Sunday, October 2, 2022

गुरु घासीदास के दो भक्तों ने इस मेले स्थल पर ही अलग-अलग समाधि ली , है

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बिलासपुर सवितर्क न्यूज सुरेश सिंह बैस

। बाबा गुरु घासीदास जयंती अवसर पर 18 दिसंबर से भरने मेले में जयंती महोत्सव और मेले का आयोजन उत्साह और श्रद्धापूर्वक मनाया जा रहा है इस अवसर पर लोगों की भारी संख्या में उपस्थितिदेखकर बाबा के भक्तों की श्रद्धा और आस्था का पराकाष्ठा देखते ही बन रहा है। भक्तों की पराकाष्ठा देखनी हो तो भरनी मेले स्थल पर पहुंचकर साक्षात देखा जा सकता है यहां पर बाबा गुरु घासीदास के दो भक्तों ने इस मेले स्थल पर ही अलग-अलग समाधि ली है।एक भक्त नयन दास सतनामी हैं जो 18 दिसंबर को प्रातः लगभग 11:00 बजे समाधि में उतरे हैं। जो कि 19 दिसंबर को दोपहर 3:00 बजे जय कारे के घोष के साथ समाधि से बाहर आएंगे वहीं दूसरे भक्त जगन दास सतनामी जी हैं जो जल समाधि में उतरे हैं और यह 72 घंटे बाद समाधि से बाहर आएंगे । इन भक्तों के समाधि लेते समय‌ अनुयायियों की भीड़ ने इनका अभिनंदन व करतल ध्वनि से समाधि में उतारने की प्रक्रिया पूर्ण की।
उक्त आशय की की जानकारी देते हुए मेला आयोजन एवं महोत्सव समिति के मुख्य आयोजक राज महंत उमादत्त घिलहरे ने बताया कि भक्तों की श्रद्धा और आस्था को देखते हुए समिति ने समाधि की प्रक्रिया के लिए बकायदा प्रशासन से विधि अनुसार अनुमति प्राप्त की है। उन्होंने कहा कि इसके लिए जिला पुलिस अधीक्षक महोदय से लिखित में अनुमति ले ली गई है।
अनुष्ठान एवं पूजा कार्यक्रमजयंती महोत्सव समिति के आयोजक पंडित उमादत्त धिलहरे ने कहा कि 18 दिसंबर को प्रातः सबसे पहले बाबा गुरु घासीदास की गद्दी और उनके प्रतीकात्मक जनेऊ कंठी खड़ाऊ 5 हाथ का बांस में लगा सफेद झंडा बाबा जी की गद्दी में रखकर विधिवत पूजा की जाती है ।उसके बाद रैली निकाली जाती है ।आगे उन्होंने कहा कि बाबा के विशेषकर प्रत्येक वस्तुओं को सात की संख्या में रखा जाता है। और फिर उनको भोग प्रसाद चढ़ाया जाता है ।जैसे सात लॉन्ग सात सुपारी सात लायची सात बंगला पान 7 की संख्या में दोना पंजीरी घी का दिया नारियल खीर हलवा व दूध से अभिषेक कर फिर चंदन बंदर कर उनको भोग प्रसाद चढ़ाया जाता है ‌फिरआखिरी में प्रसाद को पंचामृत स्वरूप सभी भक्तों में वितरित कर दिया जाता है

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। बाबा गुरु घासीदास जयंती अवसर पर 18 दिसंबर से भरने मेले में जयंती महोत्सव और मेले का आयोजन उत्साह और श्रद्धापूर्वक मनाया जा रहा है इस अवसर पर लोगों की भारी संख्या में उपस्थितिदेखकर बाबा के भक्तों की श्रद्धा और आस्था का पराकाष्ठा देखते ही बन रहा है। भक्तों की पराकाष्ठा देखनी हो तो भरनी मेले स्थल पर पहुंचकर साक्षात देखा जा सकता है यहां पर बाबा गुरु घासीदास के दो भक्तों ने इस मेले स्थल पर ही अलग-अलग समाधि ली है।एक भक्त नयन दास सतनामी हैं जो 18 दिसंबर को प्रातः लगभग 11:00 बजे समाधि में उतरे हैं। जो कि 19 दिसंबर को दोपहर 3:00 बजे जय कारे के घोष के साथ समाधि से बाहर आएंगे वहीं दूसरे भक्त जगन दास सतनामी जी हैं जो जल समाधि में उतरे हैं और यह 72 घंटे बाद समाधि से बाहर आएंगे । इन भक्तों के समाधि लेते समय‌ अनुयायियों की भीड़ ने इनका अभिनंदन व करतल ध्वनि से समाधि में उतारने की प्रक्रिया पूर्ण की।
उक्त आशय की की जानकारी देते हुए मेला आयोजन एवं महोत्सव समिति के मुख्य आयोजक राज महंत उमादत्त घिलहरे ने बताया कि भक्तों की श्रद्धा और आस्था को देखते हुए समिति ने समाधि की प्रक्रिया के लिए बकायदा प्रशासन से विधि अनुसार अनुमति प्राप्त की है। उन्होंने कहा कि इसके लिए जिला पुलिस अधीक्षक महोदय से लिखित में अनुमति ले ली गई है।
अनुष्ठान एवं पूजा कार्यक्रमजयंती महोत्सव समिति के आयोजक पंडित उमादत्त धिलहरे ने कहा कि 18 दिसंबर को प्रातः सबसे पहले बाबा गुरु घासीदास की गद्दी और उनके प्रतीकात्मक जनेऊ कंठी खड़ाऊ 5 हाथ का बांस में लगा सफेद झंडा बाबा जी की गद्दी में रखकर विधिवत पूजा की जाती है ।उसके बाद रैली निकाली जाती है ।आगे उन्होंने कहा कि बाबा के विशेषकर प्रत्येक वस्तुओं को सात की संख्या में रखा जाता है। और फिर उनको भोग प्रसाद चढ़ाया जाता है ।जैसे सात लॉन्ग सात सुपारी सात लायची सात बंगला पान 7 की संख्या में दोना पंजीरी घी का दिया नारियल खीर हलवा व दूध से अभिषेक कर फिर चंदन बंदर कर उनको भोग प्रसाद चढ़ाया जाता है ‌फिरआखिरी में प्रसाद को पंचामृत स्वरूप सभी भक्तों में वितरित कर दिया जाता है