चार जवानों की हत्या के आरोपित सीआरपीएफ जवान की बर्खास्तगी को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने माना अवैध..!

राजेन्द्र देवांगन
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चार जवानों की हत्या के आरोपित सीआरपीएफ जवान की बर्खास्तगी को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने माना अवैध..!
बिलासपुर;- छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में याचिका दायर कर पति के खिलाफ केंद्र सरकार व सीआरपीएफ की कार्रवाई को चुनौती दी थी 11 साल के बाद पत्नी को अब मिली राहत बर्खास्तगी आदेश को हाई कोर्ट में दी थी चुनौती अपने ही साथी जवानों की हत्या के आरोप में सेवा से बर्खास्त व जेल में सजा काटने के दौरान मृत जवान की विधवा ने पति की बेगुनाही व बर्खास्तगी आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण निर्णय में सीआरपीएफ के कोर्ट आफ इंक्वायरी के आधार पर बर्खास्तगी आदेश को अवैध माना है। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता अपने पति की मृत्यु यानी 24 अप्रैल 2013 तक मिलने वाले सभी सेवा लाभों की भी हकदार होगी। कोर्ट ने यह भी कहा है कि इस न्यायालय ने याचिकाकर्ता के पति की मृत्यु की प्रकृति पर कोई राय व्यक्त नहीं की है।
प्रीति देवी तिवारी ग्राम नरौना जिला लखनऊ (उत्तर प्रदेश) ने वरिष्ठ अधिवक्ता केए अंसारी, मीरा अंसारी और अमन अंसारी के माध्यम से छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में याचिका दायर कर पति के खिलाफ केंद्र सरकार व सीआरपीएफ की कार्रवाई को चुनौती दी थी। याचिका के अनुसार पति स्व. दीप कुमार तिवारी छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्र अरनपुर, जिला दंतेवाड़ा में कमांडेंट 111 बटालियन, सीआरपीएफ कैंप में तैनात थे। उन पर आरोप था कि उन्होंने 25 दिसंबर 2012 की रात में सीआरपीएफ के चार जवानों की हत्या की थी और अपने बैरक के एक कांस्टेबल को गोली मारकर घायल कर दिया था। कोर्ट आफ इंक्वायरी और विभागीय जांच के बाद दोषी जवान को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। जेल में बंद रहने के दौरान 24 अप्रैल 2013 को उनकी मृत्यु हो गई। जेल में बंद रहने के दौरान स्व. दीप कुमार तिवारी द्वारा की गई अपील खारिज कर दी गई। इसके तहत अपीलीय प्राधिकारी ने अनुशासनात्मक प्राधिकारी के छह मार्च 2013 के आदेश की पुष्टि की है, जिसमें उनके पति को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। चार जवानों की हत्या के आरोप में राज्य पुलिस द्वारा आइपीसी की धारा 302 व 307 के तहत गिरफ्तार किया। उसी दिन 28 दिसंबर 2012 के आदेश द्वारा 25 दिसंबर 2012 से निलंबित कर दिया गया। इसके बाद जांच अदालत (कोर्ट आफ इंक्ववायरी) का गठन किया गया और जांच अदालत ने अपने निष्कर्ष और सिफारिश से माना कि दीप कुमार तिवारी जवानों की हत्या के लिए पूरी तरह से जिम्मेदार है। जांच अदालत की रिपोर्ट के आधार पर सेवा से बर्खास्त कर दिया।
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पति-पत्नी दोनों की पुनरीक्षण याचिका खारिज
केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल नियम, 1955 के नियम 27(सीसी)(ii) और केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम, 1965 के नियम 19(ii) के तहत याचिकाकर्ता के पति को छह मार्च 2013 से सेवा से बर्खास्तगी की सजा दी गई और अन्य लाभ भी जब्त कर लिए गए। इसके खिलाफ उन्होंने उप महानिरीक्षक के समक्ष अपील की। पुलिस, हैदराबाद रेंज, सीआरपीएफ, हैदराबाद और अपीलीय प्राधिकारी ने अपने आदेश तीन अगस्त 2013 द्वारा अनुशासनात्मक प्राधिकारी के निष्कर्षों की पुष्टि करते हुए अपील को खारिज कर दिया। इस बीच, याचिकाकर्ता के पति की 24 अप्रैल 2013 को जेल में मृत्यु हो गई। याचिका के अनुसार
पति की मृत्यु के बाद पत्नी होने के नाते याचिकाकर्ता ने नियम 1965 के नियम 29 के तहत पुनरीक्षण प्राधिकारी के समक्ष आवेदन पेश किया जिसे पुनरीक्षण प्राधिकारी ने खारिज कर दिया।

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