कुकुरदेव मंदिर: कहानी एक अनोखे मंदिर की, जहां लोग करते हैं कुत्ते की पूजा ..जानें इसके पीछे का रहस्य..!

राजेन्द्र देवांगन
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देवी-देवताओं के एक से बढ़कर एक मंदिर के बारे में आपने जरूर सुना होगा, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत में एक ऐसा भी मंदिर है, जिसमें कुत्तों की ही पूजा होती है। इस मंदिर को कुकुरदेव मंदिर के नाम से जाना जाता है। यहां की अजीबोगरीब मान्यता और इस मंदिर के निर्माण की कहानी जानकर आप हैरान हो जाएंगे।

विभिन्न संस्कृती और मान्यताओं वाले भारत के छत्तीसगढ़ में एक ऐसा मंदिर है, जहां कुत्ते की पूजा की जाती है. इस मंदिर के निर्माण की कहानी भी बड़ी रोचक है और लोगों की इसमें गहरी आस्था है. यहां आने वाला हर शख्स मंदिर में सिर झुकाने जरूर आता है.

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में है मंदिर अनोखा मंदिर मंदिर छत्तीसगढ़ के बालोद जिला मुख्यालय से महज 6 किलोमीटर खपरी गांव में स्थित है. इस प्राचीन मंदिर को कुकुरदेव मंदिर से जाना जाता है. यह मंदिर किसी देवता को नहीं बल्कि कुत्ते को भी समर्पित है

इस मंदिर के गर्भगृह में कुत्ते की प्रतिमा स्थापित है, जबकि उसके बगल में एक शिवलिंग भी है। सावन के महीने में इस मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है। लोग शिव जी के साथ-साथ कुत्ते (कुकुरदेव) की भी वैसे ही पूजा करते हैं जैसे शिवमंदिरों में नंदी की पूजा होती है।

यह मंदिर 200 मीटर के दायरे में फैला हुआ है। मंदिर के गर्भगृह के अलावा यहां के प्रवेश द्वार पर भी दोनों ओर कुत्तों की प्रतिमा लगाई गई है। मान्यता है कि कुकुरदेव का दर्शन करने से न कुकुरखांसी होने का डर रहता है और न ही कुत्ते के काटने का खतरा रहता है।

दरअसल, कुकुरदेव मंदिर एक स्मारक है। एक वफादार कुत्ते की याद में इसे बनाया गया था। कहते हैं कि सदियों पहले एक बंजारा अपने परिवार के साथ इस गांव में आया था। उसके साथ एक कुत्ता भी था। गांव में एक बार अकाल पड़ गया तो बंजारे ने गांव के साहूकार से कर्ज लिया, लेकिन वो कर्ज वो वापस नहीं कर पाया। ऐसे में उसने अपना वफादार कुत्ता साहूकार के पास गिरवी रख दिया।

कहते हैं कि एक बार साहूकार के यहां चोरी हो गई। चोरों ने सारा माल जमीन के नीचे गाड़ दिया और सोचा कि बाद में उसे निकाल लेंगे, लेकिन कुत्ते को उस लूटे हुए माल के बारे में पता चल गया और वो साहूकार को वहां तक ले गया। कुत्ते की बताई जगह पर साहूकार ने गड्ढा खोदा तो उसे अपना सारा माल मिल गया।

कुत्ते की वफादारी से खुश होकर साहूकार ने उसे आजाद कर देने का फैसला लिया। इसके लिए उसने बंजारे के नाम एक चिट्ठी लिखी और कुत्ते के गले में लटकाकार उसे उसके मालिक के पास भेज दिया। इधर कुत्ता जैसे ही बंजारे के पास पहुंचा, उसे लगा कि वो साहूकार के पास से भागकर आया है। इसलिए उसने गुस्से में आकर कुत्ते को पीट-पीटकर मार डाला। हालांकि, बाद में बंजारे ने कुत्ते के गले में लटकी साहूकार की चिट्ठी पढ़ी तो वो हैरान हो गया। उसे अपने किए पर बहुत पछतावा हुआ। उसके बाद उसने उसी जगह कुत्ते को दफना दिया और उस पर स्मारक बनवा दिया। स्मारक को बाद में लोगों ने मंदिर का रूप दे दिया, जिसे आज लोग कुकुर मंदिर के नाम से जानते हैं।

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