CG High Court: कांस्टेबल भर्ती पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, फिजिकल टेस्ट के दौरान भ्रष्टाचार के आरोप-
जानें क्या है पूरा मामला?

राजेन्द्र देवांगन
3 Min Read
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छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने कांस्टेबल भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं के चलते आगे नियुक्ति पत्र जारी करने पर रोक लगा दी है। अदालत ने राज्य सरकार और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामला वर्ष 2023 में जारी लगभग 6000 कांस्टेबल पदों की भर्ती से जुड़ा है।

भर्ती प्रक्रिया के दौरान फिजिकल टेस्ट के संचालन में भ्रष्टाचार और अनुचित लाभ देने के आरोप लगे। फिजिकल टेस्ट में डेटा रिकॉर्डिंग के लिए टाइम्स टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड को आउटसोर्स किया गया था। आरोप है कि कंपनी ने निष्पक्षता का पालन नहीं किया और कुछ अभ्यर्थियों को पैसों के लेन-देन के माध्यम से अनावश्यक लाभ दिया गया।

इससे प्रभावित होकर जिला सक्ती, बिलासपुर, रायगढ़ और मुंगेली के निवासी मनोहर पटेल, विवेक दुबे, मृत्युंजय श्रीवास, कामेश्वर प्रसाद गजराज पटेल, अजय कुमार, जितेश बघेल, अश्वनी कुमार यादव और ईशान ने अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी के माध्यम से उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। याचिका की सुनवाई 27 जनवरी 2026 को न्यायमूर्ति पार्थ प्रतिम साहू की कोर्ट में हुई। अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी ने दलील दी कि पुलिस अधीक्षक जिला बिलासपुर ने स्वयं स्वीकार किया कि फिजिकल टेस्ट में कई गड़बड़ियां हुईं और गलत डेटा दर्ज किया गया। साथ ही CCTV फुटेज भी डिलीट किए गए हैं।

शासन द्वारा की गई कार्रवाई में 129 अभ्यर्थियों के नाम सामने आए, जिन्हें अनुचित लाभ देकर अधिक अंक दिए गए थे। पुलिस भर्ती प्रक्रिया नियम 2007 के नियम 7 के अनुसार, यदि कोई अनियमितता पाई जाती है, तो पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द कर नई भर्ती कराई जाएगी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि टाइम्स टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा आयोजित लंबी कूद, भाला फेंक और अन्य फिजिकल एक्टिविटी में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। यदि जांच स्वतंत्र एजेंसी या सीबीआई द्वारा की जाती है, तो पूरे राज्य में हुए भ्रष्टाचार और अनियमितताएं उजागर होंगी।

न्यायमूर्ति पार्थ प्रतिम साहू ने राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को अगली सुनवाई तक किसी भी कांस्टेबल नियुक्ति आदेश को जारी न करने के निर्देश दिए। अदालत ने कहा कि चयन प्रक्रिया का समापन और अंतिम सूची का प्रकाशन वर्तमान में गैरकानूनी है। इस फैसले के बाद राज्य में कांस्टेबल भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ी कार्रवाई होने की संभावना है। वहीं मेरिट के आधार पर चयनित न हुए अभ्यर्थियों के हाईकोर्ट के आदेश से हजारों अभ्यर्थियों की नजर अब आगामी सुनवाई पर टिकी हुई है।

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