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  • अभिनेत्री के चक्कर में तीन आईपीएस अधिकारी सस्पेंड… जानिए पूरा मामला

    अभिनेत्री के चक्कर में तीन आईपीएस अधिकारी सस्पेंड… जानिए पूरा मामला

    आंध्र प्रदेश सरकार ने अलग-अलग आदेश जारी कर तीन सीनियर आईपीएस अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। इसमें डीजी रैंक के एक अधिकारी भी शामिल हैं। भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के इन अधिकारियों पर मुंबई की एक अभिनेत्री व मॉडल कादंबरी जेठवानी को उसके खिलाफ दर्ज मामले में उचित जांच के बिना जल्दबाजी में गिरफ्तार करने और परेशान करने में संलिप्तता का आरोप है। 

    इन 3 IPS अधिकारियों को गिया निलंबित

    एक सरकारी आदेश के मुताबिक, पूर्व खुफिया प्रमुख पी. सीताराम अंजनेयुलु (महानिदेशक रैंक) को निलंबित किया गया है। विजयवाड़ा के पूर्व पुलिस आयुक्त कांथी राणा टाटा (महानिरीक्षक रैंक) और तत्कालीन पुलिस उपायुक्त (विजयवाड़ा) विशाल गुन्नी (पुलिस अधीक्षक रैंक) को अभिनेत्री जेठवानी के उत्पीड़न में उनकी भूमिका का खुलासा होने के बाद निलंबित कर दिया गया है। 

    पुलिस अधिकारियों ने अभिनेत्री को दी धमकी

    अभिनेत्री कांदबरी ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के दौरान पुलिस अधिकारियों ने उन्हें धमकी दी थी कि अगर उन्होंने मुंबई में निगम के एक शीर्ष अधिकारी के खिलाफ दर्ज मामला वापस नहीं लिया तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। अभिनेत्री को इस साल की शुरुआत में पिछली वाईएसआर कांग्रेस सरकार के दौरान पार्टी के एक नेता को उस शिकायत के आधार पर गिरफ्तार किया गया था, जिसमें उन पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया था। 

    अभिनेत्री को गिरफ्तार करने का आदेश

    आरोप है कि तत्कालीन खुफिया प्रमुख ने दो अन्य अधिकारियों को अभिनेत्री को गिरफ्तार करने का निर्देश दिया, हालांकि उस तारीख तक उनके खिलाफ कोई अपराध दर्ज नहीं हुआ था। सरकारी आदेश के मुताबिक, रिकॉर्ड के अनुसार अभिनेत्री कादंबरी जेठवानी के खिलाफ FIR दो फरवरी को सुबह 6:30 बजे दर्ज की गई थी, जबकि अंजनेयुलु ने प्राथमिकी दर्ज करने से पहले 31 जनवरी को ही कांथी राणा टाटा और विशाल गुन्नी को निर्देश दिए थे। 

    दर्ज किया गया झूठा केस- अभिनेत्री 

    अभिनेत्री ने हाल ही में कुछ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि उनके खिलाफ झूठा मामला दर्ज किया गया और उन्हें परेशान किया गया।

  • Chandrababu Naidu: फाइबरनेट फेज-1 प्रोजेक्ट घोटाले में दायर आरोप पत्र में CB-CID ने लिया पूर्व सीएम चंद्रबाबू नायडू का नाम

    Chandrababu Naidu: फाइबरनेट फेज-1 प्रोजेक्ट घोटाले में दायर आरोप पत्र में CB-CID ने लिया पूर्व सीएम चंद्रबाबू नायडू का नाम

    फाइबरनेट फेज-1 प्रोजेक्ट घोटाले में दायर आरोप पत्र में CB-CID ने लिया पूर्व सीएम चंद्रबाबू नायडू का नाम
    आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की मुसीबत कम होती नहीं दिख रही है. सीबी-सीआईडी ने अमरावती में एसीबी अदालत के सामने एपी फाइबरनेट फेज-1 प्रोजेक्ट कथित घोटाला मामले में दायर आरोप पत्र में पूर्व सीएम चंद्रबाबू नायडू का नाम लिया है. सीबी-सीआईडी ने माना है कि इस गड़बड़ी में पूर्व सीएम चंद्रबाबू नायडू भी शामिल थ

    पी क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (एपीसीआईडी) ने शुक्रवार को विजयवाड़ा की एसीबी स्पेशल र्ट में आरोप पत्र दाखिल किया. इस आरोप पत्र में कहा गया है कि पूर्व मुख्यमंत्री और तेलुगु देशम पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू ने टीडीपी शासन के दौरान 2015 में एपी फाइबरनेट परियोजना के पहले चरण के लिए 330 करोड़ रुपये के वर्क ऑर्डर को एक पसंदीदा कंपनी को आवंटित करने के लिए नियम तोड़ते हुए टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर किया था.

    ‘ब्लैकलिस्ट से हटाकर कंपनी को दिया टेंडर’
    सीआईडी ने एसपीई और एसीबी मामलों की अदालत में आरोप लगाया कि मेसर्स टेरासॉफ्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड को उस समय ब्लैक लिस्ट से हटाने और फिर उसे टेंडर देने में तत्कालीन सीएम चंद्रबाबू नायडू ने अहम भूमिका निभाई थी. इसके लिए वही जिम्मेदार थे. चंद्रबाबू नायडू ने वेमुरी हरिकृष्ण प्रसाद (इस मामले में एक अन्य आरोपी) को विभिन्न टेंडर मूल्यांकन समितियों में शामिल करने के लिए सरकारी अधिकारियों को भी प्रभावित किया था.

    जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि उस वक्त नेट इंडिया हैदराबाद के प्रबंध निदेशक हरि कृष्ण प्रसाद गवर्निंग काउंसिल, ई-गवर्नेंस अथॉरिटी, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड आईटी एजेंसी और इनोवेशन सोसायटी के तत्कालीन सदस्य और तकनीकी मूल्यांकन समिति के सदस्य थे.

    घोटाले में इस अफसर की भूमिका भी अहम 

    अन्य आरोपी कोगंती संबाशिव राव वर्तमान में साउथ सेंट्रल रेलवे सिकंदराबाद में चीफ कमर्शियल मैनेजर पैसेंजर मार्केटिंग के पद पर काम कर रहे हैं. कोगंती संबाशिव ने कथित तौर पर हरिकृष्ण प्रसाद को तकनीकी समिति और टेंडर मूल्यांकन समिति के सदस्य के रूप में नियुक्त करके टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर की. सीबी-सीआईडी ने अपने आरोपों में बताया है कि इन दोनों ने कथित तौर पर बिना किसी बाजार सर्वे के मनमाने ढंग से  इस प्रोजेक्ट के लिए अनुमान तैयार करके बिड दाखिल करने की आखिरी तारीख को बढ़ाकर खेल किया ताकि मेसर्स टेरासॉफ्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड को लाभ मिल सके.