही इसे दूसरे राज्यों को भी भेजा जा रहा है. औषधीय गुण और एंटीऑक्सीडेंट, प्रोटीन फाइबर, विटामिंस और कैल्शियम से भरपूर ड्रैगन फ़्रूट की पहचान केवल भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में है. इस फल की कोरोना काल के दौरान अचानक से डिमांड बढ़ी थी जिसके बाद बस्तर के कोंडागाँव जिले में भी इस ड्रैगन फ़्रूट की खेती के लिए प्रयास किया गया.

    यहां का वातावरण इस फल के लिए अनुकूल पाया गया और आखिरकार 4 सालों की मेहनत के बाद अब मां दंतेश्वरी हर्बल समूह इसके पैदावार को लेकर सफल हुआ. अब फॉर्म में 2 हजार से ज्यादा पौधों में ना केवल हरित हुए है बल्कि इनमें उत्पादन भी होने लगा है. स्थानीय स्तर के साथ-साथ अब इस उत्पादित फलों को महाराष्ट्र और दिल्ली भी भेजा जा रहा है.यहां ड्रैगन फ्रूट की कीमत 200 से 250 रुपये प्रति किलो है

    दूसरे राज्यो में बढ़ी फल की डिमांड

    गुंडाधुर कृषि कॉलेज के वैज्ञानिक बताते हैं कि ड्रैगन फ्रूट का पौधा कोई विशेष देखभाल नहीं मांगता है. यह पौधा एक बार लगाने पर 25 सालों तक लगातार भरपूर उत्पादन और नियमित मोटी आमदनी देता है. कैक्टस वर्ग का कांटेदार पौधा होने के कारण इसे कीड़े मकोड़े भी नहीं सताते और जानवरों के द्वारा इस पौधे को बर्बाद करने का डर भी नहीं रहता है.

    एक बार रोपण के बाद बिना किसी लागत के एक एकड़ से लाख रुपये सालाना कमाई कर सकते हैं. बेहद खूबसूरत दिखने वाले इस फल में अद्भुत पौष्टिक और औषधीय गुण पाए जाते हैं. इस फल में भरपूर मात्रा में एंटी ऑक्सीडेंट, प्रोटीन फाइबर, विटामिंस और कैल्शियम पाया जाता है. यही कारण है कि इसे वजन घटाने में मददगार कोलेस्ट्रॉल कम करने में सहायक और कैंसर के लिए लाभकारी बताया जाता है.

    साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की विशेष गुण होने के कारण कोरोना काल में इसका महत्व में काफी बढ़ गया था. ड्रैगन फ्रूट मूल रूप से मेक्सिको का पौधा माना जाता है. वियतनाम, चीन और थाईलैंड में इसकी खेती बड़े पैमाने पर होती है और भारत में इसे वहीं से आयात किया जाता रहा है. अब छत्तीसगढ़ में भी कई प्रगतिशील किसानों ने इसकी खेती शुरू की है.

    कोंडागांव में भी पहली बार मां दंतेश्वरी हर्बल समूह ने भी इसकी खेती लगभग 4 साल पहले शुरू की और 2 हजार ड्रैगन फ्रूट के पौधे लगाए गए थे. वर्तमान में इसमें अच्छी तादाद में फल आने शुरू हो गए हैं.वही इस फॉर्म के संस्थापक राजाराम त्रिपाठी ने बताया कि यह कोंडागांव ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के लिए गर्व और खुशी का विषय है.

    राजाराम त्रिपाठी ने कहा कि कोंडागांव में पैदा किए जा रहे ड्रैगन फ़्रूट का ना केवल स्वाद और रंग बेहतरीन है बल्कि औषधीय गुण और पौष्टिकता के हिसाब से भी यह उत्तम गुणवत्ता का है. इसका स्वाद भी काफी अच्छा है. बस्तर की जलवायु और धरती इसकी खेती के लिए एकदम उपयुक्त है.

  • Chhattisgarh: कोंडागांव पुलिस ने खोजे 20 लाख के 100 गुम हुए मोबाइल…कई जिलों से हुए बरामद, अपने फोन पाकर खिल उठे लोगों के चेहरे…

    Chhattisgarh: कोंडागांव पुलिस ने खोजे 20 लाख के 100 गुम हुए मोबाइल…कई जिलों से हुए बरामद, अपने फोन पाकर खिल उठे लोगों के चेहरे…

    ब्यूरो रिपोर्ट संतोष मरकाम

    Chhattisgarh: कोंडागांव पुलिस ने खोजे 20 लाख के 100 गुम हुए मोबाइल…कई जिलों से हुए बरामद, अपने फोन पाकर खिल उठे लोगों के चेहरे...

    छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में पुलिस ने गुम हुए 100 मोबाइलों को ढूंढ निकाला है। इन मोबाइलों की कीमत करीब 20 लाख रुपए बताई जा रही है। शुक्रवार को पुलिस ने मोबाइल मालिकों को उनके मोबाइल फोन लौटा दिए। पुलिस की साइबर सेल की टीम ने यह कार्रवाई की है। रायपुर, धमतरी, जगदलपुर समेत अन्य जगहों से इन मोबाइल फोन को बरामद किया गया है। मामला जिले के कोंडागांव थाना क्षेत्र का है।


    जानकारी के मुताबिक, जिले के कोंडागांव, केशकाल समेत अन्य थानों में मोबाइल के चोरी और गुम होने की सबसे ज्यादा रिपोर्ट दर्ज हुई थी। कोंडागांव SP दिव्यांग पटेल ने सभी थानों से गुम हुए मोबाइल के आवेदनों की डिटेल्स मंगवाई। जिसके बाद मोबाइल ढूंढने के लिए एक टीम का गठन किया गया। यह टीम साइबर सेल की मदद से मोबाइल का लोकेशन पता किया। जिसके बाद जवानों की टीम को मौके के लिए भेजा गया।

    SP ने फोन लौटाए। बताया जा रहा है कि, रायपुर, धमतरी, जगदलपुर और कांकेर समेत अन्य जगहों से करीब 100 से ज्यादा मोबाइल फोन के लोकेशन मील। अलग-अलग दिन जवानों को उन्हीं लोमेशन में भेजा गया। फिर मोबाइल बरामद किया गया। कोंडागांव SP दिव्यांग पटेल ने बताया कि, शुक्रवार को करीब 100 मोबाइल फोन को उनके मालिकों को लौटा दिया गया है। मोबाइल मिलने से मालिक बेहद खुश हैं। SP ने बताया कि, सभी फोन की कीमत 20 लाख से ज्यादा है।