बिलासपुर से केवची, अमरकंटक होते हुए डिंडोरी तक जाने वाला नेशनल हाईवे-45 पिछले कई वर्षों से निर्माणाधीन है। जिन हिस्सों में निर्माण कार्य पूरा होने के बाद आवागमन शुरू हो चुका है, वहां पहली ही बारिश में सड़क की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सड़क पर जगह-जगह दरारें दिखाई दे रही हैं, जबकि कई स्थानों पर पुल-पुलियों के समीप डामर टूटकर बिखरने लगा है।

कई जगहों पर धसी सड़क
सबसे अधिक चिंताजनक स्थिति केवची से कारिआम के बीच देखने को मिल रही है। यहां बारिश के पानी से सड़क के नीचे की मिट्टी बह जाने के कारण कई स्थानों पर सड़क धंस गई है। सड़क की सतह पर गहरी दरारें साफ नजर आ रही हैं, जिससे भविष्य में बड़े हादसों की आशंका भी बढ़ गई है।

यातायात बाधित होने के आसार
पहली ही बारिश में सामने आई इन खामियों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि अभी यह स्थिति है, तो लगातार बारिश और पहाड़ी नालों में तेज बहाव के दौरान हाईवे की हालत और भी खराब हो सकती है। ऐसे में यातायात बाधित होने और लंबे जाम की स्थिति से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

निर्माण कार्य में गुणवत्ता के मानकों का पालन नहीं करने का आरोप
अब सवाल नेशनल हाईवे अथॉरिटी और निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली पर उठ रहे हैं। क्या निर्माण कार्य में गुणवत्ता के निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया, या फिर निर्माण सामग्री और कार्य में लापरवाही बरती गई? करोड़ों रुपये की लागत से बने हाईवे की पहली ही बारिश में बदहाल स्थिति जांच की मांग कर रही है।

जगह-जगह मिट्ठी धसने से सड़क को नुकसान
पहली बरसात ने नेशनल हाईवे-45 के गुणवत्ता की खोली पोल
फिलहाल पहली बरसात ने नेशनल हाईवे-45 की गुणवत्ता की वास्तविक तस्वीर सामने ला दी है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इन खामियों को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक सुधार और जिम्मेदारों पर कार्रवाई करता है या फिर बारिश के पूरे मौसम में आम लोगों को इसी जर्जर होती सड़क पर सफर करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

