युवाओं की जीत पर सुश्री (फार्मासिस्ट) वंदना देवांगन ने दी बधाई, कहा— “शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार हमारा अधिकार”

राजेन्द्र देवांगन
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रायपुर। देशभर में युवाओं द्वारा शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग को लेकर उठी आवाज़ के बीच, सुश्री (फार्मासिस्ट) वंदना देवांगन ने सभी युवाओं को उनकी लोकतांत्रिक भागीदारी और जागरूकता के लिए बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।

इस अवसर पर उन्होंने अपनी कविता “युवा की जीत” के माध्यम से युवाओं का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि यह किसी दल या व्यक्ति की हार-जीत का विषय नहीं, बल्कि मेहनत, ईमानदारी और युवाओं के भविष्य से जुड़े अधिकारों का प्रश्न है।

उन्होंने अपनी कविता में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार को प्रत्येक नागरिक का मूल अधिकार बताते हुए कहा कि एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण तभी संभव है, जब हर युवा को निष्पक्ष शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ और सम्मानजनक रोज़गार के अवसर उपलब्ध हों।

सुश्री वंदना देवांगन ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से अपनी बात रखना युवाओं की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने सभी युवाओं से आग्रह किया कि वे सदैव एकता, संयम और सकारात्मक सोच के साथ समाज और देश के विकास में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएँ।

अंत में उन्होंने सभी युवाओं को शुभकामनाएँ देते हुए कहा, “यह केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि एक ऐसे भारत की ओर बढ़ता कदम है जहाँ शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार हर नागरिक का वास्तविक अधिकार बनें।”

युवा की जीत

आज आवाज़ ने इतिहास लिखा है,
उम्मीद ने फिर विश्वास लिखा है।
जब युवा जागता है हक़ के लिए,
तब बदलाव ने नया प्रकाश लिखा है।

न यह किसी दल की हार है,
न यह किसी चेहरे की जीत है।
यह तो उस हर छात्र की मुस्कान है,
जो ईमानदार मेहनत की प्रीत है।

शिक्षा हमारा अधिकार है,
जहाँ सपने बिकें नहीं, सँवरें।
स्वास्थ्य हमारा अधिकार है,
जहाँ हर जीवन सुरक्षित निखरे।
रोज़गार हमारा अधिकार है,
जहाँ मेहनत का हर पसीना सम्मान से बिखरे।

युवा ने यह संदेश दिया है—
हक़ की लड़ाई नफ़रत से नहीं,
एकता, धैर्य और लोकतांत्रिक आवाज़ से जीती जाती है।

आज हर उस युवा को बधाई,
जिसने उम्मीद का दीप जलाए रखा।
हर उस माँ-बाप को सलाम,
जिन्होंने अपने बच्चों के सपनों पर विश्वास बनाए रखा।

आओ, इस पल को सिर्फ़ एक जीत नहीं,
एक नई शुरुआत मानें।
जहाँ शिक्षा निष्पक्ष हो,
स्वास्थ्य सबके लिए सुलभ हो,
रोज़गार सम्मानजनक हो,
और हर युवा गर्व से कह सके—

“शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार हमारा अधिकार है;
इन्हीं से बनेगा सशक्त भारत, यही हमारा संकल्प और हमारी पहचान है।”

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