CG News: छुट्टी के दिन दुष्कर्म पीड़िता के लिए खुली स्पेशल कोर्ट, जानिए क्या आदेश हुआ

राजेन्द्र देवांगन
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बिलासपुरः छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने एक नाबालिग रेप पीड़िता को अबॉर्शन कराने की अनुमति दी है। कोर्ट ने विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम की निगरानी में यह प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया है। पीड़िता ने कोर्ट में याचिका लगाकर गर्भपात कराने की अनुमति मांगी थी। पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट से पता चला की लड़की को 21 सप्ताह का गर्भ है और उसका अबॉर्शन कराया जा सकता है। जिसके बाद कोर्ट न आदेश दिया है।

रेप पीड़ित प्रेग्नेंट युवती के लिए शीतकालीन अवकाश के दौरान हाईकोर्ट ने विशेष कोर्ट का गठन कर मामले की सुनवाई की। जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बिलासपुर कलेक्टर को मेडिकल बोर्ड गठित कर विशेषज्ञ डॉक्टरों से उसका मेडिकल कराने और 26 दिसंबर तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। दरअसल, दुष्कर्म की शिकार युवती प्रेग्नेंट हो गई है। वह समाज में बिन ब्याही मां बनने के दर्द से छुटकारा पाना चाह रही है। बताया जा रहा है कि युवती ने इसके लिए डॉक्टरों से भी राय ली। लेकिन, उन्होंने मेडिको लीगल केस बताकर अबॉर्शन करने से इंकार कर दिया।

इससे परेशान होकर उसने हाईकोर्ट की शरण ली है। 23 दिसंबर को युवती ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अबॉर्शन कराने की अनुमति मांगी है। इसमें बताया कि वो 21-22 सप्ताह के गर्भ को नहीं रखना चाह रही है। हाईकोर्ट में युवती ने स्वयं गर्भपात के लिए सहमति दी है और चिकित्सीय गर्भपात की अनुमति के लिए शपथ-पत्र भी प्रस्तुत किया है। इस मामले में हाईकोर्ट ने गंभीरता दिखाई है। शीतकालीन अवकाश के दिन चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने विशेष कोर्ट का गठन कर जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल को केस की सुनवाई करने कहा। जस्टिस अग्रवाल ने मामले की सुनवाई के दौरान 7 जून 2024 को जारी अधिसूचना के अनुसार याचिकाकर्ता की मेडिकल जांच के लिए कलेक्टर को मेडिकल बोर्ड का गठन करने का आदेश दिया।

मेडिकल बोर्ड को 26 दिसंबर तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है। हाईकोर्ट ने युवती को मेडिकल बोर्ड के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया है। मेडिकल बोर्ड में एक स्त्री रोग विशेषज्ञ, एक बाल रोग विशेषज्ञ, एक रेडियोलाजिस्ट/सोनोलाजिस्ट और अन्य आवश्यक विशेषज्ञ शामिल होंगे। जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया जाएगा कि युवती का अबॉर्शन हो सकता है या नहीं। जस्टिस अग्रवाल ने युवती की मेडिकल जांच पर होने वाला पूरा खर्च राज्य सरकार को वहन करने कहा है। हाईकोर्ट ने कलेक्टर को आदेश की प्रति तत्काल भेजने और मेडिकल बोर्ड गठित करने की प्रक्रिया शीघ्र सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

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