मनी लॉन्ड्रिंग केस में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: ED की अटैच संपत्तियों के बदले 4.36 करोड़ की FD को वैकल्पिक सुरक्षा मानने से इनकार

राजेन्द्र देवांगन
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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी द्वारा अटैच की गई छह अचल संपत्तियों के बदले 4 करोड़ 36 लाख 5 हजार 780 रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट को वैकल्पिक सुरक्षा के तौर पर स्वीकार करने की मांग को खारिज कर दी है। मामले की सुनवाई 31 अगस्त को जस्टिस बिभू दत्त गुरु की सिंगल बेंच में हुई।

FD देकर संपत्ति मुक्त करने की मांग
याचिकाकर्ता ऋषभ सोनी और एक अन्य व्यक्ति ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर ईडी की ओर से अटैच छह अचल संपत्तियों को मुक्त करने की मांग की थी। उनका तर्क था कि ये संपत्तियां अपराध की सीधी आय नहीं हैं, बल्कि PMLA की धारा 2(1)(u) के तहत समकक्ष मूल्य के रूप में अटैच की गई हैं। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि संपत्तियों के मूल्य के बराबर FD जमा कराए जाने से ईडी का हित सुरक्षित रहेगा और कारोबार भी प्रभावित नहीं होगा।

नियम से FD स्वीकार करना अनिवार्य नहीं- ईडी

ईडी ने इसका विरोध करते हुए कहा कि PMLA या 2013 के नियमों में अटैच अचल संपत्ति को स्वेच्छा से FD से बदलने का कोई सामान्य वैधानिक अधिकार नहीं दिया गया है। नियम 5 भी केवल विशेष परिस्थितियों में लागू होता है और इसमें FD स्वीकार करना अनिवार्य नहीं है।
FD के विकल्प को हाईकोर्ट ने नकारा
हाईकोर्ट ने माना कि अटैच संपत्ति के बदले FD देने का कोई सामान्य अधिकार कानून में नहीं है। केवल वित्तीय या व्यावसायिक कठिनाई के आधार पर संपत्ति को बदलने की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती। कोर्ट ने यह भी कहा कि PMLA की धारा 42 के तहत वैधानिक अपील का विकल्प उपलब्ध है। ऐसे में अनुच्छेद 226 के तहत रिट क्षेत्राधिकार का इस्तेमाल उचित नहीं है। कोर्ट ने याचिका में कोई आधार नहीं पाते हुए इसे खारिज कर दिया।

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