दंतेवाड़ा में सरपंच की बर्खास्तगी पर
बवाल : ग्रामीणों ने SDM कार्यालय घेरा, निष्पक्ष जांच की मांग

राजेन्द्र देवांगन
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दंतेवाड़ा (कटेकल्याण)। कटेकल्याण विकासखंड के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत बड़े गुडरा (लेखपाल) के सरपंच दिनेश मरकाम को पद से बर्खास्त किए जाने के बाद क्षेत्र में सियासी और सामाजिक पारा गरमा गया है। प्रशासन की इस एकतरफा कार्रवाई के विरोध में भारी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और अन्य पंचायतों के सरपंच दंतेवाड़ा एसडीएम कार्यालय पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने बर्खास्तगी के आदेश पर तुरंत पुनर्विचार करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा।

क्या हैं सरपंच पर आरोप?
प्रशासन के अनुसार, सरपंच दिनेश मरकाम पर अपने पद, शासकीय सील और हस्ताक्षरों के दुरुपयोग का आरोप है। शिकायत थी कि, उन्होंने कटेकल्याण के साप्ताहिक बाजार में गीदम और अन्य बाहरी व्यापारियों को व्यापार करने से रोकने की कोशिश की। इसके अलावा, सर्व आदिवासी समाज के लेटरपैड पर पंचायत की शासकीय सील लगाकर आंदोलन व रैली के लिए पत्र जारी किया गया, जिससे क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने का खतरा पैदा हो गया था।

एसडीएम लोकेश अल्मा का पक्ष
यह मामला अप्रैल महीने से चल रहा है। कटेकल्याण साप्ताहिक बाजार में बाहरी व्यापारियों को रोकने के लिए सरपंच ने शासकीय सील और लेटरपैड का गलत इस्तेमाल किया। उनके द्वारा धरना-प्रदर्शन और रैली को लेकर आधिकारिक तौर पर लिखित निर्देश जारी किए गए, जो पंचायत राज अधिनियम की धारा 40 का स्पष्ट उल्लंघन है। इसके अलावा, यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g) के तहत देश के किसी भी हिस्से में व्यापार करने की स्वतंत्रता के अधिकार का भी हनन है।इतिहास  न्याय’ का नहीं हुआ पालन:

ग्रामीण व जनप्रतिनिधि सरपंच के समर्थन में उतरे ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का साफ कहना है कि प्रशासन ने कार्रवाई करने में जल्दबाजी दिखाई है। ‘प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत’ (Principle of Natural Justice) के तहत किसी भी व्यक्ति पर कार्रवाई से पहले उसका पक्ष सुना जाना अनिवार्य है, लेकिन इस मामले में सरपंच को अपनी सफाई पेश करने का कोई मौका नहीं दिया गया।

सरपंच की बर्खास्तगी को जनप्रतिनिधि जितेंद्र सोरी ने बताया अन्यायपूर्ण
जनप्रतिनिधि जितेंद्र सोरी ने प्रशासन के दावों को खारिज करते हुए कहा कि, सरपंच दिनेश मरकाम की बर्खास्तगी पूरी तरह से गलत है। पूर्व में कटेकल्याण में हुए एक मारपीट के मामले में हस्तक्षेप करने और कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास की बदहाल व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए एक रैली का आयोजन किया गया था। सरपंच ने केवल इस जनहित के कार्यक्रम की सूचना प्रशासन को देने के लिए अपने सील और साइन का उपयोग किया था। इसे पद का दुरुपयोग बताना अन्यायपूर्ण है।

निष्पक्ष जांच की मांग, आंदोलन की चेतावनी
इस कार्रवाई के बाद से कटेकल्याण क्षेत्र के ग्रामीणों और आदिवासी समाज में भारी नाराजगी है। प्रदर्शनकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि प्रशासन या तो इस बर्खास्तगी आदेश को तुरंत वापस ले, या फिर पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि बिना जांच के यह एकतरफा आदेश लागू रहा, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

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