ओपन यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार सस्पेंड: विधानसभा में गलत जानकारी देने पर उच्च शिक्षा विभाग की कार्रवाई

राजेंद्र देवांगन
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बिलासपुर। पं. सुंदरलाल शर्मा ओपन यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. भुवन सिंह राज को उच्च शिक्षा विभाग ने निलंबित कर दिया है। विधानसभा में यूनिवर्सिटी में भर्ती में हुई अनियमितताओं को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने भ्रामक जानकारी दी थी, जिसके चलते यह कार्रवाई की गई है।

दरअसल, यूनिवर्सिटी में तत्कालीन कुलपति डॉ. वंशगोपाल ने उच्च शिक्षा विभाग से आठ पदों की स्वीकृति ली थी, जिनमें सहायक क्षेत्रीय निदेशक के तीन, सिस्टम एनालिस्ट, प्रोग्रामर, छात्र कल्याण अधिकारी, सहायक छात्र कल्याण अधिकारी और जनसंपर्क अधिकारी के एक-एक पद शामिल थे। इन पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई तो अनियमितताओं के आरोप लगे।

विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ही सभी उम्मीदवारों को नियुक्ति दे दी गई। इस पर शिकायतों के आधार पर अकलतरा विधायक डॉ. राघवेंद्र कुमार सिंह ने मार्च 2025 के विधानसभा सत्र में भर्ती गड़बड़ी को लेकर सवाल उठाया था।

रजिस्ट्रार ने दी भ्रामक जानकारी

इस संबंध में उच्च शिक्षा विभाग ने यूनिवर्सिटी से जवाब मांगा था। रजिस्ट्रार डॉ. भुवन सिंह राज ने जो जानकारी भेजी, उसे गलत और भ्रामक पाया गया। इसके बाद उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, लेकिन उनका जवाब असंतोषजनक पाया गया। विभाग ने 10 नवंबर को उन्हें निलंबित कर दिया। इसके बाद कुलपति प्रो. वी.के. सारस्वत ने डॉ. राज को कार्यमुक्त करते हुए परीक्षा नियंत्रक डॉ. मनीष साव को रजिस्ट्रार का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया है।

बिना जांच के खोला गया नियुक्ति का लिफाफा

स्व-वित्तीय योजना के तहत की जा रही भर्ती का विज्ञापन जनवरी 2023 में जारी हुआ था। एक अभ्यर्थी किरण दुबे की याचिका के बाद इसे निरस्त कर फरवरी 2023 में पुनः विज्ञापन जारी किया गया। परीक्षा और साक्षात्कार के दौरान आरक्षण, पात्रता और पारदर्शिता पर लगातार शिकायतें होती रहीं।

इन शिकायतों के आधार पर उच्च शिक्षा विभाग और राजभवन ने जांच पूरी होने तक लिफाफा खोलने से रोक लगा दी थी। इसके बावजूद आचार संहिता लागू होने वाले दिन सुबह तत्कालीन कुलपति डॉ. वंशगोपाल ने लिफाफा खोलकर सभी आठ पदों पर नियुक्ति दे दी।

कुलपति बोले— शासन का निर्णय

कुलपति प्रो. सारस्वत ने बताया कि विधानसभा में गलत जानकारी देने के कारण शासन ने रजिस्ट्रार डॉ. भुवन सिंह राज को निलंबित किया है। विभागीय जांच अभी जारी है।

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राजेंद्र देवांगन (प्रधान संपादक)